भक्ति
तीसरा भाषण

अध्याय 15 · 6 मिनट का पठन · 7 मिनट का श्रवण

तीसरा भाषण

कितना होता है कि लोग सभाओं में आते हैं और वहाँ आशीष पाते हैं, और फिर चले जाकर ठीक पहले जैसा ही जीवन जीते हैं, यहाँ तक कि कभी-कभी हम, जो लोगों को परमेश्वर के निकट लाने के प्रयत्न में लगातार लगे रहते हैं, ऐसे निराश होकर लौटते हैं कि हमारा मन टूटने-टूटने को हो जाता है।

हमें लगता है कि लोग उस स्थान से, जहाँ तक हम उन्हें ले आए हैं, फिर लौट जाते हैं, बजाय इसके कि उस स्थान तक चढ़ जाएँ जहाँ परमेश्वर उन्हें बुला रहा है। वे आते हैं और आते ही रहते हैं, और हम उनके लिये, जैसा भविष्यद्वक्ता कहता है, एक बहुत मधुर बजानेवाले के समान हैं, या बहुत कर्कश बजानेवाले के समान, जैसी बात हो; और वे यों ही चले जाते हैं, और कुछ नहीं पाते। वे कोई निश्चित उन्नति नहीं करते। हमने उन्हें कोई आत्मिक वरदान नहीं पहुँचाया। उनकी केवल भावनाएँ हिल जाती हैं, और इसका फल यह होता है कि वे अगला सप्ताह ठीक वैसे ही जीते हैं जैसे पिछला जीया था, और परीक्षा के आगे वैसे ही हार मान लेते हैं जैसे पहले मानते थे।

क्या नए नियम को पढ़कर आप एक क्षण के लिये भी यह कल्पना करेंगे कि अनुग्रह और उद्धार के अपने प्रबन्धों में परमेश्वर का अभिप्राय ऐसी ही बात थी? क्या हर प्रतिज्ञा, हर उपदेश और हर आज्ञा में कोई निश्चित लक्ष्य नहीं है? परमेश्वर अपनी माँगों और प्रतिज्ञाओं में, और जो प्रबन्ध उसने किया है उसमें, अत्यन्त निश्चित है; तौभी प्रभु के बहुत से लोग सदा और हठपूर्वक अनिश्चित बने रहते हैं। वे किवाड़ के समान, जो अपनी चूल पर घूमता है, इधर-उधर होते रहते हैं, और प्रभु से कभी कुछ नहीं पाते।

हम सचमुच चाहते हैं कि आप प्रभु से कुछ पाएँ, और हमें पूरा निश्चय है कि यदि आप उस शर्त को मानें, तो आप पा सकते हैं और पाएँगे भी। प्रभु आपको अनुग्रह, बल और उद्धार की वही विशेष मात्रा देने को तैयार है जिसकी आपको आवश्यकता है। अब जब आप उस उत्तम देश की दहलीज़ तक आ पहुँचे हैं, तो केवल एक ही वस्तु आपको बाहर रोक सकती है, बशर्ते आपने आवश्यक समर्पण कर दिया हो। निस्सन्देह, यदि आप कुछ भी रोक रखे हुए हैं, तो जब तक आप उसे न छोड़ दें, तब तक आप कभी भीतर नहीं आ सकते। यदि आप किसी सन्देह की वस्तु से चिपके हुए हैं, और सन्देह का लाभ परमेश्वर को नहीं देते, तो आप कभी भीतर नहीं आ सकते; पर यदि आप यह देख लें, और आवश्यक समर्पण कर दें, यदि आप सचमुच इस आशीष की अभिलाषा रखते हैं, तो केवल एक ही वस्तु आपको इसके आनन्द से बाहर रोक सकती है, और वह है—अविश्वास।

आनेवाले वर्षों में आपके विषय में भी वही कहा जाएगा जो प्राचीन काल में कुछ लोगों के विषय में कहा गया था, इब्रानियों 3:19: “इस प्रकार हम देखते हैं, कि वे अविश्वास के कारण प्रवेश न कर सके।” आप ठीक दहलीज़ तक आ पहुँचे हैं, और आपमें से कुछ तो कई बार वहाँ हो आए हैं। ओह! कैसे अनुग्रह भरे प्रभावों का अनुभव आपने किया है।

आपने परदे के पार देखा है! आपने उसका हाथ अनुभव किया है! आपके पाँव दहलीज़ पर पड़ चुके हैं!

आप भीतर पहुँचने ही को थे, और तब अविश्वास के कारण आप पीछे हट गए। क्या आज रात फिर ऐसा ही होगा? परमेश्वर न करे! क्या आप पार पाँव रखेंगे? क्या आप साहस करेंगे? क्या आप भरोसा करेंगे? क्या आप उसकी सच्चाई पर छलाँग लगाएँगे? क्या आप सर्वशक्तिमान प्रेम की बाँहों में कूद पड़ेंगे, और परिणाम उसी पर छोड़ देंगे? इसकी चिन्ता मत कीजिए कि आप मर ही जाएँ, या आप पर कुछ ऐसा बीत जाए जो जगत के इतिहास में और किसी पर कभी न बीता हो; परमेश्वर आपकी सुधि लेगा। इसकी भी चिन्ता मत कीजिए कि शैतान आकर आपको जाँचे, जैसा उसने अय्यूब को जाँचा था, और आपको फोड़ों से पीड़ित करे, और आपको राख पर बैठा दे—वहाँ यीशु के साथ आप उससे कहीं अधिक सुखी होंगे जितने उसके बिना किसी राजमहल में होते। ओह! यह परिणामों की चिन्ता! शैतान जानता है कि आपमें से बहुतों के लिये कैसी भव्य सम्भावनाएँ खुली हुई हैं; वह केवल यही नहीं जानता कि आप अपने में क्या पा सकते और भोग सकते हैं, वरन् यह भी कि यदि आप केवल भीतर आकर इस आशीष के अधिकारी हो जाएँ तो आप परमेश्वर के लिये क्या कर सकते हैं; और इसीलिए वह आपको परिणामों से डराता है। वह जानता है कि आप क्या कर सकते हैं, और आपके द्वारा कौन बचाए जा सकते हैं!

कौन जानता है कि जो अनमोल प्राण आपके चारों ओर इकट्ठे होते हैं, उनमें से कितनों को आपके द्वारा इस ऊँचे चबूतरे पर—मसीही अनुभव की इस महिमामय ऊँची भूमि पर—पहुँचाया जाए? और उनके द्वारा कितनों को और? और इस रीति से वह महिमामय आशीष कैसे फैलती जाए? यह भी स्मरण रखिए कि जितनी बार आप निकट आकर लौट जाते हैं, उतनी ही कम सम्भावना रह जाती है कि आप कभी भीतर आएँगे भी; और जितने अधिक निकट आकर आप लौटते हैं, उतनी ही कम सम्भावना रह जाती है कि आप फिर कभी इतने निकट आ सकेंगे।

आप आत्मा को शोकित कर रहे हैं। कुछ ऐसे लोग हैं जो वर्षों से निकट आते रहे हैं, और अब वे बिलकुल ही लौट गए हैं, और मुझे डर है कि वे फिर कभी ऊपर न आएँगे। आप क्या करेंगे?

राज्य की व्यवस्था आदि से अन्त तक यही है, मत्ती 9:29: “...तुम्हारे विश्वास के अनुसार तुम्हारे लिये हो,” और, मरकुस 11:24: “इसलिए मैं तुम से कहता हूँ, कि जो कुछ तुम प्रार्थना करके माँगो तो विश्वास कर लो कि तुम्हें मिल गया, और तुम्हारे लिये हो जाएगा।” अनन्त सत्य ने यह कहा है—“तुम्हारे लिये हो जाएगा।” तो अब बताइए, क्या आप करेंगे? क्या आपने सब कुछ छोड़ दिया है? क्या आप पूरी तरह स्वतन्त्र हैं? क्या आप सब कुछ अपने पीछे छोड़े जा रहे हैं? क्या आपने आज रात से यह ठान लिया है कि बीते हुए से नाता तोड़ देंगे, और आगे से शरीर की अभिलाषाओं को पूरा करने का उपाय न करेंगे, वरन् जो बातें पीछे रह गई हैं उन्हें अन्तिम विदाई देंगे, उन पर अपनी आँखें मूँद लेंगे, और अपनी ऊपर की बुलाहट के इनाम पर अपनी दृष्टि गड़ा देंगे, और अपने जीवन की हर आनेवाली घड़ी में तब तक आगे बढ़ते जाएँगे जब तक उसे पा न लें? क्या आप करेंगे? यदि करेंगे, तो परमेश्वर आपको यह आशीष देगा। वह इसे करने की बाट जोह रहा है; वह यहीं है। पवित्र आत्मा यहीं है: वह आपमें से बहुतों को ऊपर ले जा रहा है; वह आपसे बिनती कर रहा है; जो मैं कह रही हूँ उसे वह आपके मनों में और बल दे रहा है; वह कह रहा है, “आ, हे प्रिय; भोज के घर में आ जा;” वह आपको आशीष देना और अपने आत्मा से भर देना चाहता है। तो अब बताइए, क्या आप आएँगे? ओह! प्रभु आपकी सहायता करे कि आप पीछे न हटें, वरन् आगे बढ़ते जाएँ, आगे बढ़ते जाएँ, आगे बढ़ते जाएँ, परिणामों की कुछ भी चिन्ता किए बिना।

अध्याय 15 पूरा हुआ

तीसरा भाषण

पृष्ठ 1 / 1 · 6 मिनट अध्याय में शेष
पिछला अगला