अध्याय 10 · 20 मिनट का पठन
अक्टूबर
अक्टूबर 1
यीशु के चरणों में। लूका 10:39।
यीशु के चरणों में—यही हमारा सौभाग्य और आशीष का स्थान है, और यहीं हमें शिक्षा पाकर जीवन के व्यावहारिक कर्तव्यों के योग्य बनाया जाना है। यहीं हमें उसकी बाट जोहते हुए अपने बल को नया करना है, और सीखना है कि उकाब के समान पंखों पर कैसे ऊँचे उठें; और यहीं हमें वह सच्चा ज्ञान प्राप्त होता है जो सामर्थ्य है। यहीं हमें सीखना है कि सच्चा काम कैसे किया जाता है, और उसे करने के लिए सच्ची प्रेरक शक्ति से सुसज्जित होना है। यहीं हमें काम के दुखों के बीच—और वे थोड़े नहीं हैं—तथा सामान्य जीवन के दुखों के बीच शान्ति मिलती है; और यहीं पृथ्वी के दिनों के बीच हम स्वर्ग की धन्यता का कुछ आभास पाते हैं; क्योंकि उसके चरणों में बैठना सचमुच स्वर्गीय स्थानों में होना है, और उसकी महिमा को निहारना वही करना है जिससे हम वहाँ कभी न थकेंगे।—डब्ल्यू. हे एटकेन।
अक्टूबर 2
परमेश्वर प्रेम है; और जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्वर में बना रहता है, और परमेश्वर उसमें। 1 यूहन्ना 4:16।
परमेश्वर प्रेम है; और यह सोचना जितना सच है उतना ही भला भी है, कि पृथ्वी को छूनेवाली हर सूर्य-किरण के दूसरे छोर पर सूर्य है; वैसे ही परमेश्वर की पृथ्वी पर प्रेम के हर अंश के दूसरे छोर पर परमेश्वर है।—मार्क गाइ पीयर्स।
अक्टूबर 3.
उन्होंने जान लिया कि ये यीशु के साथ रहे हैं। प्रेरितों के काम 4:13।
एक मसीही को यीशु मसीह का सजीव प्रतिरूप होना चाहिए। तुमने मसीह की जीवनियाँ पढ़ी होंगी, जो सुन्दर और वाक्पटुता से लिखी गई हैं, परन्तु मसीह की सबसे उत्तम जीवनी उसकी जीवित जीवनी है, जो उसके लोगों के वचनों और कामों में लिखी जाती है। यदि हम वही होते जिसका हम अंगीकार करते हैं, और जो हमें होना चाहिए, तो हम मसीह के चित्र होते; हाँ, उसके ऐसे स्पष्ट प्रतिरूप कि संसार को घंटों हमें परखते हुए यह न कहना पड़ता, “भला, कुछ-कुछ समानता तो जान पड़ती है”: परन्तु हमें एक बार देखते ही वे पुकार उठते, “यह यीशु के साथ रहा है; इसने उसी से शिक्षा पाई है; यह उसके समान है; इसने नासरत के उस पवित्र पुरुष का पूरा भाव ग्रहण कर लिया है, और यह उसे अपने जीवन तथा प्रतिदिन के कामों में उतारता है।”—स्पर्जन।
अक्टूबर 4
मत डर, केवल विश्वास रख। मरकुस 5:36।
यदि तेरे स्वर्गीय जीवन में कठिनाइयाँ और परीक्षाएँ तुझे घेर लें, तो निराश मत हो। संभव है कि परमेश्वर ने उन्हें जान-बूझकर वहाँ रखा हो, कि तुझे विश्वास की उच्चतर उन्नति के लिए प्रशिक्षित और अनुशासित करे। यदि वह तुझे “खेते-खेते थक जाने” के लिए बुलाता है, तो शायद इसलिए कि तुझे और भी कठोर नाविक बनाए, कि तू अपने ढीले हाथों और निर्बल घुटनों को दृढ़ करे, और सबसे बढ़कर इसलिए कि तुझे उसमें और भी पवित्र भरोसे की ओर ले चले, जिसके हाथ में जहाज और उसका भाग्य है, और जो घिरती घटाओं, अंधकारमय क्षितिज और उठती लहरों के बीच हमारी शंकाओं को सदा यह कोमल झिड़की देता रहता है—“क्या मैंने तुझ से न कहा था, कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी?”—मैकडफ।
अक्टूबर 5
क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्वर ताड़ना देता है। अय्यूब 5:17।
धन्य, क्योंकि वह ताड़ना उसे धन्यता और शान्ति के मार्गों में लाने के लिए दी गई है।
धन्य, क्योंकि उसमें कोई अनावश्यक कठोरता नहीं है।
धन्य, क्योंकि यह ताड़ना इतनी हमारे विरुद्ध नहीं, जितनी हमारे सबसे क्रूर शत्रुओं—हमारे पापों—के विरुद्ध है।
धन्य, क्योंकि हमारे पास शान्ति देनेवाले वचनों की बहुतायत है।
धन्य, क्योंकि प्रभु जिससे प्रेम करता है उसी को ताड़ता है।
धन्य, क्योंकि हमारा पल भर का हलका क्लेश थोड़ी ही देर का है।—जॉर्ज बोवेन।
अक्टूबर 6
तारे को देखकर वे अति आनन्दित हुए। मत्ती 2:10।
हम जो यीशु की बाट जोहते हैं, हमें आनन्दित रहना चाहिए; जब हम ऐसे दिखते हैं मानो उसकी कब्र ढूँढ़ रहे हों, तो इससे हमारे प्रभु का आदर नहीं होता। मसीह के अनुयायियों के उदास मुख ने संसार की दृष्टि में उसकी हानि की है। तो आओ, चलते-चलते हम मुस्कुराएँ, क्योंकि यदि हम ऊपर दृष्टि करें और अपने आप को ठीक मार्ग पर रखें, तो वह तारा हमारे पास है।—थॉस. चैम्पनेस।
अक्टूबर 7
जब मैं अन्धकार में बैठूँ, तब भी प्रभु मेरे लिए ज्योति ठहरेगा। मीका 7:8।
यदि तू तर्क के प्रकाश के बदले विश्वास के प्रतीत होनेवाले अन्धकार को चुनने के लिए तैयार हो, तो परमेश्वर के वचन से तुझ पर अद्भुत ज्योति फूट निकलेगी।—ए. जे. गॉर्डन।
अक्टूबर 8
मैं (दानिय्येल) अकेला रह गया, और मैंने यह बड़ा दर्शन देखा। दानिय्येल 10:8।
एकान्त परमेश्वर का अगला कक्ष है; बस एक और कदम, और तू उसकी साक्षात् उपस्थिति में हो सकता है।—लैंडर।
अक्टूबर 9
आओ, भोजन करो। यूहन्ना 21:12।
आज भोर को हमारे प्राण के प्रियतम का शब्द सुनाई देता है, जो हमें अपना निमंत्रण दे रहा है।
“हे बालको,” वह पूछता है, “क्या तुम्हारे पास कुछ खाने को है?”
हम उत्तर देते हैं, “नहीं; अपने आप में हमारे पास भूख और दरिद्रता के सिवा कुछ नहीं। हे परमेश्वर, हम अपने आप को नहीं खिला सकते!”
तब उसका अपना मधुर शब्द उत्तर देता है, “आओ, भोजन करो!”—डब्ल्यू. हे एटकेन।
अक्टूबर 10
हे प्रभु यहोवा, तू ही जानता है! यहेजकेल 37:3।
यहाँ विश्वास का उत्तर है। “तू जानता है!”—हृदय के विश्राम के लिए कैसा तकिया! “तू जानता है!”—कितने थोड़े पर कितने व्यापक शब्द, जो हृदय की कठिनाइयों, उलझनों और परीक्षाओं को समेटकर व्यक्त कर देते हैं। “तू जानता है!”—जीवन की उथल-पुथल भरी लहरों के बीच; ऐसे समुद्र के बीच जो कभी शान्त नहीं होता; ऐसे दृश्य के बीच जहाँ इधर-उधर डगमगाना ही हर घड़ी की कहानी है—कैसा अवर्णनीय मधुर विश्रामस्थान! उस हर हृदय के लिए इनमें कैसा उत्तर है जो अपनी उमड़ती भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं पाता; उस हृदय के लिए जिसके दुख इतने गहरे हैं कि भाषा परमेश्वर तक पहुँचने का मार्ग नहीं पाती! ओह, कि ये शब्द हमारे मार्ग की हर कठिनाई के उत्तर रूप में सदा हमारे प्राण में सबसे ऊपर रहें! ये हर उस बात का परमेश्वर का उत्तर हैं जिसकी थाह हम नहीं पा सकते; परमेश्वर का वह उत्तर जिस पर हमारे हृदय विश्राम पाएँ और हमारे होंठ उसे कहें, जब हर मार्ग ऐसा रुँध जाए कि हम आगे न बढ़ सकें। “हे प्रभु यहोवा, तू ही जानता है!” हे विश्वासी, यहीं विश्राम कर। अपने प्राण को इन्हीं शब्दों पर टिका दे। अपने परमेश्वर की गोद में शान्ति से विश्राम कर, और इन्हें जीवन के हर दृश्य में अपने साथ ले चल। “हे प्रभु यहोवा, तू ही जानता है।”—एफ. व्हिटफील्ड।
अक्टूबर 11
क्या देखता हूँ, कि एक सीढ़ी पृथ्वी पर खड़ी है, और उसका सिरा स्वर्ग तक पहुँचा है। उत्पत्ति 28:12।
उस रहस्यमय सीढ़ी के विषय में सोच, जो परमेश्वर के सिंहासन से उतरकर उस स्थान तक पहुँचती है, चाहे वह कितना ही तुच्छ क्यों न हो, जहाँ तू है। वह कोई उजाड़ बंजर भूमि हो; कोई दीन कुटिया; किसी जहाज की कोठरी; किसी बसनेवाले की झोंपड़ी; पीड़ा की कोई खाट—परन्तु यीशु मसीह तुझे ढूँढ़ निकालता है, और ठीक वहीं आता है जहाँ तू है। इस सीढ़ी का एक पाया उसके ईश्वरत्व का सोना है; दूसरा उसकी मनुष्यता की चाँदी; और उसके डंडे बैतलहम की चरनी से लेकर उस सामर्थ्य के दाहिने हाथ तक की घटनाओं की शृंखला हैं, जहाँ वह विराजमान है। वह सीढ़ी तेरे लिए आशीष के भार से झुकी हुई है। ओह, कि तू प्रार्थना और विश्वास के ऊपर चढ़नेवाले दूतों के हाथों अपने पाप, चिन्ता और भय के बोझ भेज दे!—कि तू शान्ति, आनन्द, प्रेम और महिमा के झुंड-के-झुंड दूतों को अपने हृदय में ग्रहण कर सके।—एफ. बी. मेयर।
अक्टूबर 12
निश्चय इस स्थान में यहोवा है, और मुझे इसका ज्ञान न था। उत्पत्ति 28:16।
कठोर तपस्या का वह पल्ली का पुरोहित,
कलीसिया की ऊँची मीनार पर चढ़ गया
कि परमेश्वर के और निकट होकर वह
उसका वचन लोगों तक पहुँचा सके।
और उपदेश की पोथी में वह प्रतिदिन लिखता
जो उसे लगता कि स्वर्ग से भेजा गया है;
और वह उसे लोगों के सिरों पर गिरा देता
सप्ताह के एक दिन दो बार।
उसके बुढ़ापे में परमेश्वर ने कहा, “उतर आ और मर।”
और वह मीनार से पुकार उठा:
“हे प्रभु, तू कहाँ है?” और प्रभु ने उत्तर दिया:
“यहाँ नीचे, अपने लोगों के बीच।”—चयनित।
अक्टूबर 13
इसलिए अब हे इस्राएल, इन विधियों और नियमों को सुन जो मैं तुम्हें सिखाता हूँ कि उन पर चलो, कि तुम जीवित रहो, और उस देश में जाकर उसके अधिकारी हो जाओ जिसे तुम्हारे पितरों का परमेश्वर यहोवा तुम्हें देता है। व्यवस्थाविवरण 4:1।
“सुनो” और “करो,” कि तुम “जीवित रहो” और “अधिकारी हो जाओ।” यह एक सार्वभौमिक और स्थायी सिद्धांत है। यह इस्राएल के लिए सच था, और हमारे लिए भी सच है। जीवन का मार्ग और अधिकार का सच्चा भेद परमेश्वर की पवित्र आज्ञाओं का सीधा-सादा पालन है। यह हम प्रेरित ग्रन्थ में आदि से अन्त तक देखते हैं। परमेश्वर ने हमें अपना वचन इसलिए नहीं दिया कि हम उस पर अटकलें लगाएँ या उस पर वाद-विवाद करें, परन्तु इसलिए कि हम उसका पालन करें। और जैसे-जैसे हम अनुग्रह के द्वारा अपने पिता की विधियों और नियमों का हृदय से और आनन्द से पालन करते हैं, वैसे-वैसे हम जीवन के उजियाले मार्ग पर चलते हैं, और उस सब की वास्तविकता में प्रवेश करते हैं जो परमेश्वर ने मसीह में हमारे लिए संचित रखा है।—सी. एच. एम.
अक्टूबर 14
अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है; और मैं शरीर में अब जो जीवन जी रहा हूँ, वह परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करके जीता हूँ, जिसने मुझ से प्रेम किया और मेरे लिए अपने आप को दे दिया। गलातियों 2:20।
जो मनुष्य परमेश्वर में जीता है, वह परमेश्वर के जीवन के सिवा और कोई जीवन नहीं जानता।—फिलिप्स ब्रूक्स।
अक्टूबर 15
पर हम जो दिन के हैं, विश्वास और प्रेम का झिलम, और उद्धार की आशा का टोप पहनकर सचेत रहें। 1 थिस्सलुनीकियों 5:8।
विश्वास, प्रेम, आशा—ये तीनों वह रक्षक कवच रचते हैं जो प्राण की रक्षा करता है; और ये तीनों आत्म-संयम को संभव बनाते हैं। जैसे किसी गोताखोर को उसकी पोशाक में उतारकर उग्र, दूर तक उमड़ते समुद्र की तह में भेज दिया जाता है, वैसे ही जिस मनुष्य का हृदय विश्वास और प्रेम से कसा हो, और जिसका सिर आशा के टोप से ढका हो, उसे परीक्षा और सांसारिकता के सबसे उग्र समुद्र में गिरा दिया जाए, तौभी वह उसकी गहराइयों के बीच सूखा और सुरक्षित चलेगा, और ऊपर के किसी जगत से आती हवा में साँस लेगा। विश्वास तुझे परमेश्वर की सारी सामर्थ्य से जोड़ देगा। प्रेम तुझे ऐसे क्षेत्र में ले चलेगा जहाँ तेरे चारों ओर की सारी परीक्षाएँ मानो इथुरीएल के भाले से छू दी जाएँ, और अपनी ही मलिनता प्रकट कर दें। और आशा तेरी आँखों को चारों ओर के लुभावने वैभव को देखने से फेरकर ऊपर की महिमाओं पर टिका देगी। और यों बागडोर एक बिलकुल नए ढंग से तेरे हाथों में आ जाएगी, और तू अपने स्वभाव पर ऐसा राजा हो सकेगा जैसा तूने पहले कभी स्वप्न में भी न सोचा था—बशर्ते कि तू मसीह पर भरोसा रखे और उससे प्रेम करे, और अपनी अभिलाषाएँ ऊपर की वस्तुओं पर लगाए। तब जब तू मसीह को अपने ऊपर शासन करने देगा, तब तू अपने आप पर शासन कर सकेगा।—एलेक्स. मैक्लारेन।
अक्टूबर 16
हमारे परमेश्वर का वचन सदा स्थिर रहेगा। यशायाह 40:8।
परमेश्वर का वचन जीवन का जल है; जितना अधिक तुम उसे उलीचोगे, उतना ही ताज़ा वह बहता है। यह परमेश्वर की महिमा की आग है; जितना अधिक तुम उसे फूँकोगे, उतना ही निर्मल वह जलती है। यह प्रभु के खेत का अन्न है; जितना अधिक तुम उसे पीसोगे, उतना ही अधिक वह देता है। यह स्वर्ग की रोटी है; जितना अधिक वह तोड़ी और बाँटी जाती है, उतनी ही अधिक वह बनी रहती है। यह आत्मा की तलवार है; जितना अधिक वह माँजी जाती है, उतनी ही अधिक वह चमकती है।—बिशप ज्वेल।
अक्टूबर 17
तेरी कुशल के समय मैंने तुझ से बातें कीं। यिर्मयाह 22:21।
जब हम दूर तक देखना चाहते हैं, तब तेज़ दिन के उजाले की चौंध को रोकने के लिए हम अपने हाथ से आँखों पर छाया कर लेते हैं। परमेश्वर भी मानो अपना हाथ हमारे माथे पर रखता है, और कुशल की चमक को कोमल कर देता है, कि हम उसकी भलाई के व्यापकतर रूपों को ग्रहण कर सकें। यह एक सामान्य अनुभव है कि किसी व्यक्तिगत क्लेश के अन्धकार में से बाहर देखते हुए मनुष्यों ने पहली बार पृथ्वी के तल से परे देखा है, और ब्यूला देश की झलकें पाई हैं। आओ, उस हाथ से पीछे न हटें, जो हम जानते हैं कि केवल आशीष से ही भारी है।—लुडलो।
अक्टूबर 18
निश्चय वह तुझे बहेलिये के जाल से बचाएगा। भजन संहिता 91:3।
वह तुझे बहेलिये के जाल से बचाएगा। अर्थात् उन छोटी-छोटी बातों से, उन छिपे हुए फंदों और जालों से जो हमारे लिए बिछाए जाते हैं। बड़े पाप डराते हैं, जबकि छोटे फंदे उलझा लेते हैं। शिकारी के तीर से बचना उस चतुर जाल से बचने की अपेक्षा सहज है।
और वे कहाँ नहीं बिछे हैं? धन और दरिद्रता, रोग और बल, कुशल और विपत्ति, मित्रता और एकाकीपन, काम और उसका अभाव—हर एक का अपना फंदा है, जिसमें केवल असावधान ही नहीं फँसते, वरन बुद्धिमान और सतर्क भी कभी-कभी शिकार बन जाते हैं। छोटी-छोटी बातें, केवल धागे, जिनसे सावधान रहना मुश्किल से ही योग्य जान पड़ता है—फिर भी वे इतने बलवान हैं कि हमें बाँध लें और रोक लें, और हमारे विनाश का आरंभ बन सकते हैं।—मार्क गाइ पीयर्स।
अक्टूबर 19
यहोवा ने कैन पर एक चिन्ह लगा दिया। उत्पत्ति 4:15।
हम कैन के चिन्ह की चर्चा ऐसे करते हैं मानो वह शाप का चिन्ह था। वास्तव में वह परमेश्वर की दया का चिन्ह था, उसके शत्रुओं से एक बचाव।—डी. जे. बरेल।
अक्टूबर 20
तुम में कौन है जो यहोवा का भय मानता है . . . जो अन्धकार में चलता है और उसके पास प्रकाश नहीं? वह यहोवा के नाम पर भरोसा रखे और अपने परमेश्वर पर टेक लगाए। यशायाह 50:10।
“भयंकर तूफानों में,” एक बूढ़े नाविक ने कहा, “हम केवल एक ही काम कर सकते हैं, केवल एक ही उपाय है; हमें जहाज को एक निश्चित स्थिति में रखकर वहीं थामे रहना है।”
हे मसीही, यही तुझे भी करना है। कभी-कभी, पौलुस के समान, तुझे न सूर्य दिखाई देता है न तारे, और तुझ पर बड़ा तूफान छाया रहता है; और तब तू केवल एक ही काम कर सकता है; केवल एक ही उपाय है। तर्क तेरी सहायता नहीं कर सकता। बीते अनुभव तुझे कोई प्रकाश नहीं देते। प्रार्थना तक कोई शान्ति नहीं लाती। केवल एक ही मार्ग बचा है। तुझे अपने प्राण को एक स्थिति में रखकर वहीं थामे रहना है। तुझे प्रभु पर टेक लगानी है; और चाहे कुछ भी हो—हवाएँ, लहरें, आड़े समुद्र, गरज, बिजली, घूरती चट्टानें, गरजती तरंगें—चाहे कुछ भी हो, तुझे अपने आप को पतवार से बाँध लेना है, और परमेश्वर की सच्चाई, उसके वाचा-बन्धन, और मसीह यीशु में उसके अनन्त प्रेम पर अपना भरोसा दृढ़ता से थामे रखना है।—रिचर्ड फुलर।
अक्टूबर 21
मृत्यु तक विश्वासयोग्य रह, तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूँगा। प्रकाशितवाक्य 2:10।
हर विश्वासयोग्य मसीही की यात्रा के अन्त में एक स्वर्ग है।—क्यूलर।
अक्टूबर 22
मिस्र को भाग जा। मत्ती 2:13।
क्यों? क्योंकि एक क्रूर राजा है जो उस बालक के प्राण लेने की खोज करेगा।
क्या मसीह तुझ में उत्पन्न हुआ है? क्या तेरा जीवन उस चरनी के समान है—किसी मंजूषा-सा अनमोल, इसलिए कि उसमें क्या रखा है? तो सावधान रह; क्योंकि हेरोदेस से भी अधिक चतुर और निर्दयी वह प्राणों का विनाशक तुझे नष्ट करने की खोज करेगा।
एक दिन आनेवाला है जब वे कहेंगे, “जो उस बालक के प्राण लेने की खोज में थे, वे मर गए।” अनुग्रह शत्रु से जीवित बचेगा, और हम फिर लौटकर जीवन के सुखों का आनन्द लेंगे, और हमें धमकानेवाला कोई हेरोदेस न रहेगा। सचमुच, पाप ही अल्पजीवी है, क्योंकि जब वह दुष्ट सदा के लिए बाँध दिया जाएगा, तब भलाई फूले-फलेगी।—थॉस. चैम्पनेस।
अक्टूबर 23
जैसा मेरे प्रभु राजा ने कहा है, वैसा ही तेरा दास करेगा। 1 राजा 2:38।
परमेश्वर के लिए कोई बड़ा काम करने से भी अनन्त गुना उत्तम एक बात है, और वह अनन्त गुना उत्तम बात यह है कि वहीं हों जहाँ परमेश्वर हमें रखना चाहता है, वही करें जो परमेश्वर हमसे कराना चाहता है, और उसकी इच्छा से अलग हमारी अपनी कोई इच्छा न हो।—जी. कैंपबेल मॉर्गन।
अक्टूबर 24
तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने ऐसा चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे स्वर्गीय पिता की महिमा करें। मत्ती 5:16।
कहते हैं कि संसार की आँख किसी भी असंगति को ताड़ने में उकाब-सी है, दोषी और अयोग्य में विषमताएँ और असंगतियाँ खोज निकालने में तीक्ष्ण। उसकी आँख उकाब-सी है; परन्तु उकाब सूर्य के सामने आँख मूँद लेता है, और उसकी आँख की जलती पुतली दोपहर की निर्मल पवित्रता के सामने लज्जित होकर सिकुड़ जाती है। तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने ऐसा चमके कि दूसरे लोग तुम्हारे भक्तिमय जीवन की संगति से चकित और मोहित होकर पूछने आएँ, और कहें कि तुम यीशु के साथ रहे हो।—पंशन।
अक्टूबर 25
ग्यारह चेले . . . उस पहाड़ पर गए जिसे यीशु ने उनके लिए ठहराया था . . . यीशु ने पास आकर उनसे बातें कीं और कहा . . . तुम जाकर सब जातियों को चेला बनाओ। मत्ती 28:16, 18, 19।
संसार के बड़े-बड़े कार्यों के आरंभ प्रायः बहुत छोटे होते हैं। थोड़े-से अक्षरों से कितने हज़ारों शब्द बनते हैं! दस अंकों से कितनी हज़ारों संख्याएँ! एक बिन्दु समस्त रेखागणित का आरंभ है। तालाब में फेंका हुआ एक छोटा पत्थर एक छोटा घेरा बनाता है, फिर एक बड़ा, यहाँ तक कि वह दोनों किनारों तक फैल जाता है। इसी प्रकार छोटे आरंभों से परमेश्वर सारे संसार में एक प्रवाह उत्पन्न करता है।—चार्नक।
अक्टूबर 26
देखो, मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूँ, जो सब लोगों के लिए होगा। लूका 2:10।
यह सच है कि बड़े आनन्द का यह सुसमाचार “सब लोगों के लिए” था, परन्तु पहले नहीं। यह संदेश पहले हमारे ही कानों पर पड़ता है, और पहले हमारे ही प्राणों के लिए है।
ओह, इस पर भली भाँति मनन कर! परमेश्वर के सब सत्यों को पहले अपने ही हृदय तक ले जा। गिड़गिड़ाकर प्रार्थना कर कि आत्मा उन्हें स्वर्ग की लेखनी से तेरे ही विवेक पर लिख दे। तब तू स्वामी के काम के योग्य पात्र बनेगा, और उसके संदेश को आत्मिक सामर्थ्य के साथ दूसरों के प्राणों तक पहुँचाएगा।—एफ. व्हिटफील्ड।
अक्टूबर 27
प्रभु जिससे प्रेम करता है उसी को ताड़ता है। इब्रानियों 12:6।
पार्थिव कुशल स्वर्ग के विशेष प्रेम का कोई चिन्ह नहीं: और न ही दुख और चिन्ता परमेश्वर की अप्रसन्नता का कोई चिन्ह हैं, वरन इसके विपरीत। परमेश्वर का प्रेम दृढ़, सच्चा और उत्सुक है—हमारे सुख के लिए नहीं, वरन हमारी स्थायी धन्यता के लिए; वह इसी को प्राप्त करने पर तुला है, और हमारी आत्माओं को उच्चतर संगीत के साथ मिलाने के अपने प्रयासों में वह गलतफ़हमी और झिड़की सहने के लिए भी पर्याप्त बलवान है। इसलिए वह हमें शिक्षा देता हुआ आता है। आओ, हम परमेश्वर के प्रेम की पाठशाला में शिष्य होकर अपना नाम लिखाएँ। आओ, हम पाठ्यक्रम के विषय में अपनी धारणाओं को छोड़ दें; आओ, हम अपने आप को अगुवाई पाने और शिक्षा पाने के लिए सौंप दें; आओ, हम दुख के श्यामपट्ट से दिए जानेवाले किसी भी पाठ के लिए तैयार रहें: आओ, हम उसके प्रेम की अटूट दृढ़ता के विषय में इतने आश्वस्त हों कि चाहे वह हमें घात भी करे, तौभी हम उस पर भरोसा करने का साहस करें। और आओ, हम उस महान क्षण की बाट जोहें जब वह जीवन के सारे अनुशासन का कारण हमें ऐसी मुस्कान के साथ बताएगा जो हमारी आत्माओं को हर्षोल्लास से रोमांचित कर देगी, और दुख और आहें सदा के लिए भगा देगी।—एफ. बी. मेयर।
अक्टूबर 28
जो कुछ तुम पिता से मेरे नाम से माँगोगे, वह तुम्हें देगा। यूहन्ना 16:23।
प्रार्थना प्रतिज्ञा पर आधारित होनी चाहिए, परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, कि उसकी प्रतिज्ञाएँ सदा हमारी प्रार्थनाओं से व्यापक होती हैं! यहाँ उलटे पिरामिड बनाने का कोई भय नहीं, क्योंकि यीशु मसीह ही नींव है।—फ्रांसेस रिडली हैवरगल।
अक्टूबर 29
वह भोजन पर से उठा, और अपने वस्त्र उतारकर एक अँगोछा लेकर अपनी कमर बाँधी। तब बर्तन में जल भरकर चेलों के पाँव धोने और जिस अँगोछे से उसकी कमर बँधी थी उसी से पोंछने लगा। यूहन्ना 13:4, 5।
काम इसलिए साधारण और तुच्छ होते हैं क्योंकि वे प्रायः मनुष्यों के साधारण और तुच्छ विचारों को व्यक्त करते हैं। आओ, हम अपने प्रतिदिन के जीवन को बनानेवाले कामों पर तुच्छता का दोष न लगाएँ, वरन अपनी उन नीच आत्माओं पर, जो उन कामों के द्वारा अपने आप को इतनी अयोग्यता से प्रकट करती हैं। वही काम उस आत्मा के अनुसार जो उसके द्वारा प्रकट होती है, क्रमशः हर बीच की अवस्था से होते हुए अयोग्यता की गहराई से उठकर उत्कृष्टता की एक परम ऊँचाई तक चढ़ सकता है। हमारे प्रभु के देहधारण के गौरवमय उद्देश्यों में से एक यह था कि वह हमें जीवन के छोटे-छोटे ब्योरों के साथ मिला दे, कि हम इन्हें तुच्छ जानकर घृणा न करें, वरन इन ब्योरों को किसी श्रेष्ठ स्वभाव का व्याख्याता बनाने में अपनी असमर्थता के कारण अपने आप से घृणा करें। ओह, तो आओ, हम जीवन के प्रतिदिन के ब्योरों को स्नेह और कृतज्ञता से देखें, और उन सब पर यीशु के हाथ की पवित्र करनेवाली छाप को पहचानें!—जॉर्ज बोवेन।
अक्टूबर 30
उसने . . . करूबों को, और चारों ओर घूमनेवाली ज्वालामय तलवार को नियुक्त किया . . . कि जीवन के वृक्ष के मार्ग की रखवाली करें। उत्पत्ति 3:24। धन्य हैं वे जो उसकी आज्ञाओं को मानते हैं, कि उन्हें जीवन के वृक्ष का अधिकार मिले। प्रकाशितवाक्य 22:14।
यह कितना उल्लेखनीय और कितना सुन्दर है कि प्रकाशितवाक्य का अन्तिम पृष्ठ मुड़कर उत्पत्ति के पहले पृष्ठ को छूने आता है। मनुष्य का इतिहास उन दूतों से आरंभ हुआ जिनके मुख क्रोध से भरे थे और जो ज्वालामय तलवारें लिए जीवन के वृक्ष का मार्ग रोके खड़े थे। इसका अन्त करूबों के पहरे के हटने के साथ होता है; या यों कहें, कि वे अपनी तलवारें म्यान में रखकर, उस फल के, जो अब वर्जित नहीं रहा, रखवाले होने के बदले उसके पथप्रदर्शक बन जाते हैं। यह बाइबल का उन सबका—पाप, दुख, मृत्यु—यह कहने का भव्य प्रतीकात्मक ढंग है कि जो कुछ बीच में है वह एक कोष्ठक मात्र है। परमेश्वर का उद्देश्य विफल न होगा। इतिहास में उसकी राजसी यात्रा का अन्त यह है कि मनुष्यों को जीवन के वृक्ष तक पहुँच मिले, जिससे वे उन उदास युगों के लिए—जो महान अनन्तताओं में एक पल के समान ही हैं—अपने पाप के कारण रोके गए थे।—एलेक्स. मैक्लारेन।
अक्टूबर 31
कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्वर, महिमा का पिता, तुम्हें अपनी पहचान में ज्ञान और प्रकाशन की आत्मा दे: और तुम्हारे मन की आँखें ज्योतिर्मय हों। इफिसियों 1:17, 18।
एक सांझ हम स्विट्ज़रलैंड में एक पहाड़ से उतर रहे थे, जब एक काली गरजती आँधी ने दिन को मिटा दिया, और सब कुछ अचानक अन्धकार में डूब गया। हम केवल धुँधले रूप से उन सँकरी, धूल भरी पगडंडियों को, और उन उदास ढलानों को देख पा रहे थे जो और भी गहरे अन्धकार में समाई जा रही थीं। तब हमारे चारों ओर की वह सारी महिमा—ऊँचाइयाँ, गहराइयाँ और अचंभे—कहाँ थे? सब अन्धकार था। तब बिजली कौंधी—कौंध नहीं, वरन सारे आकाश का जलना, निरन्तर, और हर ओर। हम कैसी-कैसी महिमा की कोठरियों में झाँक सके! अन्धकार में से कैसे-कैसे वैभव के अचंभे चमक उठे!
सोच, कि हमारे साथ, हमारे भीतर, वही एक है जो जीवन के साधारण, धूल भरे मार्गों को दीप्तिमान करने आता है, परमेश्वर की महिमा की ज्योति से हमारे मन्द विचारों को उजियाला देता है; प्राण की दृष्टि को निर्मल करता है, और फिर उस महान उद्धार को प्रकट करता है जो मसीह में हमारा है।—मार्क गाइ पीयर्स।
अध्याय 10 पूरा हुआ
अक्टूबर