शान्त घड़ी के विचार
जुलाई

अध्याय 7 · 18 मिनट का पठन

जुलाई

जुलाई 1

उसने अपना दाहिना हाथ मुझ पर रखकर मुझ से कहा, मत डर। प्रकाशितवाक्य 1:17।

वेलिंग्टन के एक अधिकारी को जब किसी संकटपूर्ण कर्तव्य पर जाने की आज्ञा मिली, तो वह क्षण भर ऐसे ठहर गया मानो डर रहा हो, और फिर बोला:

“जाने से पहले मुझे आपके सर्वविजयी हाथ का एक बार स्पर्श मिल जाए; तब मैं यह कर सकूँगा।”

हर काम से पहले, हर कठिन कार्य से पहले, हर युद्ध से पहले, हर भले काम से पहले मसीह के हाथ का स्पर्श ढूँढ़ो। हर सवेरे की ओसमयी ताज़गी में, दिन के कर्तव्यों और संकटों का सामना करने बाहर जाने से पहले, अपना सिर झुकाओ, और मसीह के आशीर्वाद की बाट जोहो, जब वह अपने हाथ तुम पर रखता है। वे आशीष के हाथ हैं। उनका स्पर्श तुम्हें साहस, सामर्थ्य, और हर सुन्दर और उत्तम जीवन के लिये प्रेरित करेगा।—जे. आर. मिलर।

जुलाई 2

वह चालीस दिन तक उन्हें दिखाई देता रहा, और परमेश्वर के राज्य की बातें करता रहा। प्रेरितों के काम 1:3।

चालीस दिन तक इस प्रकार ठहरे रहना मसीह के अपने छोटे झुण्ड के प्रति कोमल स्नेह का सर्वोच्च प्रमाण है। जिसने उनके लिये अपना प्राण दे दिया था, वह उन्हें छोड़ने को तैयार नहीं। यद्यपि उन्होंने उसे त्याग दिया था, और उस पर सन्देह किया था, तौभी उन्होंने उसके प्रेम को न तो थका दिया, और न ही घिस डाला। वह बार-बार, फिर-फिर उन पर दृष्टि करने को ठहरता है, मानो लौट-लौटकर उन्हें आशीष देने को रुक जाता हो। यह सब उसके प्रेम-भरे जीवन के ही अनुरूप है। हर कहीं वह उनसे बिना किसी उलाहने के मिलता है, अपने कड़वे दुःखों की एक भी स्मृति स्मरण किए बिना, और चेलों पर अपने आप को ऐसी कोमलता और आनन्द के साथ प्रगट करता है जो वर्णन से परे सुन्दर है।

वह कैसे जा सकता है जब तक कि मरियम मगदलीनी के टूटे हृदय को चंगा न कर दे? उसे तब तक ठहरना होगा जब तक बेचारा पतरस निकट आकर अपनी क्षमा का निश्चय न पा ले। उसे थोमा के विश्वास को दृढ़ करने के लिये रुकना होगा। उसे उनके संग तब तक ठहरना होगा जब तक वह उन्हें यह अनुभव न करा दे कि वह वही मित्रवत, भ्रातृवत यीशु है जो वह सदा से रहा है, जो उनके काम में उनकी सुधि लेता है, तरसती हुई करुणा से उन्हें देखता है, उनकी गरमाहट के लिये आग सुलगाने, और उनके भोजन के लिये मछली पकाने को झुक जाता है, और फिर उन्हें बुलाता है कि आकर भोजन करो।—मार्क गाय पीयर्स।

जुलाई 3

यीशु … यात्रा से थका हुआ, कुएँ पर यों ही बैठ गया … (क्योंकि उसके चेले नगर में भोजन मोल लेने को गए थे।) … और उस नगर के बहुत से सामरियों ने उस स्त्री के वचन के कारण, जिसने गवाही दी थी, कि उसने मुझ से वह सब कुछ कह दिया जो मैं ने किया, उस पर विश्वास किया। यूहन्ना 4:6, 8, 39।

राह के किनारे के छोटे-छोटे कामों में बड़ी मिठास है। कदाचित जब सब हो चुकेगा, तो वे बिखरे हुए छोटे टुकड़े उन बड़े दीखनेवाले कामों से कहीं अधिक निकलेंगे! … यह जानना कितना सुखद है कि राजा के सेवक सदा सचमुच अपने कर्तव्य पर रहते हैं, चाहे कुछ केवल खड़े रहकर बाट ही क्यों न जोहते हों।—फ्रांसेस रिडली हैवरगल।

जुलाई 4

मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूँ, अपनी शान्ति तुम्हें देता हूँ … तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। यूहन्ना 14:27।

अन्धकारमय घड़ियाँ हम सब पर आती हैं; और यदि हमारे पास ऐसी शान्ति का कोई सूत्र न हो जो उनके घोर अन्धकार में से अटूट बनी रह सके, तो हम निरन्तर भय की दशा में पड़े रहेंगे। किसी राह चलते अनजान के फेंके किसी भी पत्थर से शान्ति की झील की स्फटिक-सी स्वच्छता टूट सकती है और उस पर घबराहट की लहरें दौड़ सकती हैं, जब तक कि हमने उसकी निरन्तर उपस्थिति पर भरोसा रखना न सीख लिया हो जो आत्मा के भीतर “बड़ा चैन” उत्पन्न और स्थिर रख सकता है। बस तुम पर ऐसा कुछ न आए जिसे तुम तुरन्त उसके हाथ में न सौंप दो—हर छोटी चिन्ता, हर कुचल डालनेवाली कठिनाई, हर विश्वास न कर पाने की दुर्बलता।—एफ. बी. मायर।

जुलाई 5

इसहाक लहैरोई नामक कुएँ के पास रहता था। उत्पत्ति 25:11।

इसहाक वहाँ रहता था, और जीवित और सब कुछ देखनेवाले परमेश्वर के कुएँ को अपनी निरन्तर आपूर्ति का स्रोत बनाए रखता था। मनुष्य के जीवन की सामान्य धारा, उसकी आत्मा का निवास, ही उसकी दशा की सच्ची कसौटी है। आओ, हम जीवित परमेश्वर की उपस्थिति में रहना सीखें। आओ, हम पवित्र आत्मा से प्रार्थना करें कि आज, और हर दिन, हम यह अनुभव करें, “तू ऐसा परमेश्वर है जो मुझे देखता है।” यहोवा परमेश्वर हमारे लिये एक कुएँ के समान हो—मनभावन, शान्तिदायक, कभी न चुकनेवाला, अनन्त जीवन के लिये उमड़ता हुआ। सृष्टि की कुप्पी चटककर सूख जाती है, पर सृष्टिकर्ता का कुआँ कभी नहीं चुकता। धन्य है वह जो कुएँ के पास रहता है, और यों जिसके निकट प्रचुर और निरन्तर आपूर्ति बनी रहती है! हे महिमामय प्रभु, हमें ऐसा विवश कर कि हम कभी तुझे न छोड़ें, वरन जीवित परमेश्वर के कुएँ के पास ही बसे रहें!—स्पर्जन।

जुलाई 6

यहूदा इस्करियोती … चोर था, और चूँकि उसी के पास थैली रहती थी, इसलिये जो कुछ उसमें डाला जाता, वह निकाल लेता था। यूहन्ना 12:4, 6। तुम ने सेंत-मेंत पाया है, सेंत-मेंत दो। मत्ती 10:8।

पर यदि हम इस बात की गहराई में उतरें, तो क्या हमें सम्भवतः यह न मिलेगा कि हम में से बहुत से किसी न किसी हल्के, तौभी पर्याप्त रूप से चिन्ताजनक अर्थ में, दीन-दुखियों के साथ विश्वासघात के दोषी हैं? क्या हम में से कुछ ऐसे नहीं जिन्हें उनके लिये दान सौंपे जाते हैं जो कभी उन तक नहीं पहुँचते, और हम केवल इसलिये अपने दोष से अनजान रहते हैं क्योंकि हम इन वस्तुओं को इतने समय से अपने ऊपर बरसाई गई मानते आए हैं, जब कि परमेश्वर के वचन का उजियाला उन्हीं वस्तुओं पर दीन और दरिद्रों के नाम स्पष्ट रूप से प्रगट कर देता?—जॉर्ज बोवेन।

जुलाई 7

हर एक सावधानी से देख ले कि वह कैसा बनाता है। 1 कुरिन्थियों 3:10।

हमारा काम शीघ्रता से बनाना नहीं, वरन सच्ची नींव पर और सच्ची आत्मा में बनाना है। जीवन मनुष्य और मनुष्य के बीच की मात्र होड़ से बढ़कर है; बात यह नहीं कि कौन पहले पूरा कर लेता है, वरन यह कि कौन सबसे उत्तम काम करता है; बात यह नहीं कि कौन सबसे कम समय में सबसे ऊँचा उठ जाता है, वरन यह कि कौन परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार सबसे अधिक धीरज और प्रेम से काम कर रहा है।—जोसेफ पार्कर।

जुलाई 8

जैसे तेरे दिन वैसा तेरा बल होगा। व्यवस्थाविवरण 33:25।

कोई दिन अपने कर्तव्य के बिना नहीं; कोई कर्तव्य उसे पूरा करने के बल के बिना नहीं।—चयनित।

जुलाई 9

निश्चय इस स्थान में यहोवा है, और मैं इसे न जानता था। उत्पत्ति 28:16।

“निश्चय इस स्थान में यहोवा था, और मैं इसे न जानता था।” हे मेरे प्राण, यह तेरा भी अनुभव है! तू ने अपने शोक में कितनी बार कहा है, “सचमुच तू ऐसा परमेश्वर है जो अपने आप को छिपाए रहता है!” तू कितनी बार मन की भारी उदासी के कारण सो गया है, और फिर से जागना नहीं चाहा! और जब तू फिर जागा, तो देख, वह सारा अन्धकार एक स्वप्न ही था! तेरा कल का दर्शन एक भ्रम था। परमेश्वर उस सारी रात उस तेज के साथ तेरे संग था जिसे सूर्य की आवश्यकता नहीं।

हे मेरे प्राण, तुझे केवल भविष्य की ही ओर नहीं लालायित होना है; तुझे अपने बीते हुए की महिमा को देखने की भी अभिलाषा करनी है। तुझे उस मार्ग की महिमा को ढूँढ़ निकालना है जिस से तेरे परमेश्वर ने तुझे चलाया है, और अपने शोक के विषय में भी यह कह सकना है, “यह तो स्वर्ग का द्वार था!”—जॉर्ज मैथेसन।

जुलाई 10

मेरा भोजन यह है कि अपने भेजनेवाले की इच्छा पूरी करूँ। यूहन्ना 4:34।

असन्तुष्ट जीवन का असली रहस्य प्रायः एक असमर्पित इच्छा में छिपा रहता है।—जे. हडसन टेलर।

जुलाई 11

सब प्रकार का यत्न करके अपने विश्वास पर सद्गुण बढ़ाओ। 2 पतरस 1:5।

तुम पाओगे कि दोषों को जड़ से उखाड़ने की अपेक्षा सद्गुणों को प्राप्त करके उनका गला घोंट देना सहज है। अपने दोषों के विषय में मत सोचो, और दूसरों के दोषों के विषय में तो और भी कम; जो कोई तुम्हारे निकट आए, उस में जो कुछ भला और दृढ़ है उसे ढूँढ़ो; उसका आदर करो; उसमें आनन्दित हो, और जितना कर सको, उसका अनुकरण करने का यत्न करो; और तुम्हारे दोष, सूखे पत्तों के समान, अपने समय पर झड़ जाएँगे।—जॉन रस्किन।

जुलाई 12

हे उत्तर वायु जाग, हे दक्खिन वायु चली आ; मेरी बारी पर बह, कि उसके सुगन्धित मसाले उड़ने लगें। श्रेष्ठगीत 4:16।

कभी-कभी परमेश्वर अपने बच्चों के गुणों को विकसित करने के लिये उन पर परीक्षा के कठोर झोंके भेजता है। जैसे मशालें तेज़ी से इधर-उधर झुलाने पर सबसे उज्ज्वल जलती हैं; जैसे झाऊ का पौधा आग में फेंके जाने पर सबसे मीठी सुगन्ध देता है; वैसे ही किसी मसीही के सबसे उत्तम गुण प्रायः दुःख और विपत्ति की उत्तर वायु में प्रगट होते हैं। कुचले हुए हृदय प्रायः वही सुगन्ध छोड़ते हैं जिसे परमेश्वर सूँघना चाहता है। लगभग हर सच्चे विश्वासी के अनुभव में उन परीक्षाओं का लेखा है जो मसाले के वृक्ष को हिलाने के उद्देश्य से भेजी गई थीं।—थियोडोर कायलर।

जुलाई 13

हे उत्तर वायु जाग, हे दक्खिन वायु चली आ; मेरी बारी पर बह, कि उसके सुगन्धित मसाले उड़ने लगें। श्रेष्ठगीत 4:16।

इस सुन्दर प्रार्थना में दो वायुओं का उल्लेख है। परमेश्वर, जैसा उसे भला लगे, इनमें से एक या दोनों भेज सकता है। वह दोष-सिद्धि की उत्तर वायु भेज सकता है, कि हमें मन-फिराव तक ले आए, या वह प्रेम की दक्खिन वायु भेज सकता है, कि हमें कृतज्ञता और पवित्र आनन्द में पिघला दे। यदि हमें अपने गुणों को विकसित करने के लिये प्रायः परीक्षा के तीखे झोंकों की आवश्यकता होती है, तो क्या हमें उसकी दया की गरम दक्खिनी बयार की भी आवश्यकता नहीं? क्या हमें अपने हृदयों में मसीह की उपस्थिति के नए अनुभव और पवित्र आत्मा के आनन्द की आवश्यकता नहीं? क्या हमें पिघलाए जाने—हाँ, यीशु के प्रेम से अभिभूत किए जाने की आवश्यकता नहीं?—थियोडोर कायलर।

जुलाई 14

देखो, यह मनुष्य! यूहन्ना 19:5।

“देखो, यह मनुष्य!” यह पिलातुस का उपहास था। तब से सारे युग यही करते आए हैं, और वह दर्शन अधिकाधिक महिमामय होता गया है। ज्यों-ज्यों उन्होंने देखा, काँटों का मुकुट स्वर्णिम तेज का मुकुट बन गया, और वह उतारा हुआ वस्त्र उन वस्त्रों के समान झलमला उठा जो उसने रूपान्तर की रात पहने थे। शहीदों ने उस दर्शन को देख आग की लपटों में मुसकाया है। पापियों ने उसे देख नए जीवन की ओर मुख फेरा है। नन्हे बालकों ने उसे देखा है, और उससे उनके स्वर्ग-धाम की धुँधली स्मृतियाँ जाग उठी हैं। मनुष्यों के प्राण सदा उसी की ओर तरसते हैं।—रॉबर्ट ई. स्पीयर।

जुलाई 15

उसने (यूहन्ना ने) कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है! और वे दोनों चेले उसकी बात सुनकर यीशु के पीछे हो लिए। यूहन्ना 1:36, 37।

मसीही होने का अर्थ है हमारे बीच एक सच्चे व्यक्तिगत मसीह की उपस्थिति को जानना, और उसके पीछे हो लेना।—फिलिप्स ब्रुक्स।

जुलाई 16

तुम उसे न खाना। उत्पत्ति 3:3।

अदन का पाप यह था कि जीवन के वृक्ष से पहले ज्ञान के वृक्ष का फल खाया गया। जीवन को सदा प्रथम होना चाहिए। जानना पर न होना, सुनना पर न करना, सराहना पर अधिकार में न रखना—ये सब जीवन बिना का उजियाला हैं।—चयनित।

जुलाई 17

पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूर्ण और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे। याकूब 1:4।

क्या तुम वहाँ हो जहाँ परमेश्वर तुम्हें रखना चाहता है? यदि नहीं, तो निकल आओ, और तुरन्त, क्योंकि निश्चय ही तुम्हें वहाँ नहीं रहना चाहिए। और यदि हो, तो उन परिस्थितियों की शिकायत करने से डरो जिन्हें परमेश्वर ने इसी उद्देश्य से ठहराया है कि तुम में अपने पुत्र का ही स्वरूप और समानता उत्पन्न करे।—मार्क गाय पीयर्स।

जुलाई 18

सब जल के पास बीज बोया करो। यशायाह 32:20।

इस बात की चिन्ता मत करो कि तुम्हारा काम कहाँ है। इसकी चिन्ता मत करो कि वह दिखाई देता है या नहीं। इसकी चिन्ता मत करो कि तुम्हारा नाम उसके साथ जुड़ा है या नहीं। कदाचित तुम अपने परिश्रम के फल कभी न देखो। तुम अनन्तकाल के लिये काम कर रहे हो। यदि तुम यहाँ इस तपते हुए कार्य-दिवस में परिणाम न देख सको, तो शीतल सांझ की घड़ियाँ निकट आ रही हैं, जब तुम अपने परिश्रमों से विश्राम पाओगे और तब वे तुम्हारे पीछे-पीछे चले आएँगे। सो अपना कर्तव्य करो, और परमेश्वर पर भरोसा रखो कि जो बीज तुम बोते हो उसे वह “जैसी उसे भाया वैसी देह,” दे,—एलेक्स. मैक्लेरन।

जुलाई 19

मुझे थामे रह, तब मैं बचा रहूँगा। भजन संहिता 119:117।

आज के सवेरे की घंटियों की झंकार को आधी ही टेर बजाकर मत बिगाड़ो! यह मत कहो, “मुझे थामे रह,” और वहीं रुक जाओ, या यह जोड़ दो, “तौभी मैं तो ठोकर खाकर गिर ही पड़ूँगा!” उस टेर को परमेश्वर के अपने संगीत से, विश्वास के उन उज्ज्वल वचनों से पूरी करो जो वह तुम्हारे मुँह में डालता है: “मुझे थामे रह, तब मैं बचा रहूँगा!”—फ्रांसेस रिडली हैवरगल।

जुलाई 20

हे प्रभु, मेरा सेवक घर में झोले का मारा हुआ पड़ा है। मत्ती 8:6।

कलीसिया के इस युग में हम कफरनहूम के उस बीमार सेवक की स्थिति में हैं। इन्द्रियों की दृष्टि से हम उद्धारकर्ता से अलग हैं। हम उसे देख नहीं पाते—उसे छू नहीं सकते—भीड़ में से हाथ बढ़ाकर उसके वस्त्र का छोर नहीं पकड़ सकते—हम पुराने दिनों के समान अपनी दहलीज़ पर उसके प्रिय पगों की आहट नहीं सुन पाते; परन्तु विश्वास अनदेखे को भेद जाता है; वह दूत—प्रार्थना—उससे नए यरूशलेम की गलियों में मिल लेता है; और विश्वास और प्रार्थना, जो उसकी नीचे की कलीसिया के जुड़वाँ दूत हैं, उन्हें उसने आज तक कभी खाली हाथ नहीं लौटाया।—मैकडफ।

जुलाई 21

डरते और काँपते हुए अपने-अपने उद्धार का कार्य पूरा करते जाओ: क्योंकि परमेश्वर ही है जो अपनी सुइच्छा को पूरा करने के लिये तुम में इच्छा और काम दोनों का करनेवाला है। फिलिप्पियों 2:12, 13।

इन वचनों से विचार का कैसा चौंका देनेवाला भार जाग उठता है! रुक जा, हे मेरे प्राण, और अचम्भा कर कि अनन्त परमेश्वर तेरी इतनी सँकरी सीमाओं के भीतर काम करने को झुक जाए। क्या यह सचमुच एक आश्चर्य नहीं कि वह, जिसे आकाश भी नहीं समा सकते, और जिसकी दृष्टि में वे भी निर्मल नहीं, ऐसी सामग्री पर काम करने का कष्ट उठाए, जो इतनी निराशाजनक है, और ऐसी परिस्थितियों के बीच जो इतनी प्रतिकूल हैं?

हमें उसका स्वागत करने में, और उसकी राह में कोई रुकावट न डालने में कितना सावधान रहना चाहिए! उसकी अनुग्रहमयी कार्यवाही की छोटी से छोटी हलचल को बटोर रखने के लिये हमें कितना उत्सुक होना चाहिए, जैसे यन्त्री अपने इंजन के बल को सँजोकर रखता है; और जैसे सुनार, कंजूस-सी सावधानी से, सोने के पत्तर का हर कण इकट्ठा करता है! निश्चय ही हम पवित्र श्रद्धा के भय और उत्सुक चिन्ता की कँपकँपी के प्रति सचेत रहेंगे; जब हम वह सब जो परमेश्वर हमारा पिता “भीतर काम कर रहा है,” दैनिक कर्म और जीवन में “पूरा करते” जाते हैं।—एफ. बी. मायर।

जुलाई 22

… पापियों में मैं सबसे बड़ा हूँ। … अब सनातन राजा अर्थात अविनाशी, अनदेखे और अद्वैत परमेश्वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। 1 तीमुथियुस 1:15, 17।

केवल वे ही जिन्होंने पश्चात्ताप का सबसे गहरा स्वर छुआ है, स्तुति के सर्वोच्च स्वर तक पहुँच सकते हैं।—ए. जे. गॉर्डन।

जुलाई 23

क्या ही धन्य है वह मनुष्य … जो विश्रामदिन को मानता है। यशायाह 56:2।

विश्रामदिन मानव-जीवन का बचत-कोष है, जिसमें हम सात में से एक दिन जमा करते हैं, कि जीवन की पतझड़ में वह चक्रवृद्धि ब्याज सहित लौटा दिया जाए।—चयनित।

जुलाई 24

मुझे गुप्त दोषों से पवित्र कर। भजन संहिता 19:12।

संसार को ऐसे मनुष्य चाहिए जो गुप्त दोषों से बचाए गए हों। संसार बाहरी भलाई ओढ़ सकता है और सिधाई और नैतिकता में बहुत दूर तक जा सकता है, और वह यह आशा रखता है कि मसीही उससे भी आगे बढ़े, और गुप्त दोषों से मुक्त रहे। एक छोटी-सी दरार सिक्के की खनक को बिगाड़ देती है। … संसार यह आशा रखता है, और ठीक ही रखता है, कि मसीही उससे अधिक कोमल, धीरजवन्त, और उदार हो जो प्रभु यीशु का चेला होने का दावा नहीं करता। उनके लिये जो अपनी धर्म की धारणा हमारे जीवन से लेते हैं, हमें यह प्रार्थना मन लगाकर करनी चाहिए, “मुझे गुप्त दोषों से पवित्र कर।”—मार्क गाय पीयर्स।

जुलाई 25

तू वही कर जो भला है। 2 राजा 10:5।

जितने कम हो सके उतने ही भले संकल्पों को इधर-उधर मँडराते रहने दो। वे किसी घर में भटकते भूतों के समान हैं। उन्हें शान्त करने का उपाय यह है कि उनके लिये देह ढूँढ़ दी जाए। जब वे ठोस कर्मों में देह पा लेते हैं, तब वे और खतरनाक नहीं रहते।—विलियम अर्नाट।

जुलाई 26

हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। 2 पतरस 3:18।

अनुग्रह का पौ फटना भी होता है और दिन भी; अनुग्रह की हरी बाली होती है, और तत्पश्चात बालों में पका हुआ अन्न; अनुग्रह के मसीह में बालक भी होते हैं और सयाने भी। वहाँ परमेश्वर के काम में, जैसे उसके सब कामों में, “उसके राज्य के सब स्थानों में,” उन्नति ही सिद्धि की भूमिका भी है और मार्ग भी। इसलिये हमें उपदेश दिया जाता है कि अनुग्रह में, और अपने प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की पहचान में बढ़ते जाएँ, सिद्धि की ओर आगे बढ़ें, पौलुस के समान यह कहते हुए, “मैं अपने आप को अब तक पकड़नेवाला नहीं समझता; परन्तु केवल यह एक काम करता हूँ, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन्हें भूलकर, और जो आगे हैं उनकी ओर बढ़ता हुआ, निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूँ, ताकि परमेश्वर के उस बुलावे का प्रतिफल पा लूँ जो मसीह यीशु में स्वर्गीय है।”—गुथ्री।

जुलाई 27

पाप ने अवसर पाकर आज्ञा के द्वारा मुझे भरमाया, और उसी के द्वारा मुझे मार डाला। रोमियों 7:11।

हे मसीही, सावधान रह कि तू पाप को हलका न समझे। चौकस रह, कहीं ऐसा न हो कि तू थोड़ा-थोड़ा करके गिर पड़े। पाप, एक छोटी बात? क्या वह विष नहीं? इसकी घातकता को कौन जानता है? पाप, एक छोटी बात? क्या छोटी लोमड़ियाँ दाख की बारियों को नहीं बिगाड़तीं? क्या नन्हा मूँगा-कीट ऐसी चट्टान नहीं बनाता जो किसी जहाजी बेड़े को डुबो दे? क्या छोटे-छोटे प्रहार ऊँचे बांज वृक्षों को नहीं गिरा देते? क्या निरन्तर टपकती बूँदें पत्थरों को नहीं घिसा डालतीं? पाप, एक छोटी बात? इसी ने उद्धारकर्ता के सिर को काँटों से बाँधा, और उसके हृदय को बेधा! इसी ने उसे व्यथा, कड़वाहट और शोक सहवाया। यदि तू सबसे छोटे पाप को भी अनन्तकाल के तराजू में तौल सके, तो तू उससे ऐसे भागेगा जैसे किसी साँप से, और बुराई के लेशमात्र रूप से घृणा करेगा। हर पाप को उसी दृष्टि से देख जिसने उद्धारकर्ता को क्रूस पर चढ़ाया, और तू उसे “अत्यन्त पापमय” देख पाएगा।—स्पर्जन।

जुलाई 28

तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है। मत्ती 6:32।

स्वामी परिणाम से न्याय करता है, पर हमारा पिता प्रयत्न से न्याय करता है। असफलता का अर्थ सदा दोष नहीं। वह जानता है कि वस्तुओं का मोल क्या है, और उन्हें वहाँ तौलता है जहाँ दूसरे केवल नापते हैं। तुम्हारा पिता! सोचो कि उसका प्रेम छोटे बच्चों के उन दुर्बल आरम्भों को कितना मूल्यवान समझता है, चाहे वे दूसरों को कितने ही भद्दे और अर्थहीन क्यों न जान पड़ें। यह सब इस धन्य सम्बन्ध में निहित है, और इससे कहीं अधिक भी। इसे पूरी तरह अपना मानकर ग्रहण करने से मत डर।—मार्क गाय पीयर्स।

जुलाई 29

तुम मर गए हो, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है। कुलुस्सियों 3:3।

परमेश्वर का काम न तो प्रतिभा से होता है, न सामर्थ्य से, और न वरदानों से, वरन उससे जो दीन से दीन जन के वश में है; वह है वह सरल, गम्भीर जीवन जो मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा है।—एफ. डब्ल्यू. रॉबर्टसन।

जुलाई 30

यीशु की माता ने उससे कहा, उनके पास दाखरस नहीं रहा। यीशु ने उससे कहा, हे नारी, मुझे तुझ से क्या काम? अभी मेरा समय नहीं आया। उसकी माता ने सेवकों से कहा, जो कुछ वह तुम से कहे, वही करना। यूहन्ना 2:3, 4, 5।

सांसारिक आशीषें माँगते समय सच्ची बुद्धिमानी इसी में है कि बात को प्रभु के हाथ में सौंप दें, और वहीं रहने दें। वह हमारे शोकों को जानता है, और यदि वह देखता है कि हमारे लिये यही भला है कि जल दाखरस में बदल जाए, तो वह ऐसा करेगा। हमारा काम आज्ञा देना नहीं: वह देखता है कि हमारे लिये क्या उत्तम है। जब हम सुख-समृद्धि माँगते हैं, तो कदाचित जो वस्तु हमें मिलनी चाहिए वह परीक्षा है। जब हम किसी “शरीर में चुभे काँटे” से छुटकारा चाहते हैं, तो वह जानता है कि हमें जिसकी आवश्यकता है वह इस सत्य की समझ है कि उसका अनुग्रह हमारे लिये पर्याप्त है। इस प्रकार हम उसकी पाठशाला में रखे जाते हैं, और हमें वे पाठ सीखने पड़ते हैं जो वह हमें सिखाना चाहता है।—डब्ल्यू. हे एटकेन।

जुलाई 31

जो समझता है कि मैं स्थिर हूँ, वह चौकस रहे कि कहीं गिर न पड़े। 1 कुरिन्थियों 10:12।

स्वर्ग में स्वर्गदूत गिरे, अदन में आदम, मसीह की उपस्थिति में पतरस।—थियोफिलस पोलवाइल।

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