पुस्तक · 20 अध्याय · 2 घंटे 1 मिनट का पठन
प्रार्थना के द्वारा सामर्थ्य
मनुष्य ही परमेश्वर की रीति हैं
E. M. Bounds · 1835–1913
मुफ़्त में पढ़ें·किसी खाते की ज़रूरत नहीं
प्रार्थना के पुरुषों की आवश्यकता
इस पुस्तक के बारे में
ई. एम. बाउंड्स ने प्रचारकों के लिए लिखा, और उनका तर्क एक ही है: कलीसिया बेहतर रीतियों की खोज में है, परन्तु परमेश्वर बेहतर मनुष्यों की खोज में है। बीस छोटे अध्यायों में, जिनमें से हर एक किसी पूर्ववर्ती प्रार्थना करनेवाले जन के शब्दों से आरम्भ होता है, वे यह बात ज़ोर देकर रखते हैं कि उपदेश की सामर्थ्य अध्ययन-कक्ष में गढ़े जाने से पहले प्रार्थना-कोठरी में गढ़ी जाती है, और यह कि अभिषेक — जिसे न विद्या, न प्रतिभा, न वाक्पटुता अर्जित कर सकती है — अधिक प्रार्थना से मोल लिया जाता है, या फिर बिलकुल नहीं। झकझोर देनेवाली, और चैन से पढ़ पाना कठिन।
विषय-सूची
- 1 प्रार्थना के पुरुषों की आवश्यकता 9 मिनट
- 2 हमारी योग्यता परमेश्वर की ओर से है 6 मिनट
- 3 अक्षर मारता है 7 मिनट
- 4 बचने योग्य प्रवृत्तियाँ 6 मिनट
- 5 प्रार्थना, महान अनिवार्यता 6 मिनट
- 6 प्रार्थनामय सेवकाई सफल होती है 5 मिनट
- 7 प्रार्थना में बहुत समय लगाना चाहिए 6 मिनट
- 8 प्रार्थना करनेवाले पुरुषों के उदाहरण 5 मिनट
- 9 दिन का आरम्भ प्रार्थना से करो 4 मिनट
- 10 प्रार्थना और भक्ति का मेल 6 मिनट
- 11 भक्ति का एक आदर्श 7 मिनट
- 12 हृदय की तैयारी आवश्यक है 6 मिनट
- 13 सिर से नहीं, हृदय से मिलने वाला अनुग्रह 4 मिनट
- 14 अभिषेक एक अनिवार्यता 4 मिनट
- 15 अभिषेक, सच्चे सुसमाचार-प्रचार का चिह्न 6 मिनट
- 16 बहुत प्रार्थना — अभिषेक का मोल 6 मिनट
- 17 प्रार्थना आत्मिक अगुवाई की पहचान है 7 मिनट
- 18 प्रचारकों को लोगों की प्रार्थनाओं की आवश्यकता है 8 मिनट
- 19 प्रार्थना से महानतम परिणाम पाने के लिए सुविचार आवश्यक 8 मिनट
- 20 प्रार्थना करता मंच प्रार्थना करती मंडली को जन्म देता है 5 मिनट
अपनी भाषा में पढ़ें
Alfred Sisley, “Sahurs Meadows in Morning Sun” (1894). The Metropolitan Museum of Art, Open Access.