पूलों के बीच बीनी हुई बालें
अनुग्रह और उद्धार

अध्याय 8 · 13 मिनट का पठन

अनुग्रह और उद्धार

अनुग्रह की विजय

यह सबसे बड़े आश्चर्यों में से एक है कि सब मनुष्य मसीह से प्रेम नहीं करते। हमारी जाति की पूरी भ्रष्टता को इस बात से बढ़कर और कोई बात स्पष्ट नहीं करती कि "वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था।" तौभी जिन्होंने मनुष्य की भ्रष्टता के बड़े गहरे समुद्र के सब सोते फूट निकलते देखे हैं, वे इस बात का कारण बताने में उलझन में नहीं पड़ते कि मसीहा के साथ ऐसा व्यवहार क्यों हुआ। यह सम्भव न था कि अंधकार की ज्योति के साथ संगति हो, या मसीह का बलियाल के साथ कोई मेल हो। पतित मनुष्य यीशु के साथ नहीं चल सकता था, क्योंकि वे दोनों परस्पर सहमत न थे। ऐसे दो विपरीतों के आमने-सामने आने का यह अनिवार्य परिणाम ही था कि दोषी प्राणी उस सिद्ध जन से बैर रखे। "उसे क्रूस पर चढ़ा, क्रूस पर!" यही पतित मनुष्य की स्वाभाविक पुकार है। हमारा पहला आश्चर्य हट जाता है, और एक दूसरा आश्चर्य विचार के सारे क्षेत्र को भर देता है। क्या हमें अचम्भा हुआ था कि सब मनुष्य प्रेम नहीं करते?—उससे भी बड़ा अचम्भा यह है कि कोई भी मनुष्य यीशु से प्रेम करता है। पहली दशा में हमने वह भयानक अंधापन देखा जो सूर्य की चमक को भी न पहचान सका—हमने उसे थरथराते हुए देखा, और बहुत चकित हुए; परन्तु इस दूसरी दशा में हम नासरत के यीशु को कसकर बन्द आँख को खोलते, और अपनी अद्भुत ज्योति की ईश्वरीय आभा से मिस्र के-से अंधकार को तितर-बितर करते देखते हैं। क्या यह कुछ कम आश्चर्य है? यदि कब्रों के बीच उस दुष्टात्मा-ग्रस्त मनुष्य का भयानक प्रलाप देखना एक विचित्र बात थी, तो निश्चय उसी मनुष्य को यीशु के पाँवों के पास कपड़े पहने और सचेत बैठे देखना उससे कहीं बढ़कर अद्भुत बात है। जब मनुष्य का हृदय अपना स्नेह यीशु को देने के लिये लाया जाता है, तब सचमुच यह अनुग्रह की विजय है, क्योंकि इससे प्रमाणित होता है कि शैतान का सारा काम मिट गया है, और मनुष्य अपनी पतित दशा से फिर उठा लिया गया है।

धार्मिकता का वस्त्र

स्वर्ग में हमारा दरबारी वस्त्र, और प्रतिदिन पहनने के लिये हमारा पवित्रीकरण का वस्त्र, दोनों ही मसीह के प्रेम के वे दान हैं जो उसने दीनता से झुककर हमें दिए हैं।

सुसमाचार

तुम्हें जो कुछ चाहिए, वह सब सुसमाचार में है। क्या तुम्हें कुछ ऐसा चाहिए जो संकट में तुम्हें सम्भाले रखे? वह सुसमाचार में है: "जैसे तेरे दिन वैसी ही तेरी शक्ति हो।" क्या तुम्हें कुछ ऐसा चाहिए जो कर्तव्य के लिये तुम्हारा साहस बाँधे? जिस-जिस बात को सहने या पूरा करने के लिये परमेश्वर तुम्हें बुलाता है, उस सब के लिये पूरा-पूरा पर्याप्त अनुग्रह है। क्या तुम्हें कुछ ऐसा चाहिए जो तुम्हारी आशा की आँख को ज्योति से भर दे? ओह! सुसमाचार में आनन्द की ऐसी कौंध है जो तुम्हारी आँख से परमसुख की अमर ज्वालाएँ फिर चमका देती है। क्या तुम्हें कुछ ऐसा चाहिए जो परीक्षा के बीच तुम्हें स्थिर खड़ा रखे? सुसमाचार में वह है जो तुम्हें अटल बना सकता है, कि तुम प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ। ऐसी कोई लालसा, कोई स्नेह, कोई विचार, कोई इच्छा, कोई शक्ति नहीं जिसे सुसमाचार ने लबालब न भर दिया हो। स्पष्ट है कि सुसमाचार पूरे मनुष्यत्व के लिये ठहराया गया था: वह उसके हर अंग के अनुकूल है। उसमें सिर के लिये ज्ञान है; हृदय के लिये प्रेम है; पाँव के लिये मार्गदर्शन है।

बिना योग्यता का प्रेम

मसीह से इतना प्रेम करानेवाली और कोई बात नहीं जितना यह कि उसके प्रेम का बोध और उस प्रेम के प्रति अपनी अयोग्यता का बोध, दोनों साथ-साथ तौले जाएँ। यह सोचना मधुर है कि मसीह हमसे प्रेम करता है; परन्तु, ओह, यह स्मरण करना कि हम "केदार के तम्बुओं" के समान काले हैं, और तौभी वह हमसे प्रेम करता है! यह ऐसा विचार है जो भली-भाँति हमें और सब बातों से छुड़ाकर अलग कर सकता है।

अनुग्रह

अनुग्रह सदा अनुग्रह ही है, परन्तु वह कभी इतना अनुग्रहपूर्ण नहीं जान पड़ता जितना तब, जब हम उसे अपने अयोग्य आपे तक पहुँचा हुआ देखते हैं।

दया के बरतन

परमेश्वर के चुने हुओं को "दया के बरतन" कहा गया है। अब हम जानते हैं कि बरतन केवल ग्रहण करनेवाला होता है। "बरतन" सोता नहीं है, वह तो केवल उस वस्तु को रखने और थामनेवाला पात्र है जो उसमें उण्डेली जाती है। परमेश्वर के छुड़ाए हुए लोग ऐसे ही हैं; वे स्वभाव से सोते नहीं हैं जिनमें से कोई भली वस्तु फूट निकले; वे केवल ग्रहण करनेवाले हैं। एक समय वे अपने आप से भरे रहते हैं, परन्तु अनुग्रह उन्हें खाली कर देता है, और तब खाली बरतनों के रूप में वे परमेश्वर की भलाई के मार्ग में रखे जाते हैं; परमेश्वर उन्हें अपनी करुणा से लबालब भर देता है, और इस प्रकार वे उसकी दया के बरतन प्रमाणित होते हैं। बाद में वे "बरतनों" के रूप में दूसरों को दे सकते हैं, परन्तु वे केवल वही दे सकते हैं जो परमेश्वर ने उनमें डाला है; वे डरते और काँपते हुए अपने-अपने उद्धार का कार्य पूरा कर सकते हैं, परन्तु जब तक परमेश्वर ही अपनी सुइच्छा निमित्त उनके मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव न डाले, तब तक वे उसे पूरा नहीं कर सकते। वे कृतज्ञता से उमड़ सकते हैं, परन्तु केवल इसलिए कि परमेश्वर ने उन्हें अनुग्रह से भर दिया है; उनमें से पवित्रता की धाराएँ बह सकती हैं, परन्तु केवल इसलिए कि प्रभु उस भण्डार को उमड़ता हुआ बनाए रखता है। वे ग्रहण करनेवाले हैं, और केवल ग्रहण करनेवाले।

सुसमाचार की माँग

सुसमाचार परमेश्वर को देने की योजना नहीं, परन्तु परमेश्वर से पाने की योजना है। यह उसकी परिपूर्णता में से लेना है, उसके "उद्धार के सोतों" से पीना है, उसके भण्डार से ग्रहण करना है। हे पापी! स्मरण रखो कि तुम्हारे उद्धार के लिये परमेश्वर तुमसे केवल इतना ही चाहता है कि तुम ग्रहण करनेवाले बनो, और यह भी वही तुम्हें देता है, अर्थात् ग्रहण करने की सामर्थ्य। वह तुमसे कुछ करने को नहीं कहता, केवल यह कि तुम अपना खाली हाथ आगे बढ़ाओ, और जो कुछ तुम्हें चाहिए वह सब ले लो। वह तुम्हें यह आज्ञा नहीं देता कि अपने खत्ते भरो और धनी बन जाओ, परन्तु वह तुमसे केवल इतना कहता है कि अपनी कंगाली मान लो, और अपनी खाली कोठरियों के द्वार खोल दो, कि वह तुम पर ऐसी आशीष उण्डेले जिसके लिये तुम्हें मुश्किल से ही जगह मिलेगी। क्या तुमने यह सत्य सीखा है? क्या तुम परमेश्वर के हाथ से ग्रहण करनेवाले होकर जीने लगे हो? क्या तुम दया के फाटक पर दीनता से उद्धार ढूँढ़ते हुए खड़े हुए हो? क्योंकि यदि नहीं—यदि तुम अब तक परमेश्वर को अपने निकम्मे कामों में से कुछ देने के बदले उससे अनुग्रह का धन लेने को कभी तैयार नहीं हुए—यदि तुम उसकी सेंत-मेंत भलाई को पानेवाले बनने को तैयार नहीं, तो तुम मसीह के सुसमाचार जैसी किसी भी बात से बिलकुल अनजान हो।

अनुग्रह कहीं अधिक हुआ

इस संसार के इतिहास में ऐसा कोई समय कभी नहीं आया जब वह पूरी रीति से पाप के हाथ सौंप दिया गया हो। पृथ्वी पर परमेश्वर के दास सदा रहे हैं; कभी-कभी वे पचास-पचास करके गुफाओं में छिपाए गए होंगे, परन्तु वे कभी पूरी तरह मिटाए नहीं गए। अनुग्रह घट सकता है; धारा बहुत उथली हो सकती है, परन्तु वह कभी पूरी तरह सूखी नहीं। बादल कभी इतने सर्वव्यापी नहीं हुए कि दिन को ही छिपा दें। परन्तु वह समय शीघ्र निकट आ रहा है जब अनुग्रह हमारे सारे संसार पर फैल जाएगा, और "पृथ्वी यहोवा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसा जल समुद्र में भरा रहता है।" "अनुग्रह उससे भी कहीं अधिक हुआ;" और संसार ने पाप के कारण जो कुछ भी खोया है, उससे कहीं बढ़कर उसने अनुग्रह के द्वारा पाया है। यह सच है कि हम आनन्द की उस वाटिका से निकाल दिए गए हैं जहाँ शान्ति, प्रेम और सुख का महिमामय निवास था, परन्तु यीशु के द्वारा हमें उससे भी सुन्दर उत्तराधिकार मिला है। स्वर्ग के मैदान अपने सदा नये आनन्दों में, जो वे देते हैं, अदन की वाटिका के खेतों से बढ़कर हैं, और जीवन का वृक्ष, और सिंहासन से निकलनेवाली नदी, स्वर्गीय लोकों के निवासियों को अदन से भी बढ़कर आनन्द में बसा देते हैं। यह सच है कि पाप के कारण हम मृत्यु के अधीन हो गए हैं, तौभी क्या अनुग्रह ने ऐसी अमरता प्रगट नहीं की जिसके लिये हम आनन्द से मरने को तैयार हैं? आदम में खोया हुआ जीवन मसीह में फिर से, और उससे भी बढ़कर, लौटा दिया गया है। हमारे मूल वस्त्र आदम ने फाड़ डाले, परन्तु यीशु ने हमें ऐसी ईश्वरीय धार्मिकता पहनाई है जो मूल्य में सृजी हुई निर्दोषता के निष्कलंक वस्त्रों से भी कहीं बढ़कर है। हम पाप के कारण अपनी दीन और दुःखी दशा पर विलाप करते हैं, परन्तु इस विचार से आनन्दित होते हैं कि अब हम गिरने से पहले की अपेक्षा अधिक सुरक्षित हैं, हम यीशु के साथ ऐसे निकट सम्बन्ध में लाए गए हैं जिसका घमण्ड सृजे हुए प्राणी के रूप में हमारी स्थिति कभी नहीं कर सकती थी। हे यीशु! तूने हमारे लिये उससे भी विशाल उत्तराधिकार जीत लिया है जितना आदम ने कभी खोया था; तूने हमारा खज़ाना उससे भी बड़े धन से भर दिया है जितना हमारे पाप ने कभी उड़ाया था; तूने हमें आदर से लाद दिया है, और हमें ऐसे विशेषाधिकार दिए हैं जो हमारे स्वाभाविक जन्मसिद्ध अधिकार से कभी प्राप्त न हो सकते थे। सचमुच, सचमुच, "अनुग्रह उससे भी कहीं अधिक हुआ।"

सब कुछ अनुग्रह से

परमेश्वर के लोग, अनुग्रह से बुलाए जाने के बाद, मसीह यीशु में सुरक्षित रखे जाते हैं; उनकी "रक्षा परमेश्वर की सामर्थ्य से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये" की जाती है; उन्हें पाप करके अपना अनन्त उत्तराधिकार गँवा देने नहीं दिया जाता, परन्तु जैसे-जैसे परीक्षाएँ उठती हैं, उन्हें उनका सामना करने का बल दिया जाता है; और जब पाप उन्हें अशुद्ध करता है, तब वे फिर से धोए और दोबारा शुद्ध किए जाते हैं। परन्तु ध्यान दो, जिस कारण परमेश्वर अपने लोगों की रक्षा करता है, वह वही है जिसने उन्हें उसके लोग बनाया—उसका अपना सेंत-मेंत, सर्वोच्च अनुग्रह। यदि परीक्षा की घड़ी में तुम छुड़ाए गए हो, तो ठहरकर स्मरण करो कि तुम अपने ही कारण नहीं छुड़ाए गए। तुममें ऐसा कुछ न था जिसके कारण तुम छुटकारे के योग्य ठहरते। यदि तुम्हारी आवश्यकता की घड़ी में तुम्हें खिलाया गया और तुम्हारी घटी पूरी की गई, तो यह इसलिए नहीं कि तुम परमेश्वर के विश्वासयोग्य दास रहे हो, या इसलिए कि तुम प्रार्थना करनेवाले मसीही रहे हो; यह केवल और केवल परमेश्वर की दया के कारण है। वह तुम्हारे लिये जो कुछ करता है, उसके लिये वह तुम्हारे किसी ऐसे काम से प्रेरित नहीं होता जो तुम उसके लिये करते हो; तुम्हें आशीष देने का उसका कारण पूरी रीति से और सम्पूर्ण रूप से उसके अपने हृदय की गहराइयों में है। परमेश्वर धन्य हो, उसके लोग सुरक्षित रखे जाएँगे।

"न मृत्यु न नरक कभी हटा पाएगा उसके प्रियों को उसकी छाती से; उसके प्रेम की प्यारी गोद में वे सदा करेंगे विश्राम।"

परन्तु क्यों? क्या इसलिए कि वे पवित्र हैं? क्या इसलिए कि वे पवित्र किए गए हैं? क्या इसलिए कि वे भले कामों से परमेश्वर की सेवा करते हैं? नहीं, परन्तु इसलिए कि उसने, अपने सर्वोच्च अनुग्रह में, उनसे प्रेम किया है, प्रेम करता है, और अन्त तक प्रेम करता रहेगा। इस प्रकार उद्धार आदि से अन्त तक पूरी रीति से अनुग्रह ही का है। तो एक मसीही को कितना दीन होना चाहिए! अपने उद्धार में हमारा कुछ भी हाथ नहीं; परमेश्वर ही ने सब कुछ किया है। यह बिना योग्यता की दया है जो हमने पाई है। यह उसका असीम, अथाह प्रेम है जिसने उसे हमारा उद्धार करने को प्रेरित किया; और यही प्रेम और दया अब हमें सम्भाले रखती है। उसी की महिमा हो!

यह पापियों से मिलता है

"यह तो पापियों से मिलता है।" हे पाप से रोगी बेचारे पापी, यह तुम्हारे लिये कैसा मधुर वचन है! इसका उत्तर दो, उत्तर दो, और कहो, "तब तो निश्चय वह मुझे न ठुकराएगा।" मैं तुम्हें उत्साहित करूँ कि तुम मेरे स्वामी के पास आओ, कि तुम उसका महान प्रायश्चित्त ग्रहण करो, और उसकी सारी धार्मिकता पहन लो। ध्यान दो: जिनसे मैं बात कर रहा हूँ, वे सच्चे, वास्तविक, सचमुच के पापी हैं; वे नहीं जो साधारण अंगीकार के साथ केवल कहते हैं कि वे पापी हैं, परन्तु वे जो अपनी खोई हुई, नष्ट, आशाहीन दशा को अनुभव करते हैं। इन सबको खुले मन से और सेंत-मेंत बुलाया गया है कि वे यीशु मसीह के पास आएँ, और उसके द्वारा उद्धार पाएँ। आओ, बेचारे पापी, आओ। इसलिए आओ कि उसने कहा है कि वह तुम्हें ग्रहण करेगा। मैं तुम्हारे डर जानता हूँ; मैं जानता हूँ कि तुम अपने मन में कहते हो, "वह मुझे ठुकरा देगा। यदि मैं अपनी प्रार्थना उसके सामने रखूँ, तो वह मेरी न सुनेगा; यदि मैं उसकी दुहाई दूँ, तो कदाचित् आकाश पीतल का हो जाएगा; मैं इतना बड़ा पापी रहा हूँ कि वह मुझे अपने साथ रहने के लिये अपने घर में कभी न लेगा।" बेचारे पापी! ऐसा मत कहो; उसी ने यह आज्ञा प्रकाशित की है। क्या यह पर्याप्त नहीं? उसने कहा है, "जो कोई मेरे पास आएगा उसे मैं कभी न निकालूँगा।" क्या तुम उस प्रतिज्ञा पर भरोसा करके आगे नहीं बढ़ोगे? क्या तुम ऐसे दृढ़ जहाज़ में समुद्र की यात्रा पर न निकलोगे। उसने यह कहा है? यह प्रायः पवित्र लोगों की एकमात्र सान्त्वना रही है; इसी पर वे जीवित रहे, इसी पर वे मरे। उसने यह कहा है। क्या! क्या तुम सोचते हो कि मसीह तुमसे कहेगा कि वह तुम्हें ग्रहण करेगा, और फिर ऐसा न करेगा? क्या वह कहेगा, "भोज में आओ," और फिर तुम्हारे लिये द्वार बन्द कर देगा? नहीं; यदि उसने कहा है कि जो उसके पास आते हैं उनमें से किसी को वह न निकालेगा, तो निश्चिन्त रहो, वह तुम्हें निकाल नहीं सकता, निकालेगा नहीं। तो आओ, इसी आधार पर उसके प्रेम को परखो कि उसने यह कहा है। आओ, और मत डरो, क्योंकि स्मरण रखो, यदि तुम अपने आप को पापी अनुभव करते हो, तो वह अनुभव परमेश्वर का दान है; और इसलिए तुम उसके पास बड़ी निडरता से आ सकते हो जिसने तुम्हें खींचने के लिये इतना कुछ पहले ही कर दिया है। यदि तुम उद्धारकर्ता की अपनी आवश्यकता अनुभव करते हो, तो मसीह ने ही तुम्हें उसका अनुभव कराया है; यदि तुम मसीह के पीछे आने की इच्छा रखते हो, तो मसीह ने ही तुम्हें वह इच्छा दी है; यदि तुममें परमेश्वर की कुछ भी लालसा है, तो परमेश्वर ने ही तुम्हें वह लालसा दी है; यदि तुम मसीह के लिये आहें भर सकते हो, तो मसीह ने ही तुमसे आहें भरवाई हैं; यदि तुम मसीह के लिये रो सकते हो, तो मसीह ने ही तुम्हें रुलाया है। हाँ, यदि तुम उस मनुष्य की प्रबल इच्छा के साथ, जो डरता है कि वह उसे कभी न पा सकेगा, तौभी आशा रखता है कि शायद पा ले, केवल उसकी इच्छा ही कर सकते हो—यदि तुम उसके लिये केवल आशा ही रख सकते हो, तो वह आशा भी उसी ने तुम्हें दी है। और ओह, क्या तुम उसके पास न आओगे? राजा के कुछ उपहार अभी तुम्हारे पास हैं; आओ और जो कुछ उसने किया है उसी की दुहाई दो; जब तुम यह दुहाई देते हो, तो परमेश्वर के सामने कोई भी विनती कभी विफल नहीं हो सकती। उसके पास आओ, और तुम पाओगे कि जो लिखा है वह सच है, कि "यह तो पापियों से मिलता है।"

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