शान्त घड़ी के विचार
नवम्बर

अध्याय 11 · 17 मिनट का पठन

नवम्बर

नवम्बर 1

यीशु अकेला रह गया, और वह स्त्री बीच में खड़ी रही। यूहन्ना 8:9।

यीशु के साथ अकेले! कैसा मधुर और पवित्र स्थान! कैसी धन्य शरणस्थली, जहाँ आत्मा शैतान के दोषारोपणों, संसार के अभियोगों, और जीवन के दुखों से बचकर आ सकती है! हृदय के लिए कैसा मधुर स्थान, जहाँ वह अपने आप को खोल दे, और अनंत प्रेम, कोमलता, और करुणा के कान में अपनी छिपी हुई व्यथा कह दे!

यीशु के साथ अकेले! यदि प्रभु के लोग अधिक बार वहाँ रहते, तो मसीहियत संसार के सामने कितना भिन्न रूप प्रस्तुत करती! उनके सारे व्यवहार में कैसी दीनता, और नम्रता, और प्रेम झलकता! माथे पर ही कैसी पवित्रता अंकित होती, जिसे सब पढ़ सकते! औरों पर कितने कम दोष लगाए जाते, और अपने ऊपर कितने अधिक! प्रभु के सारे व्यवहारों के प्रति कैसी शांति और समर्पण और आनंदपूर्ण अधीनता होती!

अधिक से अधिक “यीशु के साथ अकेले” रहो! तब महिमा की ओर जाने वाला मार्ग धूप से भरा होगा, चाहे वह कब्र के द्वारों से होकर हो या स्वर्ग के बादलों से होकर।—एफ. व्हिटफील्ड।

नवम्बर 2

तू मुझे जीवन का मार्ग दिखाएगा; तेरी उपस्थिति में परिपूर्ण आनंद है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सदैव बने रहते हैं। भजन संहिता 16:11।

जो मनुष्य जीवन के मार्ग पर चलता है, वह आनंद देने वाले परमेश्वर की उपस्थिति में जीता है। जितना वह उस जीवन-मार्ग के प्रति सच्चा रहता है, और न दाहिनी ओर न बाईं ओर भटकता है, उतना ही उसका आनंद गहरा होता जाता है; नहीं, वह तो उसी परिपूर्ण आनंद का सहभागी बन जाता है जिसमें स्वयं परमेश्वर जीवित है, चलता-फिरता है, और अपना अस्तित्व रखता है। और जब जीवन की सारी परीक्षाओं के बीच उसका ऐसा अनुभव होता है, तब उसे यह विशेषाधिकार भी प्राप्त है कि वह उन और भी महान बातों की प्रतीक्षा करे जो अभी उसके लिए रखी हुई हैं, जब वह उच्चतर लोक तक पहुँच जाएगा, और समय की छायाएँ सदा के लिए बीत जाएँगी। “तेरे दाहिने हाथ में,” भजनकार पुकार उठता है, “सुख सदैव बने रहते हैं।”—डब्ल्यू. हे ऐटकेन।

नवम्बर 3

दीनता को पहन लो। 1 पतरस 5:5।

क्या यह कलीसिया के काम की एक कठिनाई नहीं कि हमारे पास सैनिकों से अधिक अधिकारी हैं? हमें और अधिक साधारण सिपाहियों की आवश्यकता है, जो कहीं भी कूच करने और छोटे से छोटा काम करने को तैयार हों। हम तभी बड़े काम करने में सफल होंगे जब हम सब अधीन रहने को तैयार होंगे। जब शत्रु को परास्त करना हो, तब सोने के फीते की नहीं, वरन संगीन की आवश्यकता होती है।—थॉमस चैम्पनेस।

नवम्बर 4

याकूब ने आँखें उठाकर देखा, कि एसाव चार सौ पुरुषों को संग लिए हुए चला आ रहा है। उत्पत्ति 33:1।

आँखें उठाकर एसावों को मत ढूँढ़ो। जो कष्टों को ढूँढ़ते हैं, उन्हें देखने के लिए कष्ट पाने में देर नहीं लगती। उन्हें और ऊँचा उठाओ—उसकी ओर जिससे हमारी सहायता आती है। तब तुम अविचल मन से अपने कष्टों का सामना कर सकोगे। जिन्होंने परमेश्वर का मुख देखा है, उन्हें मरनहार मनुष्य के मुख से डरने की आवश्यकता नहीं। परमेश्वर के संग सामर्थ्य पाना उन सब बुराइयों पर सामर्थ्य पाना है जो हमें धमकाती हैं।—एफ. बी. मेयर।

नवम्बर 5

हम अपने आप को शरीर और आत्मा की सारी मलिनता से शुद्ध करें, और परमेश्वर के भय में पवित्रता को सिद्ध करते जाएँ। 2 कुरिन्थियों 7:1।

कुछ पुरानी रब्बीनी कथाओं के अनुसार, जीवन का वृक्ष अपने भीतर की किसी गति से अपनी डालियों को उन अशुद्ध हाथों से कहीं ऊपर उठा लेता था जो उन्हें छूने के लिए बढ़ाए जाते थे; और जब तक यीशु मसीह पर विश्वास के द्वारा हमारे हाथ शुद्ध नहीं हो जाते, तब तक उसका सबसे उत्तम फल हमारे सिरों के ऊपर सुनहरा, पर पहुँच से परे लटका रहता है। स्वर्ग के जीवन की परिपूर्णता केवल उन्हीं को दी जाती है, जिन्होंने पृथ्वी पर विश्वास के द्वारा यीशु मसीह के निकट आकर, अपने आप को शरीर और आत्मा की सारी मलिनता से शुद्ध कर लिया है।—एलेक्स. मैक्लारेन।

नवम्बर 6

बादल का खंभा उनके आगे से हटकर उनके पीछे जा खड़ा हुआ। निर्गमन 14:19।

हमें सदा मार्गदर्शन की ही सबसे अधिक आवश्यकता नहीं होती। हमारे बहुत से संकट पीछे से हम पर आ पड़ते हैं। वे चुपके-चुपके, छल से आते हैं, और जब हमें उनके निकट होने का पता तक नहीं होता, तब हम पर आक्रमण करते हैं। परीक्षा में डालने वाला धूर्त और चतुर है। वह हमारे सामने से नहीं आता। यह जानना कितना सांत्वनादायक है कि जब हमें पीछे से सुरक्षा की आवश्यकता होती है, तब मसीह हमारे पीछे आ खड़ा होता है।—जे. आर. मिलर।

नवम्बर 7

अधर्म के काम मुझ पर प्रबल हुए हैं; परन्तु हमारे अपराधों को तू ढाँप देगा। भजन संहिता 65:3।

बहुत सी सच्ची धर्मपरायणता इन पहले चार शब्दों के उदास घेरे में ही रह जाती है—“अधर्म के काम मुझ पर प्रबल हुए हैं”—और उससे आगे कभी झाँक तक नहीं पाती। परन्तु वहाँ पूर्णविराम मत लगाओ। किसी ऐसे को ले आओ जो सहायता कर सके। “परन्तु हमारे अपराधों को तू ढाँप देगा।” जिस क्षण हम प्रभु को भीतर ले आते हैं, उसी क्षण पराजय विजयी छुटकारे में बदल जाती है!

इसे सुनहरे अक्षरों में लिख डालो—तू! और इस शब्द में केवल एक काँपती हुई आशा या एक अचंभित इच्छा मत ढूँढ़ो। इसके पूर्ण भरोसे को सुनो—तू अवश्य ढाँप देगा!

केवल एक ही परिणाम है जो कलवरी की पीड़ा को सार्थक ठहरा सकता है; केवल एक ही परिणाम है जो हमारे धन्य उद्धारकर्ता को अथवा हमें संतुष्ट कर सकता है; और वह है पाप पर हमारा विजयी होना।—मार्क गाय पीयर्स।

नवम्बर 8

प्रेम में सच्चाई से बोलते हुए। इफिसियों 4:15।

भूल को मिटाने का सबसे उत्तम उपाय यह है कि सत्य का प्रचार किया जाए और उस पर चला जाए।—डब्ल्यू. अर्नाट।

नवम्बर 9

इसलिए वह उठकर सारपत को चला गया। 1 राजा 17:10।

प्रभु जिस किसी कर्तव्य के लिए तुम्हें बुलाए, तुम्हारे विषय में भी वैसा ही कहा जाए, “वह उठा और चला गया।” मार्ग चाहे कितना ही श्रमसाध्य या संकटपूर्ण क्यों न हो, फिर भी एलिय्याह के समान उठो, और चल पड़ो। आनंद से, विश्वास में चलो, और अपने हृदय को चुपचाप प्रभु पर निर्भर रखो, और अंत में तुम निश्चय ही उसकी भलाई को देखोगे और उसका गीत गाओगे। यद्यपि तुम कष्टों के समुद्र में उछाले जाओ, तौभी तुम परमेश्वर की उस दृढ़ नींव पर लंगर डाल सकते हो, जो अटल है। तुम्हारी सुरक्षा के लिए तुम्हारे पास उसकी बहुमूल्य और अति महान प्रतिज्ञाएँ हैं, और तुम भजनकार के साथ कह सकते हो, “हे मेरे मन, तू क्यों गिरा जाता है? और तू भीतर ही भीतर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा रख; क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूँगा।”—एफ. डब्ल्यू. क्रुम्माकर।

नवम्बर 10

प्रतिदिन का खर्च नित्य दिया जाता रहा। 2 राजा 25:30।

कल जो साँसें मैंने लीं, वे आज मुझे जीवित नहीं रख सकतीं; मुझे हर क्षण नई साँस लेते रहना होगा, नहीं तो प्राण-जीवन समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार कल का अनुग्रह और आत्मिक बल भी नया किया जाना चाहिए, और पवित्र आत्मा को क्षण-क्षण मेरी आत्मा पर साँस फूँकते रहना चाहिए, तभी मैं सांत्वनाओं का आनंद उठा सकूँगा और परमेश्वर के काम कर सकूँगा।—टॉप्लेडी।

नवम्बर 11

और जब वह बर्तन जो वह मिट्टी से बना रहा था कुम्हार के हाथ में बिगड़ गया, तब उसने उसी मिट्टी से जैसा उसे अच्छा लगा वैसा दूसरा बर्तन बना दिया। यिर्मयाह 18:4। (R. V.)

उस देश में जो परे है, परमेश्वर की सेवा का सबसे सुंदर और सबसे ऊँचा स्थान उन्हीं स्त्री-पुरुषों से भरा जाएगा जो पृथ्वी पर चाक पर तोड़े गए हैं।—जी. कैम्पबेल मॉर्गन।

नवम्बर 12

अपने आप को परखो। 2 कुरिन्थियों 13:5।

यदि तुम्हारी दशा अच्छी है, तो उसे जाँचने से तुम्हें उसका आराम मिलेगा। यदि तुम्हारी दशा बुरी है, तो उसे जाँचने से वह और बुरी नहीं हो सकती; नहीं, वरन उसे सुधारने का यही एकमात्र उपाय है, क्योंकि मन-फिराव का आरंभ दोषी ठहरने के बोध से होता है।—बिशप हॉपकिन्स।

नवम्बर 13

आज ही चुन लो कि तुम किसकी सेवा करोगे। यहोशू 24:15।

चुनाव और सेवा—इस्राएलियों से यही माँगा गया था; तुमसे भी यही माँगा जाता है, केवल यही। चुनाव और सेवा—इन्हीं में सारा जीवन समाया है।—मार्क हॉपकिन्स।

नवम्बर 14

हे प्रभु, तू पीढ़ी से पीढ़ी तक हमारा धाम बना रहा है। भजन संहिता 90:1।

तुम उकाब को वन में रोक नहीं सकते। तुम उसके चारों ओर सबसे मधुर पक्षियों का समूह इकट्ठा कर सकते हो; तुम उसे सबसे सुंदर चीड़ पर बसेरा दे सकते हो; तुम पंखवाले दूतों को सबसे उत्तम व्यंजन लाने की आज्ञा दे सकते हो; परन्तु वह इन सब को ठुकरा देगा। अपने राजसी पंख फैलाकर, और अपनी दृष्टि आल्प्स की चट्टान पर लगाए हुए, वह चट्टानों के गढ़ों और आँधी और झरने के उन्मुक्त संगीत के बीच अपने पुरखों के भवनों की ओर उड़ जाएगा।

मनुष्य की आत्मा, अपनी उकाब-सी उड़ानों में, युगों की चट्टान से कम किसी पर विश्राम न पाएगी। उसके पुरखों के भवन स्वर्ग के भवन हैं। उसकी चट्टानों के गढ़ परमेश्वर के गुण हैं। उसकी राजसी उड़ान का विस्तार अनंतकाल है! “हे प्रभु, तू पीढ़ी से पीढ़ी तक हमारा धाम बना रहा है!”—मैकडफ।

नवम्बर 15

उसने कहा है। इब्रानियों 13:5।

यदि हम विश्वास के इन शब्दों को थाम भर लें, तो हमारे हाथ में एक सर्व-विजयी हथियार आ जाता है। ऐसा कौन सा संदेह है जो इस दोधारी तलवार से न मारा जाए? ऐसा कौन सा भय है जो परमेश्वर की वाचा के धनुष से छूटे इस बाण के सामने प्राणघातक घाव खाकर न गिर पड़े? “उसने कहा है!” हाँ; चाहे हमारी शांति में आनंद के लिए हो, या हमारे संघर्ष में बल के लिए, “उसने कहा है!” ही हमारा प्रतिदिन का सहारा होना चाहिए।

क्योंकि “उसने कहा है” ही सारी बुद्धि का स्रोत और सारी सांत्वना का सोता है, इसलिए वह तुम में बहुतायत से बसा रहे, मानो “जल का एक सोता जो अनन्त जीवन के लिए उमड़ता रहता है।” तब तुम ईश्वरीय जीवन में स्वस्थ, बलवान, और आनंदित होते जाओगे।—स्पर्जन।

नवम्बर 16

अब मैं नहीं, परन्तु मसीह मुझ में जीवित है। गलातियों 2:20।

यीशु में जीवन का आश्चर्य यह है—और तुम इसे ऐसा ही पाओगे, और यदि तुमने कभी अपना नया नियम लेकर उसे अपने प्रतिदिन के जीवन का नियम बनाने का प्रयत्न किया है तो तुमने इसे ऐसा ही पाया है—कि ऐसा एक भी काम नहीं जिसे करने के लिए तुम बुलाए जाओ, और जिसके विषय में तुम्हें दस मिनट के लिए भी कोई गंभीर संदेह रहे कि यीशु मसीह, यदि वह यहाँ होते—और यीशु मसीह तो यहाँ हैं ही—उन परिस्थितियों में, और जिस सामग्री पर तुम्हें काम करना है उसके साथ, तुमसे क्या करवाना चाहेंगे। जो आत्मा यीशु के वचन को ग्रहण करती है, जो आत्मा यीशु के वचनों के द्वारा स्वयं यीशु के व्यक्तित्व में प्रवेश कर जाती है, जो आत्मा उसे अपनी प्रतिदिन की उपस्थिति और अपना प्रतिदिन का नियम जानती है—वह कभी नहीं हिचकिचाती।—फिलिप्स ब्रूक्स।

नवम्बर 17

मेरा पड़ोसी कौन है? लूका 10:29।

“तेरा पड़ोसी कौन है?” वह दुखी जन है, चाहे वह कहीं भी हो, कोई भी हो, कैसा भी हो। जहाँ कहीं तू संकट की पुकार सुने, जहाँ कहीं तू किसी को जीवन के उतार-चढ़ावों के द्वारा (अर्थात परमेश्वर की देख-रेख के द्वारा) तेरे मार्ग में लाया हुआ देखे, जिसकी सहायता करना तेरे वश में हो—वह चाहे परदेशी या शत्रु ही क्यों न हो—वही तेरा पड़ोसी है।—ए. पी. स्टैनली।

नवम्बर 18

और जो हमें तुम्हारे साथ . . . मसीह में दृढ़ करता है, और जिसने हमारा अभिषेक किया, वह परमेश्वर है; जिसने हम पर छाप भी कर दी है, और बयाना करके आत्मा को हमारे हृदयों में दिया है। 2 कुरिन्थियों 1:21, 22।

जब कोई मसीही पवित्र आत्मा के द्वारा “छापा” जाता है, अपने स्वामी की संपत्ति के रूप में “छापा” जाता है, तब यह पूछने की आवश्यकता न रहेगी कि उस “छापे हुए” जन पर “यह किसकी मूरत और नाम है?” निःसंदेह राजा की। कोई भी उस मूरत को देख सकता है।

यदि किसी “छाप” को देखा ही न जा सके, तो उसका क्या लाभ?

क्या राजा की मूरत हम पर प्रत्यक्ष रूप से, स्थायी रूप से अंकित है? हर आत्मा से भरे हुए, “छापे हुए” विश्वासी पर वह अंकित है।—जॉन मैकनील।

नवम्बर 19

वे आनंद करेंगे, और जरुब्बाबेल के हाथ में साहुल को देखेंगे। जकर्याह 4:10।

मसीही के लिए यह आनंद की बात है कि साहुल अब हमारे महान जरुब्बाबेल के हाथों में है, और जब वह प्रकट होगा, तब संसार का कुशासन समाप्त हो जाएगा। मनुष्यों के झूठे मानदंड और झूठे आकलन बहा दिए जाएँगे। “उपयुक्तता” के मानदंड, “अंतःकरण” के मानदंड, “हर मनुष्य जैसा चाहे वैसा सोचे, बस वह निष्कपट हो” के मानदंड—ये, और झूठ के ऐसे सब आश्रय मकड़ी के जाले के समान होंगे। सब वस्तुओं का माप मसीह होगा, और मसीह ही सब वस्तुओं का मापने वाला होगा।

कैसे सब कुछ उलट जाएगा! जो कुछ अभी विद्यमान है, उस सब का कैसा ऊपर-नीचे हो जाना!

धन्य और लालसा किया हुआ दिन—संसार की महान जयंती, पृथ्वी का बहुप्रतीक्षित विश्रामदिन, कराहती हुई सृष्टि का आनंद, और प्रकृति का शांत विश्राम! भला कौन न पुकार उठेगा, “हे प्रभु यीशु, आ, और इस व्याकुल स्वप्न को समाप्त कर! पाप और शोक, आहें और आँसू, निराशा और मृत्यु की उस लंबी, अंधियारी रात की छायाओं को तोड़ डाल!”—एफ. व्हिटफील्ड।

नवम्बर 20

संसार में तुम्हें क्लेश होता है; परन्तु ढाढ़स बाँधो, मैंने संसार को जीत लिया है। यूहन्ना 16:33।

क्लेश परमेश्वर की दाँवनी है—हमें नष्ट करने के लिए नहीं, वरन इसलिए कि हम में जो कुछ भला, स्वर्गीय और आत्मिक है, वह उससे अलग किया जाए जो बुरा, सांसारिक और शारीरिक है। पीड़ा की मार से कम कुछ भी यह नहीं कर सकता। बुराई भलाई से इतनी लिपटी रहती है, हम में भलाई का सुनहरा गेहूँ पुराने जीवन की कड़ी भूसी में इतना लिपटा रहता है कि केवल दुख का भारी बेंत ही उस पृथक्करण को कर सकता है।—जे. आर. मिलर।

नवम्बर 21

मैंने . . . अपने पीछे तुरही का सा एक बड़ा शब्द यह कहते सुना, . . . लिख ले। प्रकाशितवाक्य 1:10, 11।

यह ध्यान देना बहुत मधुर है कि स्वर्ग से एक शब्द ने यूहन्ना से कहा, “लिख ले।” क्या वह शब्द हमारे पास नहीं आता? क्या ऐसे लोग नहीं जो स्वर्ग के आनंदों का स्वाद चखते यदि हम उन्हें क्षमा और स्नेह के शब्द लिख भेजते? क्या ऐसे और लोग नहीं जो अपने आँसू पोंछ लेते यदि हम उन्हें बीते हुए आनंदों की याद दिलाते, जब हम भी उन्हीं के समान कंगाल थे? नहीं, क्या कुछ लोग, जो इन सीधे-सादे शब्दों को पढ़ते हैं, लिफाफे के भीतर अपने हस्ताक्षर की कोई ऐसी वस्तु न रख सकते जो विधवा के हृदय को आनंद से नचा दे?

हमारी कलम क्या कर रही है? क्या वह औरों के जीवन में आनंद बढ़ा रही है? यदि हाँ, तो जब हम अपनी मेज पर बैठते हैं, तब स्वर्गदूत अपनी वीणाएँ मिला सकते हैं। वे उद्धार के वारिसों की सेवा के लिए भेजे गए हैं, और हमारी कलम को यों देखकर आनंदित होंगे मानो वह उनके गाने के लिए संगीत लिख रही हो, क्योंकि जो हम लिखते हैं वह उनके सौंपे हुए जनों के आनंद को परिपूर्ण कर देता है।—थॉमस चैम्पनेस।

नवम्बर 22

प्रभु जिससे प्रेम रखता है, उसकी ताड़ना भी करता है। इब्रानियों 12:6।

हमें सदा यह स्मरण रखना चाहिए कि हमारे स्वर्गीय पिता के हाथ की ताड़ना को हमारे पिता के मुख के प्रकाश में समझना चाहिए; और उसके नैतिक शासन के गहरे भेदों को उसके कोमल प्रेम के माध्यम से विचारना चाहिए।—चयनित।

नवम्बर 23

तुम्हारा बुलाने वाला विश्वासयोग्य है, और वह ऐसा ही करेगा। 1 थिस्सलुनीकियों 5:24।

सांसारिक विश्वासयोग्यता केवल स्वर्गीय दानों को ग्रहण करने से ही संभव है। जैसे यह निश्चित है कि उगता हुआ हर पत्ता मुख्यतः वही जल है जो पौधे ने बादलों से पाया, और वही कार्बन जो उसने वायुमंडल से लिया, वैसे ही यह भी निश्चित है कि हमारी सारी भलाई मुख्यतः स्वर्ग से और स्वर्ग के दानों से खींची जाएगी। जैसे यह निश्चित है कि कोयले का हर वह टुकड़ा जो तुम अपनी आग पर रखते हो, अपने भीतर वे सूर्य-किरणें समेटे है जो उन सब सहस्राब्दियों से बंद पड़ी हैं जो तब से बीत चुकी हैं जब वह वन में हरा-भरा लहराता था, वैसे ही यह भी निश्चित है कि हर भला काम अपने भीतर ऊपर से आए दानों को समाए हुए है। और कोई मनुष्य दान पाए बिना शुद्ध नहीं; और हर एक अच्छा वरदान और हर एक सिद्ध वरदान ज्योतियों के पिता की ओर से आता है।—एलेक्स. मैक्लारेन।

नवम्बर 24

अपने हृदयों में अनुग्रह के साथ प्रभु के लिए गाते हुए। कुलुस्सियों 3:16।

स्मरण रखो कि तुम्हारा जीवन एक गाता हुआ जीवन होना है। यह संसार तुम्हारे लिए परमेश्वर का भव्य महामंदिर है। तुम्हें परमेश्वर के गायकों में से एक होना है, और तुम्हारे हृदय से स्तुति और धन्यवाद का एक निरंतर आराधना-बलिदान ऊपर उठता रहे, जिससे परमेश्वर सदा प्रसन्न रहे। और केवल होंठों का चढ़ावा ही नहीं, वरन आनंद के साथ जीवन का समर्पण भी हो। हाँ, आनंद के साथ, न कि दबाव के साथ। हमारी प्रकृति की हर एक शक्ति उसे प्रसन्न सेवा में अर्पित की जाए, क्योंकि प्रभु यहोवा मेरा बल ही नहीं, वरन मेरा गीत भी है।—डब्ल्यू. हे ऐटकेन।

नवम्बर 25

बीते हुए दिनों को स्मरण करो। इब्रानियों 10:32।

बीते हुए दिन—परीक्षा, संघर्ष, निराशा, और प्रलोभन के दिन। यदि हम इन्हें अधिक बार स्मरण करते, तो कितने अधिक आनंद से हम परमेश्वर की विश्वासयोग्यता के ओट को अपनी शरण बना लेते, और भजनकार के साथ पुकार उठते, “तू जो मेरा सहायक हुआ है, इस कारण मैं तेरे पंखों की छाया में जयजयकार करूँगा।”—आर. फुलर।

नवम्बर 26

प्रभु . . . तेरा धाम। भजन संहिता 91:9।

हम घर बिना किसी आयोजन के जाते हैं। हम अपनी भेंट-मुलाकातों की योजना बनाते हैं, और फिर वे समाप्त हो जाने पर घर लौट जाते हैं। कर्तव्य, आवश्यकता, और अनेक बातें हमें और कहीं ले जाती हैं; परन्तु हृदय हमें घर ले जाता है। धन्य है, अति धन्य है वह जन जिसके विचार परमेश्वर की ओर उठ जाते हैं—इसलिए नहीं कि वे मछुए की उस नाव के समान खदेड़े जाते हैं जिसे आँधी की प्रचंडता बहा ले जाती है, इसलिए नहीं कि उन्हें आवश्यकता या भय विवश करता है, इसलिए नहीं कि उन्हें कर्तव्य का हाथ ले जाता है, वरन इसलिए कि परमेश्वर ही उसका धाम और उसका घर है। और वस्तुओं से छूटकर, विचार विश्राम पाने घर लौट जाते हैं।

धन्य जन परमेश्वर में वह प्रेम पाता है जो स्वागत करता है। वहीं धूप से भरा स्थान है। वहीं चिंता खुल जाती है और परिश्रम भूल जाता है। वहीं आनंदमय स्वतंत्रता, सुखद शांति, विश्राम, और हमारे बल का नया किया जाना है—परमेश्वर के संग घर में।—मार्क गाय पीयर्स।

नवम्बर 27

इन लोगों ने जगत को उलटा-पुलटा कर दिया है। प्रेरितों के काम 17:6। इन बातों में से किसी की मुझे परवाह नहीं। प्रेरितों के काम 20:24।

संसार को हिला देने वाले मनुष्य वही हैं जो संसार को अपने आप को हिलाने नहीं देते।—चयनित।

नवम्बर 28

उसने याकूब की जाँघ की उस नस को छू दिया जो सिकुड़ गई। उत्पत्ति 32:32।

जो कुछ भी किसी आत्मा को, जिसे परमेश्वर आशीष देना चाहता है, उसके विरुद्ध अड़े रहने योग्य बनाता है, परमेश्वर उसे छू देगा। वह धन का, या प्रभाव का, या स्नेह का अभिमान हो सकता है; परन्तु वह छोड़ा न जाएगा—परमेश्वर उसे छू देगा। वह किसी नस के समान स्वाभाविक वस्तु हो सकती है; परन्तु यदि वह किसी मनुष्य से आत्मिक आशीष छीन लेती है, तो परमेश्वर उसे छू देगा। वह किसी नस के समान छोटी वस्तु हो सकती है; परन्तु किसी मनुष्य को आशीष के प्रतिरोध में दृढ़ बनाने में उसका प्रभाव उसे दोषी ठहराने के लिए बहुत होगा—और परमेश्वर उसे छू देगा। और उस स्पर्श के नीचे वह सिकुड़ और मुरझा जाएगी, और तुम जीवन के अंत तक लँगड़ाते रहोगे।

स्मरण रखो कि वह नस कभी नहीं सिकुड़ती, केवल स्वर्गदूत के हाथ के स्पर्श के नीचे ही सिकुड़ती है—कोमल प्रेम का स्पर्श।—एफ. बी. मेयर।

नवम्बर 29

परमेश्वर के लिए सब कुछ संभव है। मरकुस 10:27।

अविश्वास कहता है, “अमुक-अमुक बातें कैसे हो सकती हैं?” वह “कैसे” से भरा है; परन्तु विश्वास के पास उन दस हजार “कैसे” का एक ही महान उत्तर है, और वह उत्तर है—परमेश्वर!—सी. एच. एम।

नवम्बर 30

तुम जीवते परमेश्वर का मंदिर हो; जैसा परमेश्वर ने कहा है, मैं उनमें बसूँगा और उनमें चला-फिरा करूँगा। 2 कुरिन्थियों 6:16।

ये मंदिर उसी के लिए खड़े किए गए थे। वह इन्हें ऐसा पूर्ण रूप से भर दे कि, प्राचीन कथा के उस पूर्वी काँच के मंदिर के समान, मंदिर दिखाई ही न दे, वरन केवल वह तेजोमय धूप दिखाई दे, जो उसमें भीतर ही नहीं चमकती, वरन उसके आर-पार चमकती है, और पारदर्शी दीवारें सब की सब अनदेखी रह जाती हैं।—ए. बी. सिम्पसन।

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