सच्ची दाखलता
प्रबल प्रार्थना

अध्याय 32 · 5 मिनट का पठन

प्रबल प्रार्थना

तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगो, वह तुम्हें दे—यूहन्ना 15:16

हमारे दृष्टान्त के पहले पद में मसीह ने अपने आप को सच्ची दाखलता के रूप में, और पिता को किसान के रूप में प्रगट किया, और अपने लिये और पिता के लिये हृदय में स्थान माँगा। यहाँ, अन्तिम पद में, वह अपने और पिता के विषय में अपनी सारी शिक्षा को उस दोहरे उद्देश्य में समेट देता है जिसके लिये उसने उन्हें चुना था। अपने, अर्थात् दाखलता के, सम्बन्ध में उद्देश्य यह था कि वे फल लाएँ। पिता के सम्बन्ध में उद्देश्य यह था कि वे उसके नाम से जो कुछ माँगें, वह स्वर्ग में रहनेवाले पिता की ओर से किया जाए। जैसे फल मसीह के साथ सच्चे सम्बन्ध का महान प्रमाण है, वैसे ही प्रार्थना पिता के साथ हमारे सम्बन्ध का प्रमाण है। पुत्र में फलवन्त होकर बने रहना, और पिता से प्रबल प्रार्थना करना, ये सच्चे मसीही जीवन के दो महान तत्व हैं।

कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगो, वह तुम्हें दे।—ये दाखलता के दृष्टान्त के अन्तिम शब्द हैं। दाखलता और उसकी डालियों का सारा भेद उस दूसरे भेद तक ले जाता है—कि हम उसके नाम से जो कुछ माँगते हैं, पिता देता है! यहाँ प्रार्थना की कमी का, और प्रार्थना में सामर्थ्य की कमी का कारण देखो। इसका कारण यह है कि हम सच्ची डाली का जीवन इतना कम जीते हैं, दाखलता में अपने आप को इतना कम खोते हैं, और पूरी रीति से उसमें बने नहीं रहते; इसी से हम बहुत प्रार्थना करने के लिये इतना कम विवश होते हैं, इतना कम भरोसा रखते हैं कि हमारी सुनी जाएगी, और इसी से नहीं जानते कि उसके नाम को परमेश्वर के भण्डार की कुंजी के रूप में कैसे काम में लाएँ। पृथ्वी पर लगाई गई दाखलता स्वर्ग तक पहुँच गई है; केवल वही प्राण जो पूरी रीति से और गहराई से उसमें बना रहता है, बड़ी प्रबलता की सामर्थ्य के साथ स्वर्ग तक पहुँच सकता है। दृष्टान्त की शिक्षा और सच्चाई पर, और दाखलता की सच्चाई और जीवन पर हमारे विश्वास को प्रार्थना की सामर्थ्य के द्वारा अपने आप को प्रमाणित करना होगा। बने रहने और आज्ञा मानने का, प्रेम और आनन्द का, शुद्ध किए जाने और फल लाने का जीवन निश्चय ही प्रबल प्रार्थना की सामर्थ्य तक ले जाएगा।

जो कुछ तुम माँगो—यह प्रतिज्ञा उन चेलों को दी गई थी जो सच्ची दाखलता की समानता में अपने संगी मनुष्यों के लिये अपने आप को दे देने को तैयार थे। उनके काम के लिये यही प्रतिज्ञा उनका सारा सम्बल थी; उन्होंने इसे अक्षरशः लिया, उन्होंने इस पर विश्वास किया, उन्होंने इसका उपयोग किया, और उन्होंने इसे सच पाया। आओ, हम भी सच्ची दाखलता की डालियाँ होकर, और उसकी समानता में, अपने आप को मनुष्यों का उद्धार करने के, और परमेश्वर की महिमा के लिये फल लाने के काम में दे दें, तो हम प्रार्थना करने के लिये और “जो कुछ तुम माँगो” का दावा करने के लिये एक नई लगन और सामर्थ्य पाएँगे। हम अपने इस अद्भुत उत्तरदायित्व के प्रति जाग उठेंगे कि ऐसी प्रतिज्ञा में राजा के भण्डारों की कुंजियाँ हमें सौंपी गई हैं, और जब तक हम नाश होनेवालों के लिये रोटी और आशीष न पा लें, तब तक चैन से न बैठेंगे।

“मैंने तुम्हें चुना है ताकि तुम फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगो, वह तुम्हें दे।” हे प्रिय चेले, सब से बढ़कर प्रार्थना करनेवाला मनुष्य बनने का यत्न करो। यहाँ दाखलता की डाली होने के नाते तुम्हारे विशेषाधिकार का सबसे ऊँचा प्रयोग है; यहाँ इस बात का पूरा प्रमाण है कि तुम परमेश्वर और उसके पुत्र के स्वरूप में नये बनाए जा रहे हो; यहाँ तुम्हारी वह सामर्थ्य है जिससे तुम दिखा सको कि तुम मसीह के समान अपने लिये नहीं, वरन् दूसरों के लिये जीते हो; यहाँ तुम मनुष्यों के लिये दान पाने को स्वर्ग में प्रवेश करते हो; यहाँ मसीह में तुम्हारे बने रहने का परिणाम यह हुआ है कि वह तुम में बना रहता है, ताकि तुम्हें अपने अनुग्रह की नाली और साधन के रूप में काम में लाए। मनुष्यों के लिये फल लाने की सामर्थ्य पर परमेश्वर के साथ प्रबल होने की सामर्थ्य का मुकुट रखा गया है।

“सच्ची दाखलता मैं हूँ; और मेरा पिता किसान है।” तुम में मसीह का काम यह है कि वह तुम्हें पिता के पास ऐसे ले आए कि उसका वचन तुम में पूरा हो: “उस दिन तुम मेरे नाम से माँगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से विनती करूँगा; क्योंकि पिता तो स्वयं ही तुम से प्रेम रखता है।” मनुष्यों के लिये पिता के पास सीधे पहुँचने की सामर्थ्य, और उस मध्यस्थता की स्वतन्त्रता जो विश्वास से उनके लिये आशीष का दावा करती और उसे पाती है, मसीह के साथ हमारी एकता का सबसे ऊँचा प्रयोग है। जो सचमुच और पूरी रीति से डालियाँ होना चाहते हैं, वे सब अपने आप को मध्यस्थता के काम में दे दें। यही स्वर्ग में दाखलता मसीह का एक महान काम है, उसके सारे काम की सामर्थ्य का स्रोत। डाली के रूप में इसे अपना एक महान काम बना लो: यही तुम्हारे सारे काम की सामर्थ्य होगी।

मेरे नाम से। हाँ, प्रभु, तेरे नाम से, उस नये नाम से जो तूने यहाँ अपने आप को दिया है, सच्ची दाखलता। एक डाली के रूप में, सम्पूर्ण निष्ठा से, पूरी निर्भरता से, पूर्ण अनुरूपता से, और बने रहनेवाली फलवन्तता से तुझ में बना रहकर, मैं तुझ में होकर पिता के पास आता हूँ, और जो कुछ मैं माँगूँ वह मुझे देगा। आह, मेरा जीवन निरन्तर और प्रबल मध्यस्थता का जीवन हो! आमीन!

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