शान्त घड़ी के विचार
सितम्बर

अध्याय 9 · 18 मिनट का पठन

सितम्बर

सितम्बर 1

परमेश्वर यहोवा यों कहता है, इसके लिये भी इस्राएल का घराना मुझसे बिनती करे कि मैं उनके लिये ऐसा करूँ। यहेजकेल 36:37.

प्रार्थना दया की अग्रदूत है। पवित्र इतिहास की ओर मुड़कर देखो, तो तुम पाओगे कि इस संसार में कोई बड़ी दया शायद ही कभी बिनती के बिना, बिना पूर्व-सूचना के आई हो। प्रार्थना सदा आशीष की प्रस्तावना है। वह आशीष से पहले चलती है, आशीष की छाया के समान। जब परमेश्वर की दया का सूर्य हमारी आवश्यकताओं पर उदय होता है, तब वह प्रार्थना की छाया को दूर मैदान पर डाल देता है। अथवा, दूसरे दृष्टान्त से कहें तो, जब परमेश्वर दया का एक पर्वत ऊँचा करता है, तब वह स्वयं उसके पीछे चमकता है, और हमारी आत्माओं पर प्रार्थना की छाया डालता है, ताकि हम निश्चय जान लें कि यदि हम प्रार्थना में बहुत लगे रहें, तो हमारी बिनतियाँ दया की छाया हैं। इस प्रकार प्रार्थना आशीष से जुड़ी है, कि वह हमें उसका मोल दिखाए।—स्पर्जन।

सितम्बर 2

हम भले काम करने में हियाव न छोड़ें, क्योंकि यदि हम ढीले न पड़ें तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। गलातियों 6:9.

इस वर्तमान जीवन के घंटे आनेवाले जीवन के युगों के बीज-रूप हैं।—ए. जे. गॉर्डन।

सितम्बर 3

मैं आप ही तेरे संग चलूँगा। निर्गमन 33:14.

हमें भोर को अपनी प्रार्थना की कोठरी से कभी बाहर न निकलना चाहिए जब तक कि हमने अपने विचारों को इस सत्य पर गहराई और तीव्रता से एकाग्र न कर लिया हो कि परमेश्वर वहाँ वास्तव में हमारे संग उपस्थित है, हमें घेरे हुए है, और उस कमरे को उतने ही सचमुच भर रहा है जितना वह स्वर्ग को भरता है। आरम्भ में इससे कोई स्पष्ट परिणाम न निकले, परन्तु ज्यों-ज्यों हम परमेश्वर की उपस्थिति को अनुभव करने के बार-बार प्रयत्न करते हैं, त्यों-त्यों वह हमारे लिये अधिकाधिक वास्तविक होती जाएगी। और, ज्यों-ज्यों यह आदत हम पर बढ़ती जाती है, चाहे हम किसी कमरे में अकेले हों, या किसी प्राकृतिक वन-मन्दिर की घास पर चल रहे हों, या पथरीली गली में टहल रहे हों—रात के सन्नाटे में, या दिन के उमड़ते जनसमूह के बीच—हम प्रायः अपने आप को ये शब्द फुसफुसाते हुए पाएँगे, “तू निकट है; तू यहाँ है, हे प्रभु।”—एफ. बी. मेयर।

सितम्बर 4

दया और क्षमा हमारे प्रभु परमेश्वर ही की हैं। दानिय्येल 9:9.

जैसे स्प्रिंग का ताला आप ही बन्द हो जाता है, परन्तु बिना कुंजी के नहीं खुल सकता, वैसे ही हम स्वयं तो पाप में जा गिर सकते हैं, परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह की कुंजी के बिना लौट नहीं सकते।—कॉड्रे।

सितम्बर 5

अब समय आ पहुँचा है कि तुम नींद से जाग जाओ। रोमियों 13:11.

मैंने एक ऐसे चित्रकार के विषय में सुना है जो भोर के प्रकाश में काम करना पसन्द करता था। वह कहता था कि प्रातःकाल के प्रकाश में रंग अधिक अच्छी तरह समझ में आते हैं, इसलिये वह सूर्योदय की बाट जोहता हुआ अपनी कार्यशाला में रहा करता था। फिर हर पल उजियाला बढ़ता जाता, और वह ऐसे काम कर पाता जिन्हें वह न कर पाता यदि दिन चढ़ जाने तक ठहरा रहता।

क्या हमारे लिये कोई काम बाट नहीं जोह रहा—ऐसा काम जिसे और कोई नहीं कर सकता—और वह भी ऐसा काम जिसे करने में स्वामी ने हमारी सहायता करने की प्रतिज्ञा की है? क्या वह आकर यह पाए कि हम अब भी सो रहे हैं? अथवा जब धार्मिकता का सूर्य प्रकट हो, तो क्या वह हमें उसी चित्रकार के समान बाट जोहते हुए पाए, जो दिन की पहली किरण को ताकता और तरसता रहा? निश्चय हम में से जो इस प्रकार प्रभु की बाट जोहते हैं, वे नया बल पाएँगे, और उकाब के समान उठकर उस सूर्य का स्वागत करेंगे।—थॉमस चैम्पनेस।

सितम्बर 6

परमेश्वर की कलीसिया, जिसे उसने अपने ही लहू से मोल लिया है। प्रेरितों के काम 20:28.

निश्चय ही वह अपनी वस्तु के साथ जो चाहे कर सकता है। जो मोल उसने उन्हें अपना बनाने के लिये चुकाया है, वह इस बात की पर्याप्त प्रतिभूति है कि वह किसी ऐसी वस्तु को कभी तुच्छ न समझेगा जिसमें उनका कुछ भी हित जुड़ा हो। जिस लहू को उसने हमारे लिये बहाया है, उसके गुण के कारण हम उसकी दृष्टि में अनमोल हैं, और यदि वह कभी हमारे सुख के लिये चिन्ता में घटता हुआ पाया जाए, तो यह ऐसा होगा मानो वह अपने उसी लहू के साथ वैसा ही व्यवहार करे जैसा इस संसार के पापी करते हैं। मसीह के प्रेम का यह भरोसा हमारे हृदयों में इतनी गहराई से खुदा होना चाहिए कि उसकी ओर से उदासीनता का कोई आभास भी हम पर तनिक-सा भी प्रभाव कभी न डाल सके। यही वह जय है जो संसार पर जयवन्त होती है।—जॉर्ज बोवेन।

सितम्बर 7

आशा का दाता परमेश्वर तुम्हें विश्वास करने में सारे आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए। रोमियों 15:13.

जैसे सांसारिक बातों में, वैसे ही आत्मिक बातों में भी आशा में बड़ा बल है, और इसलिये परमेश्वर के लोगों को उस अनुग्रह को यत्नपूर्वक बढ़ाना चाहिए। एक सुदृढ़ आशा—कि यीशु मसीह में नई सृष्टि बन जाने पर हम उसी के हैं; कि यद्यपि हमारे नाम संसार में विख्यात नहीं, तौभी जीवन की पुस्तक में लिखे हैं, और अनुग्रह हमारे अधिकार में और स्वर्ग हमारी दृष्टि में है; कि कुछ ही और थोड़े वर्षों के पश्चात्, सिंहासन के सामने गानेवाले स्वर्गदूतों के समान शुद्ध होकर, हम आनन्द के साथ राजा के भवन में पहुँचाए जाएँगे, कि मसीह के समान और मसीह के संग हों, और उसे आमने-सामने और मुँह से मुँह देखें—ऐसी आशाएँ कर्म के सामर्थी सोते हैं।—गुथरी।

सितम्बर 8

उसने तुझ से जीवन माँगा, और तूने उसे दिया, वरन युगानुयुग की लम्बी आयु दी। भजन संहिता 21:4.

जब कंगाल लोग हमसे विनती करते हैं, तब हम प्रायः उन्हें वैसे ही उत्तर देते हैं जैसे प्रतिध्वनि वाणी को देती है—उत्तर विनती का आधा भाग काट देता है। मनुष्यों में हमें याएल का-सा शिष्टाचार बहुत कम मिलेगा, जो जल माँगनेवालों को दूध देती है, सिवाय इसके कि वह वैसा ही हो जैसा यह था—एक फँसानेवाला उपकार, कि किसी अनिष्ट को भली भाँति प्रवेश कराया जाए। हम में ऐसे नामान बहुत नहीं, जो जब तुम उनसे एक किक्कार माँगो, तो तुम्हें दो लेने पर विवश कर दें; परन्तु हमारी प्रार्थनाओं का परमेश्वर का उत्तर उस बढ़ानेवाले काँच के समान है, जो विनती को उत्तर में उससे कहीं अधिक बड़ा कर देता है जितनी वह प्रार्थना में थी।—बिशप रेनॉल्ड्स।

सितम्बर 9

यीशु ने आश्चर्यकर्मों का यह आरम्भ किया। यूहन्ना 2:11.

साधारण वस्तु में से ही वह बहुमूल्य वस्तु निकाली गई; और दिन-प्रतिदिन के जीवन की साधारण वस्तुओं में से ही, जो आज्ञाकारिता के साथ यीशु के सामने प्रस्तुत करके उसके चरणों में रखी जाती हैं, वह अपने महिमामय वरदान निकालता है, यहाँ तक कि हमारा सारा जीवन एक महान संस्कार बन जाता है।—डब्ल्यू. हे एटकेन।

सितम्बर 10

दिन को . . . उसने बादल के खम्भे से, और रात भर आग के उजियाले से उनकी अगुवाई की। भजन संहिता 78:14.

मेरा दिन मेरी समृद्धि है; यह वह समय है जब भाग्य का सूर्य मेरे ऊपर तेज से चमकता है, और इसलिये यही वह समय है जब मुझे छाया की आवश्यकता है। यदि मेरी धूप छाया-रहित होती, तो हे मेरे परमेश्वर, मैं तुझे भूल जाता।

परन्तु मुझे दिनों के समान रातों का भी सामना करना है। रात मेरी विपत्ति है; यह वह समय है जब भाग्य का सूर्य पहाड़ियों के पीछे अस्त हो गया है, और मैं अकेला रह जाता हूँ, और तब, हे मेरे पिता, मुझे तेरी आग के उजियाले की आवश्यकता होती है! रात के लिये मेरा आग का उजियाला कलवरी का दर्शन है—क्रूस पर तेरे प्रेम का दर्शन। मुझे तेरी आग के उजियाले की “पूरी रात भर” आवश्यकता है।—जॉर्ज मैथेसन।

सितम्बर 11

अब हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ कि हम क्या कुछ होंगे; पर इतना जानते हैं कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि हम उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है। 1 यूहन्ना 3:2.

“अब हम परमेश्वर की सन्तान हैं।” यह खाई के एक ओर का खम्भा है। “अब तक यह प्रगट नहीं हुआ कि हम क्या होंगे, परन्तु जब वह प्रगट होगा तो हम उसके समान होंगे।” यह दूसरी ओर का खम्भा है। इन दोनों को कैसे जोड़ा जाए? केवल एक ही उपाय है जिससे वर्तमान की यह सन्तानता खिलकर भविष्य की सिद्ध समानता में फल लाएगी, और वह यह है कि हम परमेश्वर की सहायता से दिन-प्रतिदिन उस खाई के आर-पार उसके समान बढ़ती हुई समानता का, और उससे उपजनेवाली पवित्रता का पुल बाँधें।—एलेक्स. मैक्लारेन।

सितम्बर 12

देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं। मत्ती 20:18.

यरूशलेम को ऐसी यात्रा कभी न हुई थी जैसी यीशु यहाँ अपने चेलों के सामने रखता है। वह अपनी इच्छा से ऊपर जाता है। यह कार्य किसी बाहरी दबाव से बलपूर्वक न कराया गया था। इस समय यरूशलेम से बचा जा सकता था। इसे जान-बूझकर खोजा गया। यह ऐसी विजय की ओर यात्रा थी जो हार के द्वारा पाई जानी थी, ऐसा राजतिलक जो अपमान और तिरस्कार के द्वारा प्राप्त होना था।

हे विश्वासी, आज संसार में अपने चलन में, अपने उद्धार के अगुवे को इस प्रकार यरूशलेम को जाते हुए देखकर बलवन्त हो, शान्ति पा, और उत्साहित हो! और स्मरण रख, जीवन के उन सब मार्गों में जो देखने में नीचे को जाते जान पड़ते हैं, जहाँ तेरे सामने दुःख, और सम्भव है मृत्यु भी, पड़े हैं, कि ऐसे सब उतार, जो यीशु की आत्मा में लिये या सहे जाते हैं, वास्तव में ऊपर को उठते पग हैं, जो तुझे परमेश्वर के पर्वत और पुनरुत्थान की महिमा तक पहुँचाते हैं।—जे. बी. स्ट्रैटन।

सितम्बर 13

ये कुम्हार थे, और पौधों और बाड़ों के बीच रहते थे; वे वहाँ राजा के काम के लिये उसके संग रहते थे। 1 इतिहास 4:23.

कहीं भी और सब कहीं हम “राजा के काम के लिये उसके संग” रह सकते हैं। इसके लिये हम बहुत ही असम्भावित या प्रतिकूल स्थान में हो सकते हैं; यह किसी छोटे-से देहाती जीवन में हो सकता है, जहाँ हमारे चारों ओर राजा की “गति” का बहुत ही थोड़ा दिखाई दे; यह हर प्रकार के बाड़ों के बीच हो सकता है, चारों दिशाओं में बाधाएँ; और इसके अतिरिक्त, यह हमारे हाथ हमारे दिन-प्रतिदिन के काम के लिये हर प्रकार के बरतनों से भरे हुए हो सकते हैं। कोई बात नहीं! जिस राजा ने हमें “वहाँ” रखा, वही आकर वहाँ हमारे संग वास करेगा; बाड़े ठीक हैं, नहीं तो वह उन्हें शीघ्र मिटा देता; और यह आवश्यक नहीं कि जो हमारे मार्ग को रोकता जान पड़े, वह उसी की रक्षा के लिये न हो; और रही बरतनों की बात, तो यही तो ठीक-ठीक वह वस्तु है जिसे उसने हमारे हाथों में देना उचित समझा, और इसलिये वही, इस समय के लिये, “उसका काम” है।—फ्रांसेस रिडली हैवरगल।

सितम्बर 14

मैं तुझे बुद्धि दूँगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना है उसमें तुझे सिखाऊँगा; मैं तुझ पर अपनी दृष्टि लगाए हुए तेरी अगुवाई करूँगा। भजन संहिता 32:8.

जब परमेश्वर अगुवाई करता है, तब हमारा जीवन चाहे जो भी कर रहा हो, उपयोगी और आशा से भरा होता है; और अनुशासन अपना सिद्ध करनेवाला काम करता है।—एच. ई. कॉब।

सितम्बर 15

मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, परन्तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे। मत्ती 20:28.

हमें अपने आप को मसीह के हाथ ऐसा समर्पित करना है कि उसके आने का यह महान उद्देश्य हमारे सारे जीवन पर अधिकार जताए और उसे अपने वश में कर ले। हमें परमेश्वर के समान दूसरों को आशीष देने के लिये जीना है। यही उसकी इच्छा है, हमारे विषय में उसका यही उद्देश्य है। यही वह है जो उसकी सामर्थ्य हमारे लिये करने को बाट जोह रही है। और यही उसके महान प्रेम का हम पर दावा भी है।

इस सत्य के प्रति एक दुर्बल सहमति की आह भरकर, फिर उपेक्षा से दूसरी ओर से निकल मत जा। इसके विषय में सोचकर और प्रार्थना करके इतनी भी क्षणिक आशा के बिना मत रह कि वह प्रार्थना सुनी जाएगी। भला और उपयोगी बनने की बड़ी-बड़ी प्रतिज्ञाओं में अपने आप को मत समेट। क्रूस पर चढ़ाए हुए के सामने घुटने टेक। मसीह के क्रूस में उसके महान उद्देश्य और मनुष्यों के लिये उसके तरसते प्रेम को पढ़। हृदय को उस पुकार का सारा बल अनुभव करने दे जो हमारे प्रिय प्रभु के उन छिदे हुए हाथों और पाँवों और लहूलुहान माथे से, और उसकी सारी भयानक लज्जा और पीड़ा से हम तक आती है। और इस सब से मोल लिया और बाँधा जाकर, अपने आप को उसके महान उद्देश्य के लिये उसके हाथ समर्पित कर दे। इस जीवन-कार्य के लिये उसी को अपना बल मानकर ग्रहण कर।—मार्क गाय पीयर्स।

सितम्बर 16

यीशु . . . भलाई करता फिरा। प्रेरितों के काम 10:38.

सब ललित कलाओं में सबसे उत्तम कला भलाई करने की कला है; तौभी इसी को सबसे कम सींचा जाता है।—टी. डेविट टैलमेज।

सितम्बर 17

और यहोवा के दूत ने उस [हाजिरा] से कहा, अपनी स्वामिनी के पास लौट जा, और उसके हाथ के नीचे दब जा। उत्पत्ति 16:9.

समर्पण एक महान मसीही व्यवस्था है, परन्तु हम इसे उत्पत्ति में आरम्भ ही में पाते हैं, मनुष्यजाति के इतिहास के आरम्भ में, और वह भी स्वर्गदूत के द्वारा दी गई।—चयनित।

सितम्बर 18

तब सुलैमान ने कहा . . . निश्चय मैंने तेरे निवास के लिये एक भवन बनवाया है। 1 राजा 8:12, 13.

शान्ति का राजकुमार सुलैमान ही मन्दिर बना सका। यदि हम प्राण जीतनेवाले बनें और कलीसिया को, जो परमेश्वर का मन्दिर है, उन्नत करें, तो हम इस बात पर ध्यान दें; न वाद-विवाद से, न तर्क से, परन्तु मसीह को ऊँचा उठाने के द्वारा ही हम मनुष्यों को उसकी ओर खींचेंगे।—जे. हडसन टेलर।

सितम्बर 19

मैंने दुःख की भट्ठी में तुझे चुन लिया है। यशायाह 48:10.

क्या यह वचन एक कोमल फुहार के समान नहीं आता, जो ज्वाला की प्रचण्डता को शान्त कर देता है? हाँ, क्या यह ऐसा अग्नि-रोधक कवच नहीं जिसके सामने ताप की कुछ नहीं चलती? विपत्ति आए तो आए—परमेश्वर ने मुझे चुन लिया है। हे दरिद्रता, तू मेरे द्वार में बड़े डग भरती चली आए—परन्तु परमेश्वर तो पहले ही घर में है, और उसने मुझे चुन लिया है। हे रोग, तू भीतर घुस आए, परन्तु मेरे पास मरहम तैयार है—परमेश्वर ने मुझे चुन लिया है। इस आँसुओं की तराई में मुझ पर चाहे जो बीते, मैं जानता हूँ कि उसने मुझे “चुन” लिया है। हे मसीही, मत डर; यीशु तेरे संग है। तेरी सब अग्निमय परीक्षाओं में उसकी उपस्थिति ही तेरी शान्ति और सुरक्षा है। जिसे उसने अपना जानकर चुन लिया है, उसे वह कभी न छोड़ेगा। “मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ,” यही उसके चुने हुओं के लिये “दुःख की भट्ठी” में उसकी अटल प्रतिज्ञा का वचन है।—स्पर्जन।

सितम्बर 20

परमेश्वर ने जगत के नीच लोगों को, और तुच्छ जाने गए लोगों को चुन लिया। 1 कुरिन्थियों 1:28.

यूरोप के कुछ बड़े भवनों में ऐसे चित्र देखे जा सकते हैं जो कूँची से नहीं बने, परन्तु पच्चीकारी हैं, जो पत्थर, काँच, या अन्य सामग्री के छोटे-छोटे टुकड़ों से बनी होती है। कलाकार इन छोटे टुकड़ों को लेता है, और उन्हें माँज-सँवारकर तथा क्रम से बैठाकर, उनसे वह भव्य और सुन्दर चित्र बना देता है। चित्र का हर एक अलग भाग काँच या संगमरमर या सीप का एक छोटा-सा तुच्छ टुकड़ा हो सकता है; परन्तु हर एक अपने-अपने स्थान पर हो, तो सारा मिलकर कला की उत्कृष्ट कृति बन जाता है।

मैं सोचता हूँ कि उस महान कलाकार के हाथों में मनुष्यजाति के साथ भी ऐसा ही होगा। परमेश्वर पत्थर और पीतल के उन छोटे तुच्छ टुकड़ों को उठा रहा है जो बिना किसी की दृष्टि में आए पाँवों तले रौंदे जा सकते थे, और उन्हीं से अपनी महान उत्कृष्ट कृति बना रहा है।—बिशप सिम्पसन।

सितम्बर 21

आनन्द के साथ यहोवा की सेवा करो; गाते हुए उसके सम्मुख आओ। भजन संहिता 100:2.

परमेश्वर चाहता है कि हमारा जीवन एक गीत हो। उसने हमारे लिये संगीत अपने वचन में, और जीवन में हमारे स्थानों और सम्बन्धों में जो कर्तव्य हम पर आते हैं उनमें, लिख रखा है। जो काम हमें करने चाहिए वे स्वरलिपि पर बैठाए गए स्वर हैं। अपने जीवन को सुन्दर संगीत बनाने के लिये हमें आज्ञाकारी और समर्पित होना चाहिए। कोई भी अवज्ञा एक झूठे स्वर का गाना है, और बेसुरापन उत्पन्न करती है।—जे. आर. मिलर।

सितम्बर 22

जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा, और द्वार बन्द करके अपने पिता से जो गुप्त में है प्रार्थना कर। मत्ती 6:6.

यही विश्वास का गढ़ है; यहीं वह दिन-प्रतिदिन के संग्राम के लिये अपने आप को हथियारबन्द करता है। प्रार्थना की उस कोठरी में सन्नाटा सारे घर में मृत्यु का सूचक है। जब उस द्वार के कब्ज़ों पर मोरचा लगने दिया जाता है, और वह कक्ष उजाड़ छोड़ दिया जाता है, तब हृदय-रूपी घर को शैतान शीघ्र फिर से अपने अधिकार में कर लेता है, और दुष्ट आत्माएँ भीतर आकर वहाँ वास करने लगती हैं।—थियोडोर कायलर।

सितम्बर 23

पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ। 1 पतरस 1:16.

पवित्रता का राजमार्ग जीवन की सबसे साधारण सड़क के साथ-साथ जाता है—ठीक तेरे ही मार्ग के साथ। हवा और वर्षा में, चाहे वह कैसी ही क्यों न बरसे—यह तो बस उसके हाथ में हाथ डाले चलना ही है।—मार्क गाय पीयर्स।

सितम्बर 24

तब यहोवा ने कहा, जो काम मैं करने पर हूँ, उसे क्या मैं इब्राहीम से छिपा रखूँ? उत्पत्ति 18:17.

इब्राहीम ने, परमेश्वर के साथ संगति में रहते हुए, उस नगर के विनाश का समाचार सदोम में रहनेवाले लूत से बहुत पहले जान लिया। आह, काश और अधिक संगति होती!—चयनित।

सितम्बर 25

अब जो जीवन मैं शरीर में जीता हूँ। गलातियों 2:20.

मुझे आशा है कि मैं इस संसार में से केवल एक ही बार होकर निकलूँगा—इसलिये यदि कोई कृपा है जो मैं दिखा सकता हूँ, या कोई भला काम है जो मैं किसी संगी मनुष्य के लिये कर सकता हूँ, तो मुझे उसे अभी कर लेने दे; मैं उसे न टालूँ, न उसकी उपेक्षा करूँ, क्योंकि मैं इस मार्ग से फिर होकर न निकलूँगा।—मार्कस ऑरेलियस।

सितम्बर 26

हमको अपने दिन गिनना सिखा, कि हम बुद्धिमान् हृदय प्राप्त करें। भजन संहिता 90:12.

हर एक दिन एक छोटा जीवन है; और हमारा सारा जीवन एक ही दिन का दोहराया जाना मात्र है: इसी से बूढ़ा याकूब अपने जीवन को दिनों से गिनता है; और मूसा चाहता है कि उसे पवित्र गणित का यह अंश सिखाया जाए—कि वह अपने वर्ष नहीं, परन्तु अपने दिन गिने। इसलिये जो एक दिन खोने का साहस करते हैं, वे भयानक रूप से अपव्ययी हैं; और जो उसे कुसमय में गँवाने का साहस करते हैं, वे हताश हैं।—बिशप हॉल।

सितम्बर 27

मसीह तुम में, महिमा की आशा। कुलुस्सियों 1:27.

धर्म वह साधारण अग्नि-सीढ़ी नहीं है जिसे तू किसी सम्भावित संकट की आशंका से अपने घर के बाहर की ओर बना लेता है, और संकट के आने तक वहीं छोड़ देता है। किसी भोर जब तेरे घर में आग लग जाती है तब तू उसके पास जाता है, और वह बेचारी पुरानी वस्तु जिसे तूने वहाँ बना रखा था, और सोचा था कि किसी दिन उसे काम में ला सकूँगा, इतनी जंग खाई और टूटी हुई है, और मौसम ने उस पर ऐसी मार की और धूप ने उसके कब्ज़े ऐसे मोड़ दिए हैं, कि वह काम ही न करेगी। यही उस मनुष्य की दशा है जिसने अपने लिये कुछ ऐसा बना रखा है जो विश्वास का पंथ जान पड़ता है, परमेश्वर पर एक भरोसा, उस दिन की आशंका से जब संकट उस पर आ पड़ेगा, और अपने मन में कह लिया है कि मैं सुरक्षित हूँ, क्योंकि तब मैं उसी में शरण लूँगा। परन्तु धर्म तो वह घर है जिसमें हम रहते हैं, वह मेज़ है जिस पर हम बैठते हैं, वह अँगीठी है जिसके निकट हम आते हैं, वह कमरा है जो अपनी मनोहर और परिचित उपस्थिति से हम पर छा जाता है; वह बिछौना है जिस पर लेटकर हम बीते हुए पर विचार करते, और भविष्य की बाट जोहते, और अपनी ताज़गी बटोरते हैं।—फिलिप्स ब्रुक्स।

सितम्बर 28

पिता की प्रतिज्ञा की बाट जोहते रहो। प्रेरितों के काम 1:4.

किसी प्रतिज्ञा पर तब तक ठहरा रह जब तक परमेश्वर वहाँ तुझसे न मिले। वह सदा अपनी प्रतिज्ञाओं के मार्ग से ही लौटकर आता है।—चयनित।

सितम्बर 29

और वह विजय जिससे संसार पर जय पाई जाती है, हमारा विश्वास है। 1 यूहन्ना 5:4.

संसार मुझ पर तब जय पाता है जब वह मुझे अपने पिता परमेश्वर को देखने, प्रेम करने, उससे संगति रखने, और उसकी सेवा करने से रोकने में सफल हो जाता है। मैं उस पर तब जय पाता हूँ जब मैं उस पर हाथ रखकर उसे विवश करता हूँ कि वह मुझे उसके और निकट पहुँचने में, उसके और समान बनने में, उसका और बार-बार स्मरण करने में, और उसकी इच्छा को और आनन्द तथा और स्थिरता से पूरा करने में सहायता दे। संसार पर एकमात्र जय यही है कि उसे झुकाकर सर्वोच्च बातों में अपनी सेवा में लगा लिया जाए—ईश्वरीय स्वभाव के अधिक स्पष्ट दर्शन की प्राप्ति, स्वयं परमेश्वर के प्रति गहरे प्रेम की प्राप्ति, और उसके प्रति अधिक आनन्दमय समर्पण और सेवा। यही जय है—जब तू संसार को एक सीढ़ी बना सके जो तुझे परमेश्वर तक ऊपर उठा ले। जब संसार तेरे और परमेश्वर के बीच एक ढकनेवाले परदे के समान आ जाए, तब उसने तुझ पर जय पा ली है। जब संसार तेरे और परमेश्वर के बीच एक पारदर्शी माध्यम के समान आ जाए, तब तूने उस पर जय पा ली है। जय पाना यही है कि उसे अपने पाँवों तले कर लिया जाए और उस पर खड़े होकर उसी के द्वारा परमेश्वर तक ऊपर पहुँचा जाए।—एलेक्स. मैक्लारेन।

सितम्बर 30

वह तेरे विषय में अपने दूतों को आज्ञा देगा, कि जहाँ कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें। भजन संहिता 91:11.

किसी कर्तव्य को बहुत छोटा, जीवन के किसी क्रम को बहुत तुच्छ, किसी काम को बहुत नीचा मत समझ, यदि वह तेरे मार्ग में आ पड़े, क्योंकि परमेश्वर उसे इतना बड़ा मानता है कि उसमें तेरी रक्षा के लिये अपने दूतों को भेजता है।—मार्क गाय पीयर्स।

पृष्ठ 1 / 1 · 18 मिनट अध्याय में शेष