परमेश्वर की बाट जोहना ·उसके पुत्र के आगमन के लिये

अध्याय 30 · 6 मिनट का पठन

एआई अनुवाद — मातृभाषी समीक्षा बाकी

उसके पुत्र के आगमन के लिये

अट्ठाईसवाँ दिन। परमेश्वर की बाट जोहना: उसके पुत्र के आगमन के लिये।

'तुम उन मनुष्यों के समान बनो, जो अपने स्वामी की प्रतीक्षा कर रहे हों।'—लूका 12:36.

'हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रगट होने तक, जिसे वह ठीक समय पर दिखाएगा, जो परमधन्य और एकमात्र अधिपति और राजाओं का राजा, और प्रभुओं का प्रभु है।'—1 तीमुथियुस 6:14,15(R.V.).

'मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीविते और सच्चे परमेश्वर की सेवा करो, और उसके पुत्र के स्वर्ग पर से आने की प्रतीक्षा करते रहो।'—1 थिस्सलुनीकियों 1:9, 10.

स्वर्ग में रहनेवाले परमेश्वर की बाट जोहना, और स्वर्ग पर से उसके पुत्र के आने की बाट जोहना—इन दोनों को परमेश्वर ने जोड़ दिया है, और कोई मनुष्य इन्हें अलग न करे। दिन प्रतिदिन के जीवन में उसकी उपस्थिति और सामर्थ्य के लिये परमेश्वर की बाट जोहना ही वह एकमात्र सच्ची तैयारी होगी जिससे हम नम्रता और सच्ची पवित्रता में मसीह की बाट जोह सकें। और मसीह की, जो स्वर्ग से आकर हमें स्वर्ग ले जाएगा, बाट जोहना ही परमेश्वर की बाट जोहने को उसका सच्चा स्वर—आशा और आनन्द का स्वर—देगा। जो पिता ठीक समय पर स्वर्ग से अपने पुत्र को प्रगट करेगा, वही परमेश्वर है जो, जब हम उसकी बाट जोहते हैं, हमें अपने पुत्र के प्रगट होने के लिये तैयार करता है। वर्तमान जीवन और आनेवाली महिमा परमेश्वर में और हम में अटूट रीति से जुड़े हुए हैं।

कभी-कभी इनके अलग हो जाने का भय रहता है। बीते हुए कल के धर्म में या आनेवाले कल के धर्म में लगे रहना सदा उससे सहज है कि आज के धर्म में विश्वासयोग्य ठहरें। जब हम इस पर दृष्टि लगाते हैं कि परमेश्वर ने बीते समय में क्या किया, या आनेवाले समय में क्या करेगा, तब वर्तमान कर्तव्य का और उसके काम के आगे वर्तमान समर्पण का व्यक्तिगत दावा हमसे छूट सकता है। परमेश्वर की बाट जोहना सदा हमें मसीह की बाट जोहने तक ले जाना चाहिए, जो उसके काम की महिमामय पूर्णता है; और मसीह की बाट जोहना सदा हमें परमेश्वर की बाट जोहने के कर्तव्य की सुधि दिलाता रहे, क्योंकि यही एकमात्र प्रमाण है कि मसीह की बाट जोहना आत्मा और सच्चाई में है। ऐसा भय बना रहता है कि हम उसके साथ, जो आनेवाला है, इतना नहीं, जितना उन बातों के साथ लगे रहें जो आनेवाली हैं; आनेवाली घटनाओं के अध्ययन में कल्पना और तर्क और मनुष्य की चतुराई के लिये ऐसा विस्तार है, कि गहरी नम्रता के साथ परमेश्वर की बाट जोहने के सिवा और कोई बात हमें इस भूल से नहीं बचा सकती कि हम बुद्धि के अध्ययन के आनन्द और रुचि को ही उसका और उसके प्रगट होने का सच्चा प्रेम समझ बैठें। हे तुम सब, जो कहते हो कि हम मसीह के आगमन की बाट जोहते हैं, यह निश्चय कर लो कि तुम अभी परमेश्वर की बाट जोहते हो। और हे तुम सब, जो अभी परमेश्वर की बाट जोहना चाहते हो कि वह अपने पुत्र को तुम में प्रगट करे, इस बात का ध्यान रखो कि तुम ऐसा उन मनुष्यों के समान करो जो स्वर्ग पर से उसके पुत्र के प्रगट होने की बाट जोहते हैं। उस महिमामय प्रगट होने की आशा तुम्हें परमेश्वर की बाट जोहने में उस बात के लिये दृढ़ करेगी जो वह अभी तुम में करना चाहता है: वही सर्वशक्तिमान प्रेम, जो उस महिमा को प्रगट करेगा, अभी भी तुम में काम कर रहा है कि तुम्हें उसके योग्य बनाए।

'उस धन्य आशा की अर्थात् अपने महान परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की महिमा के प्रगट होने की,' प्रतीक्षा उन महान बन्धनों में से एक है जो परमेश्वर की कलीसिया को युगानुयुग दिए गए हैं। 'वह अपने पवित्र लोगों में महिमा पाने, और सब विश्वास करनेवालों में आश्चर्य का कारण होने को आएगा।' तब हम सब मिलेंगे, और मसीह की देह की एकता अपनी ईश्वरीय महिमा में देखी जाएगी। वही ईश्वरीय प्रेम का मिलन-स्थान और उसकी जय होगी। यीशु अपनों को ग्रहण करेगा और उन्हें पिता के सामने प्रस्तुत करेगा। उसके अपने उससे मिलेंगे और उस धन्य मुख की आराधना ऐसे प्रेम में करेंगे जिसके लिये शब्द नहीं। उसके अपने एक दूसरे से परमेश्वर के अपने ही प्रेम की मगनता में मिलेंगे। आओ, हम अपने प्रभु और स्वर्गीय दूल्हे के प्रगट होने की बाट जोहें, उसकी लालसा करें, और उससे प्रेम रखें। उससे कोमल प्रेम और एक दूसरे से कोमल प्रेम—यही सच्ची और एकमात्र दुल्हन की आत्मा है।

मुझे बड़ा भय है कि यह बात कभी-कभी भुला दी जाती है। हॉलैंड में एक प्रिय भाई कह रहा था कि विश्वास की प्रतीक्षा ही दुल्हन का सच्चा चिह्न है। मैंने साहस करके अपनी शंका प्रगट की। कोई अयोग्य दुल्हन, जिसका विवाह किसी राजकुमार से होनेवाला हो, सम्भव है केवल उस पद और उस धन के विषय में सोचती हो जो उसे मिलनेवाला है। विश्वास की प्रतीक्षा प्रबल हो सकती है, और सच्चा प्रेम बिलकुल न हो। दुल्हन की आत्मा में जो बात है, वह प्रेम है। हम तब दुल्हन के स्थान पर नहीं होते जब भविष्यद्वाणी के विषयों में सबसे अधिक लगे रहते हैं, परन्तु तब होते हैं जब नम्रता और प्रेम में अपने प्रभु से और उसके भाइयों से सटे रहते हैं। यीशु हमारे प्रेम को ग्रहण करने से इन्कार करता है, जब तक वह उसके चेलों से प्रेम न हो। उसके आगमन की बाट जोहने का अर्थ यह है कि हम देह की एकता के उस महिमामय प्रगटीकरण की बाट जोहें जो आनेवाला है, और इस बीच यहाँ नम्रता और प्रेम में उसी एकता को बनाए रखने का यत्न करें। जो सबसे अधिक प्रेम रखते हैं, वे ही उसके आगमन के लिये सबसे अधिक तैयार हैं। एक दूसरे से प्रेम रखना ही उसकी दुल्हन, अर्थात् कलीसिया, का जीवन और सुन्दरता है।

और यह कैसे हो? हे परमेश्वर की प्रिय सन्तान! यदि तू ठीक रीति से स्वर्ग पर से उसके पुत्र की बाट जोहना सीखना चाहता है, तो अभी से स्वर्ग में रहनेवाले परमेश्वर की बाट जोहते हुए जी। स्मरण रख कि यीशु सदा परमेश्वर की बाट जोहते हुए जीता रहा। वह अपने आप से कुछ न कर सकता था। परमेश्वर ही था जिसने अपने पुत्र को दुःख उठाकर सिद्ध किया और फिर उसे ऊँचा किया। परमेश्वर ही है जो तुझे उस जन का गहरा आत्मिक जीवन दे सकता है जो सचमुच उसके पुत्र की बाट जोहता है: इसी के लिये परमेश्वर की बाट जोह। मसीह की अपनी बाट जोहना—हाय, वह उन बातों की बाट जोहने से कितना भिन्न है जो घटनेवाली हैं! पिछली बात तो कोई भी मसीही कर सकता है; पहली बात परमेश्वर ही को अपने पवित्र आत्मा के द्वारा प्रतिदिन तुझ में करनी होगी। इसलिये हे तुम सब, जो परमेश्वर की बाट जोहते हो, उसी की ओर ताको कि वह तुम्हें अनुग्रह दे कि तुम उस आत्मा में, जो स्वर्ग से है, स्वर्ग पर से उसके पुत्र की बाट जोह सको। और हे तुम, जो उसके पुत्र की बाट जोहना चाहते हो, निरन्तर परमेश्वर की बाट जोहते रहो कि वह मसीह को तुम में प्रगट करे।

मसीह का हम में प्रगट होना, जैसा उन्हें दिया जाता है जो परमेश्वर की बाट जोहते हैं, वही महिमा में मसीह के पूर्ण प्रगट होने के लिये सच्ची तैयारी है।

'हे मेरे मन, परमेश्वर के सामने चुपचाप रह!'

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परमेश्वर की बाट जोहना Andrew Murray

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