सब कुछ अनुग्रह से ·आपके नाम

अध्याय 1 · 3 मिनट का पठन

एआई अनुवाद — मातृभाषी समीक्षा बाकी

आपके नाम

जिसने यह सन्देश बोला और लिखा है, वह बहुत निराश होगा यदि यह अनेकों को प्रभु यीशु तक न ले जाए। इसे परमेश्वर पवित्र आत्मा की सामर्थ्य पर बालक-सी निर्भरता में भेजा जा रहा है, कि यदि उसे भाए तो वह इसे लाखों लोगों के मन-फिराव में काम में लाए। निःसन्देह बहुत से दीन स्त्री-पुरुष यह छोटी-सी पुस्तक उठाएँगे, और प्रभु अनुग्रह लेकर उनके पास आएगा। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिये सबसे सीधी-सादी भाषा चुनी गई है, और बहुत-से घरेलू वाक्यांश काम में लाए गए हैं। परन्तु यदि धन और पद के लोग भी इस पुस्तक पर दृष्टि डालें, तो पवित्र आत्मा उन पर भी छाप छोड़ सकता है; क्योंकि जो बात अनपढ़ की समझ में आ जाती है, वह पढ़े-लिखे के लिये कुछ कम आकर्षक नहीं होती। हाय, कि कुछ ऐसे भी इसे पढ़ें जो प्राणों के महान जीतनेवाले बनेंगे!

कौन जानता है कि कितने लोग यहाँ जो पढ़ते हैं उसी से शान्ति तक अपना मार्ग पा लेंगे? हे प्रिय पाठक, तुम्हारे लिये इससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण प्रश्न यह है — क्या तुम उनमें से एक होगे?

एक मनुष्य ने मार्ग के किनारे एक फ़व्वारा लगवाया, और उसके पास एक छोटी-सी ज़ंजीर से एक कटोरा टाँग दिया। कुछ समय बाद उसे बताया गया कि कला के एक बड़े समीक्षक ने उसकी बनावट में बहुत दोष निकाले हैं। "पर," उसने कहा, "क्या बहुत-से प्यासे लोग उसमें से पीते हैं?" तब उन्होंने उसे बताया कि हज़ारों दीन लोग — पुरुष, स्त्रियाँ और बच्चे — इस फ़व्वारे पर अपनी प्यास बुझाते हैं; और वह मुस्कुराया और बोला कि उस समीक्षक की टिप्पणी से उसे कोई विशेष चिन्ता नहीं, बस उसे यही आशा है कि किसी उमस भरी गर्मी के दिन वह समीक्षक स्वयं वह कटोरा भरे, और तृप्त हो, और प्रभु के नाम की स्तुति करे।

यह रहा मेरा फ़व्वारा, और यह रहा मेरा कटोरा: जी चाहे तो दोष निकालिए; पर जीवन का जल पीजिए अवश्य। मुझे बस इसी की चिन्ता है। मैं किसी अत्यन्त दीन झाड़ू लगानेवाले या कूड़ा बीनने वाले के प्राण को आशीष देना अधिक चाहूँगा, बजाय इसके कि किसी राजकुमार को प्रसन्न करूँ और उसे परमेश्वर की ओर फिराने में चूक जाऊँ।

पाठक, क्या इन पृष्ठों को पढ़ने में तुम्हारा कोई गम्भीर अभिप्राय है? यदि हाँ, तो हम आरम्भ से ही एकमत हैं; परन्तु यहाँ जो लक्ष्य है वह तुम्हारे मसीह और स्वर्ग को पा लेने से कम कुछ नहीं। हाय, कि हम इसे साथ मिलकर ढूँढ़ें! मैं इस छोटी-सी पुस्तक को प्रार्थना के साथ समर्पित करके ऐसा ही करता हूँ। क्या तुम परमेश्वर की ओर दृष्टि उठाकर और उससे यह माँगकर मेरा साथ न दोगे कि जब तुम पढ़ो तब वह तुम्हें आशीष दे? परमेश्वर के प्रबन्ध ने ये पृष्ठ तुम्हारे मार्ग में रख दिए हैं, तुम्हारे पास इन्हें पढ़ने का थोड़ा-सा समय है, और तुम इन पर ध्यान देने को तैयार अनुभव करते हो। ये अच्छे चिह्न हैं। कौन जाने, कहीं तुम्हारे लिये आशीष का ठहराया हुआ समय आ ही न गया हो? जो भी हो, "जैसा पवित्र आत्मा कहता है, यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मन को कठोर न करो।"

विषय-सूची

सब कुछ अनुग्रह से Charles H. Spurgeon

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