विश्राम
Dwight L. Moody

उपदेश · 23 मिनट का पठन

विश्राम

चित्र: Dwight L. Moody Dwight L. Moody

पाठ

मत्ती 11:28

संक्षेप में

जब एक बार मूडी से पूछा गया कि मसीह की कौन-सी प्रतिज्ञा सबसे बहुमूल्य है, तो वे चुन न सके—एक पिता अपनी सबसे प्रिय सन्तान का नाम नहीं ले सकता—परन्तु वे बार-बार इसी पर लौट आते हैं, और इसके भीतर के दो विश्रामों पर: वह विश्राम जो हर आनेवाले को दिया जाता है, और वह विश्राम जो जूआ उठा लेनेवाला उसके बाद पाता है। वे एक बीमार बालक की खाट के पास समाप्त करते हैं, जो केवल थामे जाना चाहता था।

कुछ वर्ष पहले एक सज्जन मेरे पास आए और मुझसे पूछा कि मसीह ने जो सब प्रतिज्ञाएँ छोड़ीं, उनमें से मैं किसे सबसे बहुमूल्य समझता हूँ। मैंने उन पर विचार करने में कुछ समय लगाया, पर मैंने हार मान ली। मैंने पाया कि मैं इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकता। यह उस मनुष्य के समान है जिसके बहुत सन्तान हैं—वह नहीं बता सकता कि उसे कौन सबसे प्रिय है; वह उन सबसे प्रेम करता है। परन्तु यदि सबसे उत्तम नहीं, तो यह सब में से सबसे मधुर प्रतिज्ञाओं में से एक है: “हे सब परिश्रम करनेवालो और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरे पास आओ, और मैं तुम्हें विश्राम दूँगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो, और मुझसे सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूँ: और तुम अपने मनों के लिये विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हलका है।”

बहुत से लोग हैं जो सोचते हैं कि ये प्रतिज्ञाएँ पूरी नहीं होंगी। कुछ ऐसी हैं जिन्हें तुम पूरी होती देखते हो, और तुम विश्वास किए बिना नहीं रह सकते कि वे सच हैं। अब याद रखो कि सब प्रतिज्ञाएँ बिना शर्तों के नहीं दी गईं। कुछ शर्तों के साथ दी गई हैं, और कुछ बिना शर्तों के। उदाहरण के लिये, लिखा है, “यदि मैं अपने मन में अनर्थ की बात रखता, तो प्रभु मेरी न सुनता।” अब जब तक मैं किसी ज्ञात पाप को पालता रहूँ, तब तक मुझे प्रार्थना करने की आवश्यकता नहीं। वह मेरी न सुनेगा, उत्तर देना तो दूर की बात है। प्रभु चौरासीवें भजन में कहता है, “जो लोग खराई से चलते हैं, उनसे वह कोई अच्छी वस्तु रोक न रखेगा।” यदि मैं खराई से नहीं चल रहा, तो इस प्रतिज्ञा के अधीन मेरा कोई दावा नहीं। फिर, कुछ प्रतिज्ञाएँ किन्हीं विशेष व्यक्तियों या जातियों से की गई थीं। उदाहरण के लिये, परमेश्वर ने कहा कि वह अब्राहम के वंश को आकाश के तारों के समान बढ़ाएगा: परन्तु वह तुम्हारे या मेरे लिये प्रतिज्ञा नहीं है। कुछ प्रतिज्ञाएँ यहूदियों से की गई थीं, और अन्यजातियों पर लागू नहीं होतीं।

फिर बिना शर्तों की प्रतिज्ञाएँ हैं। उसने आदम और हव्वा से प्रतिज्ञा की कि संसार को एक उद्धारकर्ता मिलेगा, और पृथ्वी या अधोलोक में ऐसी कोई शक्ति न थी जो ठहराए हुए समय पर मसीह को आने से रोक सकती। जब मसीह ने संसार को छोड़ा, तब उसने कहा कि वह हमारे पास पवित्र आत्मा को भेजेगा। उसे गए हुए केवल दस ही दिन हुए थे कि पवित्र आत्मा आ गया। और इस प्रकार तुम पूरे पवित्रशास्त्र में से होकर जा सकते हो, और तुम पाओगे कि कुछ प्रतिज्ञाएँ शर्तों के साथ, और कुछ बिना शर्तों के हैं; और यदि हम शर्तों को पूरा नहीं करते, तो हम उनके पूरे होने की आशा नहीं कर सकते।

मेरा विश्वास है कि यह पृथ्वी पर के हर पुरुष और स्त्री का अनुभव होगा, मेरा विश्वास है कि हर एक को जीवन की सन्ध्या में यह गवाही देनी ही पड़ेगी कि यदि उन्होंने शर्त को पूरा किया है, तो प्रभु ने अपना वचन अक्षरशः पूरा किया है। पुराना इब्रानी वीर यहोशू इसका एक दृष्टान्त था। मिस्र के ईंट के भट्ठों में चालीस वर्ष, जंगल में चालीस वर्ष, और प्रतिज्ञा किए हुए देश में तीस वर्ष परमेश्वर को परखने के बाद, उसकी मरणासन्न गवाही यह थी: “जितनी अच्छी बातों की प्रतिज्ञा प्रभु ने की थी, उनमें से एक भी बात नहीं छूटी।” मेरा विश्वास है कि परमेश्वर की किसी एक प्रतिज्ञा को तोड़ने की अपेक्षा समुद्र को उलट देना सहज होगा। इसलिये जब हम अभी अपने सामने रखी हुई ऐसी प्रतिज्ञा पर आते हैं, तो मैं चाहता हूँ कि तुम यह मन में रखो कि इस पर कोई कटौती नहीं है। “हे सब परिश्रम करनेवालो और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरे पास आओ, और मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।”

शायद तुम कहो: “मुझे आशा है कि श्री मूडी इस पुराने पाठ पर उपदेश नहीं देंगे।” हाँ: मैं दूँगा। जब मैं कोई अलबम उठाता हूँ, तो यदि सब चित्र नए हों तो उसमें मेरी रुचि नहीं होती; परन्तु यदि मैं किन्हीं चेहरों को पहचानता हूँ, तो मैं तुरन्त रुक जाता हूँ। ऐसे ही इन पुराने, सुपरिचित पाठों के साथ है। इन्होंने पहले हमारी प्यास बुझाई है, पर जल अब भी उमड़ रहा है—हम उसे पीकर सुखा नहीं सकते।

यदि तुम मनुष्य के हृदय की गहराई तक जाँच करो, तो तुम एक अभाव पाओगे, और वह अभाव विश्राम है। आज संसार की पुकार यही है, “विश्राम कहाँ पाया जा सकता है?” रात को नाट्यशालाएँ और मनोरंजन के स्थान क्यों भरे रहते हैं? रविवार की सैर, मदिरालयों और वेश्यालयों का रहस्य क्या है? कुछ सोचते हैं कि वे उसे भोग-विलास में पाएँगे, दूसरे सोचते हैं कि वे उसे धन में पाएँगे, और अन्य साहित्य में। वे ढूँढ़ते हैं और कोई विश्राम नहीं पाते।

विश्राम कहाँ पाया जा सकता है?

यदि मैं किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ना चाहता जिसके पास विश्राम हो, तो मैं अति-धनवानों के बीच न जाता। वह मनुष्य जिसके विषय में हम लूका के बारहवें अध्याय में पढ़ते हैं, सोचता था कि वह अपनी सम्पत्ति बढ़ाकर विश्राम पाएगा, परन्तु वह निराश हुआ। “हे प्राण, चैन कर।” मैं यह कहने का साहस करता हूँ कि इस विस्तृत संसार में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं जिसने उस रीति से विश्राम पाने का प्रयत्न किया हो और उसे पाया हो।

धन उसे मोल नहीं ले सकता। बहुत से करोड़पति प्रसन्नता से करोड़ों दे देते यदि वे उसे वैसे ही मोल ले सकते जैसे वे अपने शेयर और हिस्से लेते हैं। परमेश्वर ने आत्मा को इस संसार के लिये कुछ अधिक ही बड़ा बनाया है। सारे संसार को उसमें लपेट दो, फिर भी स्थान बचा रहता है। धन कमाने में चिन्ता है, और उसे रखने में और भी अधिक चिन्ता।

न ही मैं भोग-विलास ढूँढ़नेवालों के बीच जाता। उन्हें कुछ घंटों का आनन्द मिलता है, परन्तु अगले दिन उसे सन्तुलित करने के लिये पर्याप्त शोक होता है। वे आज भोग का प्याला पी सकते हैं, परन्तु कल पीड़ा का प्याला आ जाता है।

विश्राम पाने के लिये मैं कभी राजनीतिज्ञों के बीच, या तथाकथित बड़े लोगों के बीच न जाता। संसद पृथ्वी पर वह अन्तिम स्थान है जहाँ मैं जाता। निचले सदन में वे सीनेट में जाना चाहते हैं; सीनेट में वे मन्त्रिमण्डल में जाना चाहते हैं; और फिर वे राष्ट्रपति-भवन में जाना चाहते हैं; और वहाँ कभी विश्राम नहीं पाया गया। न ही मैं विद्या के भवनों के बीच जाता। “बहुत अध्ययन करना देह को थका देना है।” मैं उच्च वर्ग के, “कुलीन” लोगों के बीच न जाता, क्योंकि वे निरन्तर फैशन के पीछे दौड़ते रहते हैं। क्या तुमने हमारी सड़कों पर उनके चिन्तित चेहरे नहीं देखे? और चेहरा आत्मा का सूचक है। उनमें कोई आशा भरी दृष्टि नहीं। भोग-विलास की उनकी उपासना दासता है। सुलैमान ने भोग-विलास को परखा, और कड़वी निराशा पाई, और युगों-युगों से यही कड़वी पुकार आती रही है, “सब कुछ व्यर्थ है।”

अब, पाप में कोई विश्राम नहीं। दुष्ट उसके विषय में कुछ नहीं जानते। पवित्रशास्त्र हमें बताता है कि दुष्ट “लहराते हुए समुद्र के समान हैं जो थम नहीं सकता।” शायद तुम शान्ति के समय समुद्र पर रहे हो, जब जल स्फटिक के समान स्वच्छ होता है, और ऐसा जान पड़ता है मानो समुद्र विश्राम में हो। परन्तु यदि तुम ध्यान से देखो तो तुम देखोगे कि लहरें आती रहती हैं, और वह शान्ति केवल सतह पर थी। मनुष्य, समुद्र के समान, विश्राम नहीं पाता। आदम के पतन के बाद से उसने कोई विश्राम नहीं पाया, और जब तक वह फिर परमेश्वर के पास न लौट आए, और मसीह की ज्योति उसके हृदय में न चमके, तब तक उसके लिये कोई विश्राम नहीं।

विश्राम संसार में नहीं पाया जा सकता, और परमेश्वर का धन्यवाद हो कि संसार उसे विश्वास करनेवाले हृदय से छीन नहीं सकता! पाप ही इस सारी अशान्ति का कारण है। इसी ने संसार में परिश्रम और कठिन श्रम और दुःख ला दिया।

अब कुछ सकारात्मक बात। मैं सफलतापूर्वक किसी ऐसे व्यक्ति के पास जाता जिसने यीशु का मधुर स्वर सुना है, और अपना बोझ क्रूस के पास उतार दिया है। वहाँ विश्राम है, मधुर विश्राम। हजारों इस धन्य सत्य की गवाही दे सकते हैं। वे सच्चाई से कह सकते हैं:

मैंने यीशु का स्वर सुना जो कहता है,

“मेरे पास आ और विश्राम पा।

हे थके हुए, लेट जा, लेट जा,

अपना सिर मेरी छाती पर रख।”

मैं यीशु के पास वैसे ही आया जैसा मैं था,

थका, शिथिल और उदास।

मैंने उसमें एक विश्राम-स्थान पाया,

और उसने मुझे आनन्दित किया है।

अपने सब लेखों में सन्त ऑगस्टीन के पास इससे मधुर कुछ नहीं: “हे परमेश्वर, तूने हमें अपने ही लिये बनाया है, और हमारा हृदय तब तक अशान्त रहता है जब तक वह तुझमें विश्राम न पाए।”

क्या तुम जानते हो कि चार हजार वर्ष तक किसी भविष्यद्वक्ता, याजक या कुलपिता ने कभी खड़े होकर ऐसा वचन नहीं कहा? मूसा के लिये ऐसा वचन कहना निन्दा होती। क्या तुम्हें लगता है कि जब वह प्रभु को यह मनाने के लिये तंग कर रहा था कि वह उसे प्रतिज्ञा किए हुए देश में जाने दे, तब उसके पास विश्राम था? क्या तुम्हें लगता है कि एलिय्याह ऐसा वचन कह सकता था, जब वह झाऊ के पेड़ के नीचे यह प्रार्थना कर रहा था कि वह मर जाए? और यह इस बात के सबसे प्रबल प्रमाणों में से एक है कि यीशु मसीह केवल मनुष्य ही नहीं, परन्तु परमेश्वर भी था। वह परमेश्वर-मनुष्य था, और यह स्वर्ग की घोषणा है, “मेरे पास आओ, और मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।” वह इसे अपने साथ स्वर्ग से नीचे ले आया।

अब, यदि यह वचन सच न होता, तो क्या तुम्हें नहीं लगता कि अब तक इसका पता चल गया होता? मैं इस पर उतना ही विश्वास करता हूँ जितना अपने अस्तित्व पर। क्यों? क्योंकि मैं इसे केवल पुस्तक में ही नहीं, परन्तु अपने ही अनुभव में पाता हूँ। मसीह की “मैं करूँगा” वाली बातें कभी नहीं टूटीं, और कभी टूट नहीं सकतीं।

मैं उस अनुच्छेद में “दूँगा” शब्द के लिये परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ। वह इसे बेचता नहीं। हममें से कुछ इतने कंगाल हैं कि यदि यह बिकाऊ भी होता तो हम इसे मोल न ले सकते। परमेश्वर का धन्यवाद, हम इसे मुफ़्त में पा सकते हैं।

मुझे ऐसा वचन पाना अच्छा लगता है, क्योंकि यह हम सब को समेट लेता है। “हे सब परिश्रम करनेवालो, मेरे पास आओ।” इसका अर्थ चुने हुए थोड़े से लोग नहीं—सुसंस्कृत महिलाएँ और सभ्य पुरुष। इसका अर्थ केवल भले लोग नहीं। यह सन्त और पापी दोनों पर लागू होता है। चिकित्सालय रोगियों के लिये होते हैं, स्वस्थ लोगों के लिये नहीं। क्या तुम्हें लगता है कि मसीह किसी के मुँह पर द्वार बन्द कर देगा, और कहेगा, “मेरा अर्थ सब से नहीं था; मेरा अर्थ केवल कुछ लोगों से था”? यदि तुम सन्त के रूप में नहीं आ सकते, तो पापी के रूप में आओ। बस आओ!

एक महिला ने एक बार मुझसे कहा कि वह इतनी कठोर-हृदय है कि वह आ नहीं सकती।

“तो,” मैंने कहा, “हे मेरी भली स्त्री, यह नहीं कहता कि केवल तुम कोमल-हृदय लोग आओ। काले हृदय, नीच हृदय, कठोर हृदय, कोमल हृदय, सब हृदय आओ। तेरे कठोर हृदय को उसके सिवा और कौन कोमल कर सकता है?”

हृदय जितना कठोर हो, तुम्हें आने की उतनी ही अधिक आवश्यकता है। यदि मेरी घड़ी रुक जाए तो मैं उसे दवा की दुकान या लोहार की दुकान पर नहीं ले जाता, परन्तु मरम्मत करवाने के लिये घड़ीसाज़ के पास ले जाता हूँ। इसी प्रकार यदि हृदय बिगड़ जाए तो उसे उसके रखवाले, मसीह के पास ले जाओ, ताकि वह ठीक कर दिया जाए। यदि तुम यह सिद्ध कर सको कि तुम पापी हो, तो तुम इस प्रतिज्ञा के अधिकारी हो। इससे जितना लाभ उठा सको उठाओ।

अब, बहुत से विश्वासी हैं जो सोचते हैं कि यह वचन केवल पापियों पर लागू होता है; यह उनके लिये भी ठीक वही वस्तु है। आज हम क्या देखते हैं? कलीसिया, मसीही लोग, सब चिन्ताओं और कष्टों से लदे हुए। “हे सब परिश्रम करनेवालो, मेरे पास आओ।” सब! मेरा विश्वास है कि इसमें वह मसीही भी सम्मिलित है जिसका हृदय किसी बड़े शोक से बोझिल है। प्रभु चाहता है कि तुम आओ।

मसीह बोझ उठानेवाला।

दूसरी जगह लिखा है, “अपनी सारी चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है।” यदि हम मसीही लोगों को यह समझा सकें, तो हमारी कलीसिया विजयी होती। परन्तु उन्होंने कभी यह खोज नहीं की। वे मानते हैं कि मसीह पाप उठानेवाला है, परन्तु वे यह नहीं समझते कि वह बोझ उठानेवाला भी है। “निश्चय उसने हमारे रोग सह लिये और हमारे दुःखों को उठा लिया।” परमेश्वर की हर सन्तान का यह विशेषाधिकार है कि वह निर्मल धूप में चले।

कुछ लोग अतीत में लौट जाते हैं और जितने कष्ट उन्हें कभी हुए, उन सबको उखाड़ लाते हैं, और फिर वे भविष्य में झाँकते हैं और आशा करते हैं कि उन्हें और भी अधिक कष्ट होगा, और वे सारे जीवन लड़खड़ाते और डगमगाते चलते हैं। जब भी वे तुमसे मिलते हैं, तुम्हें कँपकँपी छुड़ा देते हैं। वे रिरियाते स्वर में तुम्हें बताते हैं कि उन्होंने “कैसा कठिन समय झेला है।” मेरा विश्वास है कि वे उन्हें सुरक्षित रखते हैं, और हर अवसर पर उस ममी को बाहर निकाल लाते हैं। प्रभु कहता है, “अपनी सारी चिन्ता मुझ पर डाल दो। मैं तुम्हारे बोझ और तुम्हारे कष्ट उठाना चाहता हूँ।” हमें जिसकी आवश्यकता है वह एक आनन्दित कलीसिया है, और जब तक हमारे पास वह न हो तब तक हम संसार को नहीं जीतेंगे। हम इस उदास-चेहरे वाली मसीहियत को पृथ्वी के तल पर से हटाना चाहते हैं।

उन लोगों को लो जिन पर कोई बड़ा बोझ है, और उन्हें किसी सभा में आने दो। यदि तुम उनका ध्यान गायन या उपदेश पर लगा सको, तो वे कहेंगे, “ओह, कैसा भव्य था! मैं अपनी सारी चिन्ताएँ भूल गया।” और वे बस अपना गट्ठर बेंच के छोर पर रख देते हैं। परन्तु ज्योंही आशीर्वचन कहा जाता है, वे फिर उस गट्ठर को पकड़ लेते हैं। तुम हँसते हो, पर तुम स्वयं ऐसा ही करते हो। अपनी चिन्ता उस पर डाल दो।

कभी-कभी वे अपनी कोठरी में जाकर अपना द्वार बन्द कर लेते हैं, और वे इतने मग्न और ऊपर उठ जाते हैं कि अपना कष्ट भूल जाते हैं; परन्तु ज्योंही वे घुटनों से उठते हैं, वे उसे फिर उठा लेते हैं। अपना शोक अब छोड़ दो; अपनी सारी चिन्ता उस पर डाल दो। यदि तुम सन्त के रूप में मसीह के पास नहीं आ सकते, तो पापी के रूप में आओ। परन्तु यदि तुम किसी कष्ट या चिन्ता से भरे सन्त हो, तो उसे उसके पास ले आओ। सन्त और पापी, आओ! वह तुम सब को चाहता है। शैतान को तुम्हें यह विश्वास दिलाकर धोखा मत देने दो कि यदि तुम चाहो तो भी नहीं आ सकते। मसीह कहता है, “तुम मेरे पास आना नहीं चाहते।” आज्ञा के साथ ही सामर्थ्य भी आती है।

यूरोप में हमारी एक सभा में एक मनुष्य ने कहा कि वह आना तो चाहता है, पर वह जंजीरों से बँधा है, और आ नहीं सकता।

एक स्कॉटलैंडवासी ने उससे कहा, “अरे भाई, तू जंजीर समेत क्यों नहीं आ जाता?”

उसने कहा, “मैंने कभी इसके बारे में सोचा ही नहीं।”

क्या तुम चिड़चिड़े और झल्लाहटवाले हो, और क्या तुम घर में बातें अप्रिय बना देते हो? मेरे मित्र, मसीह के पास आओ और उससे तुम्हारी सहायता करने को कहो। पाप जो भी हो, उसे उसके पास ले आओ।

आने का अर्थ क्या है?

शायद तुम कहो, “श्री मूडी, मैं चाहता हूँ कि आप हमें बताएँ कि आने का अर्थ क्या है।” मैंने इसे समझाने की चेष्टा छोड़ दी है। मुझे सदा उस अश्वेत सेवक जैसा लगता है जिसने कहा था कि वह अध्याय को समझाने के बजाय गड़बड़ा देनेवाला है।

सबसे अच्छी परिभाषा बस यही है—आओ। जितना अधिक तुम इसे समझाने की चेष्टा करते हो, उतने ही अधिक तुम उलझ जाते हो। एक माता अपने बच्चे को जो लगभग पहली बात सिखाती है वह है देखना। वह शिशु को खिड़की के पास ले जाती है, और कहती है, “देख, बच्चे, पिता आ रहे हैं!” फिर वह बच्चे को आना सिखाती है। वह उसे किसी कुर्सी के सहारे टिका देती है, और कहती है, “आ!” और थोड़ी देर में वह नन्हा-सा प्राणी कुर्सी को माँ की ओर धकेलता है। यही आना है। इसे सीखने के लिये तुम्हें महाविद्यालय जाने की आवश्यकता नहीं। तुम्हें यह बताने के लिये किसी सेवक की आवश्यकता नहीं कि यह क्या है। अब क्या तुम मसीह के पास आओगे? उसने कहा, “जो मेरे पास आता है, उसे मैं कभी न निकालूँगा।”

जब हमारे पास ऐसी प्रतिज्ञा है, तो आओ हम उससे लिपटे रहें, और उसे कभी न छोड़ें। मसीह हमारा उपहास नहीं कर रहा। वह चाहता है कि हम अपने सब पापों और भटकनों समेत आएँ, और अपने आप को उसकी छाती पर डाल दें। परमेश्वर हमारे पाप चाहता है, केवल हमारे आँसू नहीं। वे अकेले कोई भला नहीं करते। और हम संकल्पों के द्वारा नहीं आ सकते। कार्य आवश्यक है। कलीसिया में हमने कितनी ही बार कहा है, “मैं नया पन्ना पलटूँगा,” परन्तु सोमवार का पन्ना शनिवार के पन्ने से बुरा होता है।

स्वर्ग का मार्ग साधारणतः सीधा है, परन्तु वह क्रूस का मार्ग है। उससे बचकर निकलने की चेष्टा मत करो। क्या मैं तुम्हें बताऊँ कि इस वचन में जिस “जूए” का उल्लेख है वह क्या है? वह वही क्रूस है जो मसीहियों को उठाना ही होता है। इस अन्धकारमय संसार में विश्राम पाने का एकमात्र उपाय मसीह के जूए को उठा लेना है। मैं नहीं जानता कि तुम्हारे विषय में इसमें क्या-क्या सम्मिलित हो सकता है, अपने मसीही कर्तव्यों को उठा लेने, मसीह को स्वीकार करने और उसके किसी शिष्य के योग्य आचरण करने के अतिरिक्त। शायद यह हो कि तुम कोई पारिवारिक वेदी खड़ी करो; या किसी परमेश्वर-रहित पति को बताओ कि तुमने परमेश्वर की सेवा करने का मन ठान लिया है; या अपने माता-पिता को बताओ कि तुम मसीही बनना चाहते हो। परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करो, और सुख और शान्ति और विश्राम आएँगे। आज्ञाकारिता का मार्ग सदा आशीष का मार्ग है।

एक रविवार दोपहर मैं शिकागो में स्त्रियों से भरे एक हॉल में उपदेश दे रहा था, और सभा समाप्त होने पर एक महिला मेरे पास आई और कहा कि वह मुझसे बात करना चाहती है। उसने कहा कि वह मसीह को ग्रहण करेगी, और कुछ बातचीत के बाद वह घर चली गई। मैं पूरे सप्ताह उसे ढूँढ़ता रहा, परन्तु अगले रविवार दोपहर तक मैंने उसे नहीं देखा। वह आई और ठीक मेरे सामने बैठ गई, और उसके चेहरे पर ऐसा उदास भाव था। ऐसा जान पड़ता था मानो वह प्रभु के आनन्द के बजाय दुःख में प्रवेश कर गई हो।

सभा समाप्त होने पर मैं उसके पास गया और पूछा कि कष्ट क्या है।

उसने कहा: “ओह, श्री मूडी, यह मेरे जीवन का सबसे दुःखमय सप्ताह रहा है।”

मैंने उससे पूछा कि क्या कोई ऐसा है जिससे उसका झगड़ा हुआ हो और जिसे वह क्षमा नहीं कर सकती।

उसने कहा: “नहीं, मेरी जानकारी में तो कोई नहीं।”

“अच्छा, क्या तुमने अपने मित्रों को बताया कि तुमने उद्धारकर्ता को पा लिया है?”

“सचमुच मैंने नहीं बताया, मैं तो पूरे सप्ताह उनसे इसे छिपाने का प्रयत्न करती रही हूँ।”

“तो,” मैंने कहा, “यही कारण है कि तुम्हें कोई शान्ति नहीं।”

वह मुकुट तो लेना चाहती थी, पर क्रूस नहीं चाहती थी। मेरे मित्रो, तुम्हें कलवरी के मार्ग से ही जाना होगा। यदि तुम कभी विश्राम पाओगे, तो तुम्हें उसे क्रूस के चरणों में ही पाना होगा।

“पर,” उसने कहा, “यदि मैं घर जाकर अपने अविश्वासी पति को बताऊँ कि मैंने मसीह को पा लिया है, तो मैं नहीं जानती कि वह क्या करेगा। मुझे लगता है कि वह मुझे घर से निकाल देगा।”

“तो,” मैंने कहा, “निकल जाना।”

वह यह वचन देकर चली गई कि वह उसे बताएगी, डरी हुई और पीली, परन्तु वह एक और दुःखमय सप्ताह नहीं चाहती थी। वह शान्ति पाने के लिये कृतसंकल्प थी।

अगली रात मैंने केवल पुरुषों के लिये एक व्याख्यान दिया, और हॉल में आठ हजार पुरुष और केवल एक अकेली स्त्री थी। जब मैं समाप्त करके पूछताछ-सभा में गया, तो मैंने इस महिला को उसके पति समेत पाया। उसने उससे मेरा परिचय कराया (वह एक चिकित्सक और बहुत प्रभावशाली व्यक्ति था) और कहा:

“वह मसीही बनना चाहते हैं।”

मैंने अपनी बाइबल ली और उसे मसीह के विषय में सब कुछ बताया, और उसने उसे ग्रहण कर लिया। सब समाप्त होने पर मैंने उससे कहा:

“यह तुम्हारी आशा से बिलकुल भिन्न निकला, है न?”

“हाँ,” उसने उत्तर दिया, “मैं अपने जीवन में कभी इतनी भयभीत नहीं हुई। मुझे आशा थी कि वह कुछ भयंकर करेंगे, पर यह तो इतनी अच्छी तरह निपट गया।”

उसने परमेश्वर का मार्ग अपनाया, और विश्राम पाया।

मैं युवतियों से कहना चाहता हूँ, शायद तुम्हारा कोई परमेश्वर-रहित पिता या माता हो, कोई सन्देही भाई हो, जो मदिरा के कारण नीचे गिरता जा रहा हो, और शायद तुम्हारे सिवा कोई और न हो जो उन तक पहुँच सके। कितनी ही बार किसी भक्त, शुद्ध युवती ने किसी अन्धकारमय घर में ज्योति पहुँचाई है! यदि माताएँ और बेटियाँ केवल वह वचन कहें, तो कितने ही घर सुसमाचार से जगमगा उठें।

पिछली बार जब श्री सैंकी और मैं एडिनबर्ग में थे, तब एक पिता, दो बहनें और एक भाई थे, जो प्रति प्रातः प्रातःकालीन समाचारपत्र लेकर मेरे उपदेश की धज्जियाँ उड़ाया करते थे। वे यह सोचकर क्रोधित होते थे कि एडिनबर्ग के लोग ऐसे उपदेश से बहके जा रहे हैं। एक दिन उनमें से एक बहन हॉल के पास से जा रही थी, और उसने सोचा कि वह भीतर झाँककर देखे कि वहाँ किस प्रकार के लोग जाते हैं। संयोग से वह एक भक्त महिला के पास बैठ गई, जिसने उससे कहा:

“मुझे आशा है कि आपकी इस कार्य में रुचि है।”

उसने अपना सिर झटककर कहा: “सचमुच मेरी नहीं है। मैंने जो कुछ देखा और सुना है, उस सब से मुझे घृणा है।”

“तो,” महिला ने कहा, “शायद आप पूर्वाग्रह लेकर आई हैं।”

“हाँ, और इस सभा ने उसमें से कुछ भी दूर नहीं किया, बल्कि उसे और बढ़ा ही दिया है।”

“मुझे तो इनसे बहुत भला मिला है।”

“यहाँ मेरे लिये कुछ नहीं। मैं नहीं समझती कि कोई बुद्धिमान व्यक्ति इसमें रुचि कैसे ले सकता है।”

लम्बी कहानी को छोटा करूँ तो, उसने महिला से लौट आने का वचन ले लिया। जब सभा समाप्त हुई, तब पूर्वाग्रह में से थोड़ा-सा ही मिटा था। उसने अगले दिन फिर आने का वचन दिया, और फिर उसने तीन-चार सभाओं में और भाग लिया, और उसकी काफ़ी रुचि हो गई। उसने अपने परिवार से कुछ न कहा, जब तक कि अन्ततः वह बोझ बहुत भारी न हो गया, और उसने उन्हें बता दिया। वे उस पर हँसे, और उसे अपने उपहास का पात्र बना लिया।

एक दिन दोनों बहनें साथ थीं, और दूसरी ने कहा: “अब बता, उन सभाओं में तुझे ऐसा क्या मिला जो पहले तेरे पास न था?”

“मेरे पास एक ऐसी शान्ति है जो मैं पहले कभी न जानती थी। मैं परमेश्वर से, अपने आप से और सारे संसार से मेल में हूँ।” क्या तुम्हारा कभी अपने पड़ोसियों से, अपने ही परिवार में, कोई छोटा-सा युद्ध हुआ है? और उसने कहा: “मुझमें आत्मसंयम है। तू जानती है, बहन, यदि मेरे मन-फिराव से पहले तूने वे आधी भी नीच बातें कही होतीं जो तूने उसके बाद कही हैं, तो मैं क्रुद्ध होकर पलटकर उत्तर देती, परन्तु यदि तुझे ठीक से याद हो, तो मन-फिराव के बाद से मैंने एक बार भी पलटकर उत्तर नहीं दिया।”

बहन ने कहा: “तेरे पास निश्चय ही कुछ ऐसा है जो मेरे पास नहीं।” दूसरी ने उससे कहा कि यह उसके लिये भी है, और वह अपनी बहन को सभाओं में ले आई, जहाँ उसने शान्ति पाई।

मार्था और मरियम के समान, उनका एक भाई था, परन्तु वह एडिनबर्ग विश्वविद्यालय का सदस्य था। वह मन-फिराव करे? वह इन सभाओं में जाए? यह स्त्रियों के लिये तो ठीक हो, पर उसके लिये नहीं। एक रात वे घर आईं और उसे बताया कि उसका अपना ही एक साथी, विश्वविद्यालय का सदस्य, खड़ा होकर मसीह को स्वीकार कर चुका है, और जब वह बैठ गया तो उसका भाई उठकर स्वीकार करने लगा; और वैसे ही तीसरे ने भी।

जब उस युवक ने यह सुना, तो उसने कहा: “क्या तुम मुझे यह बताना चाहती हो कि उसने मन-फिराव कर लिया है?”

“हाँ।”

“तो,” उसने कहा, “इसमें अवश्य कुछ न कुछ बात है।”

उसने अपनी टोपी और कोट पहना, और अपने मित्र ब्लैक से मिलने चला गया। ब्लैक उसे सभाओं में ले आया, और उसने मन-फिराव कर लिया।

हम आगे ग्लासगो गए, और वहाँ छह सप्ताह भी न हुए थे कि यह समाचार आया कि वह युवक बीमार पड़कर मर गया। जब वह मर रहा था, तब उसने अपने पिता को अपनी खाट के पास बुलाया और कहा:

“क्या यह अच्छी बात नहीं थी कि मेरी बहनें उन सभाओं में गईं? हे पिता, क्या आप स्वर्ग में मुझसे न मिलेंगे?”

“हाँ, मेरे पुत्र, मुझे बहुत आनन्द है कि तू मसीही है; तुझे खोने में मुझे यही एकमात्र सान्त्वना है। मैं मसीही बनूँगा, और तुझसे फिर मिलूँगा।”

मैं यह किसी बहन को घर जाकर उद्धार का सन्देश ले जाने के लिये उत्साहित करने को कहता हूँ। हो सकता है कि तुम्हारा भाई कुछ ही महीनों में उठा लिया जाए। मेरे प्रिय मित्रो, क्या हम गम्भीर दिनों में नहीं जी रहे? क्या यह हमारे लिये समय नहीं कि हम अपने मित्रों को परमेश्वर के राज्य में ले आएँ? आ, पत्नी, क्या तू अपने पति को न बताएगी? आ, बहन, क्या तू अपने भाई को न बताएगी? क्या तू अभी अपना क्रूस न उठाएगी? यदि तू ऐसा करेगी, तो परमेश्वर की आशीष तेरी आत्मा पर बनी रहेगी।

मैं एक बार वेल्स में था, और एक महिला ने मुझे यह छोटी-सी कहानी सुनाई: उसकी एक अंग्रेज़ मित्र, जो एक माता थी, का एक बालक बीमार था। पहले तो उन्होंने समझा कि कोई खतरा नहीं, जब तक कि एक दिन चिकित्सक ने आकर कहा कि लक्षण बहुत प्रतिकूल हैं। वह माता को कमरे से बाहर ले गया, और उसे बताया कि बालक जीवित नहीं रह सकता। यह वज्रपात के समान आया। चिकित्सक के जाने के बाद माता उस कमरे में गई जहाँ बालक लेटा था और बालक से बातें करने और उसका मन बहलाने लगी।

“प्यारे, क्या तू जानता है कि तू शीघ्र ही स्वर्ग का संगीत सुनेगा? तू ऐसा मधुर गीत सुनेगा जैसा तूने पृथ्वी पर कभी नहीं सुना। तू उन्हें मूसा और मेम्ने का गीत गाते सुनेगा। तुझे संगीत बहुत प्रिय है। क्या वह मधुर न होगा, प्यारे?”

और उस छोटे, थके हुए, बीमार बालक ने अपना सिर फेर लिया, और कहा, “ओह माँ, मैं इतना थका और इतना बीमार हूँ कि मुझे लगता है वह सारा संगीत सुनने से मैं और भी बुरा हो जाऊँगा।”

“अच्छा,” माता ने कहा, “तू शीघ्र ही यीशु को देखेगा, तू सेराफ़ और करूब देखेगा और सब गलियाँ सोने से जड़ी हुई”; और वह स्वर्ग का वैसा ही वर्णन करती रही जैसा वह प्रकाशितवाक्य में वर्णित है।

उस छोटे थके हुए बालक ने फिर अपना सिर फेर लिया, और कहा, “ओह माँ, मैं इतना थका हूँ कि मुझे लगता है वे सब सुन्दर वस्तुएँ देखने से मैं और भी बुरा हो जाऊँगा!”

अन्त में माता ने बालक को अपनी बाहों में उठा लिया, और उसे अपने प्रेममय हृदय से लगा लिया। और उस छोटे बीमार बालक ने फुसफुसाकर कहा:

“ओह माँ, यही तो मुझे चाहिए। यदि यीशु केवल मुझे अपनी बाहों में उठा लें और मुझे विश्राम करने दें!”

प्रिय मित्र, क्या तुम पाप से थके और श्रान्त नहीं हो? क्या तुम जीवन की उथल-पुथल से श्रान्त नहीं हो? तुम परमेश्वर के पुत्र की छाती पर विश्राम पा सकते हो।

इस उपदेश में पवित्रशास्त्र मत्ती 11:28

सार्वजनिक डोमेन। मूल पाठ का स्रोत: मूल संस्करण.

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