विश्वास के बैंक की चेकबुक
प्रस्तावना

अध्याय 1 · 7 मिनट का पठन

प्रस्तावना

विश्वास के बैंक की चेकबुक

प्रतिदिन के उपयोग के लिए

क्रम से सजाई गई बहुमूल्य प्रतिज्ञाएँ

अनुभव से निकली संक्षिप्त टिप्पणियों सहित

लेखक

सी. एच. स्पर्जन

प्रस्तावना

परमेश्वर की ओर से मिली प्रतिज्ञा की तुलना बड़ी शिक्षाप्रद रीति से किसी ऐसे चेक से की जा सकती है जो आदेशानुसार देय हो। यह विश्वासी को इस उद्देश्य से दी जाती है कि उसे कोई अच्छी वस्तु प्रदान की जाए। इसका यह अभिप्राय नहीं कि वह उसे आराम से पढ़ ले और फिर उसे एक ओर रख दे। नहीं, उसे प्रतिज्ञा के साथ एक वास्तविकता के समान व्यवहार करना है, ठीक वैसे ही जैसे कोई मनुष्य चेक के साथ करता है।

उसे प्रतिज्ञा को लेना है, और उसे व्यक्तिगत रूप से सच मानकर ग्रहण करते हुए उस पर अपने नाम से पृष्ठांकन करना है। उसे विश्वास से उसे अपनी ही प्रतिज्ञा मानकर स्वीकार करना है। वह इस बात पर छाप दे देता है कि परमेश्वर सच्चा है, और प्रतिज्ञा के इस विशेष वचन के विषय में भी सच्चा है। वह इससे भी आगे बढ़कर विश्वास करता है कि आशीष की पक्की प्रतिज्ञा पा लेने में ही उसने वह आशीष पा ली है, और इसलिए वह आशीष की प्राप्ति की गवाही देने के लिए उस पर अपना नाम लिख देता है।

यह हो जाने पर, उसे विश्वास के साथ प्रतिज्ञा को प्रभु के सामने प्रस्तुत करना चाहिए, जैसे कोई मनुष्य बैंक के काउंटर पर चेक प्रस्तुत करता है। उसे प्रार्थना में उसे लेकर विनती करनी चाहिए, इस आशा से कि वह पूरी की जाएगी। यदि वह स्वर्ग के बैंक में ठीक तिथि पर आया है, तो उसे प्रतिज्ञा की हुई राशि तुरन्त मिल जाएगी। यदि तिथि कुछ आगे की हो, तो उसे उसके आने तक धीरज से प्रतीक्षा करनी चाहिए; परन्तु तब तक वह प्रतिज्ञा को नकद धन के समान गिन सकता है, क्योंकि ठीक समय आने पर बैंक भुगतान अवश्य करेगा।

कुछ लोग चेक पर विश्वास का पृष्ठांकन करने से चूक जाते हैं, और इसलिए उन्हें कुछ नहीं मिलता; और कुछ उसे प्रस्तुत करने में ढीले पड़ जाते हैं, और उन्हें भी कुछ नहीं मिलता। यह प्रतिज्ञा का दोष नहीं, परन्तु उन लोगों का दोष है जो उसके साथ सामान्य समझ से, और व्यापारी की सी सूझ-बूझ से व्यवहार नहीं करते।

परमेश्वर ने ऐसा कोई वचन नहीं दिया जिसे वह चुकाएगा नहीं, और ऐसी कोई आशा नहीं जगाई जिसे वह पूरी नहीं करेगा। अपने भाइयों को यह विश्वास करने में सहायता देने के लिए मैंने यह छोटी-सी पुस्तक तैयार की है। स्वयं प्रतिज्ञाओं को देखना ही विश्वास की आँखों के लिए भला है: हम अनुग्रह के वचनों का जितना अधिक अध्ययन करते हैं, उन वचनों से उतना ही अधिक अनुग्रह पाते हैं। उत्साह देनेवाले पवित्रशास्त्र के वचनों के साथ मैंने अपनी ओर से गवाहियाँ भी जोड़ दी हैं, जो परीक्षा और अनुभव का फल हैं। मैं परमेश्वर की सब प्रतिज्ञाओं पर विश्वास करता हूँ, परन्तु उनमें से बहुतों को मैंने स्वयं आजमाकर परखा है। मैंने देखा है कि वे सच्ची हैं, क्योंकि वे मुझमें पूरी हुई हैं। मुझे आशा है कि यह जवानों के लिए उत्साह देनेवाला होगा, और बड़ी आयु वालों के लिए भी सांत्वना से खाली न होगा। एक मनुष्य का अनुभव दूसरे के लिए अत्यन्त उपयोगी हो सकता है; और इसी कारण प्राचीन काल के परमेश्वर के जन ने लिखा, “मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली”; और फिर, “इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया।”

मैंने ये दैनिक अंश तब लिखने आरम्भ किए थे जब मैं विवाद की लहरों में होकर चल रहा था। तब से मुझे ऐसे जल में डाल दिया गया है जो “तैरने के योग्य,” था, और जो, यदि परमेश्वर का सम्भालनेवाला हाथ न होता, तो डूब जाने के योग्य जल सिद्ध होता। मैंने अनेक दाँवनियों की मार से क्लेश सहा है। मानसिक उदासी के बाद शरीर की तीखी पीड़ा आई, और इसके साथ-साथ शोक भी आया, और प्राण के समान प्रिय एक जन के रूप में दुःख भी। जल लगातार लहर पर लहर उमड़ता चला आया। मैं यह सहानुभूति पाने के लिए नहीं कहता, केवल इसलिए कि पाठक देख ले कि मैं सूखी भूमि पर बैठा नाविक नहीं हूँ। मैंने अनेक बार वे महासागर पार किए हैं जो प्रशान्त नहीं हैं: मैं लहरों का उठना-गिरना और आँधियों का वेग जानता हूँ। यहोवा की प्रतिज्ञाएँ मुझे इस घड़ी जितनी बहुमूल्य लगती हैं, उतनी पहले कभी नहीं लगीं। उनमें से कुछ को मैं अब तक कभी नहीं समझा था; मैं उस तिथि तक नहीं पहुँचा था जिस पर वे परिपक्व होती थीं, क्योंकि मैं स्वयं उनका अर्थ समझने के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं था।

कुछ महीने पहले की तुलना में अब बाइबल मुझे कितनी अधिक अद्भुत लगती है! प्रभु की आज्ञा मानने में, और उसकी निन्दा अपने ऊपर लिए हुए छावनी के बाहर जाने में, मुझे कोई नई प्रतिज्ञाएँ नहीं मिलीं; परन्तु मेरे लिए परिणाम लगभग वैसा ही रहा मानो मिली हों, क्योंकि पुरानी प्रतिज्ञाएँ और भी समृद्ध भण्डारों के साथ मेरे सामने खुल गई हैं। विशेष करके प्रभु का वह वचन जो उसके दास यिर्मयाह के पास पहुँचा, मेरे कानों में अत्यन्त मधुर गूँजता रहा है। उसके भाग में यही था कि वह उन लोगों से बोले जो सुनना नहीं चाहते थे, या सुनकर भी विश्वास नहीं करना चाहते थे। उसका दुःख वह दुःख था जो ठुकराए हुए प्रेम और अटल निष्ठा से उपजता है; वह अपने लोगों को उनकी भूलों से फेर लेना चाहता था, परन्तु स्वयं प्रभु का मार्ग छोड़ने को तैयार न था। उसके लिए गहरी सम्भालनेवाली सामर्थ्य के वचन थे, जिन्होंने उसके मन को वहाँ भी हारने से बचाए रखा जहाँ बिना सहायता का मनुष्य-स्वभाव अवश्य डूब जाता। अनुग्रह के इन और ऐसे ही सुनहरे वाक्यों से मैंने अपने आवश्यक भोजन से भी बढ़कर प्रेम किया है, और उन्हीं से मैंने इन पृष्ठों को समृद्ध किया है।

काश, मैं अपने स्वामी के कुछ सेवकों को शान्ति दे सकूँ! मैंने उनके हृदयों को शान्ति देने के उद्देश्य से अपने ही हृदय से लिखा है। मैं उनकी परीक्षाओं में उनसे कहना चाहता हूँ — मेरे भाइयो, परमेश्वर भला है। वह तुम्हें नहीं त्यागेगा: वह तुम्हें पार ले जाएगा। तुम्हारी वर्तमान विपत्तियों के लिए एक प्रतिज्ञा तैयार रखी है; और यदि तुम विश्वास करोगे और यीशु मसीह के द्वारा दया के आसन के सामने उसे लेकर विनती करोगे, तो तुम देखोगे कि प्रभु का हाथ तुम्हारी सहायता के लिए बढ़ा हुआ है। बाकी सब कुछ विफल हो जाएगा, परन्तु उसका वचन कभी नहीं। वह अनगिनत अवसरों पर मेरे प्रति इतना विश्वासयोग्य रहा है कि मुझे तुम्हें उस पर भरोसा रखने के लिए उत्साहित करना ही होगा। यदि मैं ऐसा न करूँ, तो मैं परमेश्वर के प्रति कृतघ्न और तुम्हारे प्रति निर्दयी ठहरूँगा।

पवित्र आत्मा, जो सहायक है, प्रभु के लोगों में नया विश्वास उत्पन्न करे! मैं जानता हूँ कि उसकी ईश्वरीय सामर्थ्य के बिना जो कुछ मैं कह सकता हूँ, वह सब व्यर्थ होगा; परन्तु उसके जीवन देनेवाले प्रभाव के अधीन, सबसे दीन गवाही भी थरथराते हुए घुटनों को स्थिर करेगी और ढीले हाथों को दृढ़ करेगी। जब उसके सेवक बिना किसी सन्देह के उस पर भरोसा रखते हैं, तब परमेश्वर की महिमा होती है। अपने स्वर्गीय पिता के साथ हम बहुत अधिक बालक नहीं बन सकते। हमारे छोटे बच्चे हमारी इच्छा या हमारी सामर्थ्य के विषय में कोई प्रश्न नहीं पूछते, परन्तु एक बार पिता से प्रतिज्ञा पा लेने पर वे उसके पूरे होने की आशा में आनन्दित रहते हैं, और कभी सन्देह नहीं करते कि वह सूर्य के समान निश्चित है। बहुत-से पाठक, जिन्हें मैं शायद कभी न देख पाऊँ, जब वे वर्ष के प्रत्येक दिन के लिए मेरे तैयार किए हुए इस छोटे-से अंश को पढ़ें, तो परमेश्वर पर ऐसे बालक-जैसे भरोसे का कर्तव्य और आनन्द दोनों खोज लें।

बहुत वर्षों से परमेश्वर के कई हजार लोग मेरी पुस्तकें सुबह-दर-सुबह और शाम-दर-शाम पढ़ते आए हैं, और उनमें से बहुतों ने कृपा करके मुझे पत्र लिखे हैं और माना है कि ऐसे पठन से उन्हें लाभ हुआ है। मुझे आशा है कि यह छोटी-सी पुस्तक उन पुस्तकों के मार्ग में बाधा नहीं बनेगी। वे दैनिक अंश विषयों के कहीं अधिक विविध क्षेत्र से एकत्र किए गए हैं, और इसी कारण और भी लाभदायक हैं कि वे सिद्धान्त, अनुभव, आचरण और अन्य सब बातों को छूते हैं। यह तो केवल प्रतिज्ञा की एक मिठाई है, और इसे भरपूर भोजन के मार्ग में बाधा नहीं बनना चाहिए: वरन्, मुझे आशा है कि यह उनके लिए लालसा जगाएगी।

हमारा प्रभु यीशु अपनी भेड़ों और मेम्नों के लिए की गई मेरी इस सेवा को स्वीकार करे, जिसे अर्पित करता है

उसका अयोग्य सेवक,

सी. एच. स्पर्जन

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