परमेश्वर की बाट जोहना ·छुटकारे के लिये

अध्याय 29 · 5 मिनट का पठन

एआई अनुवाद — मातृभाषी समीक्षा बाकी

छुटकारे के लिये

सत्ताईसवाँ दिन। परमेश्वर की बाट जोहना: छुटकारे के लिये।

'शमौन धर्मी और भक्त था, और इस्राएल की शान्ति की प्रतीक्षा कर रहा था, और पवित्र आत्मा उस पर था। हन्नाह नाम की एक भविष्यद्वक्तिन, . . . उन सभी से, जो यरूशलेम के छुटकारे की प्रतीक्षा कर रहे थे, उसके विषय में बातें करने लगी।'—लूका 2:25, 38.

यहाँ हमारे सामने बाट जोहनेवाले विश्वासी का चिह्न है। धर्मी, अपने सारे चालचलन में सच्चा; भक्त, परमेश्वर के प्रति समर्पित, सदा ऐसे चलता हुआ मानो उसी की उपस्थिति में हो; उस शान्ति की प्रतीक्षा करता हुआ जो इस्राएल की थी, परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं की पूर्ति की ओर ताकता हुआ: और पवित्र आत्मा उस पर था। उस भक्तिपूर्ण बाट जोहने में ही वह आशीष के लिये तैयार किया गया था। और शमौन अकेला न था। हन्नाह ने उन सभी से बातें कीं जो यरूशलेम के छुटकारे की प्रतीक्षा कर रहे थे। चारों ओर के रूढ़िवाद और सांसारिकता के बीच यरूशलेम में भक्त स्त्री-पुरुषों के एक छोटे से दल का यही एक चिह्न था। वे परमेश्वर की बाट जोह रहे थे; उसके प्रतिज्ञा किए हुए छुटकारे की ओर ताक रहे थे।

और अब जब इस्राएल की शान्ति आ चुकी है, और छुटकारा पूरा हो चुका है, तो क्या हमें अब भी बाट जोहने की आवश्यकता है? निश्चय ही है। परन्तु क्या हमारा बाट जोहना, जो उसे आ चुका जानकर पीछे की ओर देखते हैं, उनके बाट जोहने से बहुत भिन्न न होगा जो उसे आनेवाला जानकर आगे की ओर ताकते थे? होगा, और विशेष करके दो बातों में। अब हम छुटकारे के पूरे सामर्थ्य में परमेश्वर की बाट जोहते हैं: और हम उसके पूर्ण प्रगट होने की बाट जोहते हैं।

अब हमारा बाट जोहना छुटकारे के पूरे सामर्थ्य में है। मसीह ने कहा, 'उस दिन तुम जानोगे, कि तुम मुझ में। तुम मुझ में बने रहो।' पत्रियाँ हमें सिखाती हैं कि हम अपने आपको परमेश्वर के सामने ऐसा जानकर सौंप दें कि हम सचमुच 'पाप के लिये तो मरा, परन्तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित' हैं, और 'मसीह में स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आत्मिक आशीष' से आशीषित हैं। अब हमारा परमेश्वर की बाट जोहना उस अद्भुत चेतना में हो सकता है, जिसे पवित्र आत्मा हमारे भीतर उपजाता और बनाए रखता है, कि हम उस प्रिय में ग्रहण किए गए हैं, कि जो प्रेम उस पर टिका है वही हम पर भी टिका है, कि हम उसी प्रेम में जी रहे हैं, परमेश्वर की उसी निकटता और उपस्थिति और दृष्टि में। पुराने समय के पवित्र लोग परमेश्वर के वचन पर खड़े हुए, और उसी वचन पर आशा रखकर बाट जोहते रहे; हम भी उसी वचन पर टिके हैं—परन्तु, हाय! कितने अधिक बड़े विशेषाधिकारों के नीचे, मसीह यीशु के साथ एक होकर। परमेश्वर की बाट जोहने में हमारा भरोसा यही हो: मसीह में हमें पिता तक पहुँच मिली है; इसलिये हम कितने निश्चित हो सकते हैं कि हमारा बाट जोहना व्यर्थ नहीं हो सकता।

हमारा बाट जोहना इस बात में भी भिन्न है, कि जहाँ वे आनेवाले छुटकारे की बाट जोहते थे, वहाँ हम उसे पूरा हुआ देखते हैं, और अब उसके प्रगट होने की बाट जोहते हैं— हम में। मसीह ने केवल यही नहीं कहा, मुझ में बने रहो, परन्तु यह भी, और मैं तुम में। पत्रियाँ केवल हमारे विषय में यही नहीं कहतीं कि हम मसीह में हैं, परन्तु मसीह के विषय में यह भी कि वह हम में है, और यही छुटकारा देनेवाले प्रेम का सबसे ऊँचा भेद है। जैसे-जैसे हम दिन प्रतिदिन मसीह में अपना स्थान बनाए रखते हैं, परमेश्वर इस बात की बाट जोहता है कि मसीह को हम में ऐसे प्रगट करे कि वह हम में रूप धारण कर ले, कि उसका मन और उसका स्वभाव और उसकी समानता हम में रूप और सार पा जाए, यहाँ तक कि हर एक सचमुच कह सके, 'मसीह मुझ में जीवित है।'

ऊपर स्वर्ग में मसीह में मेरा जीवन, और यहाँ नीचे पृथ्वी पर मुझ में मसीह का जीवन—ये दोनों एक दूसरे को पूरा करते हैं। और जितना अधिक मेरा परमेश्वर की बाट जोहना इस जीवित विश्वास से चिह्नित होगा कि मैं मसीह में, उतना ही अधिक हृदय उस मसीह के लिये प्यासा होगा जो मुझ में है, और उस पर अपना दावा करेगा। और परमेश्वर की बाट जोहना, जो विशेष आवश्यकताओं और प्रार्थना से आरम्भ हुआ था, हमारे निजी जीवन के विषय में उत्तरोत्तर इसी एक बात पर केन्द्रित होता जाएगा: हे प्रभु, अपने छुटकारे को मुझ में पूरी रीति से प्रगट कर; मसीह को मुझ में जीने दे।

हमारा बाट जोहना पुराने समय के पवित्र लोगों के बाट जोहने से उस स्थान में भिन्न है जो हम लेते हैं, और उन आशाओं में जो हम रखते हैं। परन्तु जड़ में वह वही है: परमेश्वर की बाट जोहना, क्योंकि हमारी आशा उसी से है।

शमौन और हन्नाह से एक पाठ सीखो। उस महान छुटकारे के लिये—मसीह के जन्म या उसकी मृत्यु के लिये—कुछ भी करना उनके लिये कितना बिलकुल असम्भव था। वह परमेश्वर का काम था। वे बाट जोहने के सिवा और कुछ नहीं कर सकते थे। क्या हम भी मसीह के हम में प्रगट होने के विषय में उतने ही बिलकुल असहाय हैं? निश्चय ही हैं। परमेश्वर ने मसीह में उस महान छुटकारे को समूचा पूरा करके उसका ब्योरेवार उपयोग हम पर नहीं छोड़ दिया।

यह छिपा हुआ विचार कि ऐसा ही है, हमारी सारी निर्बलता की जड़ में पड़ा है। हर एक विश्वासी में मसीह का प्रगट होना, और हर एक में वह दिन प्रतिदिन का प्रगट होना, पग-पग और पल-पल, उतना ही परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता का काम है जितना मसीह का जन्म या पुनरुत्थान। जब तक यह सत्य हमारे भीतर प्रवेश करके हमें भर न दे, और हम यह अनुभव न करें कि छुटकारे के आनन्द में अपने जीवन के हर पल के लिये हम परमेश्वर पर ठीक उतने ही निर्भर हैं जितने वे उसकी बाट जोहने में थे, तब तक परमेश्वर की बाट जोहना हमारे लिये अपनी पूरी आशीष न लाएगा। अपनी पूर्ण और नितान्त असहायता का बोध, और यह भरोसा कि परमेश्वर सब कुछ कर सकता है और करेगा—हमारे बाट जोहने के भी यही चिह्न होने चाहिए, जैसे उनके थे। परमेश्वर ने जितनी महिमा के साथ अपने आपको उनके लिये विश्वासयोग्य और आश्चर्यकर्म करनेवाला परमेश्वर ठहराया, उतनी ही महिमा के साथ वह हमारे लिये भी ठहरेगा।

'हे मेरे मन, परमेश्वर के सामने चुपचाप रह!'

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परमेश्वर की बाट जोहना Andrew Murray

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