अध्याय 3 · 24 मिनट का पठन
मसीह हमारा चंगा करनेवाला
"उसने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया।" मत्ती 8:17। "यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक-सा है।" इब्रानियों 13:8।
1. दिव्य चंगाई क्या नहीं है।
हम पहले इसके नकारात्मक पक्ष पर दृष्टि डालेंगे। जहाँ कहीं भलाई पाई जाती है, वहाँ शीघ्र ही उसका एक खोटा रूप भी प्रकट हो जाता है। हर मूल्यवान सिक्के की सदा नकल बनाई जाती है, और वह महान ठग इस विषय में भी काम करता रहा है। इस अनमोल सत्य के साथ त्रुटि से सावधान रहना विशेष रूप से आवश्यक है।
- दिव्य चंगाई चिकित्सीय चंगाई नहीं है। यह हमें औषधियों के द्वारा नहीं मिलती, न ही यह उपचारों और साधनों पर परमेश्वर की कोई विशेष आशीष है। यह स्वयं परमेश्वर के सर्वशक्तिमान हाथ का प्रत्यक्ष सामर्थ्य है। "उसने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया," और वह मनुष्य की सहायता के बिना उन्हें उठाने में समर्थ है। जहाँ तक उन लोगों की बात है जो अपनी देह को पूरी तरह प्रभु पर सौंपने के लिए तैयार नहीं हैं, उनके विषय में उपचारों के उपयोग के विरुद्ध हमें कुछ नहीं कहना। उनके लिए यह उचित ही है कि वे उस सारी सहायता का उपयोग करें जो प्रकृति और विज्ञान दे सकते हैं, और हम प्रसन्नता से मानते हैं कि उनके उपचारों का, जहाँ तक वे जाते हैं, कुछ मूल्य है। एक पीड़ित संसार पर उमड़नेवाली बुराई की लहरों को रोकने के मनुष्य के प्रयासों में कुछ सामर्थ्य है। परन्तु सब प्रयासों में एक ऐसा बिंदु आता है जब हमें कहना पड़ता है, "यहीं तक तू आएगा, इससे आगे नहीं।" फिर भी किसी को भी इन मानवीय सहायताओं को उतावली में तब तक नहीं छोड़ देना चाहिए जब तक उसे कोई उत्तम सहायता न मिल जाए। जब तक वे अपने प्राकृतिक जीवन से किसी ऊँची और दृढ़तर वस्तु के लिए मसीह पर पूरी तरह भरोसा करने की ओर अगुवाई न पाएँ, तब तक उनके लिए प्राकृतिक उपचारों पर टिके रहना ही अच्छा है। उन्हें यह निश्चित होना चाहिए कि परमेश्वर का वचन रोग के लिए चंगाई को उतनी ही स्पष्टता से प्रस्तुत करता है जितनी स्पष्टता से वह पाप की क्षमा को करता है।
- दिव्य चंगाई तात्त्विक (मेटाफ़िज़िकल) चंगाई नहीं है। यह विवेकवाद की कोई प्रणाली नहीं है, जो आज संसार में इतने रूप धारण कर रही है, गिरगिट के समान, जो अपने चारों ओर की पत्तियों का रंग ले लेता है, उन लोगों के वर्ग के अनुसार जिनके संपर्क में वह आती है। जिसे आमतौर पर मन-उपचार या क्रिश्चियन साइंस कहा जाता है, वह तात्त्विक चंगाई के सबसे परिचित रूपों में से एक है। शिकागो में इसे जीवन का विज्ञान कहते हैं, परन्तु व्यावहारिक रूप से यह एक ही वस्तु है। यह ज्ञान और बुद्धि, अर्थात मनुष्य के मन को परमेश्वर के स्थान पर रख देती है। यह उपचारों के द्वारा नहीं, परन्तु मानसिक बल के द्वारा चंगाई है। यह झूठे दर्शन और संशयवादी धर्मविज्ञान की एक प्रणाली है; एक ऐसा दर्शन जो बेतुका और भरमानेवाला है, और एक ऐसा धर्मविज्ञान जो ईश्वर-निषेधी और अविश्वासी है। इसका आधार यह है कि भौतिक संसार वास्तविक नहीं है। जो तथ्य प्रतीत होते हैं वे केवल विचार हैं। यह कलीसिया मेरे मस्तिष्क में केवल एक गोलाकार विचार है, और संयोगवश तुम्हारे मस्तिष्क में भी वही विचार है, और इसलिए हम इसे कलीसिया कहते हैं; परन्तु यह कलीसिया है नहीं, यह केवल एक विचार है। जैसे तुम मेरे सामने वहाँ बैठे हो, तुम वहाँ किसी मूर्त रूप में हो नहीं, परन्तु मेरे मस्तिष्क में तुम्हारा एक विचार है, जो वहाँ बैठा है। न ही मैं यहाँ किसी शारीरिक अर्थ में हूँ, परन्तु मैं भी तुम्हारे मन में टिका हुआ एक विचार हूँ। इस प्रकार इस त्रुटि के शिक्षक आगे यह कहते हैं कि कोई देह है ही नहीं। इसलिए रोग वास्तविक नहीं है, क्योंकि उसके काम करने का कोई आधार नहीं। यदि तुम इस दर्शन को स्वीकार करो, तो सब रोगों की तह ही निकल जाएगी। यदि बीमारी का विचार तुम्हारे मन से चला गया, तो कष्ट चला गया। यह इस सिद्धांत के नियमों का एक स्पष्ट, निष्कपट कथन है। इसने इस देश में लाखों लोगों को मोह लिया है, और इससे लाखों डॉलर कमाए गए हैं। यह ह्यूम का पुराना दर्शन ही फिर से जिलाया गया है। ये शिक्षक बाइबल के साथ भी वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा देह के साथ। यह विचारों की एक सुंदर प्रणाली है, परन्तु वे केवल विचार हैं। उत्पत्ति सृष्टि की एक सुंदर कहानी है, परन्तु यह केवल एक रूपक है। नया नियम यीशु मसीह का एक मनोहर चित्र प्रस्तुत करता है, परन्तु उसका भी तथ्य में कोई आधार नहीं। ये वही पुरानी त्रुटियाँ हैं जिनके विरुद्ध प्रेरित यूहन्ना ने कड़े शब्दों में लिखा था। "हर एक आत्मा जो यह अंगीकार नहीं करती कि यीशु मसीह शरीर में आया है, वह परमेश्वर की ओर से नहीं; और यही मसीह-विरोधी की आत्मा है, जिसके विषय में तुमने सुना है कि वह आनेवाली है, और अब भी संसार में है।" यह दर्शन इस बात का इन्कार करता है कि यीशु मसीह शरीर में आया है। यह मसीह की देह की वास्तविकता का इन्कार करता है; इसलिए अपनी शिक्षा में यह मसीह-विरोधी है। यह दिव्य चंगाई नहीं है। इन दोनों के बीच कोई संगति नहीं। यह उस विज्ञान के भ्रमों में से एक है जिसे झूठे नाम से विज्ञान कहा जाता है। यह मसीहियत को जड़ से खोखला कर देगी। हम में से कुछ ने इसे इतना तुच्छ जाना है कि शायद हमने दूसरों को इससे उतना नहीं बचाया जितना चाहिए था। हमने अनुभव किया कि यह इतनी मूर्खतापूर्ण है कि इसमें कोई हानि हो ही नहीं सकती; परन्तु हम भूल जाते हैं कि मानव-स्वभाव कितना मूर्ख है। प्रेरित हमें बताता है कि इस संसार के बुद्धिमान परमेश्वर के सम्मुख मूर्ख हैं। "वह बुद्धिमानों को उन्हीं की चतुराई में फँसा देता है।" न्यू इंग्लैंड के विषय में यह कितना सच्चाई से पूरा हुआ है! महाविद्यालयों की उस भूमि ने, अमेरिकी बुद्धि और संस्कृति के उस केंद्र ने, इस विकराल वस्तु को जन्म दिया है। यह सबसे घातक अविश्वास है। यह प्रायश्चित्त को पूरी तरह मिटा देती है, क्योंकि जब पाप ही नहीं तो छुटकारा भी नहीं हो सकता। मैं ऐसे झूठ से चंगा होने के बजाय जीवन भर हर प्रकार की शारीरिक यातना के साथ बीमार रहना अधिक पसंद करूँगा।
- दिव्य चंगाई चुम्बकीय चंगाई नहीं है। यह कोई रहस्यमय धारा नहीं जो एक देह से दूसरी देह में बहती हो। यह एक गंभीर प्रश्न है कि प्रकृति में प्राणि-चुम्बकत्व जैसी कोई शक्ति है भी या नहीं, और जो यह प्रतीत होती है वह वास्तव में अपने ही भीतर के कारणों से किसी व्यक्ति के मन पर पड़नेवाला प्रभाव तो नहीं। चाहे ऐसा हो या न हो, ऐसे प्रभाव का विचार अथवा दावा उन सब के द्वारा अस्वीकार किया जाता है जो दिव्य चंगाई के सच्चे सेवक के रूप में काम करते हैं। ऐसा व्यक्ति यह चाहता है कि पीड़ित की चेतना से अपना व्यक्तित्व हटा रखे, और रोगी की दृष्टि केवल मसीह पर टिकाए रखे, कि वह अपनी चंगाई उसी से ग्रहण करे। इस काम में जितना डर इस बात का होना चाहिए कि हम स्वयं ध्यान का विषय बन जाएँ, उतना और किसी बात का नहीं। यह जीवित मसीह के साथ, और केवल उसी के साथ, हृदय से हृदय और आत्मा से आत्मा का संपर्क है, जो परिणाम को पूरा करेगा।
- दिव्य चंगाई प्रेतवाद नहीं है। इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि शैतान का मनुष्य की देह पर एक निश्चित अधिकार है। निश्चय ही उसके पास यह होना चाहिए, यदि वह उसे रोग से ग्रस्त कर सकता है। और यदि उसमें देह पर बीमारी लादने की सामर्थ्य है, तो मुझे कोई कारण नहीं दिखता कि यदि वह चाहे तो पिछला द्वार खोलकर बाहर निकल जाए और देह को भला-चंगा छोड़ दे। यदि शैतान में मसीह के समय में एक स्त्री को अठारह वर्ष तक बाँध रखने की सामर्थ्य थी, तो उतनी ही शीघ्रता से उसे खोल देने की सामर्थ्य भी थी। यदि उस समय बीमारी उसका काम थी, तो अब भी निश्चय वही होगी। यदि वह कुछ लोगों को उनके बलवान और स्वस्थ होने पर अधिक अच्छी तरह प्रयोग में ला सकता है, तो वैसा ही करेगा। और कुछ को वह दुर्बलता और पीड़ा में अधिक अच्छी तरह प्रयोग में लाता है। हम बिना ध्यान दिए नहीं रह सकते कि कैसी विचित्र दृढ़ता से हर युग के लोगों ने दुष्ट शक्ति की शरण ली है, चाहे उन्हें शांत करने के लिए या उनकी सहायता पाने के लिए। यह प्रथा आरंभिक जातियों जितनी ही पुरानी है। हम इसे वन में रहनेवाले जंगली अमेरिकी आदिवासी में और उतने ही असभ्य अफ़्रीकी में पाते हैं। विशेष रूप से ये जंगली मंत्र-तंत्र बीमारी की चंगाई के लिए किए जाते रहे हैं, और कहा जाता है कि उनमें से बहुतों से वास्तव में रोग दूर हो गया। इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रेतवादी घटनाओं की एक बड़ी संख्या वास्तविक है। वे दुष्टात्माओं की वास्तविकता का पक्का प्रमाण देती हैं, और वे परमेश्वर की उस भयानक पूर्वचेतावनी के प्रमाण हैं कि अंतिम दिनों में दुष्टात्माओं की आत्माएँ पृथ्वी पर चमत्कार करती फिरेंगी, कि यदि संभव हो तो वे चुने हुओं को भी भरमा दें। परमेश्वर का सच्चा बालक उनसे नहीं भरमाया जाएगा। यदि तुम इस विषय में धोखा खाते हो, तो सावधान! हो सकता है तुम परमेश्वर के सच्चे बालक न हो। मैं तुम्हें तुम्हारे सच्चे कल्याण की दुहाई देकर चेतावनी देता हूँ, इस लुभावने फंदे से बचो। तुम्हें इसमें कुछ वास्तविकता मिलेगी, परन्तु यह एक खतरनाक शक्ति है और यह तुम्हारे मसीही विश्वास को अपनी भयंकर लहरों के नीचे डुबा देगी।
- दिव्य चंगाई प्रार्थना-उपचार नहीं है। बहुत से मसीही हैं जो बड़ी लालसा से चाहते हैं कि दूसरे उनके लिए प्रार्थना करें। यदि वे एक निश्चित मात्रा में प्रार्थना जुटा सकें तो उन पर तदनुसार भलाई का एक प्रभाव आ पड़ेगा, और यदि संसार के सब मसीही उनके लिए प्रार्थना करें, तो वे चंगे होने की आशा करेंगे। एक सामान्य धारणा है कि प्रार्थना में बहुत सामर्थ्य है, जिसका प्रभाव अवश्य होगा यदि उसे एकत्र किया जा सके। और यदि पर्याप्त मात्रा में इकट्ठी हो जाए, तो वह पहाड़ों को हटा देगी और शायद परमेश्वर की हठीली इच्छा को भी तोड़ सकेगी। व्यावहारिक रूप से यही वह बात है जो यह दृष्टिकोण सिखाता है। प्रार्थना में तब तक कोई सामर्थ्य नहीं जब तक वह स्वयं परमेश्वर की प्रार्थना न हो। जब तक तुम जीवित चंगा करनेवाले मसीह के संपर्क में नहीं हो, तब तक कोई चंगाई नहीं। मसीह की चंगाई उसके अपने दिव्य स्पर्श से होती है। यह प्रार्थना-उपचार नहीं, परन्तु मसीह-चंगाई है।
- दिव्य चंगाई विश्वास-उपचार नहीं है। यह शब्द एक गलत धारणा देता है, और मुझे प्रसन्नता है कि इसे त्याग दिया गया है। एक खतरा यह है कि मनुष्य का मन विश्वास पर इतना केंद्रित हो जाए कि वह आत्मा और परमेश्वर के बीच में आ खड़ा हो। तुम अपने विश्वास से अपने को चंगा करने की जितनी आशा कर सकते हो, उतनी ही मानो उस चेन-पंप के हत्थे से पानी पीने की, जिससे तुम ताजा पानी निकालते हो, या उस थाली को खाने की जिस पर तुम्हारा भोजन लाया जाता है। यदि तुम अपने विश्वास को ही ताकते रहोगे, तो विश्वास ही खो दोगे। सदा परमेश्वर ही चंगा करता है। हम जितना कम प्रार्थनाओं, विश्वास, या उन साधनों पर ध्यान देते हैं जिनके द्वारा यह आती है, उतना ही अधिक संभव है कि हम आशीष पाएँ।
- दिव्य चंगाई इच्छाशक्ति नहीं है। कोई भी व्यक्ति अपनी ही असमर्थता से जूझकर उसे बल में नहीं बदल सकता। यह यांत्रिकी का एक नियम है कि कोई पिंड स्वयं को नहीं हिला सकता। ऐसा करने के लिए उसके बाहर कोई शक्ति होनी चाहिए। आर्किमिडीज़ ने कहा था कि यदि उसे संसार के बाहर कोई शक्ति मिल जाए जिस पर वह टिककर काम करे, तो वह संसार को उठा सकता है; परन्तु वह उसे भीतर से नहीं कर सकता था। यदि मनुष्य गिरा हुआ है, तो उसकी अपनी आत्मा की सारी शक्ति उसे उठाने में काम नहीं आएगी। कठिनाई प्रायः उसकी इच्छा में होती है। वह अपने को थामकर स्वयं को उठाने का प्रयत्न करता है। उसे उठाने के लिए उसके बाहर कोई शक्ति होनी चाहिए, नहीं तो वह गिरा ही रहेगा। इच्छा को मसीह के आगे सौंप देना चाहिए, और तब वह हम में इच्छा करने और अपनी सुइच्छा के अनुसार काम करने का काम करेगा। तब पहला विचार यही होगा—कि हमें जिस सामर्थ्य की आवश्यकता है उसे उससे पाना कितना सहज, कितना मनोहर रूप से सरल है। यह तो बस परमेश्वर के हाथ को छूना और उसके जीवन से बल पाना है।
- दिव्य चंगाई परमेश्वर की इच्छा का उल्लंघन नहीं है। यह ऐसा कहना नहीं है, "मैं यह आशीष लूँगा, चाहे वह चाहे या न चाहे।" यह तो यह देखना है कि इसे पाने में हमारे लिए उसका सर्वोच्च उद्देश्य पूरा होता है। हम शारीरिक चंगाई के लिए तब तक भरोसा नहीं करेंगे जब तक हम यह न जान लें कि यह हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा है, तब हम कह सकते हैं, "मैं इसे चाहता हूँ, क्योंकि वह इसे चाहता है।"
- न ही यह शारीरिक अमरता है, परन्तु यह तब तक जीवन की पूर्णता है जब तक जीवन का काम पूरा न हो जाए, और तब मसीह के आगमन पर हमारा संपूर्ण पुनरुत्थान-जीवन पाना है।
- दिव्य चंगाई कोई धनलोलुप चिकित्सा-पेशा नहीं है जिसे लोग किसी व्यापार या पेशे की भाँति इसलिए अपनाते हों कि उससे कुछ कमा लें। यदि तुम्हें इसमें एक क्षण के लिए भी धनलोलुपता का विचार दिखाई दे, तो उसे अस्वीकार करो और फटकार दो। परमेश्वर के सब वरदान कलवरी के लहू के समान सेंत-मेंत हैं।
II. दिव्य चंगाई क्या है।
- यह परमेश्वर का अलौकिक दिव्य सामर्थ्य है जो मानव देह में डाला जाता है, उनके बल को नवीन करता है और पीड़ित मानव ढाँचों की दुर्बलता के स्थान पर परमेश्वर का जीवन और सामर्थ्य रख देता है। यह दिव्य सर्वशक्तिमत्ता का एक स्पर्श है, और इससे कम कुछ नहीं। यह वही सामर्थ्य है जिसने याईर की बेटी को मरे हुओं में से जिलाया या तुम्हारी आत्मा को परिवर्तित किया। क्या यह अचरज की बात है कि परमेश्वर ऐसा सामर्थ्य दिखाए? एक खोई हुई आत्मा को नया जन्म देने के लिए मरे हुओं को जिलाने से अधिक सामर्थ्य चाहिए। परमेश्वर उन लोगों के रूपों को, जो वर्षों से कब्र में पड़े हैं, कब्र को तोड़कर बाहर ला सकता है, और यह उससे कम सामर्थ्य में जितना उसे एक आत्मा को छुड़ाने और अपने संतों को अंत तक दृढ़ बनाए रखने में लगता है।
- यह मनुष्य के तर्क पर, या चंगे किए गए लोगों की गवाही पर नहीं, परन्तु केवल परमेश्वर के वचन पर आधारित है। सारे विश्व से एकत्र की गई सारी गवाही भी ऐसे सिद्धांत की सच्चाई को स्थापित नहीं कर सकती, यदि वह पवित्रशास्त्र में न पाई जाए। मानव बुद्धि के सारे अनुमान व्यर्थ हैं यदि उनकी जड़ वहाँ न हो। यह सत्य परमेश्वर के अनन्त वचन पर टिका है, नहीं तो यह मात्र मानवीय है।
- यह सदा परमेश्वर की इच्छा को पहचानता है, और गहरी अधीनता में उसके आगे झुक जाता है। जो मसीही दिव्य चंगाई की बाट जोहता है, वह तब तक ठहरेगा जब तक परमेश्वर की इच्छा न जान ले, और उसे जानकर वह बिना डगमगाए उसका दावा करेगा। यदि कोई पीड़ित यह विश्वास कर ले कि जो काम परमेश्वर ने उसे सौंपा था वह पूरा हो चुका है, और अब वह घर बुलाया जा रहा है, तो उसे उस इच्छा में सहमत हो जाना चाहिए और उन धन्य भुजाओं में लेटकर विश्राम करना चाहिए। यदि यह विश्वास तुम में से किसी को आ गया है, प्रिय मित्रो, तो यदि परमेश्वर ने ही तुम्हें इसमें ले लिया है, तो मैं तुम्हें इससे झकझोरने का साहस न करूँगा। मेरा एकमात्र विचार यही होगा कि तुम्हारे अंतिम तकिये को मधुरता से सहलाऊँ, और तुम्हें शांति से जाने दूँ। परन्तु यदि तुम समझते हो कि तुम्हारा काम पूरा नहीं हुआ, यदि तुम्हारे पास परमेश्वर से यह स्पष्ट प्रकाश नहीं कि ऐसा है, यदि तुम्हारे हृदय में जीवित रहकर आनन्द के साथ अपनी दौड़ पूरी करने की एक सच्ची और आज्ञाकारी अभिलाषा है, तो जिसने लगभग दो हजार वर्ष पहले कहा था, "क्या इस स्त्री को इस बंधन से छुड़ाया जाना उचित न था?" वह आज भी वैसा ही है जैसा तब था। वह तुम्हारी दुर्बलता के बीच तुमसे कह रहा है, "क्या तुझे भला-चंगा नहीं किया जाना चाहिए?" निश्चय ही यह पर्याप्त होना चाहिए।
तौभी हो सकता है कि तुम्हारी बीमारी एक अनुशासन के रूप में आने दी गई हो। हो सकता है तुम उस पूरी गवाही या सेवा का कुछ भाग रोक रहे हो जिसके लिए मसीह ने तुम्हें बुलाया है। तब मुझे भय है कि जब तक वह कठिनाई ठीक न कर ली जाए तब तक तुम चंगे नहीं हो सकते। हो सकता है तुम किसी गलत और टेढ़ी मुद्रा में हो। संभवतः वह तब तक तुम्हें बहाल न करेगा जब तक वह ठीक न हो जाए। हो सकता है उसने तुम्हें किसी सेवा के लिए बुलाया हो और तुम पीछे हट रहे हो। जब तक तुम इस विषय में समर्पण न कर दो, तब तक देह के लिए कोई चंगाई नहीं होगी। परमेश्वर के प्यारे बालकों पर आने दी गई बीमारियों में सैकड़ों अर्थ छिपे हैं, और वह तुम्हें दिखाएगा कि उसका स्वर तुम्हारे लिए क्या है। "क्योंकि परमेश्वर तो एक बार, वरन दो बार भी बोलता है, तौभी मनुष्य उसे नहीं समझता। स्वप्न में, रात के दर्शन में, जब बिछौने पर ऊँघते हुए मनुष्य पर गहरी नींद आती है, तब वह मनुष्यों के कान खोलता है, और उनकी शिक्षा पर मुहर लगाता है, कि वह मनुष्य को उसके संकल्प से रोक रखे, और मनुष्य से घमंड को दूर करे। वह उसके प्राण को गड्ढे से, और उसके जीवन को तलवार से नाश होने से बचा रखता है। वह अपने बिछौने पर पीड़ा से ताड़ना भी पाता है, और उसकी हड्डियों में लगातार व्यथा बनी रहती है; यहाँ तक कि उसका प्राण रोटी से, और उसका मन स्वादिष्ट भोजन से घृणा करने लगता है। उसका मांस ऐसा घुल जाता है कि दिखाई नहीं देता; और उसकी हड्डियाँ जो दिखती न थीं, अब निकल आती हैं। वरन उसका प्राण कब्र के, और उसका जीवन नाश करनेवालों के निकट पहुँच जाता है। यदि उसके संग कोई दूत, अर्थात हजार में से एक व्याख्या करनेवाला हो, जो मनुष्य को उसकी धार्मिकता बताए, तब वह उस पर अनुग्रह करके कहता है, 'उसे गड्ढे में गिरने से बचा ले: मुझे छुड़ौती मिल गई है। उसका मांस बालक के मांस से भी अधिक ताजा हो जाएगा; वह अपनी जवानी के दिनों को फिर से पाएगा।" परमेश्वर की बहुत सी ताड़नाओं का यही अर्थ है। बहुत कुछ है जो वह मनुष्यों की देह के साथ अपने व्यवहार के द्वारा उनसे कहना चाहता है, और दिव्य चंगाई पाने से पहले, और उसे पाने के बाद बनाए रखने के लिए, उसका पूरा अर्थ आत्मा में उतारना आवश्यक है। यह कोई ढला हुआ पेटेंट नहीं जो सदा एक ही ढंग से अटल रूप से काम करे; इसके लिए परमेश्वर के साथ अति निकट चाल आवश्यक है। जब आत्मा इस प्रकार उसके साथ मेल और आज्ञाकारिता में चलती है, तब परमेश्वर का जीवन देह में पूरी तरह बह सकता है। परमेश्वर का धन्यवाद हो, हम इसे और शैतान को, दोनों को एक साथ नहीं रख सकते।
- दिव्य चंगाई यीशु मसीह के छुटकारे के काम का एक भाग है। यह उन बातों में से एक है जिन्हें वह लाने आया था। इसकी नींव का पत्थर कलवरी का क्रूस है। "वही तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है।" "उसे मृत्यु में उतरने से बचा ले, मुझे छुड़ौती मिल गई है।" निश्चय वह चंगाई केवल उसी से आती है। "उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो गए।" यह मसीह का छुटकारे का काम है। हे प्रिय, तुम्हारा इस पर अधिकार है, क्योंकि उसकी देह ने क्रूस पर तुम्हारी देह का सारा दायित्व उठा लिया। इसे ले लो और उससे और अधिक प्रेम करो, क्योंकि यह उसके कोड़ों से आई। मुझे उस शब्द को एकवचन में सोचना अच्छा लगता है—कोड़ा। यूनानी का यही अर्थ है। उसकी देह इतनी पीटी गई कि वह सारी एक ही कोड़े की धारी बन गई। उसके मांस का एक इंच भी ऐसा न था जो हमारे लिए लहूलुहान न हुआ हो। तुम्हारी देह का एक रेशा भी ऐसा नहीं जिसे छुड़ाने के लिए मसीह ने वहाँ दुख न सहा हो।
- दिव्य चंगाई हमें यीशु मसीह के जीवन के द्वारा मिलती है, जो अपनी ही देह में मरे हुओं में से जी उठा। वह अपनी जीवित देह के साथ स्वर्ग पर चढ़ गया है। तुम आज सुबह उसे वहाँ देख सकते हो, जीवित मांस और हड्डियों के हाथों और पाँवों के साथ, जिन्हें तुम छू सकते हो। वह आज भी तुम्हारे साथ मेज पर बैठकर भोजन कर सकता है जैसे पहले करता था। वह कोई धुंधली, बादल-सी आकृति नहीं, परन्तु उसके पास मांस और हड्डियाँ हैं जैसे हमारे पास हैं। यही हमारा मसीह है, एक जीवित शारीरिक मसीह, और वह अपना शारीरिक जीवन तुम्हारे साथ बाँटने में समर्थ और इच्छुक है, अपना बल तुम में फूँककर। हम अपनी देह में मसीह के जीवन के द्वारा चंगे किए जाते हैं। यह उसके साथ एक कोमल मिलन है; दांपत्य एकता के बंधन से भी अधिक निकट; इतना निकट कि उसकी शिराओं का वही जीवन तुम्हारी शिराओं में उंडेल दिया जाता है। यही दिव्य चंगाई है।
- यह पवित्र आत्मा का काम है, जो देह को जिलाता है। जब मसीह पृथ्वी पर था और रोगियों को चंगा करता था, तो यह उस ईश्वरत्व के द्वारा नहीं था जो उसकी मनुष्यता में बसा था। उसने कहा, "यदि मैं परमेश्वर के आत्मा के द्वारा दुष्टात्माओं को निकालता हूँ, तो परमेश्वर का राज्य तुम्हारे पास आ पहुँचा है।" यीशु ने पवित्र आत्मा के द्वारा चंगा किया। "प्रभु का आत्मा मुझ पर है, इसलिए कि उसने मुझे कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिए अभिषेक किया है, कि टूटे मन वालों को चंगा करूँ।" तब पवित्र आत्मा ही वह साधन है जिसके द्वारा यह महान सामर्थ्य किया जाता है। विशेष रूप से हमें इन दिनों में उसके काम को देखने की आशा करनी चाहिए, क्योंकि ये उसी की व्यवस्था के दिन हैं, वे दिन जिनके विषय में भविष्यवाणी हुई है कि चिन्ह और अद्भुत काम होंगे। शिमशोन ने अपना बल कैसे पाया? जब प्रभु का आत्मा उस पर उतर आया। तब वह मंदिर को उनके देवता दागोन समेत खंडहर में गिरा सका। परमेश्वर का आत्मा उसके मांस में था। सो जब यह विद्युत की आग हमारे ढाँचे में दौड़ती है, तो वह हर रेशे में चंगाई और बल लाती है।
- दिव्य चंगाई परमेश्वर के अनुग्रह से आती है, मनुष्य के काम के द्वारा नहीं। इसे न तो मोल लिया जा सकता है, न ही इसके लिए परिश्रम किया जा सकता है। हम इसमें परमेश्वर की सहायता नहीं कर सकते। हमें इसे एक वरदान के रूप में लेना है। यह हमें वैसे ही मिलती है जैसे क्षमा मिलती है, उसकी ओर से एक सेंत-मेंत का वरदान।
- यह हमें विश्वास के द्वारा मिलती है। यह विश्वास नहीं जो चंगा करता है। परमेश्वर चंगा करता है, परन्तु विश्वास उसे ग्रहण करता है। हम विश्वास करते हैं कि परमेश्वर कोई प्रमाण मिलने से पहले ही चंगा कर रहा है। इसे एक वर्तमान वास्तविकता के रूप में विश्वास किया जाना है, और फिर उस पर कदम बढ़ाया जाना है। हमें ऐसे काम करना है मानो यह पहले से ही सच है। परमेश्वर चाहता है कि हम उस पर टेक लगाएँ, और उस पर भरोसा रखें, और फिर जो उसने दिया है उसके लिए बिना किसी संदेह या भय के आनन्द करें और उसकी स्तुति करें।
- दिव्य चंगाई कलीसिया के इतिहास के सारे तथ्यों के अनुरूप है। इरेनियस के समय से लेकर इस वर्तमान शताब्दी तक इसके बार-बार उदाहरण मिले हैं। यह एक लंबी पंक्ति है, और चंगे किए गए लोगों की विशाल भीड़ एक स्वर से घोषणा करती है: "यीशु मसीह, कल और आज और युगानुयुग एक-सा है।" समस्त मध्ययुग में शुद्ध कलीसिया ने इस सत्य पर विश्वास किया और इसे सिखाया। वाल्डेंसियों ने इसे अपने विश्वास का एक अंग माना। आरंभिक सुधारकों के समय इससे भरे हुए हैं। लूथर और बैक्सटर, और फॉक्स और व्हाइटफ़ील्ड, और जॉन वेस्ली के जीवन इस बात की स्पष्ट और विश्वास दिलानेवाली गवाही देते हैं कि वे इस सत्य पर विश्वास करते थे। बाद के समयों में इसके उदाहरण असंख्य हैं। जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, इंग्लैंड और उसके उपनिवेश, और संसार के मिशन-क्षेत्र, यीशु के चंगा करने के सामर्थ्य के अनेक साक्षी रखते हैं। हमारा अपना देश, और यहाँ तक कि हमारा अपना नगर, इससे भरा है। तुम्हारे बीच में यहाँ इसके अनेक साक्षी हैं। तुम उन्हें जानते हो, और यह भी कि उनमें से कुछ प्रसिद्धि और वर्षों की कसौटी पर खरे उतरे हैं। वे कोई गुमनाम घटनाएँ नहीं हैं। उनमें से बहुत से पुरुष और स्त्रियाँ हैं जो मसीही सेवा के सबसे अगले मोर्चे पर खड़े रहे हैं। उनमें हर प्रकार का चरित्र और बुद्धि और मनोवृत्ति और स्वभाव पाया जाता है। उनमें बालक भी हैं, और वृद्ध पुरुष भी। उनमें से कुछ के पास ऊँची बुद्धि थी, परन्तु वे सरल बालकों में बदल दिए गए। उनमें हर वर्ग का रोग है—भयानक कैंसर से लेकर तंत्रिका-तंत्र की सबसे बिगड़ी हुई अवस्था तक। और उसने उन सब को चंगा किया है।
- दिव्य चंगाई इस युग के चिन्हों में से एक है। यह मसीह के आगमन की अग्रदूत है। यह आज के अविश्वास के प्रति परमेश्वर का उत्तर है। मनुष्य अपनी बुद्धि के बल से इसे तर्क द्वारा गिराने का प्रयत्न करे। परमेश्वर अपने सामर्थ्य के इस अकाट्य प्रमाण से इसका सामना करता है।
III. यीशु किस प्रकार हमारा चंगा करनेवाला है।
- क्योंकि उसने अपने कोड़ों से हमारे लिए चंगाई मोल ली है। यह कलवरी पर उसके मोल लिए गए छुटकारे का एक भाग है। "निश्चय उसने हमारी बीमारियों को उठा लिया और हमारे दुखों को सह लिया।"
- क्योंकि यह उसके जी उठे जीवन में हम में है। हमें चंगाई केवल यीशु से नहीं, परन्तु यीशु में मिलती है। यह उसकी जीवित देह में है, और हम इसे तभी पाते हैं जब हम उसमें बने रहते हैं, और इसे केवल तभी बनाए रखते हैं जब हम उसमें बने रहते हैं।
- क्योंकि वह हमारे विश्वास करने का सामर्थ्य बनकर हमें इसे ग्रहण करने योग्य बनाता है। यदि हम ग्रहण करना चाहें तो वह उस पर भरोसा करने का विश्वास देता है। हमें उसे पाने के लिए ऊँचाइयों पर चढ़ना नहीं पड़ता, परन्तु वह हमारी असमर्थता तक उतर आता है और हमारी चंगाई के साथ-साथ हमारा भरोसा भी बन जाता है। एक चीनी व्यक्ति एक बार मसीह और कन्फ्यूशियस और बुद्ध के बीच का अंतर बता रहा था। उसने कहा: "मैं एक गहरे गड्ढे में नीचे था, कीचड़ में आधा धँसा हुआ, और किसी से चिल्लाकर सहायता माँग रहा था कि कोई मुझे निकाले। जैसे ही मैंने ऊपर देखा, मैंने एक आदरणीय, श्वेत केश वाले पुरुष को मुझ पर नीचे झाँकते देखा। उसके मुख पर उसकी शुद्ध और पवित्र आत्मा के चिन्ह थे। 'हे मेरे पुत्र,' उसने कहा, 'यह एक भयानक स्थान है।' 'हाँ,' मैंने कहा, 'मैं इसमें गिर पड़ा। क्या तू मुझे निकाल नहीं सकता?' 'हे मेरे पुत्र,' उसने कहा, 'मैं कन्फ्यूशियस हूँ। यदि तूने मेरी पुस्तकें पढ़ी होतीं और उनकी शिक्षा पर चला होता, तो तू कभी यहाँ न होता।' 'हाँ, पिता जी,' मैंने कहा, 'परन्तु क्या तू मुझे निकाल नहीं सकता?' जैसे ही मैंने ऊपर देखा वह जा चुका था। शीघ्र ही मैंने एक और आकृति को पास आते देखा, और एक और पुरुष मुझ पर झुका, इस बार बंद आँखों और बँधी हुई भुजाओं के साथ। वह किसी दूर, सुदूर स्थान में देखता प्रतीत हो रहा था। 'हे मेरे पुत्र,' उसने कहा, 'बस अपनी आँखें बंद कर, अपनी भुजाएँ बाँध ले और अपने आप को पूरी तरह भूल जा। पूर्ण विश्राम की अवस्था में आ जा। किसी ऐसी बात का विचार न कर जो तुझे विचलित करे। इतना स्थिर हो जा कि कोई वस्तु तुझे हिला न सके। तब, हे मेरे बालक, तू ऐसे मधुर विश्राम में होगा जैसे मैं हूँ।' 'हाँ, पिता जी,' मैंने उत्तर दिया, 'जब मैं भूमि के ऊपर होऊँगा तब मैं वैसा ही करूँगा। क्या तू मुझे निकाल नहीं सकता?' परन्तु बुद्ध भी जा चुका था। मैं अभी निराशा में डूबने ही लगा था कि मैंने अपने ऊपर एक और आकृति देखी, जो औरों से भिन्न थी। वह अति साधारण था, और बिल्कुल हम जैसा ही दिखता था, परन्तु उसके मुख पर दुख के चिन्ह थे। मैं उसकी दुहाई देकर चिल्ला उठा: 'हे पिता, क्या तू मेरी सहायता कर सकता है?' 'हे मेरे बालक,' उसने कहा, 'क्या बात है?' इससे पहले कि मैं उसे उत्तर दे पाता, वह मेरे पास कीचड़ में उतर आया; उसने अपनी भुजाएँ मेरे चारों ओर लपेटीं और मुझे उठा लिया, और फिर उसने मुझे खिलाया और विश्राम दिया। जब मैं भला-चंगा हो गया, तो उसने यह न कहा, 'अब, फिर ऐसा न करना,' परन्तु उसने कहा, 'अब हम साथ-साथ आगे चलेंगे;' और हम आज तक साथ-साथ चलते आए हैं।"
हे प्रिय, यीशु मसीह तुम्हारे लिए यही करेगा! वह तुम्हारे पास वहीं उतर आता है जहाँ तुम हो। वह तुम्हारे भीतर तुम्हारा भरोसा बन जाता है, और फिर तुम साथ-साथ आगे चलते हो जब तक आनेवाले युग के पुनरुत्थान का प्रकाश और महिमा तुम पर न फूट पड़े। परमेश्वर हम सब की सहायता करे कि हम उसके अपने नाम के निमित्त उसे इस प्रकार पूर्ण रूप से ग्रहण करें! आमीन।
अध्याय 3 पूरा हुआ
मसीह हमारा चंगा करनेवाला