पूलों के बीच बीनी हुई बालें
दुःख और क्लेश में

अध्याय 3 · 19 मिनट का पठन

दुःख और क्लेश में

दुःख का अनुशासन

प्रभु अपने सबसे अच्छे सैनिक क्लेश के पहाड़ी प्रदेशों से ही निकालता है।

परीक्षा के सौभाग्य

कहा जाता है कि दिन के समय जब पृथ्वी के साधारण धरातल से तारे दिखाई नहीं देते, तब यदि कोई किसी अंधेरे कुएँ में उतर जाए, तो वे उसे तुरन्त दिखाई देने लगते हैं। और यह निश्चय ही सच है कि परमेश्वर की सबसे उत्तम प्रतिज्ञाएँ उसकी कलीसिया को प्रायः तभी दिखाई देती हैं जब वह अपनी सबसे अंधेरी परीक्षाओं में होती है। जितना यह निश्चित है कि परमेश्वर अपनी सन्तानों को भट्ठी में डालता है, उतना ही यह भी निश्चित है कि वह भट्ठी में उनके साथ होगा। मैं नहीं पढ़ता कि याकूब ने स्वर्गदूत को तब तक देखा, जब तक वह ऐसी स्थिति में न आ गया जहाँ उसे मल्लयुद्ध करना पड़ा; और तब मल्लयुद्ध करनेवाले याकूब ने मल्लयुद्ध करनेवाले स्वर्गदूत को देखा। मैं नहीं जानता कि यहोशू ने परमेश्वर के दूत को कभी देखा हो, जब तक वह यरीहो के पास न पहुँचा; और तब यहोशू ने उस स्वर्गीय योद्धा को देखा। मैं नहीं जानता कि अब्राहम ने प्रभु को कभी देखा हो, जब तक वह मम्रे के मैदानों में परदेशी और भटकनेवाला न बन गया; और तब प्रभु एक बटोही के रूप में उसे दिखाई दिया। अपने सबसे निराशाजनक दुःखों में ही हमें अपने सबसे आनन्दमय अनुभव मिलते हैं। प्रकाशन देखने के लिये तुम्हें पतमुस जाना ही होगा। संसार की सारी ज्योति से अलग, आँधियों से घिरी उस बंजर चट्टान पर ही हम वह उपयुक्त अंधकार पा सकते हैं, जिसमें पृथ्वी की छायाओं से विचलित हुए बिना हम स्वर्ग की ज्योति को निहार सकें।

बादल में ज्योति

"यहोवा ने अय्यूब का सारा दुःख दूर किया।" तो फिर हमारे सबसे लम्बे दुःखों का भी अन्त होता है, और हमारी विपत्ति की सबसे अथाह गहराइयों का भी एक तल है। हमारे जाड़े सदा मुँह नहीं फुलाए रहेंगे: ग्रीष्म शीघ्र ही मुस्कुराएगा। ज्वार सदा उतरता ही नहीं रहेगा: जल की धाराओं को अपना मार्ग लौटकर तय करना ही होगा। रात अपना अंधकार हमारे प्राणों पर सदा नहीं फैलाए रहेगी: सूर्य फिर भी उदय होगा, और उसकी किरणों में चंगाई होगी। "यहोवा ने अय्यूब का सारा दुःख दूर किया।" इसी प्रकार हमारे दुःखों का भी अन्त होगा, जब परमेश्वर उनमें अपना अभिप्राय पूरा कर लेगा। अय्यूब के विषय में वे अभिप्राय ये थे: कि शैतान हार जाए, उसी के हथियारों से विफल किया जाए, और ठीक उस समय उसकी आशाएँ धूल में मिल जाएँ जब सब कुछ उसी की इच्छा के अनुसार चल रहा था। शैतान की चुनौती पर परमेश्वर ने अपना हाथ बढ़ाकर अय्यूब की हड्डियों और उसके मांस को छुआ था; तो भी परीक्षा करनेवाला उस पर प्रबल न हो सका, वरन् उसे इन विजयी शब्दों में मुँहतोड़ उत्तर मिला, "चाहे वह मुझे घात करे, तो भी मैं उस पर भरोसा रखूँगा।" जब शैतान हार जाता है, तब युद्ध थम जाता है। प्रभु का लक्ष्य अय्यूब के विश्वास को परखना भी था। इस खजूर के पेड़ पर बहुत से बोझ लटकाए गए, परन्तु वह फिर भी सीधा ही बढ़ता रहा। आग प्रचण्ड थी, तो भी सोना तनिक भी न घटा; केवल मैल ही भस्म हुआ। प्रभु का एक और उद्देश्य उसकी अपनी महिमा था। और सचमुच उसकी बड़ी महिमा हुई। परमेश्वर ने उस अनुग्रह के द्वारा, जिससे उसने अपने दीन और दुःखी दास को उन भारी से भारी विपत्तियों में सम्भाले रखा जो कभी किसी मनुष्य पर पड़ीं, अपने महान नाम और अपनी बुद्धिमान युक्तियों के लिये अनन्त कीर्ति प्राप्त की है। परमेश्वर का एक और अभिप्राय था, और वह भी पूरा हुआ। अय्यूब अपने क्लेशों के द्वारा पवित्र किया गया था। उसकी आत्मा कोमल हो गई, और जो कुछ आत्म-धार्मिकता उसके भीतर छिपी थी, वह पूरी रीति से निकाल दी गई। और अब जबकि परमेश्वर की अनुग्रहपूर्ण योजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, वह छड़ी हटा लेता है; वह पिघली हुई चाँदी को दहकते अंगारों के बीच से निकाल लेता है। परमेश्वर मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न व्यर्थ दुःख देता है, और यह वह इस बात से प्रगट करता है कि वह उन्हें आवश्यकता से अधिक समय तक कभी दुःख नहीं देता। वह उन्हें भट्ठी में उससे एक क्षण भी अधिक नहीं रहने देता, जितना उसकी बुद्धि और उसके प्रेम के उद्देश्यों को पूरा करने के लिये नितान्त आवश्यक है। "यहोवा ने अय्यूब का सारा दुःख दूर किया।" तो हे दुःखी विश्वासी, निराश न हो; जिसने अय्यूब का सारा दुःख दूर किया, वह दक्षिण देश के नालों के समान तुम्हारी बँधुआई को भी लौटा सकता है। वह तुम्हारी दाख की बारी को फिर फुलाएगा, और तुम्हारे खेत से फिर उपज दिलाएगा। तुम फिर आनन्द मनानेवालों के संग निकलोगे, और तुम्हारे होंठों पर एक बार फिर हर्ष का गीत होगा। निराशा को अपनी क्रूर बेड़ियाँ तुम्हारे प्राण पर कसने न दो। अब भी आशा रखो, क्योंकि इस विषय में आशा है। अब भी भरोसा रखो, क्योंकि भरोसे का आधार है। वह तुम्हें आनन्द करते हुए बँधुआई से फिर निकाल लाएगा, और तुम अब भी उसकी स्तुति में गाओगे, "तूने मेरे लिये विलाप को नृत्य में बदल डाला; तूने मेरा टाट उतरवाकर मेरी कमर में आनन्द का पटुका बाँधा है।"

वर्षा के बाद निर्मल प्रकाश

दाऊद के वर्णन के अनुसार, राजा के रूप में मसीह का शासन "वर्षा के बाद निर्मल प्रकाश" के समान है, जिसके कारण भूमि से हरी-हरी घास उगती है। हमने प्रायः ऐसा ही होते देखा है। भारी बौछार के बाद, या लगातार वर्षा ऋतु के बाद, जब सूर्य चमकता है, तब हवा में ऐसी सुहावनी निर्मलता और ताज़गी होती है जो हमें और समयों में कम ही अनुभव होती है। कदाचित् सबसे उजला मौसम ठीक तभी होता है जब वर्षा थम चुकी हो, जब हवा बादलों को उड़ा ले गई हो, और सूर्य अपने कक्ष से झाँककर अपनी मुस्कानों से पृथ्वी को आनन्दित करता हो। और मसीही के अभ्यस्त हृदय के साथ भी ऐसा ही है। दुःख सदा नहीं बना रहता। विपत्ति की मूसलाधार वर्षा के बाद बार-बार निर्मल प्रकाश आता ही है। हे परखे हुए विश्वासी, इस पर विचार करो। तुम्हारे सब क्लेशों के बाद भी परमेश्वर के लोगों के लिये सब्त का विश्राम बाकी है। जब यह सारी वर्षा बीत जाएगी, तब तुम्हारे प्राण पर निर्मल प्रकाश आनेवाला है। जब तुम्हारी ताड़ना का समय बीत चुका होगा, तब तुम्हारे लिये वैसा होगा जैसा पृथ्वी के लिये होता है जब आँधी सिसकते-सिसकते सो जाती है, जब बादल स्वयं को चिथड़े-चिथड़े कर डालते हैं, और सूर्य एक बार फिर अपने महिमामय वस्त्रों में दूल्हे के समान झाँकता है। इस उद्देश्य से दुःख अपने पीछे आनेवाले परम आनन्द के साथ मिलकर, वर्षा और धूप के समान, कोमल अंकुर उपजाने के लिये काम करता है। क्लेश और सान्त्वना मिलकर हमारी भलाई ही को उत्पन्न करते हैं। "जैसे मसीह के दुःख हमको अधिक होते है।" वर्षा के बाद का निर्मल प्रकाश ऐसा वातावरण उत्पन्न करता है जो साग-पात और अनाज को ताज़ा कर देता है: और दुःख के समयों के बाद प्रभु का आनन्द प्राण को फलवन्त बनाता है। इस प्रकार हम हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाते हैं।

परीक्षा का लाभ

परीक्षाएँ हमें सिखाती हैं कि हम क्या हैं; वे मिट्टी को खोद डालती हैं, और हमें दिखा देती हैं कि हम किस मिट्टी के बने हैं; वे कुछ बुरी घास-पात को उखाड़कर ठीक ऊपर सतह पर ले आती हैं।

क्रूस उठानेवाले

कुरेनी शमौन का पद कितना आदरणीय था, कि वह यीशु मसीह का क्रूस उठानेवाला बना! हमें लगभग रोना आता है कि हम वहाँ न थे, कि हमें भी मसीह के लिये उसका क्रूस उठाने का आदर मिलता। परन्तु हमें रोने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि यदि हम उसके लोग हैं तो हमें भी उठाने के लिये उसका क्रूस मिलेगा। स्वर्ग में ऐसा कोई मुकुटधारी नहीं जो यहाँ नीचे क्रूस उठानेवाला न रहा हो। महिमा पाए हुओं की भीड़ में ऐसा कोई न होगा जिसने पृथ्वी पर अपना क्रूस न उठाया हो। हे विश्वासी, क्या तुम्हारे पास कोई क्रूस है? उसे मर्दानगी से कन्धे पर रखो! उठाओ उसे! बिना झिझके कदमों और आनन्दित मन से अपनी यात्रा पर चलते रहो, यह जानते हुए कि जब यह मसीह का क्रूस है, तो इसे उठाना अवश्य ही आदर की बात है; और यह कि जब तक तुम इसे उठाए हुए हो, तुम धन्य संगति में हो, क्योंकि तुम उसके पीछे चल रहे हो।

मसीही का प्रतिदिन का क्रूस

हे विश्वासी, मसीह यीशु तुम्हें तुम्हारे क्रूस भेंट करता है, और वे कोई तुच्छ भेंट नहीं हैं।

सान्त्वना

सान्त्वना स्वर्ग से नीचे के मरुस्थल-रूपी हृदयों पर कोमल ओस का टपकना है; यह ईश्वरीय दया के सबसे उत्तम दानों में से एक है।

सहानुभूति

सहानुभूति विशेष रूप से मसीही का कर्तव्य है। विचार करो कि मसीही क्या है, और तुम कहोगे कि यदि हर दूसरा मनुष्य स्वार्थी होता, तो भी उसे निःस्वार्थ होना चाहिए; यदि कहीं और कोई ऐसा हृदय न होता जिसमें दरिद्रों के प्रति सहानुभूति हो, तो भी हर मसीही के हृदय में ऐसा हृदय पाया जाना चाहिए। मसीही एक "राजा" है: किसी राजा को यह शोभा नहीं देता कि वह ओछेपन से केवल अपनी ही चिन्ता करे। क्या सिकन्दर कभी उस समय से अधिक राजसी था, जब उसकी सेना प्यास से तड़प रही थी और एक सैनिक ने उसे उस बहुमूल्य जल से भरा कटोरा दिया, और उसने उसे अलग रख दिया और कहा कि जब उसकी प्रजा प्यासी हो तब राजा का पीना उचित नहीं; वह उनके दुःख में उनका भागी होना अधिक पसन्द करेगा? हे तुम, जिन्हें परमेश्वर ने राजा और प्रधान बनाया है, अपने ही स्वार्थ पर राजसी रीति से राज्य करो, और उस आदरणीय उदारता से काम करो जो ब्रह्माण्ड के राजवंश को शोभा देती है। तुम संसार में दूसरों के उद्धारकर्ता होने के लिये भेजे गए हो; परन्तु यदि तुम केवल अपनी ही चिन्ता करो, तो तुम ऐसे कैसे हो सकोगे? तुम्हारा काम ज्योति बनना है; और क्या दीपक घने अंधकार में अपनी किरणें बिखेरते हुए स्वयं को नहीं जलाता? क्या यह तुम्हारा पद और सौभाग्य नहीं कि तुम्हारे विषय में भी वैसा ही कहा जाए जैसा तुम्हारे स्वामी के विषय में कहा गया—"इसने दूसरों को बचाया, और अपने आपको नहीं बचा सकता?"

मेरी प्रजा को शान्ति दो

परमेश्वर अपनी सन्तानों को उसे पूरा करने के साधन दिए बिना कभी कोई कर्तव्य नहीं सौंपता; और जब वह हमें अपनी प्रजा को "शान्ति दो" कहता है, तो हम निश्चित हो सकते हैं कि ऐसे साधन हैं जिनके द्वारा उन्हें शान्ति दी जा सकती है। हे परमेश्वर की सन्तान! क्या तुम्हें दुखते हृदय को शान्ति देने के लिये कोई विषय नहीं सूझता? बीते दिनों की प्राचीन बातें सुनाओ; शोक करनेवाले के कान में चुन लेनेवाले अनुग्रह, छुड़ानेवाली दया और ईश्वरीय प्रेम की बात धीरे से कहो। जब तुम्हें कोई व्याकुल जन मिले, तो उसे उस वाचा के विषय में बताओ जो सब बातों में ठीक की हुई है; उसे बताओ कि प्रभु ने बीते दिनों में क्या-क्या किया, कैसे उसने रहब को टुकड़े-टुकड़े किया और अजगर को छेदा; उसे अपने लोगों के साथ परमेश्वर के व्यवहार की अद्भुत कथा सुनाओ; उसे बताओ कि जिस परमेश्वर ने लाल समुद्र को दो भाग किया, वह क्लेश के गहरे जल के बीच से भी अपने लोगों के लिये राजमार्ग बना सकता है—कि जो जलती हुई झाड़ी में, जो भस्म नहीं होती थी, प्रगट हुआ, वह क्लेश की भट्ठी में भी उसे सम्भाले रहेगा; उसे उन अद्भुत कामों के विषय में बताओ जो परमेश्वर ने अपने चुने हुए लोगों के लिये किए हैं: निश्चय उनमें उसकी शान्ति के लिये पर्याप्त है; उसे बताओ कि परमेश्वर भट्ठी पर वैसे ही दृष्टि रखता है जैसे सुनार अपनी कुठाली पर। यदि इतना पर्याप्त न हो, तो उसे उसकी वर्तमान दयाओं के विषय में बताओ; उसे बताओ कि यद्यपि बहुत कुछ चला गया, तो भी उसके पास बहुत कुछ बचा है; उसे बताओ कि "अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं"; उसे बताओ कि अब वह उस प्रिय में ग्रहणयोग्य ठहरा है; उसे बताओ कि अब वह लेपालक पुत्र बनाया गया है, और उसकी स्थिति सुरक्षित है; उसे बताओ कि यीशु ऊपर है और उसका पक्ष ले रहा है; उसे बताओ कि चाहे पृथ्वी के खम्भे डोल उठें, तो भी परमेश्वर हमारा शरणस्थान है; शोक करनेवाले को बताओ कि सनातन परमेश्वर न थकता, न श्रमित होता है। परन्तु यदि इतना भी पर्याप्त न हो, तो उसे भविष्य के विषय में बताओ; उसके कान में धीरे से कहो कि एक स्वर्ग है जिसके फाटक मोतियों के और सड़कें सोने की हैं; उसे बताओ कि

"कुछ और घूमते सूरज, अधिक से अधिक, उसे सुन्दर कनान के तट पर पहुँचा देंगे,"

और इसलिए वह अपने दुःख भली-भाँति सह सकता है; उसे बताओ कि मसीह आ रहा है, और उसका चिन्ह आकाश में है, उसका आगमन निकट है, वह शीघ्र ही प्रगट होगा कि सच्चाई से पृथ्वी का, और धर्म से अपने लोगों का न्याय करे। और यदि इतना भी पर्याप्त न हो, तो उसे उस उद्धारकर्ता के विषय में सब कुछ बताओ जो जीया और मरा; उसे कलवरी पर ले चलो; उसके सामने लहू बहाते हाथों, पसली और पाँवों का चित्र खींचो; उसे दुःख के उस काँटों का मुकुट पहने राजा के विषय में बताओ; शोक और लहू के उस पराक्रमी सम्राट के विषय में बताओ, जिसने उपहास का वह लाल वस्त्र पहना जो फिर भी दुःख के साम्राज्य का बैंजनी राजवस्त्र था; उसे बताओ कि वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया। इस प्रकार, परमेश्वर की आशीष से, तुम अपना काम पूरा करोगे, और उसके लोगों में से एक को "शान्ति दोगे"। "मेरी प्रजा को शान्ति दो, तुम्हारा परमेश्वर यह कहता है।"

सुनार की आग

स्वर्ग के भण्डार में चाँदी की ऐसी कोई सिल्ली नहीं जो पृथ्वी पर भट्ठी में न रही हो और सात बार निर्मल की गई हो; ऐसा कोई रत्न नहीं जिसे ईश्वरीय जौहरी ने हर प्रकार की परख में न डाला हो; उद्धारकर्ता के मुकुट में सोने का ऐसा कोई कण नहीं जो सबसे तपते अंगारों के बीच पिघलाया न गया हो, ताकि उसकी मिलावट दूर हो जाए। परमेश्वर की हर सन्तान के लिये यह सार्वभौमिक नियम है। यदि तुम प्रभु के दास हो, तो तुम्हें ऐसा जाँचा जाना ही होगा "जैसा सोना जाँचा जाता है।"

हल्का हुआ दुःख

मुझे निश्चय है कि यदि हम यीशु की ओर अधिक ताकते, तो हमारे दुःख न तो इतने बड़े और न इतने कष्टदायक दिखाई देते। परीक्षा की सबसे अंधेरी रात में मसीह की ओर ताकना काले आकाश को निर्मल कर देगा। जब अंधकार मिस्र के अंधकार के समान घना प्रतीत हो, "ऐसा अंधकार कि टटोला जा सके," तब भी यीशु की ओर एक दृष्टि उजली बिजली की कौंध के समान सिद्ध होगी—उतनी ही तेज, पर उतनी क्षणिक नहीं। मार्ग में रहते हुए हमारे सारे परिश्रम के लिये उसकी एक झलक ही भली-भाँति पर्याप्त है। उसकी ओर ताकना सबसे सूने मार्ग को भी उजियाला कर देगा। उसकी वाणी से हर्षित होकर, उसके बल से दृढ़ होकर, हम अन्त तक करने और सहने के लिये तैयार हैं, ठीक जैसे उसने किया। हे थके और व्याकुल मसीहियो, "उसकी ओर दृष्टि करो, और ज्योति पाओ!"

ताड़ना में प्रेम

परमेश्वर के लोगों की प्रायः ताड़ना होती है, और प्रभु का हाथ उन पर भारी रहता है; तो भी उनकी ताड़नाओं में पिता की भलाई है, और उनके क्लेशों में अनन्त करुणा है। क्या तुमने कभी यह दृष्टान्त सुना है? एक चरवाहा था जिसके पास एक भेड़ थी, जिसे वह एक दूसरे और उससे अच्छे चरागाह में ले जाना चाहता था; उसने उसे पुकारा, पर वह न आई; उसने उसकी अगुवाई की, पर वह पीछे न चली; उसने उसे हाँका, पर वह अपनी ही मनमानी के पीछे चलती रही। अन्त में उसने मन में सोचा, "मैं यह करूँगा।" भेड़ के पास उसका एक छोटा मेम्ना था, और चरवाहे ने मेम्ने को गोद में उठा लिया और उसे ले चला, और तब भेड़ भी चली आई। और तुम्हारे साथ भी ऐसा ही है; परमेश्वर तुम्हें पुकारता रहा, और तुम नहीं आए; मसीह ने कहा, "आओ," और तुमने न चाहा; उसने क्लेश भेजा, और तुम फिर भी न आए; अन्त में उसने तुम्हारी सन्तान को उठा लिया, और तुम तुरन्त चले आए; तब तुम उद्धारकर्ता के पीछे हो लिए। देखो, चरवाहे की ओर से यह प्रेम का काम था। उसने तो केवल भेड़ को बचाने के लिये मेम्ने को उठाया था, और उद्धारकर्ता ने भी तुम्हारी सन्तान को केवल इसलिए स्वर्ग में उठा लिया कि वह तुम्हें भी वहाँ ले आए। अहा, धन्य हैं वे क्लेश, धन्य हैं वे हानियाँ, धन्य हैं वे मृत्युएँ, जिनका अन्त आत्मिक जीवन में होता है! तुम जानते हो कि यदि कोई मनुष्य अपने खेत से फसल काटना चाहता है, तो पहले वह उसे जोतता है। खेत शिकायत कर सकता है और कह सकता है, "मेरे मुँह पर ये घाव क्यों? यह कठोर उलट-पलट क्यों?" क्योंकि जब तक जुताई न हो ले तब तक बोआई नहीं हो सकती; पैने हल के फाल अच्छे बीज के लिये कूँड़ बनाते हैं। या प्रकृति से एक और चित्र लो: कोई मनुष्य लोहे के एक जंग लगे टुकड़े से एक चमकती तलवार बनाना चाहता है, जो किसी बड़े योद्धा के काम आए। वह क्या करता है? वह उसे आग में डालता है और पिघलाता है; वह उसका सारा धातु का मैल दूर करता है, और उसकी सारी मिलावट निकाल देता है; फिर वह उसे अपने हथौड़े से गढ़ता है; वह उसे निहाई पर बहुत कड़ी चोटें मारता है; वह उसे एक के बाद एक आग में तपाता है, यहाँ तक कि अन्त में वह एक अच्छी धार बनकर निकलती है जो युद्ध के दिन टूटेगी नहीं। परमेश्वर तुम्हारे साथ यही करता है—मैं तुमसे विनती करता हूँ कि परमेश्वर के प्रबन्ध की पुस्तक को गलत न पढ़ो; क्योंकि यदि तुम उसे ठीक-ठीक पढ़ो तो वह यों है—"मैं इस मनुष्य पर दया करूँगा, और इसी कारण मैंने इसे मारा और घायल किया है। मैं जिन जिनसे प्रेम रखता हूँ, उन सब को उलाहना और ताड़ना देता हूँ।" इसलिए आओ, हम यहोवा की ओर फिरें; क्योंकि उसी ने फाड़ा, और वही हमें चंगा भी करेगा; उसी ने मारा, और वही हमारे घावों पर पट्टी बाँधेगा।

क्रूस का दुःख सहना

"उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, उसने क्रूस का दुःख सहा।" वह आनन्द क्या था? अहा, यह ऐसा विचार है जो चट्टान को पिघला दे और लोहे के हृदय को भी हिला दे, कि जो आनन्द यीशु के आगे धरा था, वह मुख्य रूप से हमें बचाने का आनन्द था। मैं जानता हूँ कि वह अपने पिता की इच्छा पूरी करने का आनन्द भी था—अपने पिता के सिंहासन पर बैठने का—दुःख उठाने के द्वारा सिद्ध किए जाने का; परन्तु तो भी मैं जानता हूँ कि उद्धारकर्ता के क्रूस का दुःख सहने का यही महान और सबसे बड़ा कारण है—हमें बचाने का आनन्द। क्या तुम जानते हो कि दूसरों का भला करने का आनन्द क्या है? यदि नहीं जानते, तो मुझे तुम पर तरस आता है, क्योंकि जितने आनन्द परमेश्वर ने इस दीन जंगल में छोड़ रखे हैं, उनमें यह सबसे मधुर आनन्दों में से एक है। क्या तुम इसे जानते हो? क्या तुमने वह ईश्वरीय आनन्द कभी अनुभव नहीं किया, जब तुम्हारा सोना कंगालों को दिया गया, और तुम्हारी चाँदी प्रभु को अर्पित की गई, जब तुमने उसे भूखों को दे दिया—और तुम एक ओर जाकर बोले, "मुझे लगता है कि भूखों को खिलाना, नंगों को पहनाना, और अपने दीन, दुःख उठाते संगी मनुष्यों का भला करना ऐसा आनन्द है जिसके लिये जीना सार्थक है?" अब, यही वह आनन्द है जो मसीह ने अनुभव किया; यह हमें स्वर्ग की रोटी खिलाने का आनन्द था; दीन, नंगे पापियों को अपनी धार्मिकता पहनाने का आनन्द; बेघर प्राणों के लिये घर ढूँढ़ने का, हमें नरक के बन्दीगृह से छुड़ाने का, और हमें स्वर्ग के अनन्त सुख देने का आनन्द। उसके प्रेम की महानता को देखो, जिसने उसे इस प्रकार लज्जा की कुछ चिन्ता न करके क्रूस का दुःख सहने को प्रेरित किया, ताकि वह पापियों को बचाए। सचमुच मसीह का प्रेम "ज्ञान से परे है!" हे मसीहियो! यदि मसीह ने तुम्हें बचाने के आनन्द के लिये यह सब सहा, तो क्या तुम मसीह के लिये कुछ भी उठाने या सहने में लज्जित होगे? निश्चय उसके प्रति प्रेम, जिसने हमसे ऐसा प्रेम किया, हमें उसके लिये सब कुछ सहने को तैयार कर दे। क्या तुम्हें लगता है कि मसीह के पीछे चलने में तुम्हें हानि उठानी पड़ेगी—आदर, पद, धन की हानि? क्या तुम्हें लगता है कि मसीही होने के कारण तुम पर उपहास और निन्दा आती है? और क्या तुम इन छोटी-छोटी बातों के कारण पीछे हट जाओगे, जबकि वह पीछे नहीं हटा, वरन् उसने लज्जा की कुछ चिन्ता न करके, क्रूस का दुःख सहा? नहीं, परमेश्वर के अनुग्रह से हर मसीही यह कहे,—

"अब उसके नाम के प्रेम में, जो मेरा लाभ था उसे हानि गिनूँ; अपने पुराने घमण्ड को लज्जा कहूँ, और अपनी महिमा उसके क्रूस पर जड़ दूँ।"

"मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।" जीवित रहूँ तो उसका रहूँगा; मरूँ तो उसका रहूँगा। मैं उसके आदर के लिये जीऊँगा, और पूरी रीति से उसकी सेवा करूँगा। मैं अपना क्रूस उठाकर उसके पीछे हो लूँगा, और यदि मैं उसके नाम के लिये दुःख उठाने के योग्य गिना जाऊँ तो आनन्दित होऊँगा।

दुःख में मधुरता

क्या तुम्हें क्लेश के समयों पर पीछे दृष्टि डालते हुए ऐसा नहीं लगता कि परीक्षाओं के रहते हुए भी वे ऐसे समय थे जब तुम्हारे हृदय में असाधारण शान्ति और सुख था? एक मधुर आनन्द है जो दुःख के द्वारा हमारे पास आता है। दुःख का कड़वा दाखमधु सारे शरीर पर पुष्टिकारक औषधि के समान प्रभाव डालता है। समृद्धि का मीठा कटोरा प्रायः स्वाद में कड़वाहट छोड़ जाता है; परन्तु क्लेश का कड़वा कटोरा, जब वह पवित्र किया गया हो, सदा मुँह में मधुर स्वाद छोड़ जाता है। दुःख में आनन्द है। इस वीणा में भी संगीत है जिसके सब तार ढीले और टूटे हुए हैं। इस शोकभरी सारंगी से कुछ ऐसे स्वर हमें सुनाई देते हैं जो ऊँचे स्वर की तुरही से हमें कभी नहीं मिलते। दुःख के विलाप से हमें ऐसी कोमलता और मधुरता मिलती है जो आनन्द के गीत से कभी नहीं मिलती। क्या हमें इसका कारण यह नहीं मानना चाहिए कि अपने दुःखों में हम परमेश्वर के अधिक निकट रहते हैं? हमारा आनन्द उस लहर के समान है जो तट से टकराती है—वह हमें पृथ्वी पर फेंक देती है। परन्तु हमारे दुःख उस लौटती लहर के समान हैं जो हमें फिर से परमेश्वरत्व की महान गहराई में खींच ले जाती है। यदि वह लौटती लहर न होती, हमारी समृद्धि का वह उतार न होता, जो हमें फिर हमारे पिता और हमारे परमेश्वर के पास ले गया, तो हम तट पर ही फँसे और सूखे पड़े रह जाते। धन्य है क्लेश! वह हमें दया के सिंहासन तक ले आया है; उसने प्रार्थना को जीवन दिया है; प्रेम को सुलगाया है; विश्वास को दृढ़ किया है; मसीह को हमारे संग भट्ठी में ले आया है, और फिर हमें भट्ठी से निकालकर पहले से अधिक आनन्द के साथ मसीह के संग रहने को ले आया है।

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