शान्त घड़ी के विचार
दिसम्बर

अध्याय 12 · 13 मिनट का पठन

दिसम्बर

दिसम्बर 1

मसीह के बिना। इफिसियों 2:12

उत्साह देने के लिए कोई आशा नहीं, मार्ग दिखाने के लिए कोई कर्णधार नहीं, सलाह देने के लिए कोई मित्र नहीं, थामे रखने के लिए कोई अनुग्रह नहीं, हमारा स्वागत करने के लिए कोई स्वर्ग नहीं, और शान्ति देने के लिए कोई परमेश्वर नहीं!—चयनित।

दिसम्बर 2

जब मैं निर्बल होता हूँ, तभी मैं बलवन्त होता हूँ। 2 कुरिन्थियों 12:10

यही परमेश्वर का मार्ग है। हम पीछे हटकर आगे बढ़ते हैं, निर्बल होकर बलवन्त बनते हैं, और मूर्ख बनकर बुद्धिमान बनते हैं।—एफ. व्हिटफील्ड।

दिसम्बर 3

परमेश्वर के पवित्र जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर बोलते थे। 2 पतरस 1:21

बाइबल जीवित परमेश्वर की लिखी हुई पुस्तक है। इसका हर एक अक्षर सर्वशक्तिमान की उँगली से लिखा गया। इसका हर एक शब्द उन अनन्त होंठों से टपका। इसका हर एक वाक्य पवित्र आत्मा के द्वारा बोला गया। यद्यपि मूसा को अपनी अग्निमय लेखनी से अपने इतिहास लिखने का काम सौंपा गया, तौभी परमेश्वर ने उस लेखनी को चलाया। हो सकता है कि दाऊद ने अपनी वीणा छेड़ी और अपनी उँगलियों से मधुर भजनों की धुनें टपकाईं; परन्तु परमेश्वर ने ही उसके हाथों को उसकी सुनहरी वीणा की जीवित तारों पर चलाया। सुलैमान ने प्रेम के गीत गाए और परम बुद्धि के वचन कहे; परन्तु परमेश्वर ने ही उसके होंठों को चलाया और उस प्रचारक को वाक्पटु बनाया। यदि मैं गरजते हुए नहूम के पीछे चलूँ, जब उसके घोड़े जल को रौंदते हैं; या हबक्कूक के, जब वह कूशान के तम्बुओं को क्लेश में देखता है; यदि मैं मलाकी को पढ़ूँ, जब पृथ्वी भट्ठी के समान जल रही है; यदि मैं यूहन्ना के उस कोमल पृष्ठ की ओर फिरूँ, जो प्रेम की बातें कहता है; या पतरस के उन कठोर अध्यायों की ओर, जो परमेश्वर के शत्रुओं को भस्म करती हुई आग की चर्चा करता है; यदि मैं यहूदा की ओर मुड़ूँ, जो परमेश्वर के बैरियों पर शाप उगलता है—तो हर कहीं मैं परमेश्वर को बोलते हुए पाता हूँ; यह परमेश्वर की वाणी है, मनुष्य की नहीं; ये वचन परमेश्वर के वचन हैं; उस अनन्त, अदृश्य, सर्वशक्तिमान, युगों के यहोवा के वचन। यह बाइबल परमेश्वर की बाइबल है; और जब मैं इसे देखता हूँ, तो मुझे ऐसा जान पड़ता है मानो इसमें से कोई वाणी उठकर कह रही हो, “मैं परमेश्वर की पुस्तक हूँ। हे मनुष्य, मुझे पढ़। मैं परमेश्वर की लिखी हुई हूँ। मेरे पृष्ठ का अध्ययन कर, क्योंकि मैं परमेश्वर के द्वारा लिखी गई हूँ। मुझसे प्रेम रख, क्योंकि वही मेरा रचयिता है, और तू उसे हर कहीं प्रत्यक्ष और प्रकट देखेगा।”—स्पर्जन।

दिसम्बर 4

वे सब उसे छोड़कर भाग गए। मरकुस 14:50

अलगाव कभी उसकी ओर से नहीं आता।—जे. हडसन टेलर।

दिसम्बर 5

बेलशस्सर राजा ने एक बड़ा भोज दिया। दानिय्येल 5:1

एक अतिथि ऐसा था जिसे नहीं बुलाया गया था, परन्तु वह आया, और उसकी उँगली का काम भीत पर चमक उठा।—चयनित।

दिसम्बर 6

जो दूसरों को सींचता है, वह आप भी सींचा जाएगा। नीतिवचन 11:25

प्रभावशाली जीवन और ग्रहणशील जीवन एक ही हैं। बाँह का ऐसा कोई झोंका नहीं जो परमेश्वर के लिए कुछ काम करे और साथ ही परमेश्वर के सत्य को कुछ और न बटोरे, और उसे जीवन के भण्डार में न समेट ले।—फिलिप्स ब्रुक्स।

दिसम्बर 7

और वे एक लकवे के मारे हुए को उसके पास लाए। मरकुस 2:3

यदि लकवा न होता, तो सम्भव है कि यह मनुष्य मसीह को कभी न देख पाता!—चयनित।

दिसम्बर 8

हे मेरे मन, प्रभु को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूल . . . वह तुझे करुणा और कोमल दया का मुकुट पहनाता है। भजन संहिता 103:2, 4

हम विश्वास की दूरबीन की चर्चा करते हैं, परन्तु मुझे लगता है कि हमें इससे भी अधिक सतर्क और कृतज्ञ प्रेम के सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता है। इसे अपने दैनिक जीवन के छोटे-छोटे अंशों पर, आत्मा के प्रकाश में लगाकर देखो, तो वे कैसे अद्भुत रूप से उभर आते हैं!—फ्रांसेस रिडली हैवरगल।

दिसम्बर 9

जब तू जल में से होकर जाए, तब मैं तेरे संग रहूँगा। यशायाह 43:2

परीक्षा में परमेश्वर की उपस्थिति परीक्षा से छूट पा जाने से कहीं उत्तम है। हमारे साथ उसके हृदय की सहानुभूति हमारे लिए उसके हाथ के सामर्थ्य से कहीं अधिक मधुर है।—चयनित।

दिसम्बर 10

तब तुम धर्मी और दुष्ट के बीच का भेद पहचान लोगे। मलाकी 3:18

ऑस्ट्रिया की ऐनी ने कार्डिनल रिशेल्यू से कहा: “परमेश्वर हर सप्ताह के अन्त में चुकता नहीं करता, परन्तु वह अन्त में अवश्य चुकाता है!”—चयनित।

दिसम्बर 11

तुम्हारा जीवन क्या है? वह तो भाप ही के समान है, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, और फिर लोप हो जाती है। याकूब 4:14

“केवल एक ही जीवन; वह शीघ्र ही बीत जाएगा—
और केवल वही टिकेगा जो मसीह के लिए किया गया है।”—चयनित।

दिसम्बर 12

उसने (यीशु ने) . . . स्वर्ग की ओर दृष्टि की। मरकुस 6:41

परमेश्वर के लिए काम करते समय, पहले स्वर्ग की ओर देखो। यह एक उत्तम योजना है। हमारे प्रभु यीशु मसीह ने बार-बार स्वर्ग की ओर देखा और कहा, “हे पिता।” आओ हम उसका अनुकरण करें; यद्यपि हम पृथ्वी पर खड़े हैं, तौभी हमारा बर्ताव स्वर्ग का हो। बाहर जाने से पहले, यदि तुम जगत को खिलाना चाहते हो, यदि तुम आत्मिक अकाल और सूखे के बीच आशीष बनना चाहते हो, तो अपना सिर स्वर्ग की ओर उठाओ। तब तुम्हारा मुख ही चमक उठेगा, तुम्हारे वस्त्रों से ही गन्धरस, अगर और तज की सुगन्ध आएगी—उन हाथीदाँत के महलों से, जहाँ तुम अपने परमेश्वर और उद्धारकर्ता के संग रहे हो। तुम पर परमप्रधान परमेश्वर की सेवा का गौरव और सामर्थ्य अंकित होगा।—मैकनील।

दिसम्बर 13

चेले सबसे पहले अन्ताकिया में मसीही कहलाए। प्रेरितों के काम 11:26

यह नाम यह संकेत देता है कि हमारे वचनों के समान ही हमारे चरित्र से भी यह स्पष्ट प्रभाव पड़ना चाहिए कि हम यीशु मसीह के हैं। वही प्रकट रूप से हमारे जीवन का केन्द्र और पथप्रदर्शक, प्रेरणा और आदर्श, बल और प्रतिफल हो। हम मसीही हैं। यह सब लोगों को स्पष्ट दिखाई देना चाहिए, चाहे हम बोलें या चुप रहें।

क्या तुम्हारे साथ ऐसा है?—एलेक्स. मैक्लेरन।

दिसम्बर 14

अतः जब ये प्रतिज्ञाएँ हमें मिली हैं। 2 कुरिन्थियों 7:1

ग्रीष्म के दिनों में वन चिड़ियों के घोंसलों से भरे रहते हैं। वे पत्तों के बीच छिपे रहते हैं। छोटी चिड़ियाँ जानती हैं कि वे कहाँ हैं; और जब आँधी उठती है, या जब रात होने लगती है, तब वे उड़कर अपने-अपने घोंसले में चली जाती हैं। इसी प्रकार परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ बाइबल में छिपी हुई हैं, जैसे बड़े वनों में घोंसले; और किसी भी संकट या घबराहट में हमें वहीं उड़ जाना चाहिए, और अपने प्राण के घोंसले में तब तक छिपे रहना चाहिए जब तक आँधी टल न जाए। इस जगत में मसीह के वचनों के समान अभेद्य कोई गढ़ नहीं।—जे. आर. मिलर।

दिसम्बर 15

अब विश्वास, आशा और प्रेम ये तीनों बने रहते हैं; परन्तु इनमें सबसे बड़ा प्रेम है। 1 कुरिन्थियों 13:13 (R. V.)

प्रेम वह सबसे बड़ी वस्तु है जो परमेश्वर हमें दे सकता है: क्योंकि वह स्वयं प्रेम है; और यही वह सबसे बड़ी वस्तु है जो हम परमेश्वर को दे सकते हैं: क्योंकि यह हमें स्वयं दे देगा, और अपने साथ वह सब ले जाएगा जो हमारा है।—जेरेमी टेलर।

दिसम्बर 16

उसने (थोमा ने) . . . कहा, जब तक मैं . . . न देख लूँ . . . मैं विश्वास नहीं करूँगा। . . . यीशु ने . . . कहा . . . अविश्वासी न हो, परन्तु विश्वास कर। यूहन्ना 20:25, 27

मसीही के हृदय में उठनेवाला हर सन्देह परमेश्वर के वचन का, और मसीह के बलिदान का अनादर है।—चयनित।

दिसम्बर 17

लूत ने . . . सदोम की ओर अपना तम्बू खड़ा किया। उत्पत्ति 13:12

और शीघ्र ही लूत सदोम में जा बसा; और कुछ ही समय में सदोम उसके भीतर बस गया।—थियोडोर कायलर।

दिसम्बर 18

तू मुझे गुप्त दोषों से शुद्ध कर। भजन संहिता 19:12

जगत को ऐसे मनुष्यों की आवश्यकता है जो गुप्त दोषों से मुक्त हों। अधिकांश मनुष्य तो घोर, प्रकट दोषों से मुक्त रहते ही हैं।—चयनित।

दिसम्बर 19

वचन का सुननेवाला . . . काम का करनेवाला। याकूब 1:23, 25

धर्म रविवार को सीखा भले जाए, परन्तु वह सप्ताह के दिनों के काम में जिया जाता है। धर्म की मशाल कलीसिया में जलाई भले जाए, परन्तु वह दुकान में और सड़क पर जलती है। धर्म अपना जीवन प्रार्थना में खोजता है, परन्तु अपना जीवन कर्मों में जीता है। वह कोठरी में बोया जाता है, परन्तु अपनी बढ़ती जगत में करता है। वह स्तुति के गीतों में उड़ान के लिए अपने पंख सँवारता है, परन्तु उसकी वास्तविक उड़ानें प्रेम के कामों में होती हैं। सत्य की पुस्तक में अपना मसीही पाठ पढ़ते हुए वह विश्वासयोग्यता पर निश्चय करता और मनन करता है, परन्तु “विश्वासयोग्य वही है जो विश्वासयोग्यता के काम करे।” वह पवित्रस्थान की सारी सहायताओं और सहारों को अपने वस्त्र-कक्ष के समान अपना कवच धारण करने में लगाता है, परन्तु वह व्यावहारिक जीवन की सारी गतिविधियों में उचित, श्रेष्ठ और भले के लिए संघर्ष करता है, और उसका युद्धक्षेत्र जीवन का सारा विशाल मैदान है।—जॉन डॉटी।

दिसम्बर 20

तुम नहीं जानते कि कल क्या होगा। याकूब 4:14

“कल” शैतान का बड़ा साथी है—वही गोलियत, जिस पर वह जय के लिए भरोसा रखता है। “अभी” वह जवान है जो उसके विरुद्ध भेजा गया है। . . . जगत सहर्ष कल मसीही बनने को तैयार हो जाएगा, यदि मसीह उन्हें आज सांसारिक बने रहने की अनुमति दे दे।—विलियम अर्नाट।

दिसम्बर 21

समुद्र उमड़ता और अधिक तूफानी होता जाता था। योना 1:11

प्राण में पाप जहाज में योना के समान है। वह अत्यन्त शान्त जल को भी तूफानी समुद्र बना देता है।—चयनित।

दिसम्बर 22

सन्देही न बनो, वरन् उनका भी अनुकरण करनेवाले, जो विश्वास और धीरज के द्वारा प्रतिज्ञाओं के वारिस होते हैं। इब्रानियों 6:12

परमेश्वर प्रतिज्ञा करता है। विश्वास उस पर विश्वास करता है। आशा उसकी बाट जोहती है। धीरज चुपचाप उसकी प्रतीक्षा करता है।—चयनित।

दिसम्बर 23

जा, और सबसे नीची जगह पर बैठ। लूका 14:10

जो सबसे नीची जगह लेने को तैयार रहता है, उसे बैठने का स्थान सदा मिल जाता है; सबसे बुरी जगहों के लिए अधिक भीड़-भाड़ नहीं होती। पीछे वैसी धक्का-मुक्की नहीं होती जैसी आगे होती है; इसलिए यदि हम सुखी रहना चाहते हैं, तो पीछे ही रहना हमारे लिए भला होगा।—थॉमस चैम्पनेस।

दिसम्बर 24

प्रार्थना में लगे रहो। कुलुस्सियों 4:2

हमारी प्रार्थनाएँ प्रायः नगर के बच्चों की शरारतों के समान होती हैं, जो अपने पड़ोसियों के घरों के द्वार खटखटाकर भाग जाते हैं; हम भी बहुधा स्वर्ग का द्वार खटखटाकर जगत की आत्मा में भाग जाते हैं; प्रवेश और उत्तर की प्रतीक्षा करने के बदले, हम ऐसा बर्ताव करते हैं मानो हमें डर हो कि कहीं हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर न मिल जाए।—विलियम्स।

दिसम्बर 25

स्वर्गदूतों का एक दल परमेश्वर की स्तुति करते हुए कह रहा था, आकाश में परमेश्वर की महिमा हो। लूका 2:13, 14

स्वर्गदूत अनेक महान अवसरों पर उपस्थित रहे थे, और उन्होंने अपने सर्वशक्तिमान सृष्टिकर्ता की स्तुति में अनेक गम्भीर गान में भाग लिया था। वे सृष्टि के समय उपस्थित थे: “भोर के तारों ने मिलकर जयजयकार किया, और परमेश्वर के सब पुत्र आनन्द के मारे ललकार उठे।” उन्होंने अनेक ग्रहों को यहोवा की हथेलियों के बीच गढ़े जाते और उसके अनन्त हाथों से अन्तरिक्ष की अनन्तता में घुमाए जाते देखा था। जिन अनेक लोकों को उस महान ने रचा, उन पर उन्होंने गम्भीर गीत गाए थे। हमें सन्देह नहीं कि उन्होंने बारम्बार यह गाया था, “जो सिंहासन पर विराजमान है, उसका धन्यवाद और आदर, और महिमा, और वैभव, और सामर्थ्य, और प्रभुता, और पराक्रम सदा होता रहे,” जब वह सृष्टि के कार्य में अपने आप को प्रकट करता था। मुझे इसमें भी सन्देह नहीं कि उनके गीत युगों के बीतते बल पकड़ते गए। जैसे रचे जाने के समय उनकी पहली साँस ही गीत थी, वैसे ही जब उन्होंने परमेश्वर को नए लोक रचते देखा, तब उनके गीत को एक और सुर मिला; वे आराधना के स्वरग्राम में कुछ और ऊँचे उठ गए। परन्तु इस बार, जब उन्होंने परमेश्वर को अपने सिंहासन से झुककर एक स्त्री की छाती से लगा हुआ शिशु बनते देखा, तब उन्होंने अपने सुरों को और भी ऊँचा उठाया; और स्वर्गदूतों के संगीत की चरम सीमा तक पहुँचकर, उन्होंने स्तुति के दिव्य स्वरग्राम के सर्वोच्च स्वर पाए और गा उठे, “आकाश में परमेश्वर की महिमा हो,” क्योंकि उन्हें लगा कि भलाई में इससे ऊँचा परमेश्वर नहीं जा सकता। इस प्रकार उन्होंने अपनी सर्वोच्च स्तुति उसे उसके ईश्वरत्व के सर्वोच्च कार्य में दी।—स्पर्जन।

दिसम्बर 26

ऐसा न हो कि मैं हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस को छोड़ और किसी बात पर घमण्ड करूँ। गलातियों 6:14

क्रूस परमेश्वर के नैतिक विश्व का महान केन्द्र है! इसी केन्द्र की ओर परमेश्वर सदा संकेत करता रहा, और विश्वास की आँख उद्धारकर्ता के आने तक सदा आगे की ओर ताकती रही। और अब हमें सदा उसी क्रूस की ओर फिरना है, जो हमारी सारी आशीष का केन्द्र और हमारी सारी आराधना का आधार है—पृथ्वी पर भी और स्वर्ग में भी, समय में और सारी अनन्तता में।

दिसम्बर 27

वह सदा जीवित है। इब्रानियों 7:25

यही हमारे लिए, और उसके सत्य के लिए, और मनुष्यजाति के लिए हमारी आशा है। मनुष्य आते हैं और चले जाते हैं। अगुवे, शिक्षक, विचारक एक समय के लिए बोलते और काम करते हैं, और फिर मौन तथा निर्बल हो जाते हैं। वह बना रहता है। वे मरते हैं, परन्तु वह जीवित रहता है। वे जलाए हुए दीपक हैं, और इसलिए देर-सवेर बुझ जाते हैं, परन्तु वही सच्ची ज्योति है जिससे वे अपनी सारी चमक पाते हैं, और वह सदा सर्वदा चमकता रहता है।—एलेक्स. मैक्लेरन।

दिसम्बर 28

जगत के साथ मित्रता परमेश्वर से बैर है। याकूब 4:4

यह बांज के वृक्ष के साथ लिपटी हुई आइवी लता के समान है। आइवी बांज को भव्य, सुन्दर रूप भले दे दे, परन्तु सारे समय वह उसी के मर्मस्थलों को खाती रहती है। क्या हम परमेश्वर के शत्रुओं से समझौता कर रहे हैं? क्या जगत हमें अपने सम्मानों, अपने सुखों, अपनी वाहवाही से गले लगा रहा है? इससे जगत की दृष्टि में हमारा मान भले बढ़ जाए, परन्तु हमारा बल जाता रहता है।—डेनहम स्मिथ।

दिसम्बर 29

उसने (हन्ना ने) . . . प्रभु से प्रार्थना की, और बिलख-बिलखकर रोई . . . वह मन ही मन कह रही थी। 1 शमूएल 1:10, 13

दयासन पर सच्चे काम के लिए मुझे घर की बनी प्रार्थना दो—ऐसी प्रार्थना जो मेरे हृदय की गहराइयों से निकले, इसलिए नहीं कि मैंने उसे गढ़ा, परन्तु इसलिए कि परमेश्वर पवित्र आत्मा ने उसे वहाँ रखा, और उसे ऐसा जीवित बल दिया कि मैं उसे बाहर निकाले बिना न रह सका। यद्यपि तुम्हारे शब्द टूटे-फूटे हों, और तुम्हारे वाक्य असम्बद्ध हों, तौभी यदि तुम्हारी अभिलाषाएँ सच्ची हों, यदि वे झाऊ के अंगारों के समान प्रचण्ड लौ से जल रही हों, तो परमेश्वर इसकी चिन्ता नहीं करेगा कि वे किस रीति से व्यक्त होती हैं। यदि तुम्हारे पास शब्द न हों, तो सम्भव है कि तुम शब्दों के बिना उनके साथ से भी उत्तम प्रार्थना करो। कुछ प्रार्थनाएँ ऐसी होती हैं जो शब्दों की कमर तोड़ देती हैं; वे किसी भी मानवीय भाषा के उठाने के लिए बहुत भारी होती हैं।—स्पर्जन।

दिसम्बर 30

नूह पर प्रभु के अनुग्रह की दृष्टि हुई। उत्पत्ति 6:8

नूह ने अनुग्रह उसी रीति से पाया जिस रीति से पौलुस पर दया हुई (1 तीमुथियुस 1:16), अर्थात् इस रीति से कि दया ने उसे थाम लिया।—चयनित।

दिसम्बर 31

यह आशा हमारे प्राण के लिए लंगर के समान है। इब्रानियों 6:19

परमेश्वर के सिंहासन में लंगर डालो, और फिर रस्सी को छोटा करते जाओ!—चयनित।

अध्याय 12 पूरा हुआ

दिसम्बर

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