परमेश्वर की बाट जोहना ·प्राक्कथन

अध्याय 2 · 3 मिनट का पठन

एआई अनुवाद — मातृभाषी समीक्षा बाकी

प्राक्कथन

प्राक्कथन

पिछले वर्ष इंग्लैंड के लिये प्रस्थान करने से पहले, इस विचार ने मेरे मन पर गहरी छाप डाली थी कि हमारे सारे धर्म में, चाहे वह व्यक्तिगत हो या सार्वजनिक, हमें परमेश्वर की और अधिक आवश्यकता है। मुझे यह अनुभव हुआ था कि हमें अपने लोगों को उनकी आराधना में और अधिक यह सिखाना चाहिए कि वे परमेश्वर की बाट जोहें, और उसकी उपस्थिति के गहरे बोध का, उससे और अधिक सीधे संपर्क का, तथा उस पर पूर्ण निर्भरता का अभ्यास बढ़ाना हमारी सेवकाई का एक निश्चित लक्ष्य ठहरे। एक्सेटर हॉल में एक 'स्वागत' भोज में मैंने अपने सब धार्मिक कार्य के संबंध में इस विचार को बहुत सरल रीति से व्यक्त किया। मैं अन्यत्र कह चुका हूँ कि इस भाव को जो प्रत्युत्तर मिला उससे मैं विस्मित हुआ। मैंने देखा कि परमेश्वर का आत्मा बहुतों के हृदयों में यही अभिलाषा उत्पन्न करता आया है।

बीते वर्ष के अनुभवों ने, चाहे वे व्यक्तिगत हों या सार्वजनिक, इस दृढ़ विश्वास को बहुत गहरा कर दिया है। ऐसा जान पड़ता है मानो मैं स्वयं अब कहीं यह देखने लगा हूँ कि परमेश्वर के विषय में, और उसके साथ हमारे संबंध के विषय में, सबसे गहरा सत्य इसी परमेश्वर की बाट जोहने में केंद्रित है, और यह भी कि हमारे जीवन और काम में हम उसकी आत्मा से कितना थोड़ा घिरे रहे हैं। आगे के पृष्ठ मेरे इसी दृढ़ विश्वास का फल हैं, और इस अभिलाषा का भी कि परमेश्वर के सब लोगों का ध्यान हमारी सब आवश्यकताओं की उस एक महान औषधि की ओर लगाया जाए। इनमें से आधे से अधिक अंश जहाज पर लिखे गए थे; मुझे डर है कि उन पर कुछ कच्चेपन और शीघ्रता के चिन्ह रह गए हैं। उन्हें फिर से पढ़ते हुए मुझे ऐसा लगा मानो मैं चाहता कि उन्हें दोबारा लिखूँ। परन्तु अब यह मुझसे नहीं हो सकता। और इसलिए मैं उन्हें इस प्रार्थना के साथ भेजता हूँ कि वह, जो निर्बलों को काम में लाना पसन्द करता है, उनके साथ अपनी आशीष दे।

मैं नहीं जानता कि थोड़े शब्दों में यह कह पाना मेरे लिये संभव होगा या नहीं कि जो मुख्य बातें हमें सीखनी हैं वे कौन-सी हैं। पुस्तक के अन्त में लॉ के विषय की टिप्पणी में मैंने कुछ का उल्लेख किया है। परन्तु जो मैं यहाँ कहना चाहता हूँ वह यह है: हमारे धर्म की बड़ी कमी यह है कि हम परमेश्वर को नहीं जानते। निर्बलता और असफलता की हर शिकायत का उत्तर, और पवित्रता की शिक्षा खोजनेवाली हर मण्डली या हर सम्मेलन के लिये संदेश, केवल यही होना चाहिए, बात क्या है: क्या तुम्हारे पास परमेश्वर नहीं है? यदि तुम सचमुच परमेश्वर पर विश्वास करते हो, तो वह सब कुछ ठीक कर देगा। परमेश्वर अपने पवित्र आत्मा के द्वारा ऐसा करने को तैयार और समर्थ है। अपने आप से रत्ती भर भी भलाई की, या मनुष्य में जो कुछ है उससे रत्ती भर भी सहायता की आशा रखना छोड़ दो, और बस अपने आप को बिना किसी शर्त के परमेश्वर के हाथ में सौंप दो कि वह तुम में काम करे: वह तुम्हारे लिये सब कुछ करेगा।

यह कितना सरल जान पड़ता है! तौभी यही वह सुसमाचार है जिसे हम इतना कम जानते हैं। इन बहुत ही त्रुटिपूर्ण मननों को भेजते हुए मुझे लज्जा आती है; मैं उन्हें केवल अपने भाइयों के, और अपने परमेश्वर के प्रेम पर डाल सकता हूँ। वह इनका ऐसा उपयोग करे कि हम सब को अपनी ओर खींचे, और हम व्यवहार तथा अनुभव में केवल परमेश्वर की बाट जोहने की वह धन्य कला सीखें। भला होता कि हमें कुछ ठीक-ठीक बोध हो जाता कि ऐसे जीवन का प्रभाव क्या होगा जो न विचार में, न कल्पना में, न अपने प्रयत्न में, परन्तु पवित्र आत्मा की सामर्थ्य में, सर्वथा परमेश्वर की बाट जोहने के लिये अर्पित किया गया हो।

परमेश्वर के उन सब पवित्र लोगों को, जिनसे मिलने का सौभाग्य मुझे मिला है, और उनको भी जिनसे मैं नहीं मिला, मसीह में अपना नमस्कार भेजते हुए, मैं अपने आप को आपका भाई और सेवक लिखता हूँ,

एंड्रयू मरे।

वेलिंग्टन

3 मार्च 1896

[पृष्ठ 16 रिक्त है]

विषय-सूची

परमेश्वर की बाट जोहना Andrew Murray

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