किसान से बातें
कटनी का आनन्द

अध्याय 14 · 26 मिनट का पठन

कटनी का आनन्द

“वे तेरे सामने कटनी के समय का सा आनन्द करते हैं” — यशायाह 9:3 पिछले दिनों मैंने ऐसे लोगों के साथ पर्व मनाया जिन्होंने “कटनी घर आ गई” का जयघोष किया। धनी और निर्धन को एक साथ आनन्द मनाते देखकर मुझे प्रसन्नता हुई; और जब आनन्द-भरा भोजन समाप्त हुआ, तो मुझे यह भी अच्छा लगा कि एक मेज़ को मंच बनाकर उस बड़े खत्ते में सदा धन्य परमेश्वर का सुसमाचार एक उत्सुक सभा को सुनाऊँ। उस अवसर के अनुरूप मेरा हृदय आनन्दित था, और अब मैं उसी सुर में रहकर तुमसे कटनी के आनन्द के विषय में थोड़ी सी बातें करूँगा। लन्दन के रहनेवाले भूल जाते हैं कि यह कटनी का समय है; मैली-कुचैली ईंटों के इस विशाल रेगिस्तान में रहते हुए हम मुश्किल से जानते हैं कि गेहूँ की बाल कैसी होती है, सिवाय इसके कि किसी अनाज के व्यापारी की दुकान की खिड़की में उसे सूखी और सफ़ेद पड़ी देख लें; तौभी हम सब स्मरण रखें कि कटनी नाम की एक ऋतु होती है, जब परमेश्वर की भलाई से पृथ्वी के फल इकट्ठे किए जाते हैं।

यह कटनी का आनन्द क्या है, जिसे यहाँ परमेश्वर के सामने पवित्र लोगों के आनन्द की उपमा के रूप में लिया गया है? मुझे डर है कि केवल स्वार्थी प्रवृत्ति के लोगों के लिये कटनी का आनन्द बस इतना ही है कि धन बढ़ने पर उन्हें निजी सन्तोष मिलता है। कभी-कभी किसान केवल इसलिए आनन्दित होता है कि वह अपने परिश्रम का प्रतिफल देखता है, और उतना ही अधिक धनी हो जाता है। मैं आशा करता हूँ कि बहुतों के मन में आनन्द का दूसरा कारण भी मिला रहता है; अर्थात् परमेश्वर के प्रति यह कृतज्ञता कि भरपूर कटनी से कंगालों को रोटी मिलेगी, और हमारी सड़कों से कुड़कुड़ाहट दूर हो जाएगी। इसमें सन्देह नहीं कि जो मनुष्य कटनी से धनी होता है, उसके लिये कटनी में एक उचित आनन्द है; क्योंकि जो कोई कठिन परिश्रम करता है, उसे यह अधिकार है कि जब अन्त में वह अपनी अभिलाषा पा ले, तो आनन्द करे।

भला होता यदि मनुष्य सदा स्मरण रखते कि उनकी अन्तिम और सबसे बड़ी कटनी उनके परिश्रम के अनुसार होगी। जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा।

एक जवान अपना जीवन वह बीज बोकर आरम्भ करता है जिसे वह अपनी जवानी की जंगली जई कहता है; भला होता कि उसने उसे कभी बोया ही न होता, क्योंकि वह उसके लिये भयानक कटनी लाएगी। वह आशा करता है कि इस जंगली जई से वह सच्चे सुख की कटनी काटेगा, परन्तु ऐसा हो नहीं सकता; जीवन के सबसे सच्चे सुख धार्मिकता के अच्छे बीज से उगते हैं, पाप के धतूरे से नहीं। जैसे जो मनुष्य अपनी रेघारियों में ऊँटकटारे बोता है, वह सुनहरे गेहूँ के पूले काटने की आशा न रखे, वैसे ही जो दुराचार के मार्गों पर चलता है, वह सुख की आशा न रखे।

इसके विपरीत, वे वायु बोते हैं, और वे बवण्डर लवेंगे। जब किसी पापी को विवेक की पीड़ा होती है, तो वह ठीक ही कह सकता है, “यह वही है जो मैंने बोया था।” जब अन्त में उसे अपने बुरे कामों का दण्ड मिलेगा, तो वह अपने सिवा किसी और को दोष न देगा; उसने जंगली दाने बोए, और उसे जंगली दाने ही काटने होंगे। दूसरी ओर, मसीही मनुष्य को, यद्यपि उसका उद्धार कर्मों से नहीं वरन् अनुग्रह से है, उसका स्वामी अनुग्रह का प्रतिफल देगा। चाहे बोनेवाला बीज लेकर रोता हुआ चला जाए, परन्तु वह फिर पूलियाँ लिए जयजयकार करता हुआ निश्चय लौट आएगा। कटनी का आनन्द कुछ हद तक परिश्रम के प्रतिफल में है; प्रभु की सेवा करने में हमारा आनन्द भी ऐसा ही हो।

कटनी के आनन्द में एक और तत्व भी है, अर्थात् दिए गए उपकारों के लिये परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता।

हम अनोखी रीति से परमेश्वर पर निर्भर हैं; हम में से अधिकतर जितना सोचते हैं, उससे कहीं अधिक। जब इस्राएली जंगल में थे, तो वे हर सुबह बाहर जाकर मन्ना बटोरते थे। हमारा मन्ना हमें हर सुबह नहीं मिलता, परन्तु वर्ष में एक बार मिलता है। वह उतना ही स्वर्गीय प्रबन्ध है, मानो वह छावनी के चारों ओर पाले के किनकों के समान पड़ा हो। यदि हम खेत में जाकर बादलों से टपका हुआ भोजन बटोरते, तो हम उसे बड़ा आश्चर्यकर्म समझते; तो क्या हमारी रोटी का पृथ्वी में से ऊपर उगना उतना ही बड़ा अचम्भा नहीं, जितना उसका आकाश से नीचे उतरना? जिस परमेश्वर ने आकाश को स्वर्गदूतों की रोटी बरसाने की आज्ञा दी, वही इस नीरस पृथ्वी को आज्ञा देता है कि वह अपने ठीक समय पर मनुष्यजाति के लिये अन्न उपजाए। इसलिए जब भी हम देखें कि कटनी आ पहुँची है, तो हम परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ हों, और इस ऋतु को धन्यवाद के भजनों के बिना बीतने न दें। मेरा विश्वास है कि यदि मैं कहूँ कि संसार में सामान्यतः सोलह महीनों से अधिक का भोजन कभी नहीं होता, तो मैं ठीक ही कहूँगा; अर्थात् जब कटनी इकट्ठी हो जाती है, तब सोलह महीनों का भण्डार हो सकता है; परन्तु कटनी के समय सामान्यतः सारे संसार में इतना गेहूँ नहीं होता कि वह जनसंख्या के लिये चार या पाँच महीनों से अधिक चले; इसलिए यदि कटनी न आती, तो हम अकाल के कगार पर होते। हम अब भी रोज़ कमाते और रोज़ खाते हैं। आओ, हम ठहरकर परमेश्वर को धन्य कहें, और कटनी का आनन्द कृतज्ञता का आनन्द बने।

मसीही के लिये यह बड़े आनन्द की बात होनी चाहिए कि कटनी के द्वारा उसे परमेश्वर की सच्चाई का निश्चय मिलता है। प्रभु ने प्रतिज्ञा की है कि जब तक पृथ्वी बनी रहेगी, तब तक बोने और काटने के समय, ठंडा और तपन, धूपकाल और शीतकाल, निरन्तर होते चले जाएँगे। और जब तुम लदी हुई गाड़ी को फसल भीतर ले जाते देखो, तो तुम अपने मन में कह सकते हो, “परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञा का सच्चा है।

उदास शीतकाल और गीले वसन्त के बावजूद शरद ऋतु अपना सुनहरा अनाज लेकर आ पहुँची है।” निश्चय जानो कि जैसे प्रभु यह प्रतिज्ञा पूरी करता है, वैसे ही वह बाकी सब भी पूरी करेगा। उसकी सब प्रतिज्ञाएँ मसीह यीशु में हाँ और आमीन हैं; यदि वह पृथ्वी के साथ अपनी वाचा निभाता है, तो अपने निज लोगों के साथ, जिनसे वह सदा प्रेम रखता आया है, अपनी वाचा वह और कितनी अधिक निभाएगा। हे मसीही, प्रतिज्ञा को होंठों पर लिए दया के सिंहासन के पास जाओ, और उसे लेकर विनती करो। निश्चय जानो कि वह मरा हुआ अक्षर नहीं है। जब तुम सिंहासन के सामने प्रतिज्ञा का उल्लेख करो, तब अविश्वास तुम्हें हकलाने न दे, वरन् साहस से कहो—“जो वादा तूने अपने दास को दिया है, उसे पूरा कर, क्योंकि तूने मुझे आशा दी है।” धिक्कार है हम पर कि हम अपने परमेश्वर पर इतना कम विश्वास करते हैं। संसार उसकी भलाई के प्रमाणों से भरा है। हर उगता सूर्य, हर बरसती बौछार, हर घूमती ऋतु उसकी सच्चाई की गवाही देती है। फिर हम उस पर सन्देह क्यों करते हैं? यदि हम उस पर तब तक सन्देह न करें जब तक उसका कोई कारण न हो, तो हम फिर कभी अविश्वास को न जानेंगे। कटनी के लौट आने से उत्साहित होकर, आओ, हम परमेश्वर के आत्मा के बल से ठान लें कि हम डगमगाएँगे नहीं, वरन् परमेश्वर के वचन पर विश्वास करेंगे और उसमें आनन्दित रहेंगे।

एक बात और। मसीही के लिये कटनी के आनन्द में सदा आशा का आनन्द भी रहेगा। जैसे किसान के लिये एक कटनी है जिसकी वह धीरज से बाट जोहता है, वैसे ही उन सब विश्वासयोग्य बाट जोहनेवालों के लिये भी एक कटनी है, जो हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के आगमन और प्रगट होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। परिपक्व मसीही, अनाज की पकी बाल के समान, पवित्र दीनता से अपना सिर झुकाए रहता है।

जब वह परमेश्वर की बातों में अभी कच्चा ही था, तब वह तनकर खड़ा रहता था और कुछ घमण्ड भी करता था; परन्तु अब जब वह प्रभु की आशीष से भर गया है, तो वह उससे दीन हो गया है, और अपने आप को झुका लेता है; वह हँसुए की बाट जोह रहा है, और उससे डरता नहीं, क्योंकि मसीह के लोगों को बटोरने कोई साधारण लवनेवाला नहीं आएगा—वह स्वयं संसार की कटनी काटेगा।

प्रभु नाश करनेवाले दूत को यह काम सौंप देता है कि वह दाख की फसल काटे और उसे रसकुण्ड में डाले, कि वह प्रकोप से रौंदी जाए; परन्तु जो अनाज उसने स्वयं बोया है, उसे वह अपने सोने के हँसुए से स्वयं बटोरेगा। हम इसी की बाट जोह रहे हैं। हम जंगली दानों के बीच बढ़ रहे हैं, और कभी-कभी हमें कुछ डर लगता है कि कहीं जंगली दाने हम से अधिक बलवन्त होकर गेहूँ को दबा न दें; परन्तु आगे चलकर हम अलग किए जाएँगे, और जब अनाज भली भाँति फटका जाकर खत्ते में रखा जाएगा, तब हम वहाँ होंगे। यही आशा अभी भी हमारे हृदयों को आनन्द से धड़काती है। हम अपने स्वामी के बहुमूल्य पूलों को कब्र तक पहुँचा आए हैं, और जब हम वहाँ थे, तो हमें लगा कि हम लगभग कह सकते हैं, “हे प्रभु, यदि वे सो गए हैं, तो बच जाएँगे। आओ, हम भी उनके साथ मरने को चलें।” हमारा कटनी का आनन्द यह आशा है कि हम सब पवित्र लोगों के साथ विश्राम में होंगे, और सदा प्रभु के साथ रहेंगे।

पृथ्वी की इन छायारूपी कटनियों को देखकर हमें अत्यन्त आनन्दित होना चाहिए, क्योंकि वे ऊपर की अनन्त कटनी का प्रतिरूप और पूर्वाभास हैं।

कटनी के आनन्द के विषय में इतना ही; परन्तु मैं आगे बढ़ता हूँ। वे कौन से आनन्द हैं जो विश्वासी के लिये कटनी के आनन्द के समान हैं? यह एक आम धारणा है कि मसीही दुःखी लोग होते हैं। यह सच है कि हमारी परीक्षा होती है, परन्तु यह झूठ है कि हम अभागे हैं। अपनी सब परीक्षाओं के रहते हुए भी विश्वासियों को मसीह के प्रेम में ऐसी भरपाई मिलती है कि वे फिर भी एक धन्य पीढ़ी हैं, और उनके विषय में कहा जा सकता है, “हे इस्राएल, तू क्या ही धन्य है!”

पहली ऋतुओं में से एक, जिसमें हमने कटनी के आनन्द के बराबर आनन्द जाना—एक ऐसी ऋतु जो आरम्भ होने के समय से अब तक हमारे साथ बनी हुई है—वह थी जब हमने उद्धारकर्ता को पाया, और इस प्रकार उद्धार प्राप्त किया। हे भाइयो और बहनो, तुम स्वयं अपने प्राणों के जोते जाने का समय स्मरण करते हो। मेरा हृदय परती भूमि था, और घास-पात से ढका था; परन्तु एक दिन वह महान किसान आया और मेरे प्राण को जोतने लगा। दस काले घोड़े उसकी जोड़ी थे, और जो फाल उसने चलाया वह बड़ा पैना था, और जोतनेवालों ने गहरी रेघारियाँ बनाईं। वे काले घोड़े दस आज्ञाएँ थीं, और परमेश्वर के न्याय ने हल के फाल के समान मेरी आत्मा को चीर डाला। मैं दोषी ठहराया गया, बर्बाद, नष्ट, खोया हुआ, असहाय, निराश था—मुझे लगा कि नरक मेरे सामने है। फिर आड़ी जुताई हुई, क्योंकि जब मैं सुसमाचार सुनने गया, तो उससे मुझे शान्ति नहीं मिली; उसने मुझ में यह लालसा तो जगाई कि उसमें मेरा भी भाग हो, परन्तु मुझे डर था कि ऐसा वरदान मेरे लिये असम्भव है।

परमेश्वर की सबसे उत्तम प्रतिज्ञाएँ मुझ पर भौंहें चढ़ाती थीं, और उसकी धमकियाँ मुझ पर गरजती थीं। मैंने प्रार्थना की, परन्तु शान्ति का कोई उत्तर न मिला। बहुत समय तक मेरी यही दशा रही। जुताई के बाद बुआई आई। जिस परमेश्वर ने हृदय को जोता, उसी ने उसे यह अनुभव कराया कि उसे सुसमाचार की आवश्यकता है, और सुसमाचार का बीज आनन्द से ग्रहण किया गया। क्या तुम्हें वह शुभ दिन स्मरण है जब अन्त में तुम्हारे मन में थोड़ी सी आशा जागने लगी? वह बहुत थोड़ी थी—उस हरे अंकुर के समान जो मिट्टी में से झाँकता है; तुम मुश्किल से जानते थे कि वह घास है या अनाज, ढिठाई है या सच्चा विश्वास। वह थोड़ी सी आशा थी, परन्तु वह बड़ी सुहावनी रीति से बढ़ी। हाय, फिर सन्देह का पाला पड़ा; भय की बर्फ़ गिरी; निराशा की ठंडी हवाएँ तुम पर चलीं, और तुमने कहा, “मेरे लिये कोई आशा नहीं हो सकती।” परन्तु वह कैसा महिमामय दिन था जब अन्त में वह गेहूँ, जिसे परमेश्वर ने बोया था, पक गया, और तुम कह सके, “मैंने उसकी ओर दृष्टि की, और ज्योति पाई; मैंने अपने पाप यीशु पर रख दिए हैं, जहाँ परमेश्वर ने उन्हें प्राचीनकाल में रखा था, और वे दूर कर दिए गए हैं, और मेरा उद्धार हो गया है।” मुझे वह दिन भली भाँति स्मरण है, और निःसन्देह तुम में से बहुतों को भी है। हे लोगो! कोई किसान कभी ऐसा जयजयकार करके आनन्दित नहीं हुआ जैसे हमारे हृदय ने तब जयजयकार किया जब बहुमूल्य मसीह हमारा हो गया, और हम उसमें उद्धार के पूरे निश्चय के साथ उसे थाम सके।

तब से बहुत दिन बीत गए हैं, परन्तु उसका आनन्द अब भी हमारे साथ ताज़ा है। और, परमेश्वर धन्य हो, हम केवल पहले दिन के आनन्द को ही पीछे मुड़कर नहीं देखते; वरन् तब से हर दिन के आनन्द को, न्यूनाधिक; क्योंकि हमारा आनन्द कोई हम से छीन न लेगा; हम अब भी मसीह में वैसे ही चल रहे हैं, जैसे हमने उसे ग्रहण कर लिया था।

अब भी हमारी सारी आशा उसी पर टिकी है, अपनी सारी सहायता हम उसी से लाते हैं; और हमारा आनन्द और हमारी शान्ति हमारे साथ बनी रहती है, क्योंकि वे एक अटल नींव पर आधारित हैं। हम प्रभु में आनन्दित हैं, हाँ, और आनन्दित रहेंगे भी।

कटनी का आनन्द सामान्यतः इस बात में प्रगट होता है कि किसान अपने मित्रों और पड़ोसियों को भोज देता है; और, सामान्यतः, जो लोग मसीह को पाते हैं, वे अपने मित्रों और पड़ोसियों को यह बताकर अपना आनन्द प्रगट करते हैं कि प्रभु ने उनके लिये कैसे बड़े काम किए हैं। परमेश्वर का अनुग्रह बाँटने का स्वभाव रखता है। कोई मनुष्य उद्धार पाकर सदा उसके विषय में चुप नहीं रह सकता; पृथ्वी पर एक मौन कलीसिया की आशा करना वैसा ही है जैसा स्वर्ग में गूँगे गायक-दलों की आशा करना। यदि कोई मनुष्य प्यासा रहा हो, और जीवन के जल की धारा के पास आ पहुँचा हो, तो उसकी पहली प्रेरणा यह पुकारने की होगी, “अहो सब प्यासे लोगों!” क्या तुम कटनी का आनन्द अनुभव करते हो, वह आनन्द जो तुम्हें यह चाहने को उकसाता है कि दूसरे भी तुम्हारे साथ उसमें भागी हों? यदि ऐसा है, तो अपने सुख का प्रचार करने की प्रेरणा को मत दबाओ। भाइयों और बहनों से, मित्रों और कुटुम्बियों से मसीह की चर्चा करो; और यदि भाषा हकलाती भी हो, तो सन्देश अपने आप में इतना महत्वपूर्ण है कि जिन शब्दों में तुम उसे रखते हो, वे गौण बात होंगे। इसे बताओ, दूर-दूर तक सुनाओ—कि एक उद्धारकर्ता है, कि तुमने उसे पा लिया है, और कि उसका लहू अपराध को धो सकता है। इसे हर जगह बताओ; और इस प्रकार कटनी का आनन्द जल और थल पर फैल जाएगा, और परमेश्वर की महिमा होगी।

हमारे पास एक और आनन्द है जो कटनी के आनन्द के समान है। वह हमें बार-बार मिलता भी है। वह प्रार्थना के उत्तर का आनन्द है। मैं आशा करता हूँ कि तुम जानते हो कि विश्वास से प्रार्थना करना क्या है। कुछ प्रार्थनाएँ उन शब्दों के योग्य भी नहीं होतीं जो उन्हें चढ़ाने में बोले जाते हैं, क्योंकि उनमें विश्वास मिला हुआ नहीं होता। “अपने सब चढ़ावों के साथ नमक भी चढ़ाना”, और यदि हम चाहते हैं कि हमारे बलिदान ग्रहण हों, तो विश्वास का नमक आवश्यक है। जो दया के सिंहासन से परिचित हैं, वे जानते हैं कि प्रार्थना एक वास्तविकता है, और कि प्रार्थना के ईश्वरीय उत्तरों की शिक्षा कोई कल्पना नहीं। कभी-कभी परमेश्वर बुद्धिमानी भरे कारणों से उत्तर देने में देर करता है; तब उसकी सन्तान को पुकारना, और पुकारना, और फिर पुकारना पड़ता है। वे उस किसान की दशा में हैं जिसे पृथ्वी के बहुमूल्य फल की बाट जोहनी पड़ती है; और जब अन्त में प्रार्थना का उत्तर आता है, तो वे उस किसान की स्थिति में होते हैं जब उसे कटनी मिलती है। हन्ना का विलाप और हन्ना का वचन स्मरण करो। उसने अपने मन की कड़वाहट में परमेश्वर की दोहाई दी, और जब उसे बालक दिया गया, तो उसने उसका नाम “शमूएल” रखा, जिसका अर्थ है, “परमेश्वर से माँगा हुआ”; “यह वही बालक है जिसके लिये मैंने प्रार्थना की थी; और यहोवा ने मुझे मुँह माँगा वर दिया है।” 1 शमूएल 1:27।

वह उसे बहुत प्यारा था, क्योंकि वह प्रार्थना का बालक था। जो भी दया तुम्हें प्रार्थना के उत्तर में मिलती है, वह तुम्हारी शमूएल-दया, तुम्हारी दुलारी दया होगी। तुम उसके विषय में कहोगे, “इसी दया के लिये मैंने प्रार्थना की थी”, और वह तुम्हारी आत्मा में कटनी का आनन्द ले आएगी।

जब हम किसी परीक्षा पर जय पाते हैं, तब भी हमारे भीतर कटनी का एक और आनन्द होता है। हम जानते हैं कि कभी-कभी बादल के नीचे आ जाना क्या होता है; हमारे भीतर का पाप अंधकार फैलानेवाली शक्ति के साथ उठ खड़ा होता है, या कोई बाहरी विपत्ति हम पर बादल की तरह छा जाती है, और हम वह सीधा मार्ग खो बैठते हैं जिस पर चलने के हम आदी थे। ऐसे समयों में परमेश्वर की सन्तान सहायता के लिये बड़े बल से पुकारेगी; क्योंकि वह अपने आप से भी डरती है और अपने चारों ओर की परिस्थितियों से भी। परमेश्वर के कुछ लोग सप्ताहों और महीनों तक लगातार बाहर और भीतर, दोनों ओर की दोहरी परीक्षा में पड़े रहे हैं, और कड़वी वेदना में परमेश्वर की दोहाई देते रहे हैं। यह बड़ा कठिन संघर्ष है; पाप के काम को बहुत लुभावने रंगों में रंगा गया है, और परीक्षा की मोहिनी आवाज़ ने उन्हें लगभग मोह लिया है। परन्तु जब अन्त में वे पाँव फिसले बिना घोर अंधकार से भरी हुई तराई में से पार निकल आए हैं; जब, आखिरकार, अपुल्लयोन ने उन्हें नष्ट नहीं किया, वरन् वे फिर दिन के उजियाले में निकल आए हैं, तब वे ऐसा आनन्द अनुभव करते हैं जो वर्णन से बाहर है, जिसकी तुलना में कटनी का आनन्द केवल बच्चों की सी मौज-मस्ती है। गहरा आनन्द वे ही जानते हैं जिन्होंने कड़वा दुःख सहा है। जब मनुष्य अनुभव करता है कि इस संघर्ष से वह और बलवन्त हो गया है, जब वह अनुभव करता है कि परीक्षा में से होकर निकलने से उसने अनुभव और दृढ़ विश्वास बटोरा है, तो वह अपना हृदय ऊपर उठाता है, और अपने आप में नहीं, वरन् अपने परमेश्वर के सामने कटनी के आनन्द से आनन्दित होता है। हे प्रिय भाइयो, तुम जानते हो कि इसका अर्थ क्या है।

फिर, जब हम उपयोगी बनाए गए हों, तब भी कटनी का आनन्द होता है। हर मसीही की सबसे प्रबल अभिलाषा उपयोगी होना है। हमारे भीतर परमेश्वर की महिमा के लिये जलती हुई धुन होनी चाहिए। जब उपयोगी होने की अभिलाषा रखनेवाला मनुष्य अपनी योजनाएँ बनाकर अपने काम में लग जाता है, तो वह परिणामों की बाट देखने लगता है; परन्तु कदाचित् परिणाम आने में सप्ताह, या वर्ष लग जाएँ। यदि अब तक कोई फल नहीं आया, तो इसके लिये काम करनेवाले को दोष नहीं दिया जाना चाहिए; परन्तु यदि वह फल के बिना रहने में सन्तुष्ट है, तो वह दोषी है।

कोई प्रचारक ऐसा प्रचार कर सकता है जिससे किसी का मन न फिरे, और उसे कौन दोष देगा? परन्तु यदि वह इस पर भी प्रसन्न रहे, तो उसे कौन निर्दोष ठहराएगा? यदि हम परमेश्वर के अनुग्रह से दूसरे मनुष्यों के हृदय न तोड़ सकें, तो हमारा काम है कि अपने ही हृदय तोड़ें; यदि दूसरे अपने पापों के लिये न रोएँ, तो हमारी निरन्तर आदत यह होनी चाहिए कि हम उनके लिये रोएँ। जब हृदय गम्भीर, उत्साही और जोशीला हो जाता है, तो परमेश्वर सामान्यतः कुछ मात्रा में सफलता देता है, कोई पचास गुना, कोई सौ गुना। जब सफलता आती है, तब वह सचमुच कटनी का आनन्द है। मैं इतना आत्म-केन्द्रित हुए बिना नहीं रह सकता कि उस आनन्द का उल्लेख करूँ जो मुझे तब हुआ जब मैंने पहली बार सुना कि मेरी युवावस्था की सेवकाई के द्वारा किसी प्राण ने शान्ति पाई है।

मैं एक गाँव में कुछ सब्तों से प्रचार कर रहा था, और सभा बढ़ती जा रही थी, परन्तु मैंने किसी के मन-फिराव का समाचार नहीं सुना था, और मैंने सोचा, “कदाचित् परमेश्वर ने मुझे नहीं बुलाया है। वह नहीं चाहता कि मैं प्रचार करूँ, क्योंकि यदि वह चाहता, तो मुझे आत्मिक सन्तान देता।” एक सब्त को मेरे भले डीकन ने कहा, “निराश मत होइए। पिछले सब्त को एक गरीब स्त्री के मन पर उद्धार देनेवाला प्रभाव पड़ा।” तुम्हारे विचार में मुझे उस स्त्री से मिलने में कितना समय लगा? ठीक उतना ही, जितना उसकी झोंपड़ी तक पहुँचने में लगा। मैं उसी के मुँह से सुनने को उत्सुक था कि यह परमेश्वर के अनुग्रह का काम है या नहीं। यद्यपि वह केवल एक गरीब मजदूर की पत्नी थी, तौभी मैं सदा उसे स्नेह भरी दृष्टि से देखता रहा, जब तक कि वह पवित्र जीवन बिताकर स्वर्ग में उठा न ली गई।

तब से मैं प्रभु में बहुतों पर आनन्दित हुआ हूँ, परन्तु मेरी सेवकाई पर लगी वह पहली मुहर मुझे विशेष रूप से प्रिय थी। उसने मुझे कटनी के आनन्द का एक घूँट चखाया। यदि कोई मेरे लिये धन-सम्पत्ति छोड़ जाता, तो उससे मुझे उस आनन्द का सौवाँ भाग भी न मिलता जो मुझे यह जानकर मिला कि एक प्राण उद्धारकर्ता के पास पहुँचाया गया है। मुझे निश्चय है कि जिन मसीही लोगों को यह आनन्द नहीं मिला, वे उन सबसे उत्तम आनन्दों में से एक से वंचित रह गए हैं जिन्हें कोई विश्वासी स्वर्ग के इस पार जान सकता है। सच तो यह है कि जब मैं प्राणों को उद्धार पाते देखता हूँ, तो मैं न गब्रिएल के सिंहासन से डाह करता हूँ, न स्वर्गदूतों की वीणाओं से। यदि हम दूसरों को उद्धारकर्ता को जानने तक पहुँचा सकें, और इस प्रकार छुड़ानेवाले के मुकुट में नये रत्न जोड़ सकें, तो कुछ समय के लिये स्वर्ग से बाहर रहना ही हमारा स्वर्ग होगा।

मैं एक और आनन्द का उल्लेख करूँगा जो कटनी के आनन्द के समान है, और वह है प्रभु यीशु मसीह के साथ संगति। यह चर्चा करने की बात उतनी नहीं, जितनी अनुभव करने और भोगने की बात है। यदि हम यह वर्णन करने का प्रयत्न करें कि मसीह के साथ सहभागिता क्या है, तो हम असफल हो जाते हैं। मनुष्यों में सबसे बुद्धिमान सुलैमान को, जब उसे कलीसिया की अपने प्रभु के साथ संगति के विषय में लिखने की प्रेरणा मिली, तो रूपकों और प्रतीकात्मक भाषा का सहारा लेना पड़ा; और यद्यपि आत्मिक मन के लिये श्रेष्ठगीत सदा आनन्ददायक है, तौभी सांसारिक मन को वह केवल एक प्रेम-कविता सा लगता है। शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि उनकी जाँच आत्मिक रीति से होती है। 1 कुरिन्थियों 2:14 परन्तु आह, यह जानना कैसा सुख है कि मसीह तुम्हारा है, और उसके निकट रहना कैसा सुख है! उसके पंजर को छूना और कीलों के चिन्ह में अपनी उँगली डालना; ये हर दिन के आनन्द नहीं हैं। परन्तु जब ऐसी घनिष्ठ और निजी संगति हमारे विशेष दिनों में हमें मिलती है, तो वह हमारे प्राणों को अम्मीनादाब के रथों के समान ऊपर उठा लेती है, या, यदि तुम चाहो, तो वह हमें संसार पर, और जो कुछ वह बड़ा या मूल्यवान कहता है उस सब पर चलने देती है।

यदि मसीह हमारे साथ है, तो हमारी परिस्थितियों का कोई अर्थ नहीं—वह हमारा परमेश्वर, हमारी शान्ति, और हमारा सब कुछ है, और हम उसके सामने ऐसे आनन्द करते हैं जैसे कटनी के समय आनन्द करते हैं।

मेरे पास और विस्तार में जाने का समय नहीं है, क्योंकि मैं एक व्यावहारिक बात के साथ समाप्त करना चाहता हूँ। हम में से बहुत से लोग ऐसी कटनी के लिये उत्सुकता से तरस रहे हैं जो हमें गहरा आनन्द दे। हाल ही में कई लोगों ने मुझे बताया है कि लोगों के प्राणों के लिये उनके मन में कैसी गहरी करुणा है। हम में से दूसरों ने एक रहस्यमय प्रेरणा अनुभव की है कि पहले से कहीं अधिक प्रार्थना करें, और पहले से कहीं अधिक इस बात की चिन्ता करें कि मसीह नाश होनेवालों का उद्धार करे। जब तक इस देश में पूर्ण आत्मिक जागृति न हो, हम सन्तुष्ट न होंगे। यह भावना हमने स्वयं उत्पन्न नहीं की, और हम उसे दबाना भी नहीं चाहते। हम नहीं मानते कि उसे दबाया जा सकता है; और दूसरे लोग भी यही स्वर्गीय चिन्ता अनुभव करेंगे, और जब तक आशीष न आए, रात-दिन परमेश्वर के सामने आहें भरेंगे और दोहाई देंगे। यही बुआई है, यही जुताई है, यही हेंगा चलाना है—यह कटनी तक चलता रहे। मैं तरसता हूँ कि हर जगह अपने भाइयों और बहनों को यह कहते सुनूँ, “हम वेदना से भरे हैं; जब तक प्राणों का उद्धार न हो, हम पीड़ा में हैं।” राहेल की यह दोहाई, “मुझे सन्तान दे, नहीं तो मर जाऊँगी”, आज तुम्हारे सेवक की दोहाई है, और हज़ारों और लोगों की लालसा है। जैसे-जैसे वह अभिलाषा प्रबल होती है, वैसे-वैसे जागृति निकट आती है। हमें मसीह के लिये आत्मिक सन्तान मिलनी ही चाहिए, नहीं तो उनके उद्धार की लालसा के कारण हमारे हृदय टूट जाएँगे। आह, ऐसी और लालसाएँ, तड़प, उत्कण्ठाएँ और प्रयत्न हों! यदि हम तब तक प्रार्थना करते रहें जब तक जागृति की कटनी न आ जाए, तो हम उसके आनन्द में भागी होंगे।

सबसे अधिक आनन्द किसे मिलेगा? उन्हें जो इसके लिये सबसे अधिक चिन्तित रहे हैं। तुम में से जो एकान्त में प्रार्थना नहीं करते, और प्रार्थना-सभाओं में नहीं आते, उन्हें आनन्द न मिलेगा जब आशीष आएगी और कलीसिया बढ़ेगी। बुआई में तुम्हारा कोई भाग नहीं था, इसलिए कटनी में भी तुम्हारा भाग थोड़ा ही होगा। जो कभी दूसरों से उनके प्राणों के विषय में बात नहीं करते, जो सण्डे स्कूल या मिशन के काम में भाग नहीं लेते, पर केवल आशीषों का आनन्द उठाते हैं—उन्हें कटनी के आनन्द में से कुछ भी न मिलेगा, क्योंकि वे प्रभु के लिये परिश्रम नहीं करते। और कौन चाहेगा कि आलसी लोग आनन्दित हों? वरन् अपने उत्साह और चिन्ता में हमारा मन यह कहने को होता है, “मेरोज को श्राप दो, उसके निवासियों को भारी श्राप दो, क्योंकि वे यहोवा की सहायता करने को, शूरवीरों के विरुद्ध यहोवा की सहायता करने को न आए।” — न्यायियों 5:23 यदि तुम उसके आत्मा के द्वारा प्रभु की सहायता करने को आओगे, तो तुम कटनी के आनन्द में भागी होगे। कदाचित् उनसे अधिक आनन्द किसी को न होगा जो अपने प्रियजनों को परमेश्वर के पास लाए जाते देखते हैं। तुम में से कुछ की ऐसी सन्तानें हैं जो, जब भी तुम उनके विषय में सोचते हो, तुम्हारे लिये दुःख का कारण बनती हैं; वे ऐसा दुःख बनें जो तुम्हें उनके लिये निरन्तर प्रार्थना की ओर ले जाए; और यदि आशीष आए, तो वह उन तक क्यों न पहुँचे? यदि जागृति आए, तो तुम्हारी बेटी का मन क्यों न फिरे, तुम्हारे उद्दण्ड बेटे का उद्धार क्यों न हो, या तुम्हारे पके बालोंवाले पिता का भी, जो सन्देहवादी और अविश्वासी रहा है—परमेश्वर का अनुग्रह उस तक क्यों न पहुँचे? और आह, तब तुम्हें कैसा आनन्द होगा!

जब तुम अपने सम्बन्धियों को अपने प्रभु मसीह से जुड़ा हुआ देखोगे, तब तुम्हारी आत्मा कैसे आनन्द से भर जाएगी!

उनके लिये मन लगाकर प्रार्थना करो, और तुम अब भी अपने ही घर में कटनी का आनन्द अनुभव करोगे, अपने ही परिवार में कटनी घर आने का जयजयकार।

हे मेरे सुननेवाले, कदाचित् इस आनन्द से तुम्हारा कुछ लेना-देना नहीं, क्योंकि तुम्हारा उद्धार नहीं हुआ है। तौभी जिस मनुष्य का मन नहीं फिरा, उसके लिये यह एक अद्भुत बात है कि वह ऐसी सेवकाई के अधीन हो जिस पर परमेश्वर की आशीष है, और ऐसे लोगों के बीच हो जो मन-फिराव के लिये प्रार्थना करते हैं। हे जवान, तुम्हारे लिये यह एक आशीष है कि तुम्हारी माता मसीही है।

हे स्त्री, जिसका मन अब तक नहीं फिरा, तुम्हारे लिये यह एक बड़ी आशीष है कि तुम्हारी एक भक्त बहन है। इनके कारण हमें तुम्हारे विषय में आशा है। जब तक तुम्हारे सम्बन्धी प्रार्थना कर रहे हैं, हम तुम्हारे विषय में आशावान हैं। प्रभु यीशु अब भी तुम्हारा हो जाए।

परन्तु, आह, यदि तुम अविश्वासी बने रहो, तो दूसरों पर चाहे कैसी ही भरपूर आशीष आए, उससे तुम्हें कोई लाभ न होगा। “यदि तुम आज्ञाकारी होकर मेरी मानो, तो इस देश के उत्तम से उत्तम पदार्थ खाओगे।” — यशायाह 1:19 परन्तु कुछ लोग शोक से पुकार उठें, “कटनी का समय बीत गया, फल तोड़ने की ॠतु भी समाप्त हो गई, और हमारा उद्धार नहीं हुआ।” — यिर्मयाह 8:20 यह देखा गया है कि जो लोग किसी जागृति में से होकर निकलते हैं और फिर भी उनका मन नहीं फिरता, वे अकसर पहले से अधिक कठोर हो जाते हैं। मैं इसे मानता हूँ, और इसलिए प्रार्थना करता हूँ कि परमेश्वर का आत्मा ऐसी सामर्थ्य से आए कि कोई उसके प्रभाव से बच न सके।

तुम यह प्रार्थना करो: “हे सामर्थी आत्मा, मुझे छोड़कर आगे न बढ़!

तू अन्धों को दृष्टि दे सकता है; यीशु की योग्यता के साक्षी, मुझसे सामर्थ्य का वचन बोल, मुझसे भी।”

“क्या मैं बहुत समय से पाप में सोता रहा, बहुत समय से तुझे अनदेखा करता और उदास करता रहा?

क्या संसार ने मेरे हृदय को जकड़ रखा है?

आह, मुझे क्षमा कर और छुड़ा ले, मुझे भी।”

आह, संसार भर के सब विश्वासियों की ओर से मन लगाकर, लगातार प्रार्थना हो! यदि हमारी कलीसियाएँ निरन्तर, तीव्र प्रार्थना के लिये उभारी जाएँ, और परमेश्वर को तब तक चैन न लेने दें जब तक वह सिय्योन को स्थिर करके उसकी प्रशंसा पृथ्वी पर न फैला दे, तो कदाचित् हम परमेश्वर का राज्य आते और शैतान की शक्ति टूटते देखें।

तुम में से जितने मसीह से प्रेम रखते हो, मैं उसके नाम से तुमसे आग्रह करता हूँ कि मन लगाकर प्रार्थना करो; तुम में से जितने कलीसिया से प्रेम रखते हो और उसकी बढ़ती चाहते हो, मैं तुमसे विनती करता हूँ कि प्रार्थना के इस समय में पीछे न हटो। प्रभु तुम्हारी अगुवाई करे कि तुम तब तक प्रार्थना करते रहो जब तक कटनी का आनन्द न मिल जाए। क्या तुम्हें स्मरण है कि मैंने एक सब्त को कहा था, “आनेवाले इस महीने में तुम उसके काम के साथ जैसा व्यवहार करोगे, प्रभु भी तुम्हारे साथ वैसा ही व्यवहार करेगा”? मुझे लगता है कि बहुतों के लिये यह सच होगा— कि जैसा तुम उसकी कलीसिया के साथ व्यवहार करोगे, प्रभु भी तुम्हारे साथ वैसा ही करेगा। यदि तुम थोड़ा बोओगे, तो थोड़ा ही काटोगे; यदि तुम थोड़ी प्रार्थना करोगे, तो थोड़ी ही कृपा पाओगे। परन्तु यदि तुम उत्साह और विश्वास से काम करो, और प्रभु के लिये बहुत प्रार्थना और बहुत परिश्रम करो, तो पूरा नाप दबा-दबाकर और हिला-हिलाकर और उभरता हुआ तुम्हें लौटाया जाएगा। यदि तुम दूसरों को बूँद-बूँद सींचोगे, तो तुम्हें भी बूँदें ही मिलेंगी; परन्तु यदि आत्मा तुम्हारी सहायता करे कि तुम अपने प्राण में से जीवन के जल की नदियाँ उँडेलो, तो स्वर्गीय अनुग्रह की बाढ़ तुम्हारी आत्मा में बह आएगी। परमेश्वर उन्हें भीतर ले आए जिनका मन नहीं फिरा, और उन्हें यीशु पर सरल भरोसे की ओर ले चले; तब वे भी कटनी का आनन्द जानेंगे। हम यह उसी के नाम से माँगते हैं। आमीन।

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