वह मेरा कल थामे हुए है ·इब्रानियों 11

अध्याय 6 · 5 मिनट का पठन

एआई अनुवाद — मातृभाषी समीक्षा बाकी

इब्रानियों 11

यदि इब्रानियों 11 हमारे लिये विश्वास के वीरों की सूची के रूप में नहीं लिखा गया, तो उसका प्रयोजन क्या है? समस्त पवित्रशास्त्र के रचयिता पवित्र आत्मा ने इस अध्याय को यहाँ क्यों रखा है?

बाइबल की व्याख्या के हर विषय की भाँति, यहाँ भी हमें साहित्यिक सन्दर्भ पर विचार करना आवश्यक है। इब्रानियों 10:18 तक लेखक पुराने नियम की वाचा, व्यवस्था, मन्दिर और बलिदानों की रीतियों तथा प्रयोजनों के विषय में लिखता आया है। इनकी तुलना उन उत्तम वस्तुओं से की गई है जो मसीह में पाई जाती हैं।

हमारे पास उत्तम उद्धार है (इब्रानियों 2), उत्तम व्यवस्था देनेवाला (इब्रानियों 3), उत्तम विश्राम (इब्रानियों 4), उत्तम महायाजक (इब्रानियों 5), उत्तम वाचा (इब्रानियों 8), उत्तम प्रतिज्ञा (इब्रानियों 8), और उत्तम बलिदान (इब्रानियों 9)।

इब्रानियों 10:19 से आरम्भ करके लेखक एक नया विषय प्रस्तुत करता है।

“इसलिए हे भाइयों, जबकि हमें यीशु के लहू के द्वारा उस नये और जीविते मार्ग से पवित्रस्थान में प्रवेश करने का साहस हो गया है… तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ परमेश्वर के समीप जाएँ… और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामे रहें… और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्ता किया करें” (इब्रानियों 10:19, 22-24)।

अब वह उस जीवन-शैली पर बल देने के लिये लिख रहा है जो उन लोगों का लक्षण होनी चाहिए जिन्होंने मसीह में पाई जानेवाली ‘उत्तम वस्तुओं’ का अनुभव किया है।

“ परन्तु उन पहले दिनों को स्मरण करो, जिनमें तुम ज्योति पाकर दुःखों के बड़े संघर्ष में स्थिर रहे… इसलिए, अपना साहस न छोड़ो क्योंकि उसका प्रतिफल बड़ा है। क्योंकि तुम्हें धीरज रखना अवश्य है, ताकि परमेश्वर की इच्छा को पूरी करके तुम प्रतिज्ञा का फल पाओ।

क्योंकि, “अब बहुत ही थोड़ा समय रह गया है जबकि आनेवाला आएगा, और देर न करेगा। और मेरा धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उससे प्रसन्न न होगा।” पर हम हटनेवाले नहीं, कि नाश हो जाएँ पर विश्वास करनेवाले हैं, कि प्राणों को बचाएँ” (इब्रानियों 10:32, 35-39)।

अगला अध्याय हमें ‘विश्वास से जीने’ के उदाहरण देने के लिये लिखा गया है। यह बात चौंका देनेवाली है कि कालेब, एलीशा और दानिय्येल इसमें नहीं हैं, जबकि मूसा (एक हत्यारा), सारा (जो परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर हँसी थी), और राहाब (एक झूठ बोलनेवाली) इसमें हैं। विश्वास की चाल चलने के लिये किसी आत्मिक महापुरुष का होना आवश्यक नहीं। कोई भी, चाहे उसकी आत्मिक परिपक्वता जैसी भी हो, विश्वास में चलने की यह रोमांचक यात्रा आज ही आरम्भ कर सकता है, और इसके बिना परमेश्वर को प्रसन्न करना अनहोना है। परमेश्वर के अद्भुत अनुग्रह का एक और उदाहरण!

“अब विश्वास आशा की हुई वस्तुओं का निश्चय, और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है” (इब्रानियों 11:1)। हम पहले ही पहली आयत पर विचार कर चुके हैं — विश्वास की परिभाषा के रूप में, एक दान के रूप में, और एक फल के रूप में।

“क्योंकि इसी के विषय में पूर्वजों की अच्छी गवाही दी गई” (इब्रानियों 11:2)। प्राचीन काल के वे पुरुष और स्त्रियाँ, जो विश्वास में चले, उनकी अच्छी गवाही थी, उनका अच्छा नाम था। दूसरे उन्हें देखते और जान लेते थे कि ऐसे लोग परमेश्वर के साथ-साथ चलते हैं। यह देखकर कि परमेश्वर ने उनके जीवनों में किस रीति से काम किया, सीखने को पाठ थे। उसी प्रकार हमारा जीवन भी विश्वास की एक गवाही होना चाहिए — जो परमेश्वर की अगुवाई को, और उस अगुवाई के प्रति हमारी आज्ञाकारिता को प्रकट करे। संसार हमारे विश्वास की बातें सुनना नहीं चाहता, क्योंकि उसकी दृष्टि में वे तर्कहीन हैं। वह हमारे जीवन की साक्षी देखना चाहता है।

हम संसार में खड़े होकर मसीह की गवाही देने के लिये नहीं बुलाए गए; हम मसीह में खड़े होकर संसार को गवाही देने के लिये बुलाए गए हैं।

“विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्तुओं से बना हो।” (इब्रानियों 11:3)। सृष्टि के विषय में सब धर्मों की अपनी-अपनी कहानियाँ हैं।

हमारे विश्वास की नींव उस अनुत्पन्न परमेश्वर में पाई जाती है जिसने अपने वचन के द्वारा सारी सृष्टि को अस्तित्व में बुलाया। यह मनुष्य की समझ और वैज्ञानिक व्याख्या से परे है। विज्ञान इतना ही कर सकता है कि जो पहले से विद्यमान है उसकी जाँच करे, और जब वह लिखे हुए वचन की सच्चाई को प्रमाणित करता है तब पीछे हटकर विस्मय से देखता रह जाए! समझना केवल तभी सम्भव है जब परमेश्वर ने भीतरी प्रकाशन दिया हो — वह विश्वास जो हमें विश्वास करने के योग्य बनाता है। यह तर्क का स्थान नहीं ले रहा, यह सब तर्क से ऊपर है, “क्योंकि परमेश्वर के पास आनेवाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजनेवालों को प्रतिफल देता है” (इब्रानियों 11:6)।

अब हम इब्रानियों 11 में नाम लिये गए एक-एक व्यक्ति पर विचार करना आरम्भ करेंगे, कि देखें प्रभु ने विश्वास की चाल में उनकी अगुवाई किस रीति से की। इस दृष्टिकोण से चलते हुए कि पवित्र आत्मा ने नाम लिये जानेवाले लोगों के चुनाव में अपने मानवीय लेखक की जान-बूझकर अगुवाई की, मैं अपने आप से कहता हूँ कि शब्दों से आगे बढ़कर पढ़ूँ, और देखूँ कि परमेश्वर के साथ चलने के कौन से सिद्धान्त उसने इन उदाहरणों में प्रकट किए हैं। जब मैं उस विश्वास के महान सत्यों को प्रकट होते देखता हूँ, तो मेरा मन आनन्द से भर उठता है।

मेरी प्रार्थना है कि आगे आनेवाले अध्याय, जब हम उन पर एक साथ विचार करेंगे, आपके मन में उमंग भर देंगे। जो कुछ पवित्र रचयिता ने यहाँ लिखा है, उसके विषय में वह आपके प्राण से बात करे।

विषय-सूची

वह मेरा कल थामे हुए है Gareth Evans

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