अध्याय 5 · 18 मिनट का पठन
मई
मई 1
तू मेरा परमेश्वर है, मैं यत्न से तुझे ढूँढ़ूँगा। भजन संहिता 63:1
ऐसे जगत में जहाँ आत्मा के पंखों को अस्त-व्यस्त करने के लिये इतना कुछ है, परमेश्वर के मण्डप के गुप्त स्थान में प्रवेश करना कितना आवश्यक है, जो अकेला ही उसे फिर से स्थिरता और शान्ति में लौटा लाता है! ऐसे जगत में जहाँ उदास और निराश करने के लिये इतना कुछ है, उसके साथ संगति करना कितना धन्य है, जिस में समस्त सच्चे आनन्द और स्थायी हर्ष का एकमात्र सच्चा स्रोत और सोता है! ऐसे जगत में जहाँ इतना कुछ हमारी आत्माओं को अपवित्र करने, उन्हें साधारण और सांसारिक बना देने का यत्न सदा करता रहता है, प्रार्थना में उन्हें फिर से पवित्रता और परमेश्वर के लिये समर्पित करना कितना ऊँचा सौभाग्य है।—महाधर्माध्यक्ष ट्रेंच।
मई 2
उस में जीवन था; और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति था। यूहन्ना 1:4. तुम जगत की ज्योति हो। मत्ती 5:14.
ज्योति में हम चल सकते और काम कर सकते हैं। हम ज्योति में चलते हैं और पूरी रीति से ज्योति की सन्तान बन जाते हैं। हम अपनी ज्योति को, अर्थात् परमेश्वर की ज्योति को, चमकने देते हैं, ताकि मनुष्य हमारे भले कामों को देखें, और स्वर्ग में हमारे पिता की महिमा करें। कोमलता से, चुपचाप, प्रेम से, बिना थके, हम अपने आप को उस ज्योति और प्रेम को आगे पहुँचाने में लगा देते हैं जिसे परमेश्वर निरन्तर हम में उँडेलता है। हमारा एकमात्र काम यही है कि प्रतीक्षा करें, और ग्रहण करें, और फिर मसीह में परमेश्वर की ज्योति को आगे पहुँचाएँ।—एंड्रयू मरे।
मई 3
स्थिर और अटल रहो, और प्रभु के काम में सदा बढ़ते जाओ। 1 कुरिन्थियों 15:58.
भलाई करने में लगे रहना आनन्दित मसीही होने का एक उपाय है; यह शरीर के लिये व्यायाम के समान है, और यह आत्मा को स्वस्थ रखता है।—धर्माध्यक्ष राइल।
मई 4
उसने स्वर्ग की ओर देखकर आह भरी। मरकुस 7:34.
बहुधा हम आह भरते और अपने भीतर देखते हैं; यीशु ने आह भरी और बाहर की ओर देखा। हम आह भरते और नीचे देखते हैं; यीशु ने आह भरी और ऊपर देखा। हम आह भरते और पृथ्वी की ओर देखते हैं; यीशु ने आह भरी और स्वर्ग की ओर देखा। हम आह भरते और मनुष्य की ओर देखते हैं; यीशु ने आह भरी और परमेश्वर की ओर देखा।—स्टॉर्क।
मई 5
हम क्लेशों में भी घमण्ड करते हैं। रोमियों 5:3.
क्या तू ने कभी यह सोचा है कि किसी दिन तुझे परखने के लिये कुछ भी न रहेगा और न तुझे खिझाने के लिये कोई?—ए. बी. सिम्पसन।
मई 6
ऊपर की ही बातों की चिन्ता रखो, न कि पृथ्वी पर की बातों की। कुलुस्सियों 3:2.
जिसका मन ऊपर की बातों पर लगा है, वह उसके समान है जो आकाश को थामे लटका हुआ है; और इनको दृढ़ता से पकड़े हुए, चाहे वह जगत को अपने पाँवों के नीचे से लुढ़कता हुआ भी देखे, तौभी कह सकता है, “मेरा मन स्थिर है; मेरा मन स्थिर है; हे प्रभु, मैं गाऊँगा, वरन् भजन गाऊँगा!”—गुथ्री।
मई 7
प्रभु सचमुच जी उठा है, और शमौन को दिखाई दिया है। लूका 24:34. उन्होंने . . . उसका वचन आनन्द से ग्रहण किया; और उसी दिन कोई तीन हजार मनुष्य उन में मिल गए। प्रेरितों के काम 2:41.
इससे पहले कि प्रभु हमें अपनी सेवा में काम में ले, हमारा उसके साथ निकट और व्यक्तिगत व्यवहार होना चाहिए। जिस प्राणी को वह दूसरों को आशीष देने में काम में लेना चाहता है, उसके साथ वह सदा गुप्त में व्यवहार करेगा।
क्या तू अपने आस-पास के लोगों से यीशु के लिये बोलना चाहता है? तो तुझे अपने सन्देश के लिये स्वयं यीशु के पास जाना होगा। जो तू यीशु के लिये कहता है, वह यीशु से ही पाया जाना चाहिए।
आह, कितनी ही साँसें चारों ओर निर्बल होकर गिर जाती हैं, क्योंकि वे पवित्रस्थान में नहीं ली गईं! हमें जीवित परमेश्वर के साथ अधिक गुप्त व्यवहार की आवश्यकता है। हम बिना भेजे ही दौड़ पड़ते हैं; परमेश्वर के हम से बोलने से पहले ही हम बोल देते हैं; तब आश्चर्य क्या कि हम बारम्बार असफल होते हैं। आह, इससे पहले कि परमेश्वर मन को काम में ले, उसे कितनी गुप्त प्रार्थना और कैसे हृदय को टटोलनेवाले अनुशासन की आवश्यकता है!—एफ. व्हिटफील्ड।
मई 8
धर्मी अपने मन की तृप्ति तक खाता है। नीतिवचन 13:25.
मसीह को अवश्य तृप्त करना है; तो फिर, यदि हम तृप्त नहीं हैं, तो इसका कारण यही होगा कि हम पूर्ण रूप से और केवल उसी पर निर्भर होकर भोजन नहीं कर रहे। दोष उस प्रबन्ध में नहीं है जो किया गया है।—फ्रांसेस रिडली हैवरगल।
मई 9
प्रभु जिस से प्रेम करता है, उसकी ताड़ना भी करता है। इब्रानियों 12:6.
किसी ने भला ही कहा है कि “सांसारिक चिन्ताएँ स्वर्गीय अनुशासन हैं,” परन्तु वे अनुशासन से भी कुछ उत्तम हैं; वे परमेश्वर के रथ हैं, जो प्राणी को उसकी विजय के ऊँचे स्थानों तक ले जाने के लिये भेजे गए हैं। श्रेष्ठगीत में हमें “प्रेम से जड़े हुए रथ” के विषय में बताया गया है। हम सदा अपने ही विशेष रथ में प्रेम की परत को नहीं देख पाते—वह बहुधा बहुत ही अरुचिकर दिखाई देता है; परन्तु परमेश्वर का भेजा हर एक रथ अवश्य ही प्रेम से जड़ा होगा, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। सचमुच उसी का प्रेम है जो रथ को भेजता है।
तो फिर अपनी ताड़नाओं को, चाहे वे इस समय कितनी ही दुखदायी क्यों न हों, परमेश्वर के रथों के रूप में देख, जो तेरे प्राणों को आत्मिक उपलब्धि और उठान के “ऊँचे स्थानों” में ले जाने के लिये भेजे गए हैं, और तू पाएगा कि वे, अन्ततः, “प्रेम से जड़े हुए” हैं।—स्मिथ।
मई 10
उसके पुत्र यीशु मसीह का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 1 यूहन्ना 1:7.
उस खनिक की आँख से एक पाठ सीख, जो दिन भर उड़ते हुए कोयले की धूल के बीच काम करता रहता है। जब वह दिन के उजाले में बाहर निकलता है तो उसका मुँह भले ही खूब मैला हो; परन्तु उसकी आँखें स्वच्छ और चमकीली रहती हैं, क्योंकि अश्रुग्रन्थि में आँसुओं का सोता निरन्तर आँख पर अपनी कोमल धाराएँ बहाता रहता है, और धूल का हर एक कण गिरते ही उसे धो बहा देता है।
क्या यह वही शुद्ध करने का आश्चर्यकर्म नहीं जिसकी हमारी आत्माओं को ऐसे जगत में आवश्यकता है? और यही है जो हमारा धन्य प्रभु अपने शुद्ध करनेवाले लहू के द्वारा हमारे लिये करने को तैयार है, यदि हम केवल उस पर भरोसा रखें।—एफ. बी. मायर।
मई 11
जो कुछ वह तुम से कहे, वही करना। यूहन्ना 2:5.
फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने कहा: “यदि मैं तुम्हें अपने जीवन का हाल बता सकूँ, तो वह यह दिखाने के लिये होगा कि परमेश्वर ने एक अति साधारण योग्यता की स्त्री को कैसे अनोखे और अनजाने मार्गों से चलाकर अपनी सेवा में वह करवाया जो उसने उस में किया। और यदि मैं तुम्हें सब कुछ बता सकूँ, तो तुम देखोगे कि परमेश्वर ने सब कुछ किया, और मैं ने कुछ नहीं। मैं ने कठिन परिश्रम किया, बहुत कठिन, बस इतना ही; और मैं ने परमेश्वर को कभी किसी बात के लिये मना नहीं किया।”
मई 12
मैं बढ़ना भी जानता हूँ। फिलिप्पियों 4:12.
समृद्ध होना एक जोखिम की बात है। मसीही के लिये विपत्ति की कुठाली समृद्धि के पिघलाने के भाड़े से कम कठोर परीक्षा है। नश्वर आनन्द के भरे हुए कटोरे को स्थिर हाथ से थामने के लिये मानवीय कुशलता से बढ़कर कुछ चाहिए; तौभी पौलुस ने वह कुशलता सीख ली थी, क्योंकि वह कहता है, “हर एक बात में और सब दशाओं में मैं ने तृप्त होना और भूखा रहना सीखा है।” जब हमारे पास परमेश्वर की प्रावधानिक दयाओं की बहुतायत होती है, तो बहुधा ऐसा होता है कि हमारे पास परमेश्वर के अनुग्रह का बहुत थोड़ा भाग रहता है; पृथ्वी से सन्तुष्ट होकर, हम स्वर्ग के बिना ही रहकर प्रसन्न रहते हैं। निश्चय जान, भूखा रहना जानने की अपेक्षा तृप्त रहना जानना अधिक कठिन है, क्योंकि मानव स्वभाव की प्रवृत्ति घमण्ड और परमेश्वर को भूल जाने की ओर इतनी प्रबल है। इसका ध्यान रख कि तू अपनी प्रार्थनाओं में यह माँगे कि परमेश्वर तुझे “तृप्त रहना” सिखाए।—स्पर्जन।
मई 13
जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा। लूका 14:11.
. . . यदि तू मुकुट का मार्ग पूछे—तो वह क्रूस से होकर है; पर्वत का—तो वह तराई से होकर है; और उन्नति का—तो वह वही पाता है जो अपने आप को दीन करता है।—जे. एच. इवान्स।
मई 14
और उनके लिये मैं अपने आप को पवित्र करता हूँ, कि वे भी सत्य के द्वारा पवित्र किए जाएँ। यूहन्ना 17:19.
क्या तुझे स्मरण है, जब यीशु अन्तिम भोज में अपने चेलों के साथ बैठा था, कैसे उसने ऊँचे स्वर से प्रार्थना की, और उसकी प्रार्थना के बीच ये अद्भुत वचन निकले: “उनके लिये मैं अपने आप को पवित्र करता हूँ, कि वे भी पवित्र किए जाएँ”? क्या उन सब शिक्षाओं में, जो मनुष्य ने परमेश्वर के मुख से पाई हैं, इससे बढ़कर श्रेष्ठ और इससे दूरगामी कोई बात है—कि मैं अपना सर्वोत्तम केवल अपने ही लिये नहीं, परन्तु जगत के लिये बनूँ? तू अपने संगी मनुष्यों की सहायता कर सकता है—तुझे अपने संगी मनुष्यों की सहायता करनी ही चाहिए; परन्तु उनकी सहायता करने का एकमात्र उपाय यही है कि तू वैसा सबसे श्रेष्ठ और उत्तम मनुष्य बने जैसा तेरे लिये बनना सम्भव है।—फिलिप्स ब्रुक्स।
मई 15
विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना नगर के जीतनेवाले से उत्तम है। नीतिवचन 16:32.
परमेश्वर और उसके स्वर्गदूतों की दृष्टि में हर दूसरी विजय से अधिक प्रिय है अपने आप पर विजय, जिसे हर एक मनुष्य स्वर्ग की सहायता से अपने लिये प्राप्त कर सकता है।—डीन स्टैनली।
मई 16
मैं ने इसी बालक के लिये प्रार्थना की थी; और यहोवा ने मुझे मुँह माँगा वर दिया है। इसलिये मैं ने इसे यहोवा को अर्पण कर दिया है; यह जीवन भर यहोवा ही का बना रहे। 1 शमूएल 1:27, 28.
परमेश्वर कभी-कभी वरदान इसलिये देता है कि प्रेम के पास त्यागने को कुछ हो। जो वस्तुएँ वह हमारे हाथों में देता है, वे सम्भवतः इसलिये वहाँ रखी जाती हैं कि हमें यह दिखाने का अवसर मिले कि हमारे हृदय में क्या है। आह, कि हम में प्रेम की ऐसी लगन होती जो हमें अपनी हर एक वस्तु को जाँचने की ओर ले चलती, कि यह देखें कि वह मसीह के प्रति हमारे स्नेह को प्रकट करने का साधन कैसे बनाई जा सकती है!—जॉर्ज बोवेन।
मई 17
पहले तुम उसके राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज करो, तब ये सब वस्तुएँ भी तुम्हें मिल जाएँगी। मत्ती 6:33.
हमें केवल एक ही चिन्ता रखनी चाहिए, कि हम पहली बात को पहले रखें—परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्यता को। तब दोनों लोकों के लिये हमें जो कुछ चाहिए, वह सब जुटाया जाएगा। परमेश्वर हमें कभी निराश न करेगा; परन्तु ऐसे आश्वासन पर आनन्दित होते समय हम कभी-कभी यह भूल जाते हैं कि यदि हम उस ईश्वरीय प्रतिज्ञा का दावा करना चाहते हैं, तो हमें अपना भाग पूरा करना ही होगा।
यह सदा सहज न होगा। कल इसका अर्थ हो सकता है कोई अरुचिकर काम, कोई अप्रिय कर्तव्य, किसी ऐसे के लिये महँगा बलिदान जो योग्य नहीं जान पड़ता। जीवन उस भले चरवाहे के पीछे चलने की हमारी तत्परता की कठोर परीक्षाओं से भरा है। जब तक हम ने मसीह को अपने जीवन का अगुवा नहीं बनाया, तब तक हमें इस आश्वासन का दावा करने का तनिक भी अधिकार नहीं।—जे. आर. मिलर।
मई 18
उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुँह में रहेगी। भजन संहिता 34:1.
तेरी स्तुति क्षणभंगुर न हो—संगीत का एक झोंका, और फिर वाद्य को दीवार पर टाँग दिया गया, जब तक कि किसी अद्भुत विधान का कोई और चमकीला दिन तुझसे उसे उतरवा न ले। परमेश्वर अपने सन्तों के घर में अतिथि के समान नहीं आता, परन्तु उनके साथ वास करने आता है। दाऊद ने इसे जीवन भर के काम के रूप में अपनाया: “जीवन भर मैं तेरी स्तुति करता रहूँगा।”—गर्नल।
मई 19
मैं अकेला इन सब लोगों का भार नहीं उठा सकता, क्योंकि यह मेरे लिये बहुत भारी है। गिनती 11:14.
मसीह के सब सेवकों के लिये यह स्मरण रखना अति आवश्यक है कि जब कभी प्रभु किसी मनुष्य को उत्तरदायित्व के पद पर बैठाता है, तो वह उसे उसके योग्य भी बनाएगा और उस में उसे बनाए भी रखेगा।
निस्सन्देह यह बिलकुल दूसरी बात है यदि कोई मनुष्य बिना भेजे ही किसी सेवा के क्षेत्र में, या कठिनाई अथवा संकट के किसी पद पर दौड़ पड़े। ऐसी दशा में हम निश्चय ही देर-सबेर पूरी तरह ढह जाने की आशा कर सकते हैं। परन्तु जब परमेश्वर किसी मनुष्य को किसी निश्चित पद के लिये बुलाता है, तो वह उसे उस पर बने रहने के लिये आवश्यक अनुग्रह से सम्पन्न करेगा।
यह हर एक दशा में सत्य ठहरता है। यदि हम केवल जीवित परमेश्वर से लिपटे रहें, तो हम कभी असफल नहीं हो सकते। यदि हम सोते से भरते रहें, तो हम कभी सूख नहीं सकते। हमारे छोटे-छोटे झरने शीघ्र ही सूख जाएँगे; परन्तु हमारा प्रभु यीशु मसीह कहता है, “जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्रशास्त्र में आया है, उसके भीतर से जीवन के जल की नदियाँ बह निकलेंगी।”—सी. एच. एम.।
मई 20
तब मैं ने कहा, हाय! हाय! मैं नाश हुआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठवाला मनुष्य हूँ, और अशुद्ध होंठवाले लोगों के बीच में रहता हूँ; क्योंकि मेरी आँखों ने राजा, सेनाओं के यहोवा को देख लिया है। यशायाह 6:5.
हमें हमारा पापी हृदय देखने से नम्रता नहीं आती; यीशु मसीह के दर्शन से आती है। मैं इसलिये नाश हुआ क्योंकि मेरी आँखों ने राजा को देख लिया है।—एंड्रयू ए. बोनार।
मई 21
मेरे सोच-विचार करते-करते आग भड़क उठी। भजन संहिता 39:3.
हे मेरे प्राण, यदि तू अधिक सोच-विचार करता, तो आग अधिक भड़कती। तू अपने साथ एकान्त में अधिक बार क्यों नहीं जाता? यदि तू कम सांसारिक होता, तो तू जगत के लिये अधिक योग्य होता। यदि तेरे पास अधिक स्वर्गीय आग होती, तो तेरे पास अधिक सांसारिक सामर्थ्य होती।
क्या कोई ऐसा गुप्त मण्डप नहीं जिस में तू जाकर अपने आप को गर्म कर सके? क्या कोई ऐसा परमपवित्रस्थान नहीं जहाँ तू ऐसी प्रेरणा की आभा पा सके जो तुझे बलवन्त कर दे? क्या मनुष्य के पुत्र के विषय में यह नहीं लिखा है कि “जब वह प्रार्थना कर रहा था, तो उसके मुँह का रूप बदल गया”? हाँ; उसकी प्रार्थना ही से उसकी रूपान्तरित महिमा आई। उसके हृदय की आभा ही से उसके मुख की आभा फूट निकली। जब वह सोच-विचार कर रहा था, तभी आग सुलग उठी।
हे मेरे प्राण, क्या तू चाहता है कि तेरा जीवन मनुष्यों की दृष्टि में महिमामय, सुशोभित, और रूपान्तरित हो? परमेश्वर के मण्डप के गुप्त स्थान में ऊपर चढ़ जा, जहाँ प्रेम की आग जल रही है। तेरा जीवन मैदान के निवासियों के सामने महिमा से चमकेगा। तेरी प्रार्थनाएँ ज्योतिर्मय होंगी; वे तेरे मुख को मूसा के मुख के समान उजियाला देंगी, जब उसे पता भी न था कि वह चमक रहा है। तेरे वचन धधकते होंगे; वे इम्माऊस के मार्ग पर यात्रा करते हुए बहुत से हृदयों को सुलगा देंगे। तेरा मार्ग दीप्तिमान होगा; जब तू एलिय्याह के एकान्त में प्रार्थना कर चुकेगा, तब तुझे एलिय्याह का अग्निमय रथ मिलेगा।—जॉर्ज मैथेसन।
मई 22
जो कोई इन छोटों में से किसी एक को चेला जानकर केवल एक कटोरा ठंडा पानी पिलाए, मैं तुम से सच कहता हूँ, वह अपना प्रतिफल कभी नहीं खोएगा। मत्ती 10:42.
हम भलाई करने और बाँटने के अवसरों को बहुत दूर ढूँढ़ने के जोखिम में पड़ते हैं। बुरुँश के फूलों तक पहुँचने की चेष्टा में हम पाँवों तले की गुलबहार को रौंद डालते हैं।—चयनित।
मई 23
नाले के पास अपने आप को छिपा। 1 राजा 17:3.
नदी के पास नहीं, परन्तु नाले के पास। नदी में तो सदा प्रचुर जल भरा रहता, परन्तु नाला किसी भी क्षण सूख सकता था।
यह हमें क्या सिखाता है? परमेश्वर अपने लोगों को यहाँ विलासिता में नहीं रखता। जगत की बहुतायत कहीं उनके मन को उससे न हटा ले। वह उन्हें नदी नहीं, परन्तु नाला देता है। नाला आज बह रहा हो, कल वह सूख सकता है।
और परमेश्वर ऐसा क्यों करता है? हमें यह सिखाने के लिये कि हमें उसके वरदानों और आशीषों में नहीं, परन्तु स्वयं उसी में विश्राम करना है। यही तो हमारे हृदय सदा करते रहते हैं—देनेवाले के बदले वरदान में विश्राम करना। इसलिये परमेश्वर हमें नदी के पास नहीं सौंप सकता, क्योंकि वह अनजाने ही हृदय में उसका स्थान ले लेती है। इस्राएल के विषय में कहा गया है कि जब वे तृप्त हुए, तब वे परमेश्वर को भूल गए।—एफ. व्हिटफील्ड।
मई 24
उसका राज्य सब के ऊपर है। भजन संहिता 103:19.
उसका राज्य सब के ऊपर है—इसलिये तू ऐसी कोई बात नहीं पा सकता जो स्तुति का विषय न हो, क्योंकि ऐसी कोई बात नहीं जो तेरे प्रभु की कृपामय अनुमति, या योजना, या नियन्त्रण का विषय न हो। सब के ऊपर—कहीं भी तू उसके राज्य से बाहर पाँव नहीं रख सकता, और न किसी बात में उसकी देखभाल और शासन से आगे निकल सकता है। सब के ऊपर—इसलिये सब कुछ परमेश्वर की ओर से मानकर ग्रहण कर; सब कुछ परमेश्वर का जानकर थामे रह; और अपने धन्यवाद के द्वारा सब कुछ फिर परमेश्वर को लौटा दे, और इस प्रकार वृत्त को पूरा कर, उसी को सब वस्तुओं का आदि और अन्त, अर्थात् अल्फा और ओमेगा बना दे।—मार्क गाय पीयर्स।
मई 25
यदि हम धीरज से सहते रहेंगे, तो उसके साथ राज्य भी करेंगे। 2 तीमुथियुस 2:12.
महिमा के मुकुट के लिये सबसे बड़ी बोली लगानेवाला वही है जो आत्म-त्याग के क्रूस को सबसे दीनता से धारण करता है।—ए. जे. गॉर्डन।
मई 26
सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर, क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है। नीतिवचन 4:23.
जो अपने हृदय को शुद्ध और पवित्र रखना चाहता है, उसे हर उस मार्ग पर एक पहरुआ बैठाना चाहिए जिससे पाप वहाँ प्रवेश पा सके, और किसी से इतना नहीं जितना उन “छोटे” पापों से, जैसा उन्हें कहा जाता है।
परमेश्वर के जन को अपनी आँखों की रखवाली करनी है, और इसीलिये अय्यूब ने कहा, “मैं ने अपनी आँखों के विषय वाचा बाँधी है”—अपनी जीभ की, और इसलिये यह उपदेश है, “अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होठों को छल की बातें बोलने से रोक”—अपने कानों की, और इसलिये यह चेतावनी है, “हे मेरे पुत्र, जिस उपदेश से भटकना होता है उसका सुनना छोड़ दे”—अपने पाँवों की, और इसीलिये दाऊद कहता है, “मैं ने अपने पाँवों को हर एक बुरे मार्ग से रोक रखा है, ताकि मैं तेरे वचन को मानूँ।” और चूँकि पाँचों इन्द्रियों का ऐसा कोई द्वार नहीं जिससे शत्रु बाढ़ के समान भीतर न आ सके, जब तक कि आत्मा उसके विरुद्ध झण्डा न खड़ा करे, इसलिये हमें हर एक द्वार की रखवाली करने, और हर एक फाटक पर यह लिख देने की आवश्यकता है, “यहाँ कोई हानि या अशुद्धता पहुँचानेवाली वस्तु प्रवेश नहीं करती।”—गुथ्री।
मई 27
जो कुछ तुम करो, . . . सब प्रभु यीशु के नाम से करो। कुलुस्सियों 3:17.
छोटे-छोटे काम ऐसे कर मानो वे बड़े हों, प्रभु यीशु मसीह के उस प्रताप के कारण जो तुझ में वास करता है; और बड़े-बड़े काम ऐसे कर मानो वे छोटे और सहज हों, उसकी सर्वशक्तिमत्ता के कारण।—पास्कल।
मई 28
उन्होंने उसी को उसका क्रूस उठाने के लिये विवश किया। मत्ती 27:32.
बहुत से मसीही ऐसे हैं जिनके विषय में यह सत्य है। वे क्रूस उठाने को विवश किए जाते हैं, परन्तु यह कैसे आता है? यह उनके उससे भाग जाने के कारण आता है। वे मन में ठान लेते हैं कि वे मसीह का क्रूस न उठाएँगे; और जब क्रूस सचमुच आता है, तब वे पाते हैं कि वह और भी भयानक रूप में, और भी कुचल डालनेवाले भार के साथ आता है, जितना वह कभी न आता यदि वे केवल अपने आप को ईश्वरीय अगुवाई के अधीन करने में सन्तुष्ट रहते; क्योंकि क्रूस उन सब के पास अवश्य आता है जिन्हें आगे आनेवाली महिमा के लिये तैयार होना है।—डब्ल्यू. हे एटकेन।
मई 29
हमारे प्रभु यीशु मसीह ने . . . हमारे पापों के लिये अपने आप को दे दिया, कि हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ाए। गलातियों 1:4.
मसीह के प्रति लगाव ही जगत से विरक्ति का एकमात्र रहस्य है।—ए. जे. गॉर्डन।
मई 30
तुम जगत की ज्योति हो। जो नगर पहाड़ पर बसा है वह छिप नहीं सकता। मत्ती 5:14.
दीपक बोलते नहीं, परन्तु चमकते अवश्य हैं। प्रकाश-स्तम्भ न कोई ढोल बजाता है, न घड़ियाल पीटता है; तौभी जल के परे दूर तक उसकी मित्रवत् चिनगारी मल्लाह को दिखाई देती है। इसी प्रकार तेरे कर्म तेरे धर्म को प्रकट करते हुए चमकें। तेरे जीवन का मुख्य उपदेश तेरे सारे चालचलन से स्पष्ट होता रहे।—स्पर्जन।
मई 31
मुझ से अलग रहकर तुम कुछ नहीं कर सकते। यूहन्ना 15:5. जो मुझे सामर्थ्य देता है उसके द्वारा मैं सब कुछ कर सकता हूँ। फिलिप्पियों 4:13.
उससे अलग होकर हम कुछ नहीं कर सकते। जब तक हम उस में बने रहते हैं, तब तक कुछ भी असम्भव नहीं। इसलिये हमारे जीवन का एकमात्र उद्देश्य यही होना चाहिए कि हम मसीह के साथ जीवित और गहरी एकता में बने रहें, हर उस बात से बचते रहें जो उसे तोड़ दे, और उसे दृढ़ करने और बढ़ाने के हर एक साधन को काम में लाएँ। और जिस मात्रा में हम ऐसा करते हैं, उसी मात्रा में हम पाएँगे कि उसकी सामर्थ्य हर सम्भव संकट के लिये हम में बहती चली आती है। सम्भव है हम उसकी उपस्थिति का अनुभव न करें; परन्तु जब कभी हम उस पर आश्रित होने लगेंगे, तब हम उसे उपस्थित पाएँगे। कोई परीक्षा ऐसी नहीं जिस पर हम प्रभुता न पा सकें; कोई अभाव ऐसा नहीं जिसे हम धीरज से न सह सकें; कोई कठिनाई ऐसी नहीं जिसका हम सामना न कर सकें; कोई काम ऐसा नहीं जिसे हम पूरा न कर सकें; कोई अंगीकार या साक्षी ऐसी नहीं जो हम न दे सकें, यदि केवल हमारे प्राण यीशु मसीह के साथ स्वस्थ एकता में जीवित रहें; क्योंकि जैसा हमारा दिन या घड़ी होगा, वैसा ही हमारा बल होगा।—एफ. बी. मायर।
अध्याय 5 पूरा हुआ
मई