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नवम्बर का महीना

अध्याय 12 · 41 मिनट का पठन

नवम्बर का महीना

1 नवम्बर

सिद्धता और सुरक्षा

“तुम्हारा बुलानेवाला विश्वासयोग्य है, और वह ऐसा ही करेगा” 1 थिस्सलुनीकियों 5:24

वह क्या करेगा? वह हमें पूरी रीति से पवित्र करेगा। इससे पहले का पद देखो। वह शुद्ध करने के काम को तब तक आगे बढ़ाता रहेगा जब तक हम हर अंग में सिद्ध न हो जाएँ। वह इस वचन को पूरा करेगा, कि “तुम्हारी आत्मा, प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहें।” वह हमें अनुग्रह से गिरने न देगा, और न पाप के अधिकार के अधीन आने देगा। ये कैसे बड़े उपकार हैं! ऐसे अकथनीय दानों के देनेवाले की आराधना करना हमें उचित ही है।

यह कौन करेगा? वह प्रभु, जिसने हमें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में, और पाप की मृत्यु में से निकालकर मसीह यीशु में अनन्त जीवन में बुलाया है। केवल वही यह कर सकता है: ऐसी सिद्धता और सुरक्षा केवल सारे अनुग्रह के परमेश्वर ही से आ सकती है।

वह ऐसा क्यों करेगा? क्योंकि वह “विश्वासयोग्य” है—अपनी उस प्रतिज्ञा के प्रति विश्वासयोग्य जो विश्वासी का उद्धार करने के लिये दी गई है; अपने पुत्र के प्रति विश्वासयोग्य, जिसका प्रतिफल यह है कि उसके लोग उसके सामने निर्दोष खड़े किए जाएँ; उस काम के प्रति विश्वासयोग्य जो उसने हमारी प्रभावशाली बुलाहट के द्वारा हम में आरम्भ किया है। पवित्र लोग अपनी विश्वासयोग्यता पर नहीं, वरन् प्रभु की अपनी विश्वासयोग्यता पर भरोसा रखते हैं।

आ, मेरे प्राण, एक नीरस महीने का आरम्भ करने के लिये यह कैसा बड़ा भोज है। बाहर चाहे कोहरा हो, पर भीतर धूप होनी चाहिए।

2 नवम्बर

स्वर्गीय धन

“जो लोग खरी चाल चलते हैं; उनसे वह कोई अच्छी वस्तु रख न छोड़ेगा” भजन संहिता 84:11

बहुत सी मनभावनी वस्तुएँ प्रभु रोक सकता है, परन्तु “कोई अच्छी वस्तु” वह रख न छोड़ेगा। हमारे लिये क्या अच्छा है, इसका सबसे अच्छा न्यायी वही है। कुछ वस्तुएँ निश्चय ही अच्छी हैं, और ये हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा केवल माँगकर पा सकते हैं।

पवित्रता एक अच्छी वस्तु है, और इसे वह हम में सेंत-मेंत उत्पन्न करेगा। बुरी प्रवृत्तियों, उग्र स्वभाव और बुरी आदतों पर जय वह आनन्द से देगा, और हमें उसके बिना नहीं रहना चाहिए।

पूरा निश्चय वह प्रदान करेगा, और अपने साथ निकट की संगति, और सारी सच्चाई तक पहुँच, और दया के सिंहासन के सामने प्रबल होनेवाला साहस भी। यदि ये हमारे पास नहीं हैं, तो इसका कारण ग्रहण करने के लिये विश्वास की घटी है, न कि परमेश्वर की देने में कोई अनिच्छा। शान्त मन, स्वर्गीय मनोदशा, बड़ा धीरज और उत्कट प्रेम—ये सब वह पवित्र परिश्रम को देगा।

पर भली-भाँति ध्यान दो कि हमें “खरी चाल” चलनी ही होगी। न कोई दोहरे उद्देश्य हों, न टेढ़े व्यवहार; न कपट, न छल। यदि हम मैली चाल चलें तो परमेश्वर हम पर उपकार नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसा करना पाप को इनाम देना होगा। खराई का मार्ग स्वर्गीय धन का मार्ग है—ऐसा धन जो इतना बड़ा है कि उसमें हर एक अच्छी वस्तु सम्मिलित है।

प्रार्थना में आगे रखने के लिये यह कैसी प्रतिज्ञा है! आओ, हम घुटनों पर आ जाएँ।

3 नवम्बर

परमेश्वर के समय में

“क्योंकि इस दर्शन की बात नियत समय में पूरी होनेवाली है, वरन् इसके पूरे होने का समय वेग से आता है; इसमें धोखा न होगा। चाहे इसमें विलम्ब भी हो, तो भी उसकी बाट जोहते रहना; क्योंकि वह निश्चय पूरी होगी और उसमें देर न होगी” हबक्कूक 2:3

दया धीमी लग सकती है, पर वह निश्चित है। प्रभु ने अपनी अचूक बुद्धि से अपनी अनुग्रहकारी सामर्थ्य के प्रगट होने का एक समय ठहराया है, और परमेश्वर का समय ही सबसे अच्छा समय है। हम जल्दी में रहते हैं; आशीष का दर्शन हमारी अभिलाषा को भड़काता है और हमारी लालसाओं को उतावला कर देता है; परन्तु प्रभु अपने ठहराए हुए समयों को निभाएगा। वह न कभी अपने समय से पहले आता है, न कभी पीछे।

यहाँ परमेश्वर के वचन की चर्चा एक जीवित वस्तु के समान की गई है, जो बोलेगा और आएगा। वह कभी मरा हुआ अक्षर नहीं है, जैसा हम उसके पूरा होने की लम्बी बाट जोहते-जोहते डरने लगते हैं। जीवित वचन जीवित परमेश्वर की ओर से मार्ग में है, और यद्यपि वह देर करता हुआ लगे, वास्तव में वह देर नहीं कर रहा। परमेश्वर की रेलगाड़ी समय से पीछे नहीं चलती। यह केवल धीरज की बात है, और हम शीघ्र ही अपनी आँखों से प्रभु की विश्वासयोग्यता देख लेंगे। उसकी कोई प्रतिज्ञा विफल न होगी; “इसमें धोखा न होगा।” उसकी कोई प्रतिज्ञा चुप्पी में खो न जाएगी; “वह बोलेगा।” विश्वास करनेवाले कान से वह कैसी शान्ति की बातें कहेगा! उसकी किसी प्रतिज्ञा को उस हुंडी के समान फिर से नया करवाने की आवश्यकता न होगी जिसका भुगतान नियत दिन पर न हो सका हो—“उसमें देर न होगी।”

आ, मेरे प्राण, क्या तू अपने परमेश्वर की बाट नहीं जोह सकता? उसमें विश्राम कर, और अकथनीय शान्ति में चुपचाप रह।

4 नवम्बर

गड्ढे तुम खोदो

“और उसने कहा, इस नाले में तुम लोग इतना खोदो, कि इसमें गड्ढे ही गड्ढे हो जाएँ। क्योंकि यहोवा यह कहता है, तुम्हारे सामने न तो वायु चलेगी, और न वर्षा होगी; तो भी यह नदी पानी से भर जाएगी; और अपने गाय बैलों और पशुओं समेत तुम पीने पाओगे” 2 राजाओं 3:16, 17

तीन सेनाएँ प्यास से नाश हो रही थीं, और प्रभु ने बीच में पड़कर उन्हें सम्भाला। यद्यपि उसने न बादल भेजा और न वर्षा, तो भी उसने बहुतायत से पानी दिया। वह साधारण उपायों पर निर्भर नहीं है, वरन् अपनी बुद्धि और सामर्थ्य के नये-नये कामों से अपने लोगों को चकित कर सकता है। इस प्रकार हमें परमेश्वर का उससे कहीं अधिक दर्शन कराया जाता है जितना साधारण रीतियाँ प्रगट कर सकती थीं। यद्यपि प्रभु उस रीति से हमारे लिये प्रगट न हो जिसकी हम आशा करते, या जिसे चाहते, या जिसकी कल्पना करते हैं, तो भी वह किसी न किसी रीति से हमारा प्रबन्ध करेगा। यह हमारे लिये बड़ी आशीष है कि हम गौण कारणों की ओर ताकने से ऊपर उठाए जाएँ, जिससे उस महान आदिकारण के मुख की ओर निहार सकें।

क्या आज हमारे पास इतना अनुग्रह है कि हम ऐसे गड्ढे खोदें जिनमें ईश्वरीय आशीष बह सके? हाय! हम प्रायः सच्चे और व्यावहारिक विश्वास को प्रगट करने में चूक जाते हैं। आओ, आज हम प्रार्थना के उत्तरों की बाट में चौकस रहें। जैसे वह बालिका, जो वर्षा के लिये प्रार्थना करने सभा में गई, अपने साथ छाता लेती गई; वैसे ही आओ, हम सचमुच और व्यावहारिक रूप से आशा रखें कि प्रभु हमें आशीष देगा। आओ, हम इस नाले में गड्ढे ही गड्ढे खोद दें, और आशा रखें कि वे सब भर जाएँगे।

5 नवम्बर

जो दुःखदायी है वह समाप्त होगा

“मैं सदा मुकद्दमा न लड़ता रहूँगा, न सर्वदा क्रोधित रहूँगा; क्योंकि आत्मा मेरे बनाए हुए हैं और जीव मेरे सामने मूर्छित हो जाते हैं” यशायाह 57:16

हमारा स्वर्गीय पिता हमें सिखाना चाहता है, हमारा नाश करना नहीं। हमसे उसके मुकद्दमे के पीछे हमारे प्रति एक कृपालु अभिप्राय छिपा है। वह सदा हमारे विरुद्ध हथियार उठाए न रहेगा। हम सोचते हैं कि प्रभु की ताड़ना लम्बी है, पर इसका कारण यह है कि हमारा धीरज छोटा है। उसकी करुणा सदा की है, पर उसका मुकद्दमा सदा का नहीं। रात चाहे अपनी थकानेवाली लम्बाई तक खिंचती रहे, पर अन्त में उसे आनन्दमय दिन के लिये स्थान देना ही होगा। जैसे यह मुकद्दमा केवल कुछ समय के लिये है, वैसे ही वह क्रोध भी जो इसका कारण है, केवल क्षण भर का है। प्रभु अपने चुने हुओं से इतना प्रेम करता है कि वह उन पर सदा क्रोधित नहीं रह सकता।

यदि वह हमसे सदा वैसा ही व्यवहार करे जैसा वह कभी-कभी करता है, तो हम पूरी रीति से मूर्छित हो जाएँ, और निराश होकर मृत्यु के फाटकों तक उतर जाएँ। हियाव बाँधो, प्रिय हृदय! प्रभु शीघ्र ही अपनी डाँट समाप्त करेगा। धीरज धरे रहो, क्योंकि प्रभु तुम्हें सम्भाले रहेगा, और पार भी ले जाएगा। जिसने तुम्हें बनाया वह जानता है कि तुम कितने दुर्बल हो, और कितना थोड़ा सह सकते हो। जिसे उसने इतनी कोमलता से रचा है, उसे वह कोमलता ही से सम्भालेगा। इसलिए इस दुःखदायी वर्तमान के कारण मत डरो, क्योंकि वह शीघ्रता से एक सुखद भविष्य की ओर बढ़ रहा है। जिसने तुम्हें मारा, वही तुम्हें चंगा करेगा; उसके थोड़े से क्रोध के पीछे बड़ी दया आएगी।

6 नवम्बर

आनन्द और मनोरथ

“यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा” भजन संहिता 37:4

परमेश्वर में आनन्द मनुष्य को बदल देने की सामर्थ्य रखता है, और उसे हमारे पतित स्वभाव की भद्दी अभिलाषाओं से ऊपर उठा देता है। यहोवा में आनन्द न केवल अपने आप में मधुर है, वरन् वह सारे प्राण को मधुर बना देता है, यहाँ तक कि हृदय की लालसाएँ ऐसी हो जाती हैं कि प्रभु उन्हें पूरा करने की प्रतिज्ञा निःसंकोच कर सकता है। क्या वह आनन्द महान नहीं जो हमारे मनोरथों को तब तक ढालता रहता है जब तक वे परमेश्वर के मनोरथों के समान न हो जाएँ?

हमारी मूर्खता की रीति यह है कि पहले अभिलाषा करें, और फिर जिसकी अभिलाषा की है उसे पाने के लिये जुट जाएँ। हम परमेश्वर की रीति से काम नहीं करते, जो यह है कि पहले उसी को खोजें, और फिर आशा रखें कि सब वस्तुएँ हमें मिल जाएँगी। यदि हम अपने हृदय को परमेश्वर से इतना भर जाने दें कि वह आनन्द से उमड़ने लगे, तो प्रभु आप ही इस बात की चिन्ता करेगा कि हमें किसी अच्छी वस्तु की घटी न हो। आनन्द की खोज में बाहर भटकने के बदले, आओ, हम परमेश्वर के साथ घर पर ही रहें, और अपने ही कुण्ड से पानी पिया करें। वह हमारे लिये हमारे सब मित्रों से कहीं अधिक कर सकता है। समय और इन्द्रियों की तुच्छ वस्तुओं के लिये कुढ़ते और तरसते फिरने से यह अच्छा है कि हम केवल परमेश्वर में सन्तुष्ट रहें। कुछ समय तक हमें निराशाएँ मिल सकती हैं; परन्तु यदि वे हमें प्रभु के और निकट ले आएँ, तो वे अत्यन्त मूल्यवान समझने योग्य हैं, क्योंकि अन्त में वे हमारे सब उचित मनोरथों की पूर्ति हमारे लिये निश्चित कर देंगी।

7 नवम्बर

सच्ची दीनता का प्रतिफल

“जो अपने आपको छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा” लूका 18:14

हमारे लिये अपने आपको छोटा बनाना कठिन नहीं होना चाहिए, क्योंकि हमारे पास घमण्ड करने को है ही क्या? हमें बिना कहे ही सबसे नीचा स्थान ले लेना चाहिए। यदि हम समझदार और ईमानदार हैं तो हम अपनी दृष्टि में छोटे होंगे। विशेषकर प्रार्थना में प्रभु के सामने हम सिकुड़कर कुछ भी न रह जाएँगे। वहाँ हम किसी योग्यता की बात नहीं कर सकते, क्योंकि हमारे पास कोई है ही नहीं: हमारी एकमात्र पुकार दया ही के लिये होनी चाहिए: “हे परमेश्वर मुझ पापी पर दया कर!”

यहाँ सिंहासन से एक ढाढ़स देनेवाला वचन है। यदि हम अपने आपको छोटा बनाएँ तो प्रभु हमें बड़ा करेगा। हमारे लिये ऊपर जाने का मार्ग ढलान से नीचे की ओर है। जब हमसे अहं उतार लिया जाता है तब हमें दीनता पहनाई जाती है, और यही सबसे उत्तम वस्त्र है। प्रभु हमें मन की शान्ति और आनन्द में ऊँचा उठाएगा; वह हमें अपने वचन के ज्ञान और अपनी संगति तक ऊँचा उठाएगा; वह हमें निश्चित क्षमा और धर्मी ठहराए जाने के आनन्द में ऊँचा उठाएगा। प्रभु अपने सम्मान उन्हीं पर रखता है जो उन्हें देनेवाले के आदर के लिये पहन सकते हैं। वह उपयोगिता, स्वीकृति और प्रभाव उन्हें देता है जो उनसे फूल न जाएँगे, वरन् बड़ी जिम्मेदारी के बोध से और भी नम्र हो जाएँगे। न परमेश्वर और न मनुष्य उस मनुष्य को ऊपर उठाना चाहेगा जो अपने आपको ऊपर उठाता है; परन्तु परमेश्वर और भले मनुष्य दोनों मिलकर नम्र योग्यता का आदर करते हैं।

हे प्रभु, मुझे अपनी दृष्टि में नीचे गिरा दे, कि मैं तुझमें ऊँचा उठूँ।

8 नवम्बर

अनुग्रह की महानता

“मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है” 2 कुरिन्थियों 12:9

हमारी निर्बलता को मूल्यवान समझना चाहिए, क्योंकि वह ईश्वरीय सामर्थ्य के लिये स्थान बनाती है। यदि हमने स्वभाव की निर्बलता का अनुभव न किया होता, तो शायद हम अनुग्रह की सामर्थ्य को कभी न जान पाते। शरीर के काँटे और शैतान के दूत के लिये प्रभु धन्य हो, जब वे हमें परमेश्वर की सामर्थ्य की ओर हाँक ले जाते हैं।

यह हमारे प्रभु के अपने होंठों से निकला एक अनमोल वचन है। इसने लेखक को आनन्द के मारे हँसा दिया है। परमेश्वर का अनुग्रह मेरे लिये बहुत है! मैं तो समझता हूँ कि अवश्य है। क्या आकाश पक्षी के लिये बहुत नहीं, और समुद्र मछली के लिये बहुत नहीं? वह सर्वपर्याप्त मेरी बड़ी से बड़ी आवश्यकता के लिये भी पर्याप्त है। जो पृथ्वी और स्वर्ग के लिये पर्याप्त है, वह निश्चय ही मुझ जैसे एक बेचारे कीड़े की दशा को सम्भाल सकता है।

तो आओ, हम अपने परमेश्वर और उसके अनुग्रह पर टिक जाएँ। यदि वह हमारे दुःख को दूर न करे, तो वह हमें उसे सहने की सामर्थ्य देगा। उसकी सामर्थ्य हम में तब तक उण्डेली जाएगी जब तक वह कीड़ा पहाड़ों को दाँव न डाले; और एक तुच्छ सा प्राणी सब ऊँचों और बलवन्तों पर जयवन्त न हो जाए। हमारे लिये अपनी सामर्थ्य की अपेक्षा परमेश्वर की सामर्थ्य का होना अच्छा है; क्योंकि यदि हम जितने हैं उससे हजार गुना अधिक बलवन्त होते, तो भी शत्रु के सामने वह सब कुछ भी न ठहरता; और यदि हम जितने हैं उससे भी अधिक निर्बल हो सकते, जो लगभग असम्भव है, तो भी हम मसीह के द्वारा सब कुछ कर सकते थे।

9 नवम्बर

आवश्यक ज्ञान

“और वे जानेंगे कि मैं परमेश्वर यहोवा, उनके संग हूँ, और वे जो इस्राएल का घराना है, वे मेरी प्रजा हैं, मुझ परमेश्वर यहोवा की यही वाणी हैं” यहेजकेल 34:30

प्रभु की निज प्रजा होना एक उत्तम आशीष है, पर यह जानना कि हम ऐसे हैं, एक शान्तिदायक आशीष है। यह आशा रखना कि परमेश्वर हमारे संग है एक बात है, और यह जानना कि वह हमारे संग है दूसरी बात। विश्वास हमें बचाता है, पर निश्चय हमें तृप्त करता है। जब हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं तब हम उसे अपना परमेश्वर मान लेते हैं; पर उसका आनन्द हमें तब मिलता है जब हम जान लेते हैं कि वह हमारा है, और हम उसके हैं। किसी भी विश्वासी को केवल आशा और भरोसा रखने से सन्तुष्ट नहीं रहना चाहिए; उसे प्रभु से विनती करनी चाहिए कि वह उसे पूरे निश्चय तक ले चले, जिससे आशा की बातें निश्चय की बातें बन जाएँ।

जब हम वाचा की आशीषों का आनन्द लेते हैं, और अपने प्रभु यीशु को अपने लिये एक नामी पौधे के समान उगाया हुआ देखते हैं, तभी हम अपने प्रति परमेश्वर के अनुग्रह का स्पष्ट ज्ञान पाते हैं। व्यवस्था से नहीं, वरन् अनुग्रह से हम सीखते हैं कि हम प्रभु की प्रजा हैं। आओ, हम अपनी आँखें सदा सेंत-मेंत अनुग्रह की ओर लगाए रहें। विश्वास का निश्चय व्यवस्था के कामों से कभी नहीं आ सकता। वह सुसमाचार का गुण है, और हम तक केवल सुसमाचार की रीति से ही पहुँच सकता है। आओ, हम अपने भीतर न देखें। आओ, हम केवल प्रभु की ओर देखें। जैसे-जैसे हम यीशु को देखते हैं, वैसे-वैसे हम अपना उद्धार देखेंगे।

हे प्रभु, हम पर अपने प्रेम की ऐसी बाढ़ भेज कि हम सन्देह और भय के कीचड़ से परे बहा दिए जाएँ।

10 नवम्बर

बिना ठोकर खाए चलना

“वह तेरे पाँव को टलने न देगा” भजन संहिता 121:3

यदि प्रभु ऐसा होने न दे, तो न मनुष्य और न शैतान ऐसा कर सकते हैं। यदि वे हमें लज्जाजनक रीति से गिरा सकते, हमें हमारे स्थान से खदेड़ सकते, और हमें विस्मृति की कब्र में गाड़ सकते, तो वे कितने आनन्दित होते! वे मनमाने ढंग से ऐसा कर सकते थे, यदि केवल एक बाधा न होती, और वह केवल एक ही है: प्रभु ऐसा होने न देगा; और यदि वह ऐसा होने न दे, तो हमें यह सहना न पड़ेगा।

जीवन का मार्ग आल्प्स पर्वतों के बीच यात्रा करने के समान है। पहाड़ी पगडण्डियों पर पाँव फिसलने का खतरा निरन्तर बना रहता है। जहाँ मार्ग ऊँचा होता है वहाँ सिर चकराने लगता है, और तब पाँव शीघ्र फिसल जाते हैं: कहीं-कहीं ऐसे स्थान हैं जो काँच के समान चिकने हैं, और कहीं ढीले पत्थरों से ऊबड़-खाबड़, और इन दोनों में से किसी में भी गिरने से बचना कठिन है। जिसे जीवन भर सीधा खड़े रहने और बिना ठोकर खाए चलने की सामर्थ्य दी जाती है, उसके पास धन्यवाद करने का सबसे अच्छा कारण है। गड्ढों और फन्दों, निर्बल घुटनों, थके पाँवों और धूर्त शत्रुओं के बीच परमेश्वर की कोई भी सन्तान एक घण्टे भी स्थिर खड़ी न रह पाती, यदि वह विश्वासयोग्य प्रेम न होता जो उसके पाँव को टलने न देगा। “हजार फन्दों के बीच खड़ा हूँ मैं, तेरे हाथ से थामा और रक्षित; वह अदृश्य हाथ मुझे थामे रहेगा, और तेरे पवित्र पर्वत तक ले जाएगा।”

11 नवम्बर

प्रभु के स्वतन्त्र जन

“तब तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के अधीन नहीं वरन् अनुग्रह के अधीन हो” रोमियों 6:14

यदि पाप का बस चले तो वह राज्य करेगा: हृदय के सिंहासन से नीचे का कोई भी स्थान उसे सन्तुष्ट नहीं कर सकता। कभी-कभी हम डरते हैं कि वह हम पर जय पा लेगा, और तब हम प्रभु की दोहाई देते हैं, “किसी अनर्थ बात को मुझ पर प्रभुता न करने दे।” यह उसका शान्ति देनेवाला उत्तर है, “तुम पर पाप की प्रभुता न होगी। वह तुम पर आक्रमण कर सकता है, और तुम्हें घायल भी कर सकता है; पर वह तुम पर कभी अपना राज्य स्थापित न कर पाएगा।”

यदि हम व्यवस्था के अधीन होते, तो हमारा पाप बल पकड़ता और हमें अपनी सामर्थ्य के अधीन रखता; क्योंकि पाप का दण्ड यही है कि मनुष्य पाप की सामर्थ्य के अधीन आ जाता है। पर क्योंकि हम अनुग्रह की वाचा के अधीन हैं, इसलिए वाचा की निश्चित घोषणा के द्वारा हम जीवते परमेश्वर से दूर हो जाने से सुरक्षित रखे गए हैं। हमसे अनुग्रह की प्रतिज्ञा की गई है, जिसके द्वारा हम अपने भटकावों से लौटाए जाते, अपनी अशुद्धताओं से शुद्ध किए जाते, और आदतों की जंजीरों से छुड़ाए जाते हैं।

यदि हम अब भी अनन्त जीवन के लिये परिश्रम करनेवाले दास होते, तो हम निराश होकर पड़े रह सकते थे और “मिस्रियों की सेवा करने में सन्तुष्ट” हो सकते थे; परन्तु क्योंकि हम प्रभु के स्वतन्त्र जन हैं, इसलिए हम अपनी भ्रष्टताओं और परीक्षाओं से लड़ने का साहस बाँधते हैं, यह निश्चय जानकर कि पाप हमें फिर कभी अपने वश में न कर सकेगा। परमेश्वर आप ही हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्त करता है, जिसकी महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

12 नवम्बर

पवित्र किए हुए प्राण सन्तुष्ट रहते हैं

“मेरी प्रजा मेरे उत्तम दानों से सन्तुष्ट होगी, यहोवा की यही वाणी है” यिर्मयाह 31:14

ध्यान दो कि “मेरा” शब्द यहाँ दो बार आता है: “मेरी प्रजा मेरे उत्तम दानों से सन्तुष्ट होगी।”

जो लोग परमेश्वर से सन्तुष्ट हैं, वे परमेश्वर के अपने लोग ठहराए गए हैं। वह उनसे प्रसन्न है, क्योंकि वे उससे प्रसन्न हैं। वे उसे अपना परमेश्वर कहते हैं, और वह उन्हें अपनी प्रजा कहता है; वह उन्हें अपना भाग बनाकर सन्तुष्ट है, और वे उसे अपना भाग पाकर सन्तुष्ट हैं। परमेश्वर के इस्राएल और इस्राएल के परमेश्वर के बीच आनन्द की पारस्परिक संगति है।

ये लोग सन्तुष्ट हैं। यह एक महान बात है। मनुष्यों में से बहुत थोड़े कभी सन्तुष्ट होते हैं, उनका भाग चाहे जैसा भी हो; उन्होंने मानो जोंक निगल ली है, और वह निरन्तर पुकारती रहती है, “दे, दे!” केवल पवित्र किए हुए प्राण ही सन्तुष्ट प्राण हैं। परमेश्वर को आप ही हमारा मन भी फिराना होगा और हमें सन्तोष भी देना होगा।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि प्रभु के लोग अपने प्रभु की भलाई से सन्तुष्ट हों। यहाँ ऐसी भलाई है जिसमें कोई मिलावट नहीं, ऐसी उदारता जिसकी कोई सीमा नहीं, ऐसी दया जिसमें कोई डाँट नहीं, ऐसा प्रेम जिसमें कोई परिवर्तन नहीं, ऐसा अनुग्रह जिसमें कुछ रोका नहीं जाता। यदि परमेश्वर की भलाई हमें सन्तुष्ट नहीं करती, तो और क्या करेगी? क्या! क्या हम अब भी कराह रहे हैं? निश्चय ही भीतर कोई गलत अभिलाषा है, यदि वह ऐसी है जिसे परमेश्वर की भलाई सन्तुष्ट नहीं करती।

हे प्रभु, मैं सन्तुष्ट हूँ। तेरा नाम धन्य हो।

13 नवम्बर

कभी न चूकनेवाला पहरा

“सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊँघेगा और न सोएगा” भजन संहिता 121:4

यहोवा “इस्राएल का रक्षक” है। किसी भी प्रकार की अचेतना उस पर कभी नहीं छाती, न गहरी नींद और न हल्की ऊँघ। वह अपने लोगों के घर और हृदय की चौकसी करने से कभी नहीं चूकता। यह हमारे पूरी शान्ति में विश्राम करने के लिये पर्याप्त कारण है। सिकन्दर ने कहा था कि वह इसलिए सो जाता है क्योंकि उसका मित्र पार्मेनियो पहरा देता है; तो हम कितना अधिक सो सकते हैं, क्योंकि हमारा परमेश्वर हमारा पहरेदार है।

“सुन” शब्द यहाँ इस ढाढ़स देनेवाली सच्चाई की ओर हमारा ध्यान खींचने के लिये रखा गया है। इस्राएल जब पत्थर का तकिया लगाकर लेटा, तो सो गया; पर उसका परमेश्वर जागता रहा, और दर्शन में अपने दास के पास आया। जब हम असहाय पड़े होते हैं, तब यहोवा आप हमारे सिर को ढाँप लेगा।

प्रभु अपने लोगों की रक्षा ऐसे करता है जैसे कोई धनवान अपने खजाने की, जैसे कोई सेनापति सैनिक दल के द्वारा नगर की, जैसे कोई प्रहरी अपने राजा की चौकसी करता है। जो ऐसी रक्षा में हैं, उनकी कोई हानि नहीं कर सकता। मैं अपना प्राण उसके प्रिय हाथों में सौंप दूँ। वह हमें कभी नहीं भूलता, हमारी सक्रिय चिन्ता करना कभी नहीं छोड़ता, हमें सुरक्षित रखने में कभी अपने आपको असमर्थ नहीं पाता।

हे मेरे प्रभु, मेरी रक्षा कर, ऐसा न हो कि मैं भटकूँ, गिरूँ और नाश हो जाऊँ। मेरी रक्षा कर, कि मैं तेरी आज्ञाओं का पालन करूँ। अपनी कभी न ऊँघनेवाली देखभाल के द्वारा मुझे आलसी के समान सोने से, और उनके समान नाश होने से बचा जो मृत्यु की नींद सोते हैं।

14 नवम्बर

जिस नाम से माँगें

“यदि तुम मुझसे मेरे नाम से कुछ माँगोगे, तो मैं उसे करूँगा” यूहन्ना 14:14

कैसी विस्तृत प्रतिज्ञा है! कुछ भी! चाहे बड़ा हो या छोटा, मेरी सारी आवश्यकताएँ उस शब्द “कुछ” में समा जाती हैं। आ, मेरे प्राण, दया के सिंहासन के सामने खुलकर माँग, और अपने प्रभु को तुझसे यह कहते सुन, “तू अपना मुँह पसार, मैं उसे भर दूँगा।”

कैसी बुद्धिमानी की प्रतिज्ञा है! हमें सदा यीशु के नाम से माँगना है। यह हमें उत्साहित करता है, और साथ ही उसका आदर भी करता है। यह एक स्थायी दलील है। कभी-कभी बाकी हर दलील धुँधली पड़ जाती है, विशेषकर वे जो हम परमेश्वर के साथ अपने सम्बन्ध से, या उसके अनुग्रह के अपने अनुभव से निकाल सकते थे; परन्तु ऐसे समयों में भी यीशु का नाम सिंहासन के सामने सदा के समान सामर्थी रहता है, और हम पूरे निश्चय के साथ उसकी दुहाई दे सकते हैं।

कैसी शिक्षाप्रद प्रार्थना है! मैं ऐसी किसी वस्तु के लिये नहीं माँग सकता जिस पर मैं मसीह का हाथ और मुहर न लगा सकूँ। मैं अपने प्रभु का नाम किसी स्वार्थी या हठीली विनती पर लगाने का साहस नहीं कर सकता। मैं अपने प्रभु का नाम केवल उन्हीं प्रार्थनाओं पर लगा सकता हूँ जिन्हें वह आप, यदि मेरी दशा में होता, तो माँगता। यीशु के नाम से ऐसे माँगने का अधिकार पाना, मानो यीशु आप माँग रहा हो, एक बड़ा सौभाग्य है; परन्तु उसके प्रति हमारा प्रेम हमें कभी उस नाम को वहाँ लगाने न देगा जहाँ वह उसे न लगाता।

क्या मैं वह माँग रहा हूँ जिसे यीशु स्वीकार करता है? क्या मैं अपनी प्रार्थना पर उसकी मुहर लगाने का साहस कर सकता हूँ? तो जो कुछ मैं पिता से माँगता हूँ, वह मुझे मिल गया है।

15 नवम्बर

असीम धन

“मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा” फिलिप्पियों 4:19

पौलुस का परमेश्वर हमारा परमेश्वर है, और वह हमारी हर एक घटी को पूरी करेगा। पौलुस को फिलिप्पियों के विषय में इसका पूरा निश्चय था, और हमें अपने विषय में इसका पूरा निश्चय है। परमेश्वर ऐसा करेगा, क्योंकि यह उसके स्वभाव के अनुरूप है: वह हमसे प्रेम करता है, वह हमें आशीष देने में आनन्दित होता है, और ऐसा करने से उसकी महिमा होगी। उसकी करुणा, उसकी सामर्थ्य, उसका प्रेम, उसकी विश्वासयोग्यता, सब मिलकर काम करते हैं कि हम भूखे न रहें।

प्रभु कैसे नाप से देता है: “अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है।” उसके अनुग्रह का धन बड़ा है, पर उसकी महिमा के धन के विषय में हम क्या कहें? उसका वह धन “जो महिमा सहित मसीह यीशु में है,” उसका अनुमान कौन लगा सकता है? इसी अथाह नाप के अनुसार परमेश्वर हमारी आवश्यकताओं की विशाल खाई को भरेगा। वह प्रभु यीशु को अपनी परिपूर्णता का पात्र और नाली बनाता है, और तब अपने प्रेम का धन उसके सर्वोच्च रूप में हमें प्रदान करता है। हल्लेलूय्याह!

लेखक जानता है कि प्रभु के काम में परखा जाना क्या होता है। विश्वासयोग्यता का बदला क्रोध से दिया गया है, और उदार दाताओं ने अपना चन्दा बन्द कर दिया है; परन्तु जिसे उन्होंने दबाना चाहा, वह एक पैसा भी दरिद्र नहीं हुआ, वरन् और भी धनी हुआ है; क्योंकि यह प्रतिज्ञा सच्ची निकली है, “मेरा परमेश्वर हमारी हर एक घटी को पूरी करेगा।” परमेश्वर का प्रबन्ध किसी भी बैंक से अधिक निश्चित है।

16 नवम्बर

विफल होने को ठहराए गए हथियार

“जितने हथियार तेरी हानि के लिये बनाए जाएँ, उनमें से कोई सफल न होगा, और जितने लोग मुद्दई होकर तुझ पर नालिश करें उन सभी से तू जीत जाएगा” यशायाह 54:17

शत्रु की भट्ठियों और लोहारखानों में बड़ी खटपट मची है। वे पवित्र लोगों को मारने के लिये हथियार बना रहे हैं। यदि पवित्र लोगों का प्रभु उन्हें अनुमति न देता, तो वे इतना भी न कर पाते; क्योंकि कोएले की आग धोंकनेवाला लोहार भी उसी का सृजा हुआ है। पर देखो, वे कैसी व्यस्तता से परिश्रम करते हैं! वे कितनी तलवारें और भाले गढ़ते हैं! इससे कुछ नहीं बिगड़ता, क्योंकि हर एक हथियार के फल पर तुम यह लेख पढ़ सकते हो: यह सफल न होगा।

पर अब एक और शोर सुनो: यह जीभों का झगड़ा है। जीभें उन हथियारों से भी भयानक हैं जो हथौड़ों और निहाइयों से बनाए जा सकते हैं, और जो बुराई वे करती हैं वह कहीं गहरा घाव करती और कहीं दूर तक फैलती है। अब हमारा क्या होगा? निन्दा, झूठ, कटाक्ष, उपहास—ये विष में बुझे तीर हैं; हम इनका सामना कैसे करें? प्रभु परमेश्वर हमसे प्रतिज्ञा करता है कि यदि हम उन्हें चुप न भी करा सकें, तो भी कम से कम उनसे नष्ट होने से बच जाएँगे। वे अभी कुछ क्षण के लिये हमें दोषी ठहराते हैं, पर अन्त में हम उन्हें दोषी ठहराएँगे, और वह भी सदा के लिये। झूठ बोलनेवालों का मुँह बन्द किया जाएगा, और उनके झूठ उन भले लोगों के आदर का कारण बन जाएँगे जिन्होंने उनके कारण दुःख उठाया।

17 नवम्बर

परमेश्वर कभी नहीं त्यागता

“क्योंकि यहोवा अपनी प्रजा को न तजेगा, वह अपने निज भाग को न छोड़ेगा” भजन संहिता 94:14

नहीं, वह उनमें से एक को भी नहीं तजेगा। मनुष्य के पास उसके त्यागे हुए होते हैं, पर परमेश्वर के पास कोई नहीं; क्योंकि उसका चुनाव अटल है, और उसका प्रेम अनन्त है। कोई भी ऐसे एक भी व्यक्ति को नहीं खोज सकता जिसे परमेश्वर ने, उस पर अपने आपको उद्धार देनेवाली रीति से प्रगट करने के बाद, त्याग दिया हो।

यह महान सत्य भजन में दुःखी के हृदय को ढाढ़स देने के लिये बताया गया है। प्रभु अपने लोगों की ताड़ना करता है; पर वह उन्हें कभी नहीं त्यागता। व्यवस्था और छड़ी के इस दोहरे काम का परिणाम हमारी शिक्षा है, और उस शिक्षा का फल आत्मा की स्थिरता और मन का संयम है, जिससे विश्राम उत्पन्न होता है। दुष्टों को तब तक छोड़ दिया जाता है जब तक वह गड्ढा न खुद जाए जिसमें वे गिरकर पकड़े जाएँगे; पर भक्तों को पाठशाला में भेजा जाता है कि वे आगे की अपनी महिमामय नियति के लिये तैयार किए जाएँ। न्याय लौटकर विद्रोहियों पर अपना काम पूरा करेगा, पर वह उसी प्रकार सच्चे और भक्त लोगों को निर्दोष ठहराने के लिये भी लौटेगा। इसलिए हम ताड़ना की छड़ी को शान्त अधीनता से सह सकते हैं; उसका अर्थ क्रोध नहीं, वरन् प्रेम है।

“परमेश्वर चाहे ताड़े और सुधारे,

पर वह कभी अनदेखा न कर सकता;

चाहे विश्वासयोग्यता से डाँटे,

पर प्रेम करना कभी न छोड़ सकता।”

18 नवम्बर

स्पष्ट रूप से अलौकिक

“उस दिन यहोवा यरूशलेम के निवासियों को मानो ढाल से बचा लेगा, और उस समय उनमें से जो ठोकर खानेवाला हो वह दाऊद के समान होगा; और दाऊद का घराना परमेश्वर के समान होगा, अर्थात् यहोवा के उस दूत के समान जो उनके आगे-आगे चलता था” जकर्याह 12:8

प्रभु के अपने लोगों की रक्षा करने की सबसे अच्छी रीतियों में से एक यह है कि वह उन्हें भीतरी सामर्थ्य से बलवन्त करता है। मनुष्य दीवारों से अच्छे हैं, और विश्वास गढ़ों से अधिक दृढ़ है।

प्रभु हम में से सबसे निर्बल को लेकर उसे इस्राएल के वीर दाऊद के समान बना सकता है। हे प्रभु, मेरे साथ ऐसा ही कर! अपनी सामर्थ्य मुझमें भर दे, और मुझे पवित्र साहस से भर दे, कि मैं परमेश्वर पर भरोसा रखकर गोफन और पत्थर लिये उस दानव का सामना करूँ।

प्रभु अपने सबसे बड़े वीरों को उनकी वर्तमान दशा से कहीं अधिक सामर्थी बना सकता है: दाऊद परमेश्वर के समान, यहोवा के दूत के समान हो सकता है। यह एक अद्भुत बढ़ती होगी, पर यह सम्भव है, नहीं तो इसकी चर्चा ही न की जाती। हे प्रभु, हमारे अगुवों में से सबसे अच्छों के साथ ऐसा ही काम कर! हमें दिखा कि तू क्या कर सकता है—अर्थात् अपने विश्वासयोग्य दासों को अनुग्रह और पवित्रता की ऐसी ऊँचाई तक उठा सकता है जो स्पष्ट रूप से अलौकिक हो!

हे प्रभु, अपने पवित्र लोगों में वास कर, तो वे परमेश्वर के समान होंगे; अपनी सामर्थ्य उनमें डाल, तो वे उन जीवित प्राणियों के समान होंगे जो यहोवा की उपस्थिति में रहते हैं। यीशु के निमित्त, इस हमारे दिन में अपनी सारी कलीसिया के लिये यह प्रतिज्ञा पूरी कर। आमीन।

19 नवम्बर

आज्ञाकारिता से आशीष तक

“आज के दिन से मैं तुम को आशीष देता रहूँगा” हाग्गै 2:19

भविष्य की बातें हमसे छिपी हैं। तो भी यहाँ एक दर्पण है जिसमें हम आनेवाले वर्षों को देख सकते हैं। प्रभु कहता है, “आज के दिन से मैं तुम को आशीष देता रहूँगा।”

यह ध्यान देने योग्य है कि इस प्रतिज्ञा में किस दिन की चर्चा है। फसलें मारी गई थीं, लू और गेरूई लगी थी, और यह सब लोगों के पाप के कारण था। अब प्रभु ने देखा कि ये ताड़ना पाए हुए लोग उसके वचन का पालन करने और उसका मन्दिर बनाने लगे हैं, और इसलिए वह कहता है, “जिस दिन यहोवा के मन्दिर की नींव डाली गई, उस दिन से सोच-विचार करो। आज के दिन से मैं तुम को आशीष देता रहूँगा।” यदि हम किसी पाप में जीते रहे हैं, और आत्मा हमें उससे अपने आपको शुद्ध करने की अगुवाई करता है, तो हम प्रभु की आशीष पर भरोसा रख सकते हैं। उसकी मुस्कान, उसका आत्मा, उसका अनुग्रह, उसकी सच्चाई का और पूरा प्रकाशन—ये सब हमारे लिये बढ़ी हुई आशीष सिद्ध होंगे। अपनी विश्वासयोग्यता के कारण हमें मनुष्यों की ओर से और अधिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है, पर हम प्रभु अपने परमेश्वर के साथ और निकट के सम्बन्ध में, और उसमें अपनी स्वीकृति के और स्पष्ट दर्शन में ऊपर उठेंगे।

हे प्रभु, मैंने ठान लिया है कि मैं तेरे प्रति और अधिक सच्चा रहूँगा, और तेरी शिक्षा और तेरी आज्ञा के पालन में और अधिक यथार्थ रहूँगा; इसलिए मैं मसीह यीशु के द्वारा तुझसे विनती करता हूँ कि अब से लेकर सदा तक मेरे दैनिक जीवन की धन्यता को बढ़ाता जा।

20 नवम्बर

भूख की तृप्ति

“क्योंकि वह अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है” भजन संहिता 107:9

लालसाएँ रखना अच्छा है, और वे जितनी तीव्र हों उतना ही अच्छा। प्रभु प्राण की लालसाओं को सन्तुष्ट करेगा, चाहे वे कितनी भी बड़ी और सब कुछ निगल जानेवाली क्यों न हों। आओ, हम बड़ी लालसा रखें, क्योंकि परमेश्वर बड़ा देगा। जब हम अपने आप से सन्तुष्ट होते हैं और लालसाओं से मुक्त होते हैं, तब हम मन की सही दशा में कभी नहीं होते। और अधिक अनुग्रह की अभिलाषाएँ, और ऐसी आहें जो बयान से बाहर हैं, बढ़ने की पीड़ाएँ हैं, और हमें चाहना चाहिए कि हम उन्हें और भी अधिक अनुभव करें। हे धन्य आत्मा, हमें उत्तम वस्तुओं के लिये, और सर्वोत्तम वस्तुओं में से और अधिक के लिये आहें भरनेवाला और पुकारनेवाला बना!

भूख कोई सुखद अनुभव नहीं है। तो भी धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं। ऐसे लोगों की भूख न केवल थोड़े से भोजन से शान्त की जाएगी, वरन् वे तृप्त किए जाएँगे। वे किसी भी प्रकार के मोटे-झोटे भोजन से नहीं भरे जाएँगे, वरन् उनका आहार उनके भले प्रभु के योग्य होगा, क्योंकि स्वयं यहोवा उन्हें उत्तम पदार्थों से तृप्त करेगा।

आओ, हम इस बात पर न कुढ़ें कि हम लालसा रखते और भूखे हैं, वरन् भजनकार की वाणी सुनें, जो आप भी परमेश्वर की महिमा होते देखने के लिये लालायित और भूखा है। “लोग यहोवा की करुणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें!”

21 नवम्बर

बाहर और ऊपर की ओर दृष्टि

“हे पृथ्वी के दूर-दूर के देश के रहनेवालों, तुम मेरी ओर फिरो और उद्धार पाओ! क्योंकि मैं ही परमेश्वर हूँ और दूसरा कोई नहीं है” यशायाह 45:22

यह प्रतिज्ञाओं की प्रतिज्ञा है। यह हमारे आत्मिक जीवन की नींव में पड़ी है। उद्धार उसकी ओर एक दृष्टि करने से आता है जो “धर्मी और उद्धारकर्ता परमेश्वर” है। यह निर्देश कितना सरल है! “तुम मेरी ओर फिरो। यह माँग कितनी उचित है! निश्चय ही सृजी हुई वस्तु को अपने सृजनहार की ओर देखना चाहिए। हम बहुत समय तक और कहीं ताकते रहे; अब समय है कि हम केवल उसी की ओर देखें जो हमें आशा रखने को बुलाता है, और हमें अपना उद्धार देने की प्रतिज्ञा करता है।

केवल एक दृष्टि! क्या हम अभी दृष्टि न करेंगे? हमें अपने में से कुछ भी नहीं लाना है, वरन् बाहर और ऊपर अपने प्रभु की ओर देखना है जो अपने सिंहासन पर है, जहाँ वह क्रूस पर से चढ़ गया है। एक दृष्टि के लिये न किसी तैयारी की आवश्यकता है, न किसी कठोर प्रयत्न की: उसके लिये न चतुराई चाहिए न बुद्धि, न धन न बल। जो कुछ हमें चाहिए वह सब प्रभु हमारे परमेश्वर में है, और यदि हम हर बात के लिये उसकी ओर देखें, तो वह हर बात हमारी होगी, और हम उद्धार पाएँगे।

आओ, हे दूर-दूर के लोगो, इधर देखो! हे पृथ्वी के छोर के रहनेवालो, अपनी आँखें इस ओर फेरो! जैसे सबसे दूर के देशों से भी मनुष्य सूर्य को देख सकते और उसके प्रकाश का आनन्द ले सकते हैं, वैसे ही तुम जो मृत्यु की सीमाओं पर, ठीक नरक के फाटकों पर पड़े हो, एक दृष्टि के द्वारा परमेश्वर का प्रकाश, स्वर्ग का जीवन, और प्रभु यीशु मसीह का उद्धार पा सकते हो, जो परमेश्वर है, और इसलिए उद्धार करने में समर्थ है।

22 नवम्बर

दण्ड की कोई आज्ञा नहीं

“यहोवा की यह वाणी है, कि उन दिनों में इस्राएल का अधर्म ढूँढ़ने पर भी नहीं मिलेगा, और यहूदा के पाप खोजने पर भी नहीं मिलेंगे; क्योंकि जिन्हें मैं बचाऊँ, उनके पाप भी क्षमा कर दूँगा” यिर्मयाह 50:20

सचमुच यह महिमामय वचन है! इस्राएल और यहूदा की पापी जातियों से यहाँ कैसी सिद्ध क्षमा की प्रतिज्ञा की गई है! पाप को इस प्रकार दूर किया जाना है कि वह ढूँढ़ने पर भी न मिले, इस प्रकार मिटाया जाना है कि उसका कुछ भी शेष न रहे। क्षमा करनेवाले परमेश्वर की महिमा हो!

शैतान हम पर दोष लगाने के लिये पाप ढूँढ़ता फिरता है, हमारे शत्रु उन्हें इसलिए खोजते हैं कि उन्हें हमारे सिर मढ़ें, और हमारा अपना विवेक भी रोगी जैसी उत्सुकता के साथ उन्हें खोजता है। परन्तु जब प्रभु यीशु का बहुमूल्य लहू लगाता है, तब हमें किसी खोज का भय नहीं रहता, क्योंकि “ढूँढ़ने पर भी नहीं मिलेगा,” “खोजने पर भी नहीं मिलेंगे।” प्रभु ने अपने लोगों के पापों को मिटा दिया है: उसने अपराध का अन्त कर दिया है, और पाप को समाप्त कर दिया है। यीशु के बलिदान ने हमारे पापों को गहरे समुद्र में डाल दिया है। यह हमें आनन्द से नचा देता है।

पाप के मिट जाने का कारण यह है कि यहोवा आप अपने चुने हुओं को क्षमा करता है। उसका अनुग्रह का वचन न केवल राजकीय है, वरन् ईश्वरीय भी है। वह पापमुक्ति की घोषणा करता है, और हम मुक्त हो जाते हैं। वह प्रायश्चित्त को लागू करता है, और उसी घड़ी से उसके लोग दण्ड की आज्ञा के हर भय से परे हो जाते हैं। पाप को मिटा डालनेवाले परमेश्वर का नाम धन्य हो!

23 नवम्बर

धीरज धरना सीखना

“तेरा परमेश्वर यहोवा उन जातियों को तेरे आगे से धीरे धीरे निकाल देगा” व्यवस्थाविवरण 7:22

हमें यह आशा नहीं रखनी चाहिए कि हम प्रभु यीशु के लिये एक ही वार में जय पा लेंगे। बुरे सिद्धान्त और बुरी रीतियाँ सहज में नहीं मरतीं। कहीं-कहीं वहाँ के निवासियों को अशुद्ध करनेवाले अनेक दुर्गुणों में से एक को भी निकालने में वर्षों का परिश्रम लगता है। हमें अपनी सारी शक्ति से युद्ध जारी रखना चाहिए, उस समय भी जब हमें थोड़ी ही प्रत्यक्ष सफलता मिले।

इस संसार में हमारा काम यह है कि हम उसे यीशु के लिये जीत लें। हमें समझौते नहीं करने हैं, वरन् बुराइयों को जड़ से मिटाना है। हमें लोकप्रियता नहीं खोजनी है, वरन् अधर्म से निरन्तर युद्ध करना है। अविश्वास, पोपवाद, मद्यपान, अशुद्धता, अत्याचार, सांसारिकता, भ्रम; इन सबको “निकाल” दिया जाना है।

केवल प्रभु हमारा परमेश्वर ही यह पूरा कर सकता है। वह अपने विश्वासयोग्य दासों के द्वारा काम करता है; और उसका नाम धन्य हो, वह प्रतिज्ञा करता है कि वह इसी प्रकार काम करेगा। “तेरा परमेश्वर यहोवा उन जातियों को तेरे आगे से निकाल देगा।” यह वह धीरे-धीरे करेगा, कि हम धीरज धरना सीखें, विश्वास में बढ़ें, जागते रहें, और शारीरिक निश्चिन्तता से बचे रहें। आओ, हम थोड़ी सी सफलता के लिये परमेश्वर का धन्यवाद करें, और अधिक के लिये प्रार्थना करें। आओ, हम तलवार को तब तक म्यान में न रखें जब तक सारा देश यीशु के लिये जीत न लिया जाए।

हियाव बाँध, मेरे हृदय! थोड़ा-थोड़ा करके आगे बढ़ता जा, क्योंकि थोड़ा-थोड़ा मिलकर बहुत हो जाता है।

24 नवम्बर

दोषमुक्ति और क्षमा

“वह सर्वदा वाद-विवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा” भजन संहिता 103:9

वह कभी-कभी डाँटेगा, नहीं तो वह हम जैसे बेचारे भटकनेवाले बच्चों का बुद्धिमान पिता न होता। उसकी डाँट उन लोगों के लिये बहुत दुःखदायी होती है जो सच्चे हैं, क्योंकि वे अनुभव करते हैं कि वे उसके कितने योग्य हैं, और उसे दुःखी करना उनकी ओर से कितना गलत है। हम जानते हैं कि इस डाँट का क्या अर्थ है, और हम प्रभु के सामने झुकते हैं, और शोक करते हैं कि हमने उसे अपने ऊपर क्रोधित होने का कारण दिया।

परन्तु इन पंक्तियों में हमें कैसी शान्ति मिलती है! वह “सर्वदा वाद-विवाद करता न रहेगा।” यदि हम मन फिराएँ और पाप के कारण टूटे हुए और पाप से टूटकर अलग हुए हृदय के साथ उसकी ओर लौटें, तो वह तुरन्त हम पर मुस्कुराएगा। जिनसे वह अपने सारे हृदय से प्रेम करता है, उनकी ओर भौंहें चढ़ा हुआ मुख करने में उसे कोई आनन्द नहीं: उसका आनन्द तो यह है कि हमारा आनन्द पूरा हो।

आओ, हम उसके दर्शन के खोजी हों। निराशा का कोई कारण नहीं, हताशा का भी नहीं। आओ, हम डाँटनेवाले परमेश्वर से भी प्रेम करें, और शीघ्र ही हम गाएँगे: “अब तेरा क्रोध शान्त हुआ, और तूने मुझे शान्ति दी है।” दूर हो जाओ, हे अंधकारमय आशंकाओ, हे प्राण के कौवो! भीतर आओ, हे दीन आशाओ और कृतज्ञ स्मृतियो, हे हृदय के कबूतरो! जिसने बहुत पहले न्यायी के रूप में हमें दोषमुक्त किया, वह फिर पिता के रूप में हमें क्षमा करेगा, और हम उसके मधुर, कभी न बदलनेवाले प्रेम में आनन्दित होंगे।

25 नवम्बर

पहाड़ मैदान बन जाते हैं

“हे बड़े पहाड़, तू क्या है? जरुब्बाबेल के सामने तू मैदान हो जाएगा; और वह चोटी का पत्थर यह पुकारते हुए आएगा, उस पर अनुग्रह हो, अनुग्रह!” जकर्याह 4:7

इस घड़ी कठिनाई, संकट या आवश्यकता का एक पहाड़ हमारे मार्ग में हो सकता है, और स्वाभाविक बुद्धि को उसके ऊपर से, या उसके बीच से, या उसके चारों ओर से कोई मार्ग नहीं सूझता। विश्वास को आने दो, और तुरन्त वह पहाड़ लोप होकर मैदान बन जाता है। पर पहले विश्वास को प्रभु का वचन सुनना होगा—“न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।” जीवन की अजेय परीक्षाओं का सामना करने के लिये यह महान सत्य सबसे पहली आवश्यकता है।

मैं देखता हूँ कि मैं कुछ नहीं कर सकता, और मनुष्य पर सारा भरोसा व्यर्थ है। “न तो बल से।” मैं देखता हूँ कि किसी दृश्य साधन पर भरोसा नहीं किया जा सकता, वरन् सामर्थ्य अदृश्य आत्मा में है। केवल परमेश्वर को काम करना है, और मनुष्यों और साधनों को कुछ भी न गिना जाए। यदि ऐसा है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने लोगों के कामों को अपने हाथ में लेता है, तो बड़े-बड़े पहाड़ कुछ भी नहीं। वह संसारों को ऐसे हटा सकता है जैसे लड़के गेंदें उछालते हैं, या उन्हें पाँव से ठोकर मारकर लुढ़काते हैं। यही सामर्थ्य वह मुझे उधार दे सकता है। यदि प्रभु मुझे आल्प्स पर्वत हटाने की आज्ञा दे, तो मैं उसके नाम से यह कर सकता हूँ। वह एक बड़ा पहाड़ हो सकता है, पर मेरी निर्बलता के सामने भी वह मैदान बन जाएगा; क्योंकि प्रभु ने यह कहा है। जब परमेश्वर मेरी ओर है तो मैं किस बात से डरूँ?

26 नवम्बर

स्वर्गीय कीमियागरी

“तुम्हारा शोक आनन्द बन जाएगा” यूहन्ना 16:20

उनका विशेष शोक अपने प्रभु की मृत्यु और उसकी अनुपस्थिति थी, और वह आनन्द में तब बदल गया जब वह मरे हुओं में से जी उठा और उनके बीच अपने आपको प्रगट किया। पवित्र लोगों के सारे शोक इसी प्रकार बदल दिए जाएँगे; उनमें से सबसे बुरे भी, जो ऐसे लगते हैं मानो उन्हें सदा के लिये कड़वाहट के सोते बने रहना है।

तो जितना अधिक शोक, उतना ही अधिक आनन्द। यदि हम पर मनों शोक लदा है, तो प्रभु की सामर्थ्य उसे टनों आनन्द में बदल देगी। तो जितना कड़वा दुःख, उतना ही मीठा सुख: घड़ी के लोलक का बाईं ओर दूर तक झूलना उसे दाईं ओर भी उतनी ही दूर तक ले जाएगा। दुःख की स्मृति आनन्द के स्वाद को और बढ़ा देगी: हम एक को दूसरे के सामने रखकर देखेंगे, और हीरे की चमक उसके पीछे लगी काली पन्नी के कारण और भी स्पष्ट दिखाई देगी।

आ, मेरे हृदय, हियाव बाँध! थोड़ी ही देर में मैं उतना ही आनन्दित होऊँगा जितना अभी उदास हूँ। यीशु मुझसे कहता है कि एक स्वर्गीय कीमियागरी के द्वारा मेरा शोक आनन्द बन जाएगा। मैं नहीं देखता कि यह कैसे होगा, पर मैं इसका विश्वास करता हूँ, और पहले से ही गाने लगता हूँ। मन की यह उदासी बहुत समय की नहीं है; मैं शीघ्र ही उन आनन्दित लोगों के बीच ऊपर होऊँगा जो दिन और रात प्रभु की स्तुति करते हैं, और वहाँ मैं उस दया के गीत गाऊँगा जिसने मुझे बड़े क्लेशों से छुड़ाया।

27 नवम्बर

तेरी हर यात्रा में विश्राम

“यहोवा ने कहा, मैं आप चलूँगा और तुझे विश्राम दूँगा” निर्गमन 33:14

अनमोल प्रतिज्ञा! हे प्रभु, मुझे सामर्थ्य दे कि मैं इसे पूरी रीति से अपना बना लूँ।

कुछ समयों पर हमें अपने निवास से निकलना ही पड़ता है, क्योंकि यहाँ हमारा कोई स्थिर रहनेवाला नगर नहीं। प्रायः ऐसा होता है कि जब हम किसी स्थान में सबसे अधिक घर जैसा अनुभव करते हैं, तभी अचानक वहाँ से बुला लिए जाते हैं। इस दुःख की औषधि यह है: प्रभु आप हमारे साथ चलेगा। उसकी उपस्थिति, जिसमें उसका अनुग्रह, उसकी संगति, उसकी देखभाल और उसकी सामर्थ्य सम्मिलित हैं, हमारी हर एक यात्रा में सदा हमारे साथ रहेगी। इसका अर्थ जितना यह कहता है उससे कहीं अधिक है; क्योंकि वास्तव में इसका अर्थ सब कुछ है। यदि परमेश्वर हमारे साथ है, तो स्वर्ग और पृथ्वी हमारे अधिकार में हैं। हे प्रभु, मेरे साथ चल, और फिर जहाँ चाहे मुझे भेज!

पर हम विश्राम का स्थान पाने की आशा रखते हैं। यह वचन उसकी प्रतिज्ञा करता है। हमें ऐसा विश्राम मिलना है जिसे परमेश्वर आप देता, बनाता और बनाए रखता है। उसकी उपस्थिति हमें तब भी विश्राम देगी जब हम कूच पर हों, हाँ, युद्ध के बीच में भी। विश्राम! तीन गुना धन्य शब्द। क्या नश्वर मनुष्य कभी इसका आनन्द ले सकते हैं? हाँ, प्रतिज्ञा तो है, और विश्वास से हम उसकी दुहाई देते हैं। विश्राम सहायक से, शान्ति के राजकुमार से, और उस महिमामय पिता से आता है जिसने सातवें दिन अपने सारे कामों से विश्राम किया। परमेश्वर के साथ होना ही सबसे गहरे अर्थ में विश्राम करना है।

28 नवम्बर

वह करना जिस पर परमेश्वर आशीष दे सके

“तेरे खत्तों पर और जितने कामों में तू हाथ लगाएगा उन सभी पर यहोवा आशीष देगा” व्यवस्थाविवरण 28:8

यदि हम प्रभु अपने परमेश्वर की आज्ञा मानें, तो जो कुछ वह हमें देता है उस पर वह आशीष देगा। जब धन पर प्रभु की आशीष हो, तो वह शाप नहीं है। जब मनुष्यों के पास उनकी तात्कालिक आवश्यकता से अधिक होता है, और वे खत्तों में संचय करने लगते हैं, तो उस संचय के पीछे लोभ का घुन या कठोर-हृदयता की झुलसाहट लग जाना सहज है; परन्तु परमेश्वर की आशीष हो तो ऐसा नहीं होता। विवेक बचत का प्रबन्ध करता है, उदारता खर्च की दिशा ठहराती है, कृतज्ञता समर्पण को बनाए रखती है, और स्तुति उपभोग को मधुर बनाती है। किसी की लोहे की तिजोरी में और उसके बैंक खाते पर परमेश्वर की आशीष होना बड़ी दया है।

अन्तिम वाक्यांश के द्वारा कैसा अनुग्रह हमारा बनाया गया है! “जितने कामों में तू हाथ लगाएगा उन सभी पर यहोवा आशीष देगा।” हम किसी ऐसे काम में हाथ न लगाएँगे जिस पर हम परमेश्वर की आशीष माँगने का साहस न कर सकें, और न ही बिना प्रार्थना और विश्वास के उसमें लगेंगे। पर हर उद्यम में प्रभु की सहायता की बाट जोह सकना कैसा सौभाग्य है! कुछ लोग भाग्यशाली मनुष्य की बात करते हैं: प्रभु की आशीष भाग्य से उत्तम है। बड़े लोगों का संरक्षण परमेश्वर के अनुग्रह के सामने कुछ भी नहीं। आत्मनिर्भरता ठीक है; पर प्रभु की आशीष प्रतिभा, बुद्धि-कौशल या चतुराई के सारे फल से असीम रूप से बढ़कर है।

29 नवम्बर

बाट जोहना सीखो

“जो कोई विश्वास रखे वह उतावली न करेगा” यशायाह 28:16

वह प्रभु की आज्ञाओं को मानने में तो फुर्ती करेगा; पर किसी अधीर या अनुचित अर्थ में वह उतावली न करेगा।

वह भाग जाने की उतावली न करेगा, क्योंकि वह उस भय से पराजित न होगा जो घबराहट उत्पन्न करता है। जब दूसरे इधर-उधर ऐसे भागते हैं मानो उनकी बुद्धि जाती रही हो, तब विश्वासी शान्त, स्थिर और सोच-समझकर चलनेवाला रहेगा, और इस प्रकार परीक्षा की घड़ी में बुद्धिमानी से काम कर सकेगा।

वह अपनी आशाओं में उतावली न करेगा, कि अपनी अच्छी वस्तुएँ तुरन्त और उसी स्थान पर माँगे; वरन् वह परमेश्वर के समय की बाट जोहेगा। कुछ लोगों को हाथ की चिड़िया पाने की बड़ी हड़बड़ी रहती है; क्योंकि वे प्रभु की प्रतिज्ञा को झाड़ी की चिड़िया समझते हैं, जिसके उनके हाथ आने की सम्भावना नहीं। विश्वासी बाट जोहना जानते हैं।

वह गलत या सन्देहजनक काम में कूदकर उतावली न करेगा। अविश्वास को कुछ न कुछ करते ही रहना है, और इस प्रकार वह अपना ही सत्यानाश कर लेता है; पर विश्वास उचित गति से अधिक उतावली नहीं करता, और इसलिए उसे उस मार्ग से दुःखी होकर लौटना नहीं पड़ता जिस पर वह लापरवाही से चला था।

मेरी क्या दशा है? क्या मैं विश्वास करता हूँ, और इसलिए विश्वासी की चाल से चल रहा हूँ, जो परमेश्वर के साथ चलना है? हे फड़फड़ाते मन, शान्त हो! अहा, यहोवा के सामने चुपचाप रह, और धीरज से उसकी बाट जोह! हे हृदय, देख कि तू यह अभी करे!

30 नवम्बर

परमेश्वर अगली पंक्ति में है

“और तेरे आगे-आगे चलनेवाला यहोवा है; वह तेरे संग रहेगा, और न तो तुझे धोखा देगा और न छोड़ देगा; इसलिए मत डर और तेरा मन कच्चा न हो” व्यवस्थाविवरण 31:8

किसी बड़े काम या बड़े युद्ध के सामने, यह वचन हमें अपने हथियार बाँधने में सहायता करता है। यदि यहोवा आप हमारे आगे-आगे चलता है, तो पीछे चलना निश्चय ही सुरक्षित है। यदि प्रभु आप सबसे आगे है, तो हमारी प्रगति को कौन रोक सकता है? आओ, हे संगी सैनिको, हम तुरन्त आगे बढ़ें! हम विजय की ओर बढ़ने में हिचकिचाते क्यों हैं?

और प्रभु केवल हमारे आगे ही नहीं है; वह हमारे संग है। ऊपर, नीचे, चारों ओर, भीतर वह सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी है। हर समय में, अनन्तकाल तक, वह हमारे संग रहेगा जैसा वह रहा है। इससे हमारी भुजा को कैसा बल मिलना चाहिए! हे क्रूस के सैनिको, साहस से धावा बोलो, क्योंकि सेनाओं का यहोवा हमारे संग है!

हमारे आगे और हमारे संग रहकर, वह अपनी सहायता कभी न हटाएगा। वह अपने आप में कभी विफल नहीं हो सकता, और हमारे प्रति वह कभी नहीं चूकेगा। वह हमारी आवश्यकता के अनुसार अन्त तक हमारी सहायता करता रहेगा। जैसे वह विफल नहीं हो सकता, वैसे ही वह हमें छोड़ेगा भी नहीं। जब तक लड़ाई के दिन बीत न जाएँ, वह हमें बल और सहायता देने में सदा समर्थ और इच्छुक रहेगा।

आओ, हम न डरें और न हमारा मन कच्चा हो; क्योंकि सेनाओं का यहोवा हमारे साथ युद्ध में उतरेगा, लड़ाई की मार आप सहेगा, और हमें विजय देगा।

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