जीवनियाँ

प्यूरिटन और सुधारक 1480–1699

पुस्तकों के पीछे के जीवन — प्रचारक, मिशनरी और लेखक, जिनके शब्द आज भी बोलते हैं।

चित्र: Martin Luther

Martin Luther 1483–1546

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मार्टिन लूथर (1483–1546) वह जर्मन भिक्षु थे जिनकी केवल विश्वास से धर्मी ठहराए जाने की पुनःखोज ने प्रोटेस्टेंट धर्म-सुधार को सुलगा दिया। एक तूफ़ान के आतंक ने उन्हें मठ में धकेला और फिर रोमियों की एक आयत ने उन्हें शान्ति में पहुँचाया; उन्होंने 1517 में अपने पंचानबे प्रस्ताव टाँगे, वोर्म्स की राजसभा में पोप और सम्राट दोनों को ललकारा, वार्टबुर्ग में नए नियम का जर्मन में अनुवाद किया, और कलीसिया को उसके भजन और धर्मशिक्षा की पुस्तकें दीं। उनके अन्तिम लिखे हुए शब्द थे, “हम भिखारी हैं। यह सच है।”

चित्र: Richard Baxter

Richard Baxter 1615–1691

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अंग्रेज़ प्यूरिटन कलीसियाई अगुवा और किडरमिन्स्टर के पासबान, जिन्हें 1662 में इंग्लैंड की कलीसिया से निष्कासित कर दिया गया। व्यावहारिक धर्मविज्ञान के एक विपुल लेखक, जिनकी पासबानी और भक्ति-सम्बन्धी रचनाएँ चिरस्थायी मसीही क्लासिक बन गईं।

चित्र: John Bunyan

John Bunyan 1628–1688

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अंग्रेज़ लेखक और प्यूरिटन प्रचारक, पेशे से बेडफ़र्ड का एक ठठेरा, जो बिना अधिकार-पत्र के प्रचार करने के कारण एक दशक से अधिक समय तक बन्दी रहा। उसी कैद के दौरान उसने तीर्थयात्री की यात्रा लिखी, जो अंग्रेज़ी भाषा की सबसे अधिक प्रकाशित होने वाली दृष्टान्त-कथाओं में से एक है।