पूलों के बीच बीनी हुई बालें
भले काम और परिश्रम

अध्याय 18 · 8 मिनट का पठन

भले काम और परिश्रम

भले काम

जब एक बार मनुष्य का हृदय पवित्रशास्त्र के सूक्ष्मदर्शी यन्त्र के नीचे रखा जाता है, और हम उसे आत्मिक आँख से देखते हैं, तब हम उसे इतना घिनौना पाते हैं कि हमें पूरा निश्चय हो जाता है कि किसी अधर्मी और बिना मन फिराए हुए मनुष्य में भले कामों के पाए जाने की आशा करना उतना ही असम्भव है जितना समुद्र के बीचों-बीच आग जलती देखने की आशा करना। ये दोनों बातें आपस में मेल नहीं खातीं। हमारे भले काम, यदि हमारे पास कुछ हैं, तो सच्चे मन-फिराव से उपजते हैं; इतना ही नहीं, वे उस निरन्तर आत्मिक प्रभाव से भी उपजते हैं जो मन-फिराव के समय से लेकर मृत्यु की घड़ी तक हम पर काम करता रहता है। आह, हे मसीही, यदि तुम्हें प्रतिदिन नया अनुग्रह न मिलता, तो तुम्हारे पास कोई भले काम न होते! पहली घड़ी में तुम्हें जो अनुग्रह दिया गया था, वह आज फल उत्पन्न करने के लिये तुम्हें पर्याप्त न लगता। यह हमारे हृदयों में ऐसा कोई पेड़ लगाने के समान नहीं जो स्वभाव से आप ही आप फल लाता हो; परन्तु रस जड़ से, अर्थात् यीशु मसीह से, ऊपर चढ़ता है। हम अपने आप में पेड़ नहीं हैं, परन्तु हम जीवित दाखलता में लगी हुई डालियाँ हैं।

हमारे भले काम मसीह के साथ एकता से उपजते हैं। कोई मनुष्य अपने आप को यीशु के साथ जितना अधिक एक जानता और अनुभव करता है, वह उतना ही अधिक पवित्र होगा। मसीही का चरित्र मसीह के चरित्र के समान क्यों होता है? केवल इसी कारण कि वह प्रभु यीशु से जुड़ा और एक हुआ है। डाली में अंगूर क्यों लगते हैं? केवल इसलिए कि वह दाखलता में साटी गई है, और इस कारण वह तने के स्वभाव में सहभागी होती है। इसी प्रकार, हे मसीही, परमेश्वर के लिये फल लाने का तुम्हारे पास एक ही मार्ग है, कि तुम मसीह में साटे जाओ और उसके साथ एक हो जाओ। यदि तुम सोचते हो कि मसीह के साथ निरन्तर सहभागिता बनाए रखे बिना तुम पवित्रता में चल सकते हो, तो तुमने बड़ी भूल की है। यदि तुम पवित्र होना चाहते हो, तो तुम्हें यीशु के निकट रहकर जीना होगा। भले काम केवल वहीं से उपजते हैं। इसी से हमें कामों पर किसी भी प्रकार का भरोसा रखने के विरुद्ध सबसे प्रबल तर्क मिलते हैं; क्योंकि जब काम केवल परमेश्वर का दान हैं, तो किसी बिना मन फिराए हुए मनुष्य के लिये अपने आप में ऐसे कोई भले काम उत्पन्न करना कितना पूरी तरह असम्भव है। और यदि वे परमेश्वर के दान हैं, तो उनमें हमारी अपनी योग्यता कितनी थोड़ी हो सकती है!

अच्छी शुरुआत करो

मैंने ऐसे मनुष्यों को जाना है जो धर्म की दौड़ अपनी पूरी शक्ति से दौड़े, और फिर भी उसे हार गए, क्योंकि उन्होंने ठीक से आरम्भ नहीं किया था। तुम कहते हो, "भला, यह कैसे?" देखो, कुछ लोग ऐसे हैं जो अचानक ही धर्म में कूद पड़ते हैं। वे उसे जल्दी पा लेते हैं, और कुछ समय तक उसे थामे रहते हैं, और अन्त में उसे खो देते हैं, क्योंकि उन्होंने अपना धर्म सही रीति से नहीं पाया था। उन्होंने सुना है कि इससे पहले कि किसी मनुष्य का उद्धार हो सके, यह आवश्यक है कि पवित्र आत्मा की शिक्षा के द्वारा वह पाप का बोझ अनुभव करे, कि वह उसे मान ले, कि वह अपने कामों पर से सारी आशा त्याग दे, और केवल यीशु मसीह की ओर ताके। वे इन सब बातों को अप्रिय आरम्भिक औपचारिकताएँ समझते हैं, और इसलिए, इससे पहले कि वे पश्चाताप पर ध्यान दें, इससे पहले कि पवित्र आत्मा ने उनमें कोई अच्छा काम किया हो, इससे पहले कि वे सब कुछ छोड़कर मसीह पर भरोसा करने तक पहुँचाए गए हों, वे धर्म का अंगीकार कर लेते हैं। यह बिना किसी पूँजी या माल के व्यापार आरम्भ करने के समान है, और इसमें दिवाला निकलना ही है। यदि किसी मनुष्य के पास आरम्भ करने को पूँजी न हो, तो वह थोड़े समय तक अच्छा दिखावा कर सकता है, परन्तु वह हाण्डी के नीचे जलते हुए काँटों की चरचराहट के समान होगा,—थोड़ी देर तक बहुत शोर और बहुत उजियाला, परन्तु अन्त में वह अन्धकार में बुझ जाएगा। कितने ऐसे हैं जो कभी यह आवश्यक नहीं समझते कि भीतर हृदय में काम हो! तो भी हम स्मरण रखें कि ऐसा मनुष्य कभी नहीं हुआ जिसका हृदय बदला गया हो और जिसका हृदय पहले दुःखी न हुआ हो। पवित्र आनन्द के ऊँचे बाँध पर निकल आने से पहले हमें पाप-बोध की उस अन्धेरी सुरंग से होकर जाना ही पड़ता है; उद्धार की शहरपनाह के साथ-साथ दौड़ने से पहले हमें निराशा के दलदल में से होकर जाना ही पड़ता है। बोने से पहले जोतना अवश्य है; कटनी से पहले बहुत-सा पाला और बहुत-सी तीखी बौछारें अवश्य पड़ती हैं। परन्तु हम प्रायः उन छोटे बच्चों के समान करते हैं जो झाड़ियों से फूल तोड़कर उन्हें बिना जड़ के अपनी क्यारियों में लगा देते हैं; फिर वे कहते हैं कि उनकी छोटी-सी वाटिका कितनी सुन्दर और कितनी मनोहर है; परन्तु थोड़ी देर ठहरो, और उनके सब फूल मुरझा जाते हैं, क्योंकि उनकी कोई जड़ नहीं। यह सब सही आरम्भ न होने का, "धर्म का मूल" न होने का परिणाम है। बाहरी धर्म का, उसके फूल और पत्ते का, क्या लाभ, जब तक हममें "धर्म का मूल" न हो—जब तक आत्मा के हल से हमारी जुताई न हुई हो, और फिर हममें सुसमाचार का पवित्र बीज न बोया गया हो, इस आशा में कि बहुतायत की फसल उत्पन्न हो? मसीही दौड़ दौड़ने में अच्छी शुरुआत होनी ही चाहिए, क्योंकि जब तक आरम्भ ठीक न हो, जीतने की कोई आशा नहीं।

सेंत-मेंत दो

हे मसीही, जब कभी तुम्हारा मन परमेश्वर की कलीसिया से लोभ के कारण कुछ रोक रखने को करे, तो अपने उद्धारकर्ता का ध्यान करो, जिसने तुम्हारी सेवा के लिये अपना सब कुछ दे दिया! और क्या तुम तब—जब तुम ऐसा उत्तम आत्म-त्याग देखते हो—क्या तुम तब भी स्वार्थी हो सकते हो, और जब झुण्ड के दीनों की माँगें तुम्हारे सामने रखी जाती हैं, तब अपनी स्वादिष्ट वस्तुओं को उनकी आवश्यकताओं से अधिक मूल्यवान समझ सकते हो? यीशु को स्मरण करो; सोचो कि तुम उसे अपनी ओर देखते और यह कहते देख रहे हो, "मैंने तेरे लिये अपने आपको दे दिया, और क्या तू अपने आप को मुझसे रोक रखता है? क्योंकि यदि तू ऐसा करता है, तो तू मेरे प्रेम को उसकी सारी ऊँचाई, और गहराई, और लम्बाई, और चौड़ाई में नहीं जानता।"

परमेश्वर की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता

मसीही के लिये परमेश्वर की इच्छा के समान प्रबल कोई तर्क नहीं। परमेश्वर की इच्छा ही विश्वासी की व्यवस्था है। वह यह नहीं पूछता कि इससे उसे क्या लाभ होगा—दूसरों पर इसका क्या अच्छा प्रभाव पड़ेगा, परन्तु वह केवल इतना कहता है, "क्या मेरे पिता ने इसकी आज्ञा दी है?" और उसकी प्रार्थना यह होती है, "हे पवित्र आत्मा, आज्ञा मानने में मेरी सहायता कर, इसलिए नहीं कि मैं देखता हूँ कि इसमें मेरी कैसी भलाई होगी, परन्तु केवल इसलिए कि तू आज्ञा देता है।" परमेश्वर की आज्ञाओं को पूरा करना मसीही का विशेषाधिकार है, "उसके वचन को मानते और पूरा करते हुए।"

आनन्द की आज्ञा

"यहोवा को अपने सुख का मूल जान।" एक ही आज्ञा की यह व्यवस्था कड़े पत्थर की पटियाओं पर लिखी जानेवाली कोई कठोर व्यवस्था नहीं, परन्तु इसमें ऐसी विधि है जो अपनी झिलमिलाती चमक के कारण कटैलों और मोतियों पर लिखे जाने योग्य है। "यहोवा को अपने सुख का मूल जान।" जब सुख मानना कर्तव्य बन जाता है, तब कर्तव्य भी निश्चय ही सुख बन जाता है। जब आनन्दित रहना मेरा कर्तव्य हो जाए, और मुझे प्रसन्न रहने की स्पष्ट आज्ञा मिली हो, तब यदि मैं अपने ही आनन्द को ठुकराऊँ और अपने ही परम सुख से मुँह मोड़ूँ, तो मैं सचमुच मूर्ख ठहरूँगा। आह, हमारा परमेश्वर कैसा है, जिसने आनन्दित रहना हमारा कर्तव्य ठहराया है! कैसा अनुग्रहकारी परमेश्वर है, जो किसी आज्ञाकारिता को अपने ग्रहण के इतना योग्य नहीं समझता जितना उस हर्ष-भरी आज्ञाकारिता को जो आनन्दित हृदय से की जाती है। "यहोवा को अपने सुख का मूल जान।"

आलस्य

कुछ परीक्षाएँ परिश्रमी लोगों पर आती हैं, परन्तु आलसी पर सब परीक्षाएँ टूट पड़ती हैं। आलसी मसीहियों की परीक्षा शैतान उतनी नहीं करता, जितना वे स्वयं शैतान को उकसाते हैं कि वह उनकी परीक्षा करे। आलस्य हृदय का द्वार अधखुला छोड़ देता है और शैतान से भीतर आने को कहता है; परन्तु यदि हम भोर से रात तक काम में लगे रहें, तो यदि शैतान भीतर आए भी, तो उसे द्वार तोड़कर ही आना पड़ेगा। प्रभुता-सम्पन्न अनुग्रह के अधीन, और विश्वास के बाद, परीक्षा के विरुद्ध इस आज्ञा के पालन से उत्तम कोई ढाल नहीं, कि "प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरे रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।"

उपयोगी जीवन

मसीह, मेरा स्वामी, भलाई करता फिरता है, और यदि तुम उसके साथ चलना चाहते हो, तो तुम्हें भी उसी काम पर फिरना होगा।

जीवन में दिखनेवाला धर्म

जब तक तुम्हारा धर्म दिखाई न दे, तब तक मैं उसका अधिक मूल्य नहीं आँकूँगा। दीपक बोलते नहीं, परन्तु वे चमकते हैं: प्रकाश-स्तम्भ कोई ढोल नहीं बजाता, वह कोई घण्टा नहीं पीटता; तो भी दूर जल के पार उसकी मित्र-भरी चिंगारी नाविक को दिखाई देती है। इसी प्रकार तुम्हारे काम तुम्हारे धर्म को चमकाकर दिखाएँ। तुम्हारे जीवन का मुख्य उपदेश तुम्हारे सारे आचरण से उजागर हो, तो वह अवश्य ही उजियाला फैलाएगा।

मसीही परिश्रम

हम पवित्रशास्त्र में पाते हैं कि प्रमुख पवित्र जनों को जो बड़े-बड़े दर्शन मिले, उनमें से अधिकतर तब मिले जब वे काम में लगे हुए थे। मूसा अपने पिता की भेड़-बकरियाँ चरा रहा था जब उसने जलती हुई झाड़ी देखी; यहोशू यरीहो नगर के चारों ओर घूम रहा है जब उसकी भेंट यहोवा के दूत से होती है; याकूब प्रार्थना में है, और परमेश्वर के दूत उसे दिखाई देते हैं; गिदोन गेहूँ झाड़ रहा है, और एलीशा हल जोत रहा है, जब प्रभु उन्हें बुलाता है; मत्ती चुंगी की चौकी पर बैठा है, जब उसे यीशु के पीछे हो लेने को कहा जाता है; और याकूब और यूहन्ना मछलियाँ पकड़ रहे हैं। मनुष्यों के प्राणों का सर्वशक्तिमान प्रेमी आलसी लोगों पर अपने आप को प्रकट करने का आदी नहीं। जो आलसी और निठल्ला है, वह अपने उद्धारकर्ता की मधुर संगति पाने की आशा नहीं कर सकता।

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