अध्याय 25 · 3 मिनट का पठन
दिन 24 — भला सामरी
“‘इन तीनों में से कौन उस मनुष्य का पड़ोसी ठहरा, जो डाकुओं के हाथ में पड़ गया था?’ व्यवस्था के जानकार ने उत्तर दिया, ‘वही, जिसने उस पर दया की।’ तब यीशु ने उससे कहा, ‘जा, तू भी वैसा ही कर।’”
— लूका 10:36–37 (BSB)
परमेश्वर की व्यवस्था का एक जानकार यीशु को परखने आया। वह परमेश्वर की आज्ञा जानता था: “तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना।” पर वह कोई बचने का रास्ता ढूँढ़ना चाहता था। इसलिए उसने पूछा, “और मेरा पड़ोसी कौन है?” शायद उसे आशा थी कि यीशु उसे एक छोटी-सी सूची दे देंगे, ताकि उसे सब से प्रेम न करना पड़े।
इसलिए यीशु ने एक कहानी सुनाई।
एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो की ओर के सुनसान रास्ते पर जा रहा था। डाकुओं ने उस पर हमला किया, उसका सब कुछ छीन लिया, उसे मार-पीटकर अधमरा करके रास्ते के किनारे छोड़ गए।
थोड़ी देर में एक याजक उसी रास्ते से आया। वह तो अवश्य सहायता करेगा! पर जब उसने घायल मनुष्य को देखा, तो वह रास्ते की दूसरी ओर से कतराकर आगे बढ़ गया। फिर एक लेवीय, जो परमेश्वर के मन्दिर में सहायता किया करता था, वहाँ से आया। उसने देखा, और वह भी दूसरी ओर से होकर आगे निकल गया।
फिर एक सामरी वहाँ आया। याद रखो, यहूदी और सामरी आपस में बिलकुल नहीं मिलते-जुलते थे। यीशु की बात सुननेवाले लोग तो यही आशा करते कि इस कहानी में सामरी ही बुरा आदमी होगा!
पर जब सामरी ने उस मनुष्य को देखा, तो “उसे तरस आया।” वह घुटनों के बल बैठ गया, उसके घावों को धोकर बाँधा, उसे अपने ही गदहे पर बैठाकर एक सराय में ले गया। उसने सारी रात उसकी देखभाल की। अगले दिन उसने सराय के मालिक को पैसे देकर कहा, “इसकी देखभाल करना। यदि और अधिक ख़र्च हो जाए, तो लौटने पर मैं तुझे चुका दूँगा।”
फिर यीशु ने पूछा, “इन तीनों में से कौन उस घायल मनुष्य का पड़ोसी ठहरा?” उस जानकार को उत्तर देना पड़ा, “वही, जिसने उस पर दया की।” और यीशु ने कहा, “जा, तू भी वैसा ही कर।”
देखते हो यीशु ने क्या किया? उस मनुष्य ने पूछा था, “मुझे किससे प्रेम करना है?” यीशु ने प्रश्न को उलट दिया: “किसे इसकी आवश्यकता है कि तू उसका पड़ोसी बने?” तुम्हारा पड़ोसी केवल वही नहीं, जो तुम्हारे पास रहता है या जो तुम्हें अच्छा लगता है। वह हर वह जन है, जिसे सहायता चाहिए, चाहे वह तुमसे भिन्न हो, चाहे वह कोई हो जिससे तुम्हारी नहीं बनती।
पड़ोसी बनने में कुछ न कुछ लगता है। सामरी ने अपना समय, अपना धन और अपना आराम दे दिया। पर प्रेम यही करता है।
इस पर सोचो: तुम्हारे जीवन में ऐसा कौन है, जिसे इसकी आवश्यकता है कि तुम उसके लिये “भले सामरी” बनो?
यह करके देखो: आज किसी ऐसे को ढूँढ़ो, जिसे सहायता चाहिए, और दूसरी ओर से कतराकर आगे मत बढ़ जाओ। रुककर सहायता करो।
प्रिय यीशु, धन्यवाद कि तूने मुझे दिखाया कि भला पड़ोसी होने का क्या अर्थ है। मेरी सहायता कर कि मैं सहायता के भूखे लोगों के पास से बचकर न निकल जाऊँ। मुझे तरस से भरा हृदय दे, उनके लिये भी जो मुझसे भिन्न हैं। मेरी सहायता कर कि मैं भी जाकर वैसा ही करूँ। तेरे नाम में, आमीन।
अध्याय 25 पूरा हुआ
दिन 24 — भला सामरी