अध्याय 4 · 15 मिनट का पठन
मसीही युद्ध
विजय का आनन्द
मसीही का रणक्षेत्र यहाँ है, परन्तु विजय-जुलूस ऊपर है। यह तलवार और भाले का देश है; वह विजय-माला और मुकुट का देश है। यह लहू में लथड़े हुए कपड़ों और युद्ध की धूल का देश है; वह तुरही के आनन्दमय नाद का देश है, श्वेत वस्त्र और जयजयकार का स्थान है। आह, जब स्वर्ग में सब धन्य जनों की विजय पूरी हो जाएगी; जब स्वयं मृत्यु, जो शत्रुओं में अन्तिम है, मार डाली जाएगी; जब शैतान बन्दी बनाकर मसीह के रथ के पहियों के पीछे घसीटा जाएगा; जब सब छुड़ाए हुओं के हृदयों से सारे जगत की विजय का महान जयघोष उठेगा—तब उन सब धन्य जनों को आनन्द की कैसी सिहरन अनुभव होगी! वह कैसा सुख का क्षण होगा!
विजय के आनन्द का कुछ अंश हम यहाँ भी जानते हैं। क्या तुमने कभी किसी बुरे मन से संघर्ष किया है, और अन्त में उस पर जय पाई है? क्या तुमने कभी किसी प्रबल परीक्षा से कड़ा मल्लयुद्ध किया है, और जाना है कि धन्यवाद के साथ यह गाना क्या होता है, "जब मैंने कहा, मेरा पाँव फिसलने लगा है, तब हे यहोवा, तेरी करुणा ने मुझे थाम लिया?" क्या तुमने, बनियन के मसीही नामक यात्री के समान, अपुल्लयोन से युद्ध किया है, और घोर संग्राम के बाद उसे भगा दिया है? तब तुमने स्वर्गीय विजय का पूर्वस्वाद चखा है—अन्तिम विजय कैसी होगी, उसकी बस एक झलक। परमेश्वर तुम्हें ये आंशिक विजयें इसलिए देता है कि वे भविष्य का बयाना हों। आगे बढ़ो और जय पाओ, और हर विजय को, चाहे वह पहले से कठिन हो और उसमें अधिक कड़ा संघर्ष करना पड़े, अपने लिये स्वर्ग की विजय की ज़मानत समझो।
संघर्ष में सुरक्षा
परमेश्वर अपने लोगों को इस रीति से सुरक्षित नहीं रखता कि उनके शत्रुओं को उन पर आक्रमण करने ही न दे, परन्तु इस रीति से कि जब वे संघर्ष में लगे हों, तब वह उन्हें सम्भाले रहता है। ऐसी दीवार के पीछे अपने आपको बचाए रखना, जिस पर कोई चढ़ न सके, कोई बड़ी बात नहीं; परन्तु वहाँ खड़े रहना जहाँ ओलों के समान घने तीर बरस रहे हों, जहाँ क्रोध से भाले भोंके जा रहे हों, जहाँ हर ओर तलवार के वार पड़ रहे हों, और उस सबके बीच अभेद्य, अजेय, अमर सिद्ध होना—यह ऐसा ईश्वरीय जीवन धारण करना है जिसे कोई मानवीय शक्ति जीत नहीं सकती। मसीही की बुलाहट ऐसी ही है। परमेश्वर हमें वहाँ रखेगा जहाँ हमें परखा जाना और परीक्षा में पड़ना ही होगा। यदि हम परखे न जाएँ, तो उसकी कोई महिमा नहीं जो हमें सुरक्षित रखता है; और यदि हमारी परीक्षा न हो, तो उसके अनुग्रह के प्रति कोई कृतज्ञता नहीं जो हमें परीक्षाओं से छुड़ाता है। प्रभु अपने पौधों को काँच-घर में नहीं रखता, जैसा कुछ माली करते हैं; नहीं, वह उन्हें खुली हवा में लगा देता है, और यदि पाला पड़नेवाला हो, तो वह कहता है, "अहा! परन्तु कोई पाला उन्हें मार नहीं सकता, और जाड़े की ठण्ड के कारण वे गर्मी में और भी हृष्ट-पुष्ट होंगे।" वह उन्हें न तो सूर्य की तपन से बचाता है, न रात की ठिठुरन से। इस संसार में हमें क्लेश होगा ही, और बहुत क्लेश होगा, क्योंकि हम बड़े क्लेश उठाकर ही राज्य के अधिकारी होते हैं। परमेश्वर अपने लोगों के लिये यह करता है: वह उन्हें क्लेश में सम्भाले रखता है, परीक्षा में सुरक्षित रखता है, और उनकी सब कठिनाइयों से उन्हें आनन्द के साथ निकाल लाता है। इसलिए, हे मसीही, तुम अपनी सुरक्षा में आनन्द कर सकते हो; परन्तु यह न सोचो कि तुम पर आक्रमण न होगा; तुम लबानोन से बहती हुई धारा के समान हो, जिसे अनेक झरनों से नीचे गिरना है, अनेक खुरदरी चट्टानों पर टूटना है, अनेक बड़े-बड़े पत्थरों से रुकना है, अनेक गिरे हुए पेड़ों से अटकना है; परन्तु तुम्हें परमेश्वर की अदम्य शक्ति के साथ सब कुछ बहाते हुए आगे बढ़ते जाना है, जब तक कि अन्त में तुम अपने पूर्ण विश्राम का स्थान न पा लो।
पाप से युद्ध
हे मसीही, पाप को कभी हाथ न लगाओ, जब तक तुम्हारे हाथ पर लोहे का दस्ताना न हो; मित्रता का कोमल दस्ताना पहनकर उसके पास कभी न जाओ; उसके विषय में कभी नरमी से बात न करो; परन्तु उसके हर रूप से सदा घृणा करो। यदि वह तुम्हारे पास छोटी लोमड़ी बनकर आए, तो उससे चौकस रहो, क्योंकि वह दाख की बारियों को बिगाड़ देगी। चाहे वह गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में तुम्हारी ओर झपटे कि किसको फाड़ खाए, चाहे वह लुभावने रूप में, मनोहर चाल-ढाल के साथ, झूठे प्रेम का दिखावा करके तुम्हें पाप में फँसाने के लिये आगे बढ़े—सावधान रहो; क्योंकि उसका आलिंगन मृत्यु है, और उसकी पकड़ विनाश। हर प्रकार के पाप से तुम्हें युद्ध करना है—होंठों के, हाथ के, हृदय के पाप से। चाहे वह लाभ से कितना ही सुनहरा किया गया हो; चाहे सदाचार की शोभा से कितना ही चमकाया गया हो; चाहे बड़े लोग उसकी कितनी ही प्रशंसा करें, या भीड़ में वह कितना ही लोकप्रिय हो, तुम्हें पाप से हर जगह, उसके सब छद्मवेशों में, हर समय और हर स्थान में घृणा करनी है। एक भी पाप को छोड़ा नहीं जाना है, परन्तु सब पापों के विरुद्ध पूर्ण और सम्पूर्ण विनाश का युद्ध घोषित किया जाना है।
कष्ट सहो
हे मसीह के योद्धा, तुम्हें कठिन लड़ाई लड़नी होगी। तुम्हारे लिये कोई कोमल बिछौना नहीं; रथ पर चढ़कर स्वर्ग जाना नहीं; ऊबड़-खाबड़ मार्ग पर चलना ही होगा; पहाड़ों पर चढ़ना होगा; नदियाँ पार करनी होंगी; अजगरों से लड़ना होगा; दानवों को मारना होगा; कठिनाइयों पर जय पानी होगी; और बड़े-बड़े क्लेश सहने होंगे। स्वर्ग का मार्ग समतल नहीं है; जो उस पर थोड़े ही पग चले हैं, उन्होंने भी उसे ऊबड़-खाबड़ और कठोर पाया है। तो भी वह सुखद है; वह संसार भर की सबसे आनन्ददायक यात्रा है; इसलिए नहीं कि वह अपने आप में सहज है, वह केवल संगति के कारण सुखद है; उन मधुर प्रतिज्ञाओं के कारण जिन पर हम टेक लगाते हैं; हमारे उस प्रियतम के कारण जो इस विशाल जंगल की सब ऊबड़-खाबड़ और कँटीली झाड़ियों में हमारे साथ चलता है। हे मसीही योद्धाओ, संघर्ष की आशा रखो: "जो दुःख रूपी अग्नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इससे यह समझकर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है।" जितना सच यह है कि तुम परमेश्वर की सन्तान हो, उतना ही सच यह है कि तुम्हारा उद्धारकर्ता तुम्हारे लिये यह मीरास छोड़ गया है—"संसार में तुम्हें क्लेश होता है।" तो भी स्मरण रखो कि यह "क्लेश" ही "राज्य में प्रवेश" का मार्ग है; इसलिए "मसीह यीशु के अच्छे योद्धा के समान दुःख उठाओ।"
विश्वास की लड़ाई
स्पार्टा के लोगों के समान, हर मसीही योद्धा ही जन्म लेता है। उस पर आक्रमण होना उसकी नियति है; आक्रमण करना उसका कर्तव्य है। उसके जीवन का एक भाग रक्षात्मक युद्ध में बीतेगा। उसे उस विश्वास के लिये पूरा यत्न करना होगा जो पवित्र लोगों को एक ही बार सौंपा गया था; उसे शैतान का सामना करना होगा; उसे उसकी सब युक्तियों के सामने खड़े रहना होगा; और सब कुछ पूरा करके भी स्थिर रहना होगा। तो भी यदि वह केवल बचाव ही करता रहे, तो वह बहुत ही दीन-हीन मसीही ठहरेगा; उसे ऐसा होना चाहिए जो अपने शत्रुओं पर चढ़ाई करे। उसे दाऊद के साथ यह कह सकना चाहिए, "मैं सेनाओं के यहोवा के नाम से तेरे पास आता हूँ, जो इस्राएली सेना का परमेश्वर है, और उसी को तूने ललकारा है।" उसका मल्लयुद्ध लहू और माँस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से है। उसके पास अपने युद्ध के लिये हथियार होने चाहिए—शारीरिक नहीं—परन्तु ऐसे जो "गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं।" उसे अच्छी तरह रक्षित गढ़ में रहने से सन्तुष्ट नहीं होना चाहिए, परन्तु शत्रु के किलों पर आक्रमण करने, और कनानियों को देश से निकाल देने के लिये निकल पड़ना चाहिए। परन्तु ऐसी अनेक रीतियाँ हैं जिनसे मसीही अपने योद्धा-स्वभाव को बहुत हद तक भूल सकता है। और, हाय! ऐसे थोड़े नहीं हैं, जो यदि मसीही हैं भी, तो निश्चय उस प्रतिदिन के युद्ध के विषय में बहुत ही कम जानते हैं जिसके लिये हमारे उद्धार के कर्ता अपने चेलों को बुलाता है। उनका धर्म नरम है; ऐसा धर्म जो विरोध से कतराता है; सरकण्डे-सा धर्म, जो हवा के हर झोंके के आगे झुक जाता है, और भक्ति के उस देवदार के समान नहीं, जो आँधी के बीच ऊँचा खड़ा रहता है, और तूफ़ान में विजय के आनन्द के मारे अपनी डालियाँ बजाता है, चाहे बाहर सारी पृथ्वी शस्त्र उठाए खड़ी हो। ऐसे मनुष्यों में वह विश्वास नहीं होता जो महिमा में सहभागी होता है। यद्यपि वे उद्धार पाए हुए हैं, तो भी उनके नाम उन शूरवीरों में लिखे हुए न पाए जाएँगे, जो हमारे महान सेनापति के लिये सब वस्तुओं की हानि उठाने को, और उसकी निन्दा अपने ऊपर लिए हुए छावनी के बाहर निकल चलने को तैयार हैं। आह, हम ऐसे अपमानजनक आराम से कभी सन्तुष्ट न हों, परन्तु सच्चे मन और वीरता से प्रभु की लड़ाइयाँ लड़ें। क्या मसीह के किसी अनुयायी के लिये प्रभु की सेवा करने का अमर सम्मान खो देना कोई छोटी बात है? कीर्ति पाने के लिये मनुष्य क्या कुछ नहीं करते? और क्या हम, जब वह हमारे द्वार पर पड़ी है, आलस्य से मुँह फेर लेंगे और अपनी महिमा को भूमि पर फेंक देंगे? आओ, हम उठें और काम में लग जाएँ, क्योंकि मसीह के विश्वासयोग्य सेवक का सम्मान खो देना कोई हल्की बात नहीं है।
स्थिरता
यदि तुममें अधिक विश्वास होता, तो तुम भट्ठी में भी उतने ही आनन्दित रहते जितने आनन्द के पर्वत पर; तुम अकाल में भी उतने ही प्रसन्न रहते जितने बहुतायत में; तुम प्रभु में तब भी आनन्द करते जब जैतून से तेल न निकलता, जैसे तब करते जब रसकुण्ड फटकर अपने किनारों से उमड़ रहा होता। यदि तुम्हें परमेश्वर पर अधिक भरोसा होता, तो तुम इतना ऊपर-नीचे न डोलते; और यदि तुम मसीह के अधिक निकट होते, तो तुममें इतनी डाँवाडोलता न होती। कभी-कभी तुम शैतान के क्रोध को ललकार सकते हो, हर आक्रमण का साहस से सामना कर सकते हो, और हर परीक्षा का विरोध कर सकते हो; परन्तु बहुत बार तुम भयभीत और दुविधा में रहते हो, और वीरता से सामना करने के बदले लड़ाई से भाग निकलने को तैयार रहते हो। परन्तु यदि तुम सदा उसे स्मरण रखो जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया, तो तुम सदा दृढ़ और स्थिर रह सकते हो। अपने स्वामी के निकट रहो, तो तुम इस प्रकार चंचल और अनिश्चित न रहोगे। हवा के साथ घूमनेवाले मुर्गे के समान होने से सावधान रहो। परमेश्वर से माँगो कि उसकी व्यवस्था तुम्हारे हृदय पर ऐसी लिखी जाए मानो पत्थर पर लिखी हो, न कि रेत पर। माँगो कि उसका अनुग्रह तुम्हारे पास नदी के समान आए, न कि उस नाले के समान जो सूख जाता है। माँगो कि तुम अपना चाल-चलन सदा पवित्र रखो; कि तुम्हारा मार्ग उस भोर-प्रकाश के समान हो जो ठहरता नहीं, परन्तु जिसकी चमक दोपहर तक बढ़ती जाती है। माँगो कि "परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, तुम्हें स्थिर और बलवन्त करे।"
विजयी छुटकारा
जब इस्राएली मिस्र देश से निकले, तब वे प्रभु के वचन के अनुसार अपनी सारी सम्पत्ति अपने साथ ले गए—"एक खुर तक न रह जाएगा।" इससे हमें क्या शिक्षा मिलती है? यही कि न केवल परमेश्वर के सब लोग उद्धार पाएँगे, परन्तु जो कुछ परमेश्वर के लोगों के पास कभी भी था, वह सब लौटा दिया जाएगा। जो कुछ याकूब कभी मिस्र में ले गया था, वह सब फिर से बाहर लाया जाएगा। क्या मैंने आदम में सिद्ध धार्मिकता खो दी? मुझे मसीह में सिद्ध धार्मिकता मिलेगी। क्या मैंने आदम में पृथ्वी पर का सुख खो दिया? परमेश्वर मुझे मसीह में यहाँ नीचे बहुत सुख देगा। क्या मैंने आदम में स्वर्ग खो दिया? मुझे मसीह में स्वर्ग मिलेगा; क्योंकि मसीह केवल उन लोगों को ढूँढ़ने और उनका उद्धार करने नहीं आया जो खो गए थे, परन्तु उसको भी जो खो गया था; अर्थात् लोगों के साथ-साथ सारी मीरास को भी; उनकी सारी सम्पत्ति को। केवल भेड़ों को ही नहीं, परन्तु उस अच्छी चराई को भी जिसे भेड़ों ने खो दिया था; केवल उड़ाऊ पुत्र को ही नहीं, परन्तु उड़ाऊ पुत्र की सारी जायदाद को भी। मिस्र से सब कुछ बाहर लाया गया; यूसुफ की हड्डियों तक को पीछे न छोड़ा गया। मिस्री यह नहीं कह सकते थे कि इस्राएलियों की सम्पत्ति का एक टुकड़ा भी उनके पास रह गया—न उनकी एक भी कठौती, न उनका एक भी पुराना वस्त्र। और जब मसीह सब वस्तुओं को जीतकर अपने अधीन कर लेगा, तब मसीही ने मिस्र के परिश्रम के कारण एक कण भी न खोया होगा, परन्तु वह यह कह सकेगा, "हे मृत्यु, तेरा डंक कहाँ रहा? हे कब्र, तेरी जय कहाँ रही?" हे नरक, तेरी विजय कहाँ है? तेरे पास अपनी जीत दिखाने के लिये न कोई झण्डा है, न कोई पताका; रणभूमि पर न कोई टोप छूटा है, न कोई शिरस्त्राण; एक भी ऐसी विजय-निशानी नहीं जिसे तू मसीह का उपहास करने के लिये नरक में खड़ा कर सके। उसने न केवल अपने लोगों को छुड़ाया है, परन्तु वे फहराते झण्डों के साथ निकले हैं। खड़े होकर उस प्रभु की प्रशंसा करो और उससे प्रेम करो, जो इस प्रकार अपने सब लोगों को छुड़ाता है। "हे यहोवा, तेरे काम क्या ही बड़े हैं! तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भाँति जानता हूँ।"
विजेता से भी बढ़कर
मसीही को अन्त में विजेता होना है। क्या तुम सोचते हो कि हम सदा पाप के मज़दूर और दास बने रहेंगे, स्वतन्त्रता के लिये आहें भरते रहेंगे, और तो भी उसके बन्धन से कभी छूट न सकेंगे? नहीं! शीघ्र ही वे ज़ंजीरें जो मुझे जकड़े हुए हैं, तोड़ दी जाएँगी, मेरे बन्दीगृह के द्वार खोल दिए जाएँगे, और मैं उस महिमामय नगर में, पवित्रता के निवास में, ऊपर चढ़ जाऊँगा, जहाँ मैं पाप से पूरी रीति से छूट जाऊँगा। हम जो प्रभु से प्रेम रखते हैं, सदा मेशेक में परदेशी होकर न रहेंगे। अभी धूल हमारे वस्त्रों को मैला कर सकती है, परन्तु वह दिन आ रहा है जब हम उठकर अपने ऊपर से धूल झाड़ देंगे, और अपने शोभायमान वस्त्र पहन लेंगे। यह सच है कि अभी हम कनान में इस्राएल के समान हैं। कनान शत्रुओं से भरा है; परन्तु कनानी निकाले जाएँगे, और निकाले ही जाने चाहिए, और दान से लेकर बेर्शेबा तक सारा देश प्रभु का होगा। हे मसीहियो, आनन्द करो! तुम शीघ्र ही सिद्ध होनेवाले हो, शीघ्र ही पाप से मुक्त, बिना किसी एक भी गलत झुकाव के, बिना एक भी बुरी अभिलाषा के। तुम शीघ्र ही ज्योति में रहनेवाले स्वर्गदूतों के समान शुद्ध होनेवाले हो; वरन् उससे भी बढ़कर, अपने स्वामी के वस्त्र पहने हुए, तुम्हें "उस पवित्र जन के समान पवित्र" होना है। क्या तुम इसकी कल्पना कर सकते हो? क्या यही स्वर्ग का सार, परमसुख का आनन्द-विभोर होना, महिमा की पहाड़ियों का गीत नहीं—कि तुम सिद्ध होनेवाले हो? कोई परीक्षा तुम तक पहुँच न सकेगी, और यदि परीक्षा तुम तक पहुँच भी जाती तो उससे तुम्हारी कोई हानि न होती; क्योंकि तुममें ऐसा कुछ भी न होगा जो किसी भी रीति से पाप को पनपा सके। वह ऐसा होगा जैसे कोई चिंगारी समुद्र पर गिरे; तुम्हारी पवित्रता उसे क्षण भर में बुझा देगी। हाँ, यीशु के लहू में धुले हुए, तुम शीघ्र ही सोने की सड़कों पर चलोगे, श्वेत वस्त्र पहने और श्वेत हृदय के साथ भी। आह, इस निकट की आशा में आनन्द करो, और इसे वर्तमान संघर्ष के लिये अपना बल बनने दो।
मसीही युद्ध
मसीही को जो लड़ाई लड़ने के लिये बुलाया गया है, वह कठिन लड़ाई है; ऐसी नहीं जिसे दरबारी सूरमा जीत लें; कोई ऐसी सहज झड़प नहीं जिसे वह जीत ले, जो किसी धूप भरे दिन रण में दौड़ा आया, सेना पर एक दृष्टि डाली, फिर अपने घोड़े की लगाम मोड़ी, और बड़ी नज़ाकत से अपने रेशमी तम्बू के द्वार पर उतर गया। यह ऐसा अभियान नहीं जिसे वह जीत ले, जो आज कच्चा रंगरूट होकर मूर्खता से यह कल्पना करता है कि एक सप्ताह की सेवा उसे महिमा का मुकुट दिला देगी। यह जीवन भर का युद्ध है; ऐसा संग्राम जिसमें विजयी होने के लिये हमारी सारी शक्ति लगेगी; ऐसी लड़ाई जिससे सबसे दृढ़ हृदय भी काँप उठे; ऐसा युद्ध जिससे सबसे वीर भी पीछे हट जाए, यदि उसे यह स्मरण न रहे कि यहोवा उसकी ओर है; तो वह किस से डरे? परमेश्वर उसके जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है: वह किसका भय खाए? यह लड़ाई बाहुबल या शारीरिक शक्ति की नहीं; यदि ऐसी होती, तो हम इसे शीघ्र जीत लेते; परन्तु यह इसी कारण और भी भयानक है कि यह मन का संघर्ष, हृदय का संग्राम, आत्मा का द्वन्द्व है—और बहुधा प्राण की घोर वेदना।
क्या तुम्हें आश्चर्य होता है कि मसीही को संघर्ष के लिये बुलाया गया है? परमेश्वर दृढ़ विश्वास कभी बिना अग्निमय परीक्षा के नहीं देता; वह कोई मज़बूत जहाज़ बनाकर उसे बहुत प्रचण्ड आँधियों में डाले बिना नहीं छोड़ता; वह तुम्हें पराक्रमी योद्धा नहीं बनाएगा, यदि उसकी इच्छा युद्ध में तुम्हारे कौशल को परखने की न हो। प्रभु की तलवार काम में लाई ही जानी चाहिए; स्वर्ग की तलवारों को उस दुष्ट के कवच पर चलाया ही जाना चाहिए, और तो भी वे टूटेंगी नहीं, क्योंकि वे सच्चे यरूशलेमी धातु की बनी हैं, जो कभी नहीं टूटती। यदि हम लड़ाई सही रीति से आरम्भ करें, तो हम जय पाएँगे। यदि हमने अपनी तलवारें क्रूस पर पैनी की हैं, तो हमें किसी भी बात का भय नहीं; क्योंकि चाहे हम कभी-कभी गिराए जाएँ और हताश हों, तो भी हम निश्चय अन्त में अपने सब विरोधियों को भगा देंगे, क्योंकि अब हम परमेश्वर की सन्तान हैं। तो फिर हम क्यों डरें? यदि परमेश्वर हमें आगे बढ़ने को कहे, तो कौन हमसे "रुको" कहेगा?
अध्याय 4 पूरा हुआ
मसीही युद्ध