परमेश्वर की बाट जोहना ·निरन्तर

अध्याय 32 · 5 मिनट का पठन

एआई अनुवाद — मातृभाषी समीक्षा बाकी

निरन्तर

तीसवाँ दिन। परमेश्वर की बाट जोहना: निरन्तर।

'इसलिए तू अपने परमेश्वर की ओर फिर; कृपा और न्याय के काम करता रह, और अपने परमेश्वर की बाट निरन्तर जोहता रह।'—होशे 12:6.

निरन्तरता जीवन के अनिवार्य तत्त्वों में से एक है। किसी मनुष्य में उसे एक घड़ी के लिये भी तोड़ दो, और वह जाती रहती है, वह मर जाता है। अटूट और अविराम निरन्तरता स्वस्थ मसीही जीवन के लिये अनिवार्य है। परमेश्वर चाहता है कि मैं वही बनूँ, और परमेश्वर मुझे वही बनाने की बाट जोहता है; मैं वही बनना चाहता हूँ, और मैं उसकी बाट जोहता हूँ कि वह मुझे हर पल वही बनाए जिसकी वह मुझसे आशा रखता है, और जो उसकी दृष्टि में भाता है। यदि परमेश्वर की बाट जोहना सच्ची भक्ति का सार है, तो पूर्ण निर्भरता की आत्मा का बनाए रखा जाना निरन्तर होना चाहिए। परमेश्वर की यह बुलाहट, 'अपने परमेश्वर की बाट निरन्तर जोहता रह,' ग्रहण की और मानी जानी चाहिए। विशेष रूप से बाट जोहने के समय हो सकते हैं: परन्तु प्राण की प्रवृत्ति और आदत तो अटल और अखण्ड रीति से वहाँ बनी रहनी चाहिए।

यह निरन्तर बाट जोहना सचमुच एक आवश्यकता है। जो दुर्बल मसीही जीवन से ही सन्तुष्ट हैं, उन्हें यह एक विलासिता जान पड़ती है, कोई ऐसी बात जो अच्छा मसीही होने के लिये अनिवार्य नहीं। परन्तु जो सब यह प्रार्थना करते हैं, 'हे प्रभु! मुझे उतना ही पवित्र कर जितना क्षमा पाया हुआ पापी किया जा सकता है! मुझे अपने इतने निकट रख जितना निकट रहना मेरे लिये सम्भव है! मुझे अपने प्रेम से उतना ही भर दे जितना तू भरने को तैयार है!' वे तुरन्त अनुभव करते हैं कि यह ऐसी बात है जो अवश्य मिलनी चाहिए। वे अनुभव करते हैं कि प्रभु की निरन्तर बाट जोहे बिना न तो परमेश्वर के साथ अटूट संगति हो सकती है, न मसीह में पूर्ण रीति से बने रहना, न पाप पर जय और सेवा के लिये तत्परता बनी रह सकती है।

यह निरन्तर बाट जोहना सम्भव भी है। बहुतेरे सोचते हैं कि जीवन के कामकाज के रहते यह हो ही नहीं सकता। वे सदा इसका विचार नहीं कर सकते। जब वे चाहते भी हैं, तब भी भूल जाते हैं।

वे यह नहीं समझते कि यह हृदय की बात है, और हृदय जिस बात से भरा रहता है, वही उसे घेरे रहती है, चाहे विचार और कहीं लगे हों। किसी पिता का हृदय दूर पड़ी हुई रोगी पत्नी या रोगी बालक के लिये गहरे प्रेम और लालसा से निरन्तर भरा रह सकता है, यद्यपि अनिवार्य कामकाज उसके सारे विचारों को माँग लेता हो। जब हृदय ने यह सीख लिया कि वह एक पल के लिये भी अपने आप को थामने या कोई भलाई उपजाने में कितना बिलकुल असमर्थ है, जब उसने यह समझ लिया कि परमेश्वर उसे कितने निश्चय और सत्य के साथ थामे रहेगा, जब उसने अपने आप से निराश होकर परमेश्वर की उस प्रतिज्ञा को ग्रहण कर लिया कि वह उसके लिये असम्भव को कर देगा, तब वह परमेश्वर में विश्राम करना सीख लेता है, और कामकाज और परीक्षाओं के बीच भी निरन्तर बाट जोह सकता है।

यह बाट जोहना एक प्रतिज्ञा है। परमेश्वर की आज्ञाएँ सामर्थ्य देनेवाली हैं: सुसमाचार के आदेश सब प्रतिज्ञाएँ हैं, इस बात का प्रगटीकरण कि हमारा परमेश्वर हमारे लिये क्या करेगा। जब तू पहले पहल परमेश्वर की बाट जोहना आरम्भ करता है, तब बार-बार व्यवधान और बार-बार असफलता होती है। परन्तु विश्वास कर कि परमेश्वर प्रेम से तेरी रखवाली कर रहा है और गुप्त रीति से उसमें तुझे बलवन्त कर रहा है। कभी-कभी ऐसा जान पड़ता है कि बाट जोहना समय गँवाना ही है, परन्तु ऐसा नहीं है। बाट जोहना, अन्धकार में भी, एक अनजानी उन्नति है, क्योंकि तेरा काम परमेश्वर से है, और वही तुझ में काम कर रहा है। जो परमेश्वर तुझे अपनी बाट जोहने को बुलाता है, वही तेरे दुर्बल यत्नों को देखता है, और उसे तुझ में उपजाता है। तेरा आत्मिक जीवन किसी भी रीति से तेरा अपना काम नहीं: जैसे तूने उसे आरम्भ नहीं किया, वैसे ही तू उसे चला भी नहीं सकता; परमेश्वर का आत्मा ही है जिसने तुझ में परमेश्वर की बाट जोहने का काम आरम्भ किया है; वही तुझे निरन्तर बाट जोहने के योग्य बनाएगा।

निरन्तर बाट जोहने का उत्तर और प्रतिफल स्वयं परमेश्वर का निरन्तर काम करना होगा। हम अपने मनन के अन्त पर आ रहे हैं। काश कि तू और मैं एक पाठ सीख लें: परमेश्वर को निरन्तर काम करना ही होगा, परमेश्वर निरन्तर काम करेगा। वह सदा निरन्तर काम करता ही रहता है, परन्तु अविश्वास उसके अनुभव में बाधा डालता है। पर वही, जो अपने आत्मा के द्वारा तुझे निरन्तर बाट जोहना सिखाता है, तुझे इसका अनुभव भी कराएगा कि सनातन परमेश्वर होने के नाते उसका काम कभी नहीं रुकता। परमेश्वर के प्रेम में और जीवन में और काम में कोई टूट, कोई व्यवधान नहीं हो सकता।

इस बात में परमेश्वर को इस विचार से सीमित न कर कि उससे क्या आशा की जा सकती है। अपनी आँखें इसी एक सत्य पर गड़ा दे: अपने स्वभाव ही से परमेश्वर, जो जीवन का एकमात्र दाता है, और कुछ कर ही नहीं सकता, केवल यह कि हर पल अपनी सन्तान में काम करे। केवल एक ही पक्ष पर दृष्टि न रख: 'यदि मैं निरन्तर बाट जोहूँगा, तो परमेश्वर निरन्तर काम करेगा।' नहीं, दूसरे पक्ष को देख। परमेश्वर को पहले रख और कह, 'परमेश्वर निरन्तर काम करता है, इसलिये मैं हर पल उसकी बाट निरन्तर जोह सकता हूँ।' तब तक समय ले जब तक तेरे उस परमेश्वर का दर्शन, जो एक पल भी रुके बिना निरन्तर काम करता है, तेरे सारे अस्तित्व को भर न दे। तब तेरा निरन्तर बाट जोहना आप से आप हो जाएगा। भरोसे और आनन्द से भरी हुई प्राण की पवित्र आदत यही होगी, 'मैं तेरी ही बाट जोहता रहता हूँ दिन भर।' पवित्र आत्मा तुझे सदा बाट जोहते रहने में बनाए रखेगा।

'हे मेरे मन, परमेश्वर के सामने चुपचाप रह!'

विषय-सूची

परमेश्वर की बाट जोहना Andrew Murray

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