अध्याय 8 · 20 मिनट का पठन
अगस्त
अगस्त 1
प्रार्थना में लगे रहो। कुलुस्सियों 4:2.
इस संसार में परमेश्वर किसी भी पुरुष या स्त्री को जो सबसे बड़ा और सबसे उत्तम गुण देता है, वह प्रार्थना का गुण है। और जब वह इस संसार के अन्त में उनसे लेखा लेने आता है, तब कोई भी पुरुष या स्त्री परमेश्वर को जो सबसे अच्छा प्रतिफल लौटा सकता है, वह प्रार्थना से भरा जीवन है। और वे ही सेवक अपने प्रभु का धन सबसे अच्छे साहूकारों को सौंपते हैं जो सवेरे उठते और देर तक बैठे रहते हैं, जब तक वे इस संसार में हैं, सदा प्रार्थना की उत्तम से उत्तम रीतियाँ खोजते और उनका अनुसरण करते हैं, और सदा प्रार्थना की अधिक गुप्त, अधिक दृढ़, और आत्मिक रूप से अधिक फलदायक आदतें बनाते रहते हैं, यहाँ तक कि वे सचमुच बिना रुके प्रार्थना करते हैं, और सदा प्रार्थना में नए-नए उद्यम, और नई-नई उपलब्धियाँ, और नई-नई समृद्धियाँ पाते रहते हैं।—एलेक्स. व्हाइट।
अगस्त 2
वह उन नावों में से एक पर चढ़ गया . . . और . . . बैठ गया। लूका 5:3.
जब यीशु नाव में बैठते हैं, तब सब कुछ अपने ठीक स्थान पर होता है। माल भण्डार में रहता है, मन में नहीं। चिन्ताएँ और लाभ, भय और हानियाँ, बीते कल की असफलता और आज की सफलता हमारे और उनकी उपस्थिति के बीच अपने को नहीं घुसेड़तीं। मन उन्हीं से लिपटा रहता है। भजनकार ने गाया, “भलाई और करुणा मेरे साथ-साथ बनी रहेंगी।” हाय, जब भलाई और करुणा हमारे आगे आ जाती हैं, और हमारी आशीषें यीशु को दृष्टि से ओझल कर देती हैं! यही तो वह धन्य क्रम है—प्रभु सदा पहले, मैं उनके पीछे-पीछे, और उनकी भलाई और करुणा मेरे पीछे-पीछे।—मार्क गाइ पियर्स।
अगस्त 3
अब तो तुम प्रभु में ज्योति हो; ज्योति की सन्तान के समान चलो। इफिसियों 5:8.
हम अपने जीवन-सेवा के उस अचेतन भाग के महत्त्व को नहीं समझते। वह निरन्तर चलता रहता है। सड़क पर दूसरे को दिए हर अभिवादन में, हर क्षण की बातचीत में, हर पत्र में जो हम लिखते हैं, दूसरों के जीवन से हर सम्पर्क में, हम से एक सूक्ष्म प्रभाव निकलता है जो प्रायः उन कामों से भी दूर तक पहुँचता है, और उनसे भी गहरी छाप छोड़ जाता है जिन्हें हम उस समय कर रहे होते हैं। आत्मिक परिणामों और छापों में बात इतनी नहीं कि हम इस संसार में क्या करते हैं, वरन् यह कि हम क्या हैं।—जे. आर. मिलर।
अगस्त 4
भले कामों के लिये मसीह यीशु में सृजे गए। इफिसियों 2:10.
आओ, हम उससे विनती करें कि वह हम में यह कार्य करे कि हम उन भले कामों को चाहें, कि हमारी इच्छा, अपने स्वतन्त्र कार्य में बिना बाधा पाए, उसकी इच्छा से ओतप्रोत और गढ़ी जाए, ठीक जैसे ज्योति वायुमण्डल को हटाए बिना उसमें व्याप जाती है। और आओ, हम यह भी आशा रखें कि वह हम में इतना बल भर देगा कि हम सब भाँति से प्रसन्न करते हुए उसकी इच्छा को पूरा कर सकें। इस प्रकार, दिन-प्रतिदिन हमारा जीवन उन पवित्र इच्छाओं और मनोहर कामों का प्रगटीकरण होगा जो परमेश्वर के भीतर बसने और भीतर काम करने की गवाही देंगे। और मनुष्य हमारे भले कामों को देखकर हमारे स्वर्गीय पिता की महिमा करेंगे।—एफ. बी. मेयर।
अगस्त 5
अपने इसी बल में जा . . . क्या मैंने तुझे नहीं भेजा? न्यायियों 6:14.
आज्ञाकारिता के मार्ग में परमेश्वर अपने बालक को कभी असफल होने के लिये नहीं छोड़ता।—थियोडोर क्यूलर।
अगस्त 6
ऊपर की वस्तुओं पर मन लगाओ, न कि पृथ्वी की वस्तुओं पर। कुलुस्सियों 3:2. जो काम तेरे हाथ लगे उसे अपनी शक्ति भर करना। सभोपदेशक 9:10.
यदि हमें संसार से अलग रहकर जीवन बिताना है, तो चूँकि मनुष्य वही काम भली भाँति करते हैं जिसे वे मन लगाकर करते हैं, हम, जिनका मन ऊपर की वस्तुओं पर लगा है, इस जीवन के सांसारिक, साधारण कर्तव्यों को ठीक रीति से कैसे निभाएँ? यदि हमारे मन स्वर्गीय बातों में मग्न हैं, तो हम इस दूसरी, और उतनी ही ईश्वरीय, आज्ञा का पालन कैसे करें, “जो काम तेरे हाथ लगे उसे अपनी शक्ति भर करना”?
ये दोनों पूर्ण रूप से मेल खाते हैं। मनुष्य स्वर्गीय और पार्थिव संसारों के बीच खड़ा दोनों से सम्बन्ध रखता है; और न तो वह उस फूल के समान है जो धूल से उगकर उसी में लौट जाता है और पूर्णतः पृथ्वी का है, और न उस तारे के समान जो अपने निचले मण्डल से बहुत दूर चमकता हुआ पूर्णतः आकाश का है, वरन् हमारे मन उस मेघधनुष के समान ठीक ठहराए जा सकते हैं जो स्वर्ग तक उठता पर पृथ्वी पर टिका रहता, और घाटी के ढेलों तथा आकाश के बादलों दोनों से जुड़ा है।—गथरी।
अगस्त 7
आओ, हम हर एक बोझ और उलझानेवाले पाप को दूर करके, धीरज से उस दौड़ में दौड़ें जो हमारे सामने रखी है, और यीशु की ओर ताकते रहें। इब्रानियों 12:1, 2.
यहाँ बैठे हुए विचार करो—किसी ऐसे काम पर जो तुम कर रहे हो और जो गलत है, अपने जीवन की किसी आदत पर, अपने भोग-विलास पर, अथवा अपने जीवन की उस बड़ी, सर्वव्यापी आदत पर जो तुम्हें अनन्तकाल के बदले वर्तमान का प्राणी, और महिमामय आकाश के बदले भौतिक पृथ्वी का प्राणी बना देती है। अपने आप से अपने निज जीवन की किसी आदत के विषय में पूछो, और उसे यीशु मसीह के आमने-सामने ले आओ।—फिलिप्स ब्रुक्स।
अगस्त 8
उन्होंने यह जान लिया कि ये यीशु के साथ रहे हैं। प्रेरितों के काम 4:13.
यदि मैं संसार का ध्यान करूँ, तो मुझ पर संसार की छाप पड़ती है; यदि मैं अपनी परीक्षाओं और दुखों का ध्यान करूँ, तो मुझ पर अपनी परीक्षाओं और दुखों की छाप पड़ती है; यदि मैं अपनी असफलताओं का ध्यान करूँ, तो मुझ पर अपनी असफलताओं की छाप पड़ती है; यदि मैं मसीह का ध्यान करूँ, तो मुझ पर मसीह की छाप पड़ती है।—चयनित।
अगस्त 9
तुम मुझे गुरु, और प्रभु, कहते हो; और भला कहते हो, क्योंकि मैं वही हूँ। यूहन्ना 13:13. (आर. वी. हाशिया).
हमारा गुरु कैसा अद्भुत है! कभी-कभी हम उसे घर में ढूँढ़ते हैं, पर वह वहाँ नहीं होता। हम उसे ढूँढ़ने निकलते हैं और उसे कदाचित् जंगल में या किसी पहाड़ पर प्रार्थना करते हुए पाते हैं, या किसी दीन अंधे को हाथ पकड़कर ले जाते हुए, या चुंगी लेनेवालों और पापियों के साथ भोजन करते हुए, या आँधी में सोते हुए, या किसी सामरी स्त्री से बातें करते हुए, या क्रोधित मनुष्यों से घिरे हुए, या क्रूस उठाए हुए। केवल उसके वचन ही शिक्षा नहीं देते। उसका स्थान, उसका काम, उसके संगी, उसका परिवेश, उसका वस्त्र, उसका मौन, उसका समर्पण—सब कुछ शिक्षा से भरा है। और जो उससे सीखते हैं वे उसके समान बन जाते हैं।—जॉर्ज बोवेन।
अगस्त 10
पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता होने के लिये भेजा। 1 यूहन्ना 4:14.
यह कैसा मधुर विचार है कि यीशु मसीह अपने पिता की अनुमति, अधिकार, सहमति, और सहायता के बिना नहीं निकले। वह पिता की ओर से भेजा गया कि मनुष्यों का उद्धारकर्ता ठहरे। . . . क्या तूने कभी यहोवा के हृदय के उस प्रेम की गहराई पर विचार किया, जब परमेश्वर पिता ने अपने पुत्र को दया के इस महान कार्य के लिये सुसज्जित किया? यदि नहीं, तो यही आज तेरा ध्यान का विषय हो। पिता ने उसे भेजा! इस विषय पर मनन कर। विचार कर कि यीशु वही करता है जो पिता चाहता है। मरते हुए उद्धारकर्ता के घावों में उस महान परमेश्वर का प्रेम देख, जो कहता है, मैं जो हूँ सो हूँ। यीशु का हर एक विचार उस अनन्त, सदा धन्य परमेश्वर से भी जुड़ा रहे।—स्पर्जन।
अगस्त 11
जो यहोवा की बाट जोहते हैं वे अपनी शक्ति बदलते जाएँगे। यशायाह 40:31. (आर. वी.)
हे प्रभु, हम में कैसा परिवर्तन, वह एक छोटा सा घण्टा
जो तेरी उपस्थिति में बिताया जाए, ला देने में समर्थ होगा!
वह हमारे हृदय से कैसे भारी बोझ उठा लेगा!
कैसी सूखी भूमि को मानो वर्षा से सींच देगा!
हम घुटने टेकते हैं—और चारों ओर सब कुछ उदास सा जान पड़ता है।
हम उठते हैं—और दूर और पास का सब कुछ
धूप भरी रूपरेखा में, साहसी और स्पष्ट, सामने खड़ा हो जाता है।
हम घुटने टेकते हैं—कैसे निर्बल: हम उठते हैं—कैसे सामर्थ्य से भरे।
फिर हम अपने ऊपर यह अन्याय क्यों करें
या दूसरों पर—कि हम सदा बलवन्त नहीं रहते;
कि हम सदा चिन्ता से दबे रहते हैं;
कि हम कभी निर्बल या निरुत्साहित हों,
व्याकुल या बेचैन, जबकि हमारे पास प्रार्थना है,
और आनन्द और बल और साहस तेरे पास हैं?
—महाधर्माध्यक्ष ट्रेंच।
अगस्त 12
परन्तु तुझे तेरे परमेश्वर यहोवा ने ऐसा करने नहीं दिया। व्यवस्थाविवरण 18:14.
कैसी सीढ़ी है यह! हम प्रायः आँसू भरे, संदेह भरे स्वर में अपनी उन आत्मिक दयाओं के लिये धन्यवाद देते हैं जो प्रत्यक्ष हैं; पर उन दयाओं के लिये कितना असीम क्षेत्र है जो अप्रत्यक्ष हैं! हम कल्पना भी नहीं कर सकते कि परमेश्वर ने हमें कितना कुछ करने नहीं दिया, कितना कुछ बनने नहीं दिया।—फ्रांसेस रिडली हैवरगल।
अगस्त 13
यीशु ने निकलकर एक बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, और उनके बीमारों को चंगा किया। . . . और जब वह भीड़ को विदा कर चुका, तब वह प्रार्थना करने को अलग एक पहाड़ पर चढ़ गया; और जब सन्ध्या हुई, तब वह वहाँ अकेला था। मत्ती 14:14, 23.
क्या हम भी उसके समान मानव चरित्र के इन दो महान तत्त्वों को मिलाकर रखते हैं? क्या हमारे सार्वजनिक कर्तव्य, संसार की चिन्ताएँ, और कारबार, और उलझनें, परमेश्वर के साथ किसी गुप्त चाल-चलन से सुन्दरता से ढाले और पवित्र किए गए हैं? यदि संसार अपनी व्यस्त सड़कों से हमारे पीछे चले, तो क्या वह हमें हमारी घरेलू वेदियों और हमारी कोठरी की भक्ति तक खोज पाएगा?
कर्म और मनन मसीही जीवन के दो महान अंग हैं, और धार्मिक चरित्र की सिद्धि इसी में है कि इन दोनों को एक स्वर और मेल में पाया जाए।—मैकडफ।
अगस्त 14
तुम्हारे लिये एक आदर्श छोड़ गया, कि तुम उसके पदचिह्नों पर चलो। 1 पतरस 2:21. (आर. वी.)
मैंने बहुत पहले ही यह प्रार्थना करना छोड़ दिया, “हे प्रभु यीशु, इस खोए हुए संसार पर तरस खा!” मुझे वह दिन और वह घड़ी स्मरण है जब मुझे ऐसा जान पड़ा मानो प्रभु मुझे ऐसी प्रार्थना करने पर डाँट रहे हों। उन्होंने मानो मुझसे कहा, “मैंने खोए हुए संसार पर तरस खाया है, और अब तेरी बारी है कि तू तरस खाए।”—ए. जे. गॉर्डन।
अगस्त 15
तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर करके न मानना। निर्गमन 20:3.
यदि तुम अपने आप को किसी भोग को अपनी प्रार्थनाओं से बढ़कर, किसी पुस्तक को अपनी बाइबल से बढ़कर, किसी घर को परमेश्वर के भवन से बढ़कर, किसी मेज को प्रभु की मेज से बढ़कर, किसी व्यक्ति को अपने उद्धारकर्ता से बढ़कर, किसी को अपने प्राण से बढ़कर, अथवा किसी वर्तमान भोग-विलास को स्वर्ग की आशा से बढ़कर प्रेम करने लगते पाओ—तो सावधान हो जाओ!—गथरी।
अगस्त 16
तुम मेरी सी चाल चलो, जैसा मैं भी मसीह की सी चाल चलता हूँ। 1 कुरिन्थियों 11:1.
मैक्सिको के युद्ध में जब सैनिक डगमगा रहे थे, तब एक सेनापति अपनी रकाबों पर उठ खड़ा हुआ और शत्रु की पंक्ति में यह पुकारता हुआ कूद पड़ा, “हे वीरो, मेरे पीछे आओ!” वे, उसका साहस और तेवर देखकर, उसके पीछे झपटे, और विजय पाई।
मनुष्यों को परमेश्वर के लिये एकत्र करने को जिस वस्तु की आवश्यकता है वह है उनकी अगुवाई करने के लिये एक आदर्श। दूसरों को आगे बढ़ने की तुम्हारी सब आज्ञाएँ तब तक व्यर्थ हैं जब तक तुम स्वयं पीछे रहते हो। उन्हें ठीक रीति से प्रभावी करने के लिये तुम्हें स्वयं स्वर्ग की ओर चल पड़ना होगा, और पीछे केवल इसलिये मुड़ना होगा कि यह उत्तेजक ललकार दो, “हे वीरो, मेरे पीछे आओ!”—टी. डेविट टालमेज।
अगस्त 17
बड़ी दीनता के साथ प्रभु की सेवा करते हुए। प्रेरितों के काम 20:19.
एक शिल्पी की कथा है जिसने बहुत समय तक चन्दन की लकड़ी का एक टुकड़ा ढूँढ़ा, ताकि उसमें से मरियम की मूर्ति गढ़े। वह निराश होकर हार मानने ही वाला था, और अपने जीवन की उस कल्पना को अधूरी छोड़ने ही वाला था, कि एक स्वप्न में उसे आज्ञा हुई कि वह अपनी मरियम की मूर्ति बांज की लकड़ी के एक कुन्दे से गढ़े, जो आग में झोंके जाने के लिये रखा था। उसने आज्ञा मानी, और साधारण जलावन की लकड़ी के एक कुन्दे से एक उत्कृष्ट कृति बना दी।
हम में से बहुत से लोग जीवन के बड़े अवसर इसलिये खो देते हैं कि हम अपनी नक्काशी के लिये चन्दन की खोज में बैठे रहते हैं, जबकि वे सचमुच उन्हीं साधारण कुन्दों में छिपे रहते हैं जिन्हें हम जला देते हैं।—ओरिसन स्वेट मार्डेन।
अगस्त 18
मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है, क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है। 2 कुरिन्थियों 12:9.
परमेश्वर अपने लोगों की प्रार्थनाओं का उत्तर दबाव को हटाकर नहीं, वरन् उसे सहने की उनकी शक्ति बढ़ाकर देता है। यह दबाव प्रायः जीवन के सकरे मार्ग और विनाश के चौड़े रास्ते के बीच की बाड़ होता है; और यदि हमारा स्वर्गीय पिता उसे हटा दे, तो कदाचित् वह स्वर्ग की हानि पर हो। हाय, यदि परमेश्वर ने उस काँटेदार बाड़ को, प्रायः बड़ी हार्दिक प्रार्थनाओं के उत्तर में, हटा दिया होता, तो हम में से कितने आज त्यागे हुए होते! महिमा में विराजमान कितने ही सन्तों का गीत कैसे थम गया होता! कितनी ही वीणाएँ तार-रहित पड़ी होतीं! छुड़ाए हुओं के भवनों में कितने ही स्थान रीते रह जाते! यदि परमेश्वर उन सब प्रार्थनाओं का उत्तर दे देता जो हम स्वर्ग की ओर चढ़ाते हैं, तो हमें और किसी कोड़े की आवश्यकता न होती। धन्य है कि हमारे पास एक ऐसा है जो इतना प्रेमी है कि जो हम प्रायः इतनी उतावली से माँगते हैं उसे नहीं देता।—एफ. व्हिटफील्ड।
अगस्त 19
मुझ में बने रहो, और मैं तुम में। जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। यूहन्ना 15:4.
पल-पल, और घड़ी-घड़ी, मनुष्य की भीतरी प्रकृति को परमेश्वर के जीवन से निरन्तर सम्भाला जाना है। केवल तब ही, जब मैं उसकी परिपूर्णता को अपने रीतेपन में लगातार ग्रहण करता रहूँ, मैं इस शब्द के सच्चे, पूर्ण, गहरे अर्थ में सचमुच जी रहा होता हूँ—वही अनन्त जीवन, जो अभी मेरा सौभाग्य है, और आगे मेरी महिमा होगा।—डब्ल्यू. हे एटकेन।
अगस्त 20
विश्वास ही से नूह ने . . . अपने घराने के बचाव के लिये एक जहाज बनाया। इब्रानियों 11:7.
विश्वास के प्रयोग के लिये कैसा दीन, कैसा साधारण क्षेत्र! कोई कहता कि उद्देश्य काम से बिलकुल बेमेल था। जहाज एक बड़ा उपक्रम था, पर वह किसलिये उठाया गया? अपने ही परिवार को बचाने के लिये। क्या इतना छोटा क्षेत्र विश्वास का लक्ष्य होने योग्य है? क्या परिवार के घेरे के जीवन जैसा साधारण दृश्य परमेश्वर की सेवा का मन्दिर होने के योग्य है? . . . हे मेरे मन, जब तू अपनी प्रार्थनाएँ समाप्त कर ले और अपने मनन पूरे कर ले, तो यह न कहना कि तू परमेश्वर के भवन से निकल आया है। परमेश्वर का भवन तेरे लिये सब कहीं होगा, और तेरा अपना घर उसी का एक भाग होगा। तू अनुभव करेगा कि इस स्थान के सब कर्तव्य पवित्र किए गए हैं; कि यह परमेश्वर के भवन और स्वर्ग के द्वारों में से एक के सिवा और कुछ नहीं। तू अनुभव करेगा कि इसका हर एक कर्तव्य उच्च संगति का कार्य है। इसलिये यह तेरा हो कि तू अपने घर को उसी का भवन बना ले। यह तेरा हो कि तू घर के सामाजिक जीवन के हर एक वचन, दृष्टि, और काम को पवित्र कर ले। यह तेरा हो कि तू साधारण दिन की आवश्यकताओं के लिये अपनी शरण का जहाज बनाए; निश्चय ही, तेरे प्रेम का परिश्रम विश्वास का कार्य कहलाएगा।—जॉर्ज मैथेसन।
अगस्त 21
हम उसकी रचना हैं, और भले कामों के लिये मसीह यीशु में सृजे गए, जिन्हें परमेश्वर ने पहले से तैयार किया कि हम उनमें चलें। इफिसियों 2:10.
संसार में कोई मनुष्य ऐसा उत्पन्न नहीं होता जिसका काम उसके साथ उत्पन्न न हो। जो चाहते हैं उनके लिये सदा काम रहता है, और काम करने के औज़ार भी।—जे. बी. लोवेल।
अगस्त 22
वह . . . चेलों के पाँव धोने लगा। यूहन्ना 13:5.
हम भूल जाते हैं कि यीशु मसीह आज भी, जब वह सिंहासन पर विराजमान है, वही है जो कल था, जब वह हमारे संसार के मार्ग पर चला। और इस भूल में हम कितना कुछ खो देते हैं! जो वह था, वही वह है। जो उसने कहा, वही वह कहता है। सुसमाचार तो केवल उस जीवन के नमूने हैं जिसे वह सदा जीता आया है; वे उसके अपरिवर्तनीय अस्तित्व की दिनचर्या से फाड़े गए पन्ने हैं। आज भी वह अपने चेलों के पाँव धोने में लगा है, जो उनकी जंगल की यात्राओं से मैले हुए हैं। हाँ, हे मेरे मित्र, वह मनोहर घटना तुझ में पूरी हो रही है, यदि केवल तू उसकी दीन, प्रेममयी सेवाओं को अस्वीकार न करे, जिसे हम स्वामी और प्रभु कहते हैं, पर जो अब भी अपनी कमर बाँधकर सेवा करने को निकलता है। और यदि हम ठीक बने रहना चाहते हैं तो हमें यह निरन्तर शुद्धिकरण चाहिए। केवल उस घड़ी की ओर पीछे मुड़कर देखना पर्याप्त नहीं, जब हम पहली बार क्षमा के लिये परमेश्वर के पुत्र के चरणों में घुटने टेके; और उसे यह कहते सुना, “तेरे पाप, जो बहुत हैं, सब क्षमा हुए।” हमें प्रतिदिन, प्रति घड़ी शुद्धिकरण चाहिए—प्रतिदिन, प्रति घड़ी के पाप से।—एफ. बी. मेयर।
अगस्त 23
मैं यहोवा हूँ, मैं बदलता नहीं। मलाकी 3:6.
हमारी आशा “मुझे ऐसा जान पड़ता है,” या “यह सम्भव है” जैसे किसी कच्चे धागे पर नहीं टँगी; परन्तु हमारे बँधे हुए लंगर की जंजीर, वह दृढ़ रस्सी, उसकी शपथ और प्रतिज्ञा है जो अनन्त सत्य है। हमारा उद्धार परमेश्वर के अपने हाथ और मसीह के अपने बल से परमेश्वर के अपरिवर्तनीय स्वभाव के दृढ़ खम्भे से बाँधा गया है।—विलियम रदरफोर्ड।
अगस्त 24
मैं मेंह को उसके नियुक्त समय पर बरसाऊँगा; आशीष की झड़ियाँ लगेंगी। यहेजकेल 34:26.
आज सवेरे तेरी ऋतु कौन सी है? क्या यह सूखे की ऋतु है? तो यही झड़ियों की ऋतु है। क्या यह भारी बोझ और काली घटाओं की ऋतु है? तो यही झड़ियों की ऋतु है। “जैसे तेरे दिन वैसा तेरा बल होगा।” “मैं तुझे आशीष की झड़ियाँ दूँगा।” यह शब्द बहुवचन में है। परमेश्वर सब भाँति की आशीषें भेजेगा। परमेश्वर की सारी आशीषें सोने की जंजीर की कड़ियों के समान एक साथ चलती हैं। यदि वह मन फेरनेवाला अनुग्रह देता है, तो वह शान्ति देनेवाला अनुग्रह भी देगा। वह “आशीष की झड़ियाँ” भेजेगा। आज ऊपर देख, हे मुरझाए हुए पौधे, और स्वर्गीय सिंचाई के लिये अपने पत्ते और फूल खोल दे।—स्पर्जन।
अगस्त 25
फिर भी, तेरे वचन पर। लूका 5:5.
आह, हमारे लिये कैसा धन्य नियम! मेरा यह मार्ग अन्धकारमय, रहस्यमय, उलझन भरा है; फिर भी, तेरे वचन पर मैं आगे बढ़ूँगा। मेरी यह परीक्षा चुभनेवाली है, हाड़-माँस के सहने को कठोर है। टूटे हुए हृदय से साँस लेना कठिन है, तेरी इच्छा पूरी हो। पर, फिर भी, तेरे वचन पर मैं कहूँगा, ऐसा ही हो, हे पिता! मेरी यह उलझानेवाली आदत, या दुर्बलता, या पाप, क्रूस पर चढ़ाना कठिन है। यह मेरा ही एक अंग बन गया है—मानो दूसरा स्वभाव; इससे अलग होना ऐसा होगा जैसे दाहिना हाथ काट देना, या दाहिनी आँख निकाल देना; फिर भी, तेरे वचन पर मैं हर एक बोझ को दूर कर दूँगा; इस मूरत को मैं सर्वथा नष्ट कर दूँगा। मेरी यह धार्मिकता अनदेखी करना कठिन है; ये सब सद्गुण, और भलमनसाहतें, और स्वाभाविक अनुग्रह, यह विश्वास करना कठिन है कि इन्हें मेरे उद्धार के विषय में किसी भी रीति से मिलाया नहीं जा सकता; और यह कि मुझे आदि से अन्त तक सब कुछ अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के वरदान के रूप में ही ग्रहण करना है। फिर भी, तेरे वचन पर मैं उसके ज्ञान की उत्तमता के कारण सब कुछ हानि ही समझूँगा।—मैकडफ।
अगस्त 26
यदि हम दुख उठाएँ, तो उसके साथ राज्य भी करेंगे। 2 तीमुथियुस 2:12.
छायाकार को तुम्हें एक चित्र देने के लिये पहले एक नेगेटिव चाहिए, जैसा वह उसे कहता है। अब, पार्थिव क्रूस ही वह नेगेटिव है जिससे स्वर्गीय मुकुट बनना है; इस वर्तमान समय का दुख और शोक ही आनेवाले जीवन की महिमा, आदर, और अमरता को निश्चित करता है।—ए. जे. गॉर्डन।
अगस्त 27
परमेश्वर का वचन, जो जीवित और सदा ठहरनेवाला है। 1 पतरस 1:23.
वचन बना रहता है। यहूदी ने इससे बैर किया—पर यह जीवित रहा, जब वह परदा उस पवित्रस्थान से फाड़ा गया जिसे शकीना छोड़ चुकी थी, और जब यरूशलेम ही नष्ट कर दिया गया। यूनानी ने इसका उपहास किया—पर इसने उसके तत्त्वज्ञान को जर्जर और उसके ऐक्रोपोलिस को खण्डहर होते देखा। रोमियों ने इसे आग में डाला—पर यह अपनी राख में से उठ खड़ा हुआ, और गिरते हुए उकाब पर झपटा। तर्क करनेवाले ने इसे उस भट्ठे में झोंका, जिसे उसकी अपनी असावधानी ने “सामान्य से सात गुणा अधिक” धधका रखा था—पर यह आग की गन्ध तक लिए बिना निकल आया। कर्मकाण्डी ने इसे विष देने को इसके चारों ओर साँप लपेट दिए—पर इसने उन्हें झटक दिया और कुछ हानि न पाई। अधर्मी ने इसे कुतर्क और व्यंग्य की आँधी में समुद्र में फेंक दिया—पर यह घमण्डी लहरों की चोटी पर वीरता से सवार रहा। और यह अब भी जीवित है—आँधी के सबसे ऊँचे गर्जन में भी सुना जाता है—यह सारे समय बोलता आया है—यह अभी बोल रहा है!—पंशन।
अगस्त 28
परमेश्वर की शान्ति तुम्हारे हृदयों में राज्य करे। कुलुस्सियों 3:15.
बहुत वर्ष पहले हमारे एक जहाजी बेड़े को एक प्रचण्ड आँधी ने बुरी तरह छिन्न-भिन्न कर दिया—पर यह पाया गया कि कुछ जहाज उसके प्रकोप से अछूते रहे। वे उस स्थान पर थे जिसे नाविक “आँधी की आँख” कहते हैं। जबकि चारों ओर उजाड़ था, वे सुरक्षित थे। ऐसा ही उसके साथ होता है जिसके हृदय में परमेश्वर की शान्ति है।—पिल्किंगटन।
अगस्त 29
तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो। कुलुस्सियों 3:24.
मसीही होने के नाते हमारा काम यही है कि हम जीवन के हर एक काम में प्रभु की सेवा करें।—मार्क गाइ पियर्स।
अगस्त 30
संसार से प्रेम न रखो, और न उन वस्तुओं से जो संसार में हैं। 1 यूहन्ना 2:15.
यदि तुम किसी छोटी नदी के किनारे जाकर उन मक्खियों को देखो जो उसमें नहाने आती हैं, तो तुम पाओगे कि जब वे अपने शरीर को जल में डुबाती हैं, तब वे अपने पंखों को जल से ऊँचा रखती हैं; और थोड़ी देर तैरने के बाद वे अपने बिना भीगे पंखों से धूप भरी हवा में उड़ जाती हैं। अब, यही हमारे लिये शिक्षा है। यहाँ हम संसार की चिन्ताओं और कारबार में डूबे हुए हैं; पर आओ, हम अपने प्राण के पंखों को—अपने विश्वास और अपने प्रेम को—संसार से बाहर रखें, कि इनके बिना उलझे हुए हम स्वर्ग की ओर उड़ान भरने को तैयार रहें।—जे. इंग्लिस।
अगस्त 31
मैं चाहता हूँ कि तुम चिन्ता से मुक्त रहो। 1 कुरिन्थियों 7:32.
इस जीवन के परिवर्तनों और संयोगों की ओर भय से न ताको। वरन् उनकी ओर इस पूरी आशा से देखो कि जैसे-जैसे वे उठें, परमेश्वर, जिसके तुम हो, तुम्हें उनमें से छुड़ा लेगा। उसने अब तक तुम्हें थामे रखा है—तुम बस उसके प्यारे हाथ को कसकर थामे रहो, और वह तुम्हें हर बात में से कुशल से पार ले चलेगा; और जब तुम खड़े न रह सको, तब वह तुम्हें अपनी बाँहों में उठा लेगा। कल क्या हो सकता है, उसकी ओर आगे बढ़कर न ताको। वही सनातन पिता जो आज तुम्हारी चिन्ता करता है, कल भी, और हर दिन तुम्हारी सुधि लेगा। या तो वह तुम्हें दुख से बचाएगा, या वह तुम्हें उसे सहने की अटूट शक्ति देगा। इसलिये शान्त रहो, और सब चिन्तित विचारों और कल्पनाओं को दूर रख दो।—फ्रांसिस द सेल्स।
अध्याय 8 पूरा हुआ
अगस्त