शान्त घड़ी के विचार
अप्रैल

अध्याय 4 · 16 मिनट का पठन

अप्रैल

अप्रैल 1

भोर को यहोवा का वचन मेरे पास पहुँचा। यहेजकेल 12:8।

दिन के आरम्भ में परमेश्वर के साथ अकेले बिताई हुई एक शान्त घड़ी कर्मशील कामकाज के परिश्रमों और चिन्ताओं के लिये सबसे उत्तम आरम्भ है। प्रार्थना का एक छोटा-सा समय, जिसमें हम बुद्धि, अनुग्रह और सामर्थ्य के लिये ऊपर की ओर ताकते हैं, और पवित्र आत्मा के उंडेले जाने की खोज करते हैं, हमें अपने धर्म को दिन के कामकाज में साथ ले चलने में सहायता देता है। यह हृदय के भीतर आनन्द और शान्ति ले आता है। और जब हम अपनी सारी चिन्ताओं को प्रभु की देखरेख और रखवाली में सौंप देते हैं, और विश्वासयोग्यता से उसकी इच्छा पूरी करने का यत्न करते हैं, तब हमें यह आनन्दमय भरोसा रहता है कि घटनाएँ चाहे कितनी ही अन्धकारमय या निराश करनेवाली क्यों न दिखें, हमारे पिता का हाथ हर बात का संचालन कर रहा है, और वह हमारे सब परिश्रमों को सबसे बुद्धिमान दिशा देगा।—चयनित।

अप्रैल 2

यहोवा परमेश्वर ने भूमि की मिट्टी से मनुष्य को रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूँक दिया; और मनुष्य जीवित प्राणी बन गया। उत्पत्ति 2:7।

और इस प्रकार मेरा यह प्राण दो जगतों का मेल है—मिट्टी और ईश्वरत्व! यह दो गोलार्धों की सीमा-रेखा को छूता है। एक ओर यह ईश्वरीय से जुड़ा है; दूसरी ओर, मैदान के पशु से। इसका आरम्भ नीचे से है, परन्तु इसकी पराकाष्ठा ऊपर से है; यह भूमि की मिट्टी से आरम्भ होता है, परन्तु यह परमेश्वर के श्वास में पूरा होता है।

हे मेरे प्राण, क्या तू अपने दुगुने उद्गम के योग्य जीवन जी रहा है? क्या तू अपने दुहरे जनकत्व को, और इसलिये अपने दुहरे कर्तव्य को स्मरण रखता है? परमेश्वर के प्रति तेरा एक कर्तव्य है, क्योंकि उसका श्वास तुझ में है; पृथ्वी के प्रति भी तेरा एक कर्तव्य है, क्योंकि तू उसी में से लिया गया है।—जॉर्ज मैथेसन।

अप्रैल 3

सदा आनन्दित रहते हैं। 2 कुरिन्थियों 6:10।

उन दो छोटे-से शब्दों—“सदा आनन्दित रहना”—का अर्थ किसी भी मसीही को कभी ज्ञात नहीं हो सकता, केवल उस मसीही को छोड़, जो अपना क्रूस उठाकर यीशु के पीछे हो लेता है।—डब्ल्यू. हे एटकेन।

अप्रैल 4

यह सारा देश जो तू देख रहा है, मैं तुझे और तेरे वंश को युगानुयुग के लिये दे दूँगा। उत्पत्ति 13:15।

परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ सदा चढ़ती हुई श्रेणी पर हैं। एक दूसरी की ओर ले जाती है, जो उससे भी अधिक भरपूर और अधिक धन्य है। मेसोपोटामिया में परमेश्वर ने कहा, “मैं तुझे वह देश दिखाऊँगा।” बेतेल में, “यही वह देश है।” यहाँ, “मैं तुझे सारा देश दूँगा, और बालू के कणों के समान अनगिनत सन्तान दूँगा।” और हम इन्हें भी फीका पड़ते हुए पाएँगे।

इसी रीति से परमेश्वर हमें पवित्रता की ओर लुभाता है। जब तक हम कार्य करने का साहस न करें तब तक कुछ न देना—ताकि वह हमें परखे। आरम्भ में ही सब कुछ न देना—ताकि वह हमें अभिभूत न कर दे। और सदा अपने हाथ में आशीष का असीम भण्डार रखे रहना। ओह, परमेश्वर के वे अनखोजे अवशेष! उसके अन्तिम तारे को किसने कभी देखा है?—एफ. बी. मायर।

अप्रैल 5

उस रात उन्होंने कुछ न पकड़ा। यूहन्ना 21:3।

परमेश्वर भले ही पापी संसार को उनकी निषिद्ध योजनाओं में सफल होने दे, परन्तु धन्य है उसका नाम, वह अपने चुने हुओं को उस मार्ग में फलने-फूलने नहीं देता जो उन्हें उसकी पवित्र इच्छा से बाहर ले जाता है! हर एक योना के पीछे भेजने के लिये उसके पास एक आँधी है, और हर एक अविश्वासी और डाँवाडोल शमौन के लिये एक खाली जाल।—ए. बी. सिम्पसन।

अप्रैल 6

उन्होंने मुझे दाख की बारियों की रखवाली करनेवाली ठहराया; परन्तु अपनी निज दाख की बारी की रखवाली मैंने नहीं की। श्रेष्ठगीत 1:6।

यहाँ हमारा ध्यान एक ऐसे संकट की ओर खींचा जाता है जो विशेष रूप से इसी युग का है: हमारे समय की तीव्र व्यस्तता सेवा में उत्साह की ओर ले जा सकती है, पर व्यक्तिगत संगति की उपेक्षा करते हुए; परन्तु ऐसी उपेक्षा न केवल सेवा का मूल्य घटाएगी, वरन् हमें सर्वोच्च सेवा के अयोग्य कर देने की ओर प्रवृत्त होगी।—जे. हडसन टेलर।

अप्रैल 7

हम उस देश में गए जहाँ तूने हमें भेजा था . . . और वहाँ हमने अनाक की सन्तान को देखा। गिनती 13:27, 28।

जब हम कर्तव्य के मार्ग पर होते हैं, तभी हम दानवों से मिलते हैं। जब इस्राएल आगे बढ़ रहा था, तभी वे दानव प्रकट हुए। जब वे लौटकर फिर जंगल में गए, तब उन्हें एक भी न मिला।—चयनित।

अप्रैल 8

उनमें से हर एक राजकुमार के समान दिखता था। न्यायियों 8:18।

फ्रांसेस रिडली हैवरगल कहती हैं: “यदि राजा वास्तव में हमारा निकट सम्बन्धी है, तो वह राजकीय समानता पहचानी जा सकेगी।”

अप्रैल 9

वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे शान्त जल के सोतों के पास ले चलता है। भजन संहिता 23:2।

यह उस विश्राम की ओर संकेत करता है जिसमें हमारा अच्छा चरवाहा अपने झुण्ड को ले चलता है। जीवन केवल परिश्रम ही नहीं है। परमेश्वर हमारी तीर्थयात्रा के मार्ग में हमें बहुत-से शान्त विश्राम-स्थल देता है।

रात इन्हीं में से एक है, जब दिन के परिश्रम, संघर्ष और थकान के बाद हमें एक ओर ले जाया जाता है, और शोर को रोकने के लिये परदे खींच दिए जाते हैं, और वह अपने प्रियों को नींद देता है, और नींद में नवीनीकरण की अद्भुत आशीषें देता है। विश्रामदिन इन शान्त विश्राम-स्थलों में से एक और है। परमेश्वर चाहता है कि हम अपने सांसारिक कामों को छोड़ दें, और देह तथा प्राण दोनों की ताज़गी के लिये एक दिन रखें। . . . मित्रता की भेंट-घड़ियाँ भी शान्त विश्राम-स्थल हैं, जहाँ हृदय हृदय से बातें कर सकता है, जहाँ यीशु भी, अनदेखे, आते हैं और अपनी आशीष देते हैं। मसीही उपासना की सारी विधियाँ—प्रार्थना और भक्ति के समय, परमेश्वर के साथ संगति की घड़ियाँ—शान्त विश्राम-स्थल हैं।

जितना हम समझ पाते हैं उससे कहीं अधिक हमें अपने व्यस्त जीवन में इन मौन घड़ियों की आवश्यकता है, और जीवन जितना अधिक व्यस्त हो, उतनी ही अधिक इनकी आवश्यकता होती है।—जे. आर. मिलर।

अप्रैल 10

हर दिन के लिये प्रतिदिन का नियत भाग। 2 राजा 25:30।

एक लाठी यात्री की सहायता करती है, परन्तु लाठियों का गट्ठर एक भारी बोझ है।—स्पर्जन।

अप्रैल 11

एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरा करो। गलातियों 6:2।

सत्य के किसी प्रश्न के विषय में तुम किसी भी घड़ी चाहे कितने ही उलझन में क्यों न पड़ जाओ, एक शरण और सहारा सदा हाथ के पास रहता है: तुम अपने अतिरिक्त किसी और के लिये कुछ कर सकते हो। जिन समयों में तुम परमेश्वर को देख नहीं पाते, तब भी तुम्हारे लिये यह पवित्र सम्भावना खुली रहती है, कि परमेश्वर को दिखाओ: क्योंकि मनुष्यों के हृदयों का प्रेम और दया ही वह माध्यम है जिसके द्वारा वह ईश्वरीय वास्तविकता मनुष्यों तक पहुँचती है, चाहे वे उसका नाम लें या न लें। तो यह विचार तुम्हारे साथ बना रहे: ऐसे समय हो सकते हैं जब तुम सहायता पा न सको, परन्तु ऐसा कोई समय नहीं जब तुम सहायता दे न सको।—जॉर्ज मेरियम।

अप्रैल 12

डरते और काँपते हुए अपने अपने उद्धार का कार्य पूरा करते जाओ; क्योंकि परमेश्वर ही है, जो अपनी सुइच्छा के निमित्त तुम में इच्छा और काम, दोनों को उत्पन्न करता है। फिलिप्पियों 2:12, 13।

यह न तेरा काम है न मेरा, कि हम इस पर विचार करें कि हम स्वर्ग पहुँचेंगे या नहीं, और यहाँ तक कि इस पर भी नहीं कि हम भले मनुष्य बनेंगे या नहीं; हमारा काम तो इस पर विचार करना है कि हम किस रीति से परमेश्वर के उद्देश्यों के बीच में आएँ और इन थोड़े-से वर्षों में यह अकथनीय सौभाग्य पाएँ कि उसके काम में से कुछ करें।—फिलिप्स ब्रुक्स।

अप्रैल 13

परमेश्वर ने . . . हमारे हृदयों में ज्योति चमकाई, ताकि यीशु मसीह के मुख में परमेश्वर की महिमा की पहचान की ज्योति दे। 2 कुरिन्थियों 4:6।

हे मसीही! तब तक विश्राम न कर जब तक तू अपने हृदय में परमेश्वर की उस पूर्ण, अखण्ड ज्योति को न जान ले। इस लक्ष्य के लिये, उसके हर उस उभार के अधीन हो जा जो तुझे किसी अजेय और सम्भवतः अजेय बुराई को दिखाता है। बस उसे ज्योति के सामने ले आ; ज्योति को उस पर चमकने दे, और उसे बाहर निकाल दे। भोर के प्रतीक्षकों से भी बढ़कर यहोवा की बाट जोह, क्योंकि “धर्मी का मार्ग तो भोर के प्रकाश के समान है, जो दोपहर तक अधिक अधिक चमकता रहता है।” इस पर भरोसा रख कि परमेश्वर तुझे अपनी महिमा की ज्योति से भर देना चाहता है: भोर के प्रतीक्षकों से भी बढ़कर उसकी बाट जोह। “हाँ, यहोवा ही की बाट जोहता रह।”—एंड्रयू मरे।

अप्रैल 14

हे मेरे मन, तू चुपचाप होकर केवल परमेश्वर की बाट जोह। भजन संहिता 62:5।

क्या तुम्हें कभी यह सूझा कि यदि तुम प्रार्थना का परमेश्वर का उत्तर नहीं सुनते, तो शायद इसलिये नहीं कि वह गूँगा है, वरन् इसलिये कि तुम बहरे हो; इसलिये नहीं कि उसके पास देने को कोई उत्तर नहीं, वरन् इसलिये कि तुमने उसके लिये कान नहीं लगाया? हम अपनी सेवा में इतने व्यस्त हैं, अपने काम में इतने व्यस्त हैं, और कभी-कभी अपनी प्रार्थना में ही इतने व्यस्त हैं, कि हमें यह सूझता ही नहीं कि हम अपना बोलना बन्द करें और सुनें कि क्या परमेश्वर के पास “दबे हुए धीमे शब्द” में हमें देने को कोई उत्तर है; कि हम निष्क्रिय हो जाएँ, शान्त हो जाएँ, कुछ न करें, कुछ न कहें, और किसी सच्चे अर्थ में कुछ न सोचें; केवल ग्रहणशील बने रहें और उस शब्द की प्रतीक्षा करें। भजनकार कहता है, “तू चुपचाप होकर केवल परमेश्वर की बाट जोह”; और फिर, “यहोवा की बाट जोह।”—चयनित।

अप्रैल 15

क्या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके? मत्ती 26:40।

हे तुम जो आहें भरते और मुरझाते हो, और अपनी सामर्थ्य की घटी पर विलाप करते हो,
सुनो इस कोमल फुसफुसाहट को, “क्या तुम एक घड़ी भी न जाग सके?”
फलवन्तता और आशीष तक कोई “राजमार्ग” नहीं है;
पवित्र सेवा की सामर्थ्य तो परमेश्वर के साथ संगति में है।
—चयनित।

अप्रैल 16

मेरा भोजन यही है कि अपने भेजनेवाले की इच्छा पूरी करूँ। यूहन्ना 4:34।

अपने जीवन का पोषण अपने जीवन के काम में ढूँढ़।—फिलिप्स ब्रुक्स।

अप्रैल 17

परमेश्वर ही है, जो अपनी सुइच्छा के निमित्त तुम में इच्छा और काम, दोनों को उत्पन्न करता है। फिलिप्पियों 2:13।

पूर्ण उद्धार यह अनुभव करना है कि जो कुछ हम अपने आदर्श मसीह में देखते हैं, वह सब हमारा हो सकता है—अनुकरण के द्वारा नहीं, वरन् पुनरुत्पादन के द्वारा।—चयनित।

अप्रैल 18

देखो, मैं सारे दिन तुम्हारे संग हूँ। मत्ती 28:20। (आर. वी., हाशिया।)

“सारे दिन”—जाड़े के दिनों में, जब आनन्द उड़ चुके होते हैं; धूपहीन दिनों में, जब वर्षा के बाद बादल बार-बार लौट आते हैं; रोग और पीड़ा के दिनों में; परीक्षा और उलझन के दिनों में—उतना ही जितना उन दिनों में जब हृदय आनन्द से वैसा ही भरा होता है जैसा वसन्त में वन गीतों से भरे होते हैं। वह दिन कभी नहीं आता जब प्रभु यीशु अपने पवित्र जनों के पास न हों। प्रीतम और मित्र भले ही दूर खड़े रहें, परन्तु वह उनके साथ आग में से होकर चलता है; वह उनके साथ नदियों को पार करता है; वह उनके संग खड़ा रहता है जब वे सिंह के आमने-सामने होते हैं। हम कभी अकेले नहीं हो सकते। जब भी हम अपना हिसाब लगाएँ, तब हमें सदा अपने साधनों में उसके साधन जोड़ लेने चाहिए।—एफ. बी. मायर।

अप्रैल 19

यीशु के लहू के द्वारा . . . उस परमपवित्र स्थान में प्रवेश करने का साहस रखते हुए . . . हम सच्चे मन से समीप जाएँ। इब्रानियों 10:19, 22।

ओह, इस सन्देश की महिमा! पन्द्रह शताब्दियों तक इस्राएल के पास एक पवित्रस्थान था जिसमें एक परमपवित्र स्थान था, जिसमें मृत्यु के दण्ड के भय से कोई प्रवेश नहीं कर सकता था। उसका एकमात्र साक्षी यही था: मनुष्य परमेश्वर की उपस्थिति में वास नहीं कर सकता; उसकी संगति में बना नहीं रह सकता। और अब सब कुछ कैसा बदल गया है! जैसे तब यह चेतावनी गूँजती थी: “प्रवेश निषेध! भीतर न आना!” वैसे ही अब यह पुकार निकलती है: “भीतर आ! परदा फट गया है; परमपवित्र स्थान खुला है; परमेश्वर तुझे अपनी गोद में स्वागत करने के लिये प्रतीक्षा कर रहा है; अब से तुझे उसी के साथ रहना है।” यही वह सन्देश है। हे बालक! तेरा पिता यह लालसा करता है कि तू भीतर आए, वास करे, और फिर कभी बाहर न जाए।—एंड्रयू मरे।

अप्रैल 20

आज रात परमेश्वर का एक दूत मेरे पास आ खड़ा हुआ . . . और कहा, हे पौलुस, मत डर। . . . परमेश्वर ने उन सब को जो तेरे साथ यात्रा कर रहे हैं, तुझे दे दिया है। इसलिये . . . हियाव बाँधे रहो; क्योंकि मैं परमेश्वर पर विश्वास करता हूँ, कि जैसा मुझ से कहा गया है वैसा ही होगा। प्रेरितों के काम 27:23, 24, 25।

एक सक्रिय विश्वास किसी प्रतिज्ञा के लिये धन्यवाद दे सकता है, चाहे वह अभी पूरी न हुई हो; क्योंकि वह जानता है कि परमेश्वर के वचन-पत्र नकद धन के समान ही खरे हैं।—मैथ्यू हेनरी।

अप्रैल 21

किसी भी बात की चिन्ता मत करो, वरन् हर एक बात में प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ अपनी विनती परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित करो। फिलिप्पियों 4:6।

हर कठिनाई के साथ स्वाभाविक परीक्षा यही होती है कि उसके लिये योजना बनाई जाए, उसे स्वयं ही मार्ग से हटा दिया जाए; परन्तु अपनी सारी योजना, अपने सारे सोच-विचार, अपनी सारी चिन्ता को वहीं रोक दे, और उससे बात कर! “अपना बोझ यहोवा पर डाल दे, वह तुझे सम्भालेगा।” हो सकता है तू इसे सदा पल-दो-पल में न कर पाए। तब तब तक बिनती करता रह जब तक तुझे यह न जान पड़े कि उसने उसे थाम लिया है, और प्रार्थना स्तुति बन जाए। विश्राम कर, भरोसा रख, और बाट जोह, और देख कि जो काम तू करना चाहता था और जिसकी तुझे इतनी चिन्ता थी, उसे वह कैसे करता है। “खड़े होकर चुपचाप रहो और यहोवा के उद्धार को देखो।”—ए. ई. फंक।

अप्रैल 22

जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे . . . उकाब के समान पंख लगाकर ऊपर चढ़ेंगे। यशायाह 40:31।

जितने प्राणियों के पंख हैं वे सब अपने लिये बिछाए हर फंदे से बच सकते हैं, यदि वे केवल इतना ऊँचा उड़ें; और जो प्राण अपने पंखों का उपयोग करता है, वह उन सब वस्तुओं से जो उसे हानि या दुःख पहुँचा सकती हैं, सदा एक निश्चित “निकास का मार्ग” पा सकता है।—स्मिथ।

अप्रैल 23

सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है। 1 यूहन्ना 4:18।

भय और प्रेम जीवन की प्रेरणाओं के रूप में एक दूसरे के विरोध में उठ खड़े होते हैं, उन दो पहाड़ों के समान जिन पर से क्रमशः पुरानी व्यवस्था की आशीषें और शाप सुनाए गए थे—शाप का पर्वत बिलकुल बंजर, पथरीला, हरियाली से रहित और जल से रहित; आशीष का पर्वत हरा-भरा और अनेक फूलों से उज्ज्वल, और अनेक कल-कल बहती धाराओं से आशीषित। भय बंजर है। प्रेम फलवन्त है। एक दास है, और उसका काम बहुत ही अल्प मूल्य का है। दूसरा स्वतन्त्र है, और उसके कर्म महान और बहुमूल्य हैं। उस पर्वत की झुलसी हुई चोटी पर से, जो दासत्व को जन्म देती है, व्यवस्था के वचन सुने जा सकते हैं; परन्तु इन सारी व्यवस्थाओं को मानने की सामर्थ्य तो उस धूप-भरी पहाड़ी पर ढूँढ़नी होगी जहाँ स्वतन्त्रता प्रेम में वास करती है और आज्ञाकारिता को बल देती है। इसलिये, यदि तू अपने जीवन में उस सर्वोच्च सामर्थ्य का उपयोग करना चाहता है जो परमेश्वर ने अनुग्रह में हमारी बढ़ती के लिये हमें दी है, तो अपने तर्क भय से नहीं, वरन् प्रेम से खींच।—अलेक्ज़ेंडर मैक्लारेन।

अप्रैल 24

मसीह का प्रेम हमें विवश किए रहता है। 2 कुरिन्थियों 5:14।

मसीह का प्रेम इतना विशाल है कि कोई हृदय उसे समा नहीं सकता। यह औरों के हृदयों में उमड़ पड़ेगा: यह अपने आप को उंडेल देगा, अपने आप को दे डालेगा, ताकि औरों के जीवन समृद्ध हों। मसीह का हृदय किसी के लिये भी एक बहुमूल्य वस्तु है जिसे धारण किया जाए। यह उन्हें, जिनके पास वह है, वहीं ले चलेगा जहाँ उसने उसे पहुँचाया था। यदि इसने उसे क्रूस का मोल चुकवाया, तो यह उनसे भी कुछ कम मोल न लेगा।—जे. एम. कैम्पबेल।

अप्रैल 25

क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा तेरा दाहिना हाथ थामे रहूँगा, और तुझ से कहता हूँ, मत डर, मैं तेरी सहायता करूँगा। यशायाह 41:13।

परमेश्वर का हाथ थामने का यत्न मत कर; उसे अपना हाथ थामने दे। थामने का काम उसे करने दे, और भरोसा करने का काम तू कर।—एच. डब्ल्यू. वेब पेप्लो।

अप्रैल 26

सोच-विचार करो कि उसने तुम्हारे लिये कैसे कैसे बड़े काम किए हैं। 1 शमूएल 12:24।

उस सारे मार्ग पर दृष्टि डाल जिस पर तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे ले आया है। क्या तू उसे भेस बदले हुए दस हजार आशीषों से भरा हुआ नहीं देखता? स्मरण कर उस आवश्यक सहायता को जो ठीक संकट की घड़ी में भेजी गई; उस सही मार्ग को जो तेरे लिये चुना गया, उस गलत मार्ग के बदले जो तूने अपने लिये चुना था; उस हानिकारक वस्तु को जिससे तेरा हृदय इतने चाव से लिपटा था, जो तेरे मार्ग से हटा दी गई; उस विश्राम की घड़ी को जो दी गई, जिसकी तेरी परखी और जूझती आत्मा को ठीक उसी क्षण आवश्यकता थी। ओह, क्या यीशु तेरे पास खड़ा न रहा, जब तू यह जानता तक न था? क्या असीम प्रेम ने अपनी सनातन भुजाओं से हर घटना को घेर न लिया, और अपनी दयामय झालर से हर बादल को मढ़ न दिया? ओह, अपने पगों को फिर से नाप, और उनमें से हर एक में उसके चरण-चिह्न को पहचान! उन सबके लिये उसका धन्यवाद कर, और यीशु पर और अधिक सरलता से टेक लगाने का आवश्यक पाठ सीख।—एफ. व्हिटफील्ड।

अप्रैल 27

उसने . . . कहा . . . मैंने . . . तेरा तोड़ा भूमि में छिपा दिया। . . . उसके स्वामी ने उत्तर देकर उससे कहा, हे दुष्ट और आलसी दास। मत्ती 25:24-26।

जो बड़े काम हम कर नहीं सकते और जो छोटे काम हम करना नहीं चाहते, इन दोनों के बीच यह संकट है कि कहीं हम कुछ भी न करें।—मोनो।

अप्रैल 28

उसी की महिमा अब भी हो और युगानुयुग होती रहे। 2 पतरस 3:18।

हे विश्वासी, तू उस समय की बाट जोह रहा है जब तू ऊपर के पवित्र जनों के साथ मिलकर सारी महिमा यीशु को देगा; परन्तु क्या तू उसकी महिमा कर रहा है अभी? प्रेरित के वचन ये हैं, “उसी की महिमा अब भी हो और युगानुयुग होती रहे।”—सी. एच. स्पर्जन।

अप्रैल 29

तब तू जान लेगा कि मैं ही यहोवा हूँ; क्योंकि जो मेरी बाट जोहते हैं वे कभी लज्जित न होंगे। यशायाह 49:23।

जे. हडसन टेलर कहते हैं: “परमेश्वर के सम्मुख शान्त प्रतीक्षा अनेक भूलों से और अनेक दुःखों से बचा सकती है।”

अप्रैल 30

जैसा तू चाहती है वैसा ही तेरे लिये हो। मत्ती 15:28।

ओह, प्रार्थना की विजयें! ये बाइबल की पर्वत-चोटियाँ हैं। ये हमें मम्रे के मैदानों में, पनीएल के घाटों पर, यूसुफ के बन्दीगृह में, मूसा की विजयों में, यहोशू की अलौकिक जय-यात्राओं में, दाऊद के छुटकारों में, एलिय्याह और एलीशा के आश्चर्यकर्मों में, प्रभु के जीवन की समूची कथा में, पिन्तेकुस्त के भेद में, पौलुस की अद्वितीय सेवकाई के मूल-स्वर में, पवित्र जनों के जीवनों और शहीदों की मृत्युओं में, और कलीसिया के इतिहास तथा परमेश्वर की सन्तानों के अनुभव में जो कुछ सबसे पवित्र और मधुर है, उस सब में फिर से ले चलती हैं। और जब हमारे लिये अन्तिम संघर्ष बीत चुकेगा, और प्रार्थना की चरण-चौकी स्तुति की वीणा को स्थान दे देगी, तब समय के वे स्थल जो सबसे स्वर्गीय और अनन्त तेज से मढ़े होंगे, वे वही होंगे जो प्रायः गहनतम दुःख और अन्धकारतम रात से जुड़े हुए हैं, जिन पर हमारा यह अभिलेख अंकित है, “यहोवा-शम्मा: यहोवा वहाँ था!”—ए. बी. सिम्पसन।

अध्याय 4 पूरा हुआ

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