अध्याय 2 · 15 मिनट का पठन
फ़रवरी
फ़रवरी 1
प्रार्थना में लगे रहो। कुलुस्सियों 4:2
क्या तुझे किसी वस्तु की चाह नहीं? तब मुझे भय है कि तू अपनी दरिद्रता को नहीं जानता। क्या परमेश्वर से माँगने को तेरे पास कोई दया नहीं? तब प्रभु की दया ही तुझे तेरी दुर्दशा दिखाए। प्रार्थनाहीन प्राण मसीह-रहित प्राण है। प्रार्थना विश्वास करनेवाले शिशु की तुतलाहट है, युद्ध करते हुए विश्वासी की ललकार है, और यीशु में सो जानेवाले मरणासन्न संत का अंतिम गीत है।—स्पर्जन।
फ़रवरी 2
जिसमें सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। इफिसियों 2:21
जीवन का यह तम्बू एक अद्भुत रचना है; इसकी रहस्यमय और तेजोमय दीवारें खड़ी करने में हर प्रकार के कार्य करनेवालों के लिये स्थान है। यदि हम सबसे बड़ा काम न कर सकें, तो सबसे छोटा तो कर ही सकते हैं। हमारा स्वर्ग इस बोध से उपजेगा कि जो हम बना रहे थे वह परमेश्वर का तम्बू था, और जिसके अधीन हम काम कर रहे थे वह परमेश्वर का आशीर्वाद था।—जोसेफ पार्कर।
फ़रवरी 3
संसार से प्रेम न रखो। 1 यूहन्ना 2:15
इससे प्रेम न रख, और फिर भी इससे प्रेम रख। उसके प्रेम से इससे प्रेम रख जिसने इसके लिये मरने को अपना पुत्र दे दिया। उसके प्रेम से इससे प्रेम रख जिसने इसके लिये अपना लहू बहाया। उन स्वर्गदूतों के प्रेम से इससे प्रेम रख, जो इसके मन-फिराव पर आनन्दित होते हैं। इसका भला करने को इससे प्रेम रख—इसके कष्टों को अपने आँसू दे, इसके शोकों को अपनी करुणा, इसकी घटियों को अपना धन, इसकी दुर्दशाओं को अपनी प्रार्थनाएँ, और इसके परोपकार, जनहित और मसीही भक्ति के क्षेत्रों को अपनी शक्ति और परिश्रम के घंटे। तू इसे प्रभावित किए बिना, या इससे प्रभावित हुए बिना जी नहीं सकता। या तो तू संसार को उत्तम बनाएगा, या यह तुझे बुरा बना देगा।
परमेश्वर अपने अनुग्रह और पवित्र आत्मा के द्वारा तेरी सहायता करे कि तू संसार में ऐसे जीए कि उससे ऊपर जीए, और उससे परे देखे; और इससे ऐसा प्रेम करे कि जब तू इसे छोड़े, तो इसे उससे उत्तम छोड़े जैसा तूने इसे पाया था।—गुथ्री।
फ़रवरी 4
तू अपनी मुट्ठी खोलकर सब प्राणियों की इच्छा तृप्त करता है। भजन संहिता 145:16
इच्छा—यह कैसा सुकुमार शब्द है! यह भी बहुत होता कि वह आवश्यकता को, अभाव को; तृप्त करता, परन्तु वह इससे कहीं आगे जाता है। दया हमारी आवश्यकता को पूरा करने को उमड़ती है; कर्तव्य कभी-कभी हमारे अभावों की सुधि ले लेता है; परन्तु इच्छा को तृप्त करना एक कोमल चौकसी को, हमारे विषय में एक मधुर और अनुग्रहपूर्ण ज्ञान को, और आशीष देने की उत्कंठा को दर्शाता है। परमेश्वर तब तक तृप्त नहीं होता जब तक वह हमारी इच्छाओं को तृप्त न कर दे।—मार्क गाय पीयर्स।
फ़रवरी 5
हे यहोवा के सब सेवको, तुम जो रात के समय यहोवा के भवन में खड़े रहते हो। . . . यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, वह सिय्योन में से तुझे आशीष दे। भजन संहिता 134:1,3
यदि मैं अपने मित्र के प्रेम को जानना चाहूँ, तो मुझे देखना होगा कि वह जाड़े में क्या कर सकता है। ऐसा ही ईश्वरीय प्रेम के साथ है। ग्रीष्म की धूप में आराधना करना मेरे लिये बहुत सहज है, जब जीवन के मधुर स्वर वायु में गूँजते हों और जीवन के फल वृक्ष पर लगे हों। परन्तु पक्षी का गीत थम जाए, और वृक्ष का फल गिर जाए; तब क्या मेरा मन फिर भी गाता रहेगा? क्या मैं रात के समय परमेश्वर के भवन में खड़ा रहूँगा? क्या मैं उसकी अपनी रात में उससे प्रेम करूँगा? क्या मैं उसकी गतसमनी में एक घड़ी भी उसके साथ जागूँगा? क्या मैं वाया डोलोरोसा पर उसका क्रूस उठाने में सहायता करूँगा? मेरा प्रेम उसके पास उसकी दीनता में आया है। मेरे विश्वास ने उसे उसकी नम्रता में पाया है। मेरे मन ने उसके तुच्छ भेस के बीच से उसकी महिमा को पहचान लिया है, और अन्त में मैं जान गया हूँ कि मैं दान को नहीं, वरन् दाता को चाहता हूँ। जब मैं रात के समय उसके भवन में खड़ा रह सकूँ, तब मैंने उसे केवल उसी के लिये ग्रहण कर लिया है।—जॉर्ज मैथेसन।
फ़रवरी 6
जो कोई कहता है कि मैं उसमें बना रहता हूँ, उसे चाहिए कि वह स्वयं भी वैसे ही चले जैसे वह चला। 1 यूहन्ना 2:6
इस संसार को जिस प्रचार की सबसे अधिक आवश्यकता है, वह हैं वे जूतों में चलते हुए उपदेश, जो यीशु मसीह के साथ-साथ चलते हैं।—चयनित।
फ़रवरी 7
यदि हम यहोवा को जानने के लिये पीछे चलते रहें, तो हम उसे जान लेंगे। होशे 6:3
प्रभु ने हमें अपने ज्ञान के मार्ग पर ला खड़ा किया है, और हमें आज्ञा देता है कि हम उस मार्ग पर उसके सब विचित्र मोड़ों से होते हुए तब तक चलते रहें जब तक वह उस मैदान पर न खुल जाए जहाँ परमेश्वर का सिंहासन है। हमारा जीवन प्रभु को जानने के लिये पीछे चलते रहना है। जिन अनुभवों में से हमें होकर जाने को बुलाया जाता है, उनमें से कुछ पर हम अचम्भा करते हैं, परन्तु बाद में हम देखते हैं कि उन्होंने हमें अपने प्रभु का कुछ नया ज्ञान दिया। . . . हमें किसी अधिक उजियाले अवसर की बाट नहीं जोहनी है; वरन् वर्तमान का सदुपयोग करके अपने लिये उस भविष्य तक एक सेतु बनाना है।—जी. बोवेन।
फ़रवरी 8
अपने देश, अपनी जाति, और अपने पिता के घर में से निकलकर चला जा। उत्पत्ति 12:1। इब्राहीम . . . अपने लोगों में जा मिला। उत्पत्ति 25:8
सारी संगति के बाद भी हम मानो द्वीपों पर बसते हैं, जो एक विशाल द्वीपसमूह में यहाँ-वहाँ बिखरे हैं, हर एक अपनी छोटी सी चट्टान पर, और हमारे बीच समुद्र टकराता रहता है; परन्तु वह समय आता है जब, यदि हमारे मन उस महान् प्रभु पर लगे हों जिसकी उपस्थिति हमें एक कर देती है, तब न कोई समुद्र रहेगा और वे सब अलग-थलग चट्टानें एक विशाल महाद्वीप के भाग हो जाएँगी। . . . यदि हम वर्तमान से अलगाव का, और अपने सच्चे नाते अनदेखे में होने का यह बोध बढ़ाएँ, यदि हम यहाँ परदेशियों के समान बसें क्योंकि हमारी नागरिकता स्वर्ग में है, तब मृत्यु हमें हमारे संगियों से खींचकर अलग न करेगी, न किसी एकाकी देश में खदेड़ेगी, वरन् हमें वहाँ ले आएगी जहाँ और घनिष्ठ बन्धन “मधुर संगतियों” को एक साथ बाँध देंगे, और भेड़ें एक-दूसरे के निकट बैठेंगी क्योंकि सब एक ही चरवाहे के चारों ओर एकत्र हैं। तब बहुत से नाते फिर से बुने जाएँगे, और वह एकाकी यात्री उन प्रियजनों से फिर मिलेगा जिन्हें उसने “बहुत पहले से प्रेम किया और थोड़ी देर के लिये खो दिया था।”—एलेक्स. मैक्लारेन।
फ़रवरी 9
इसलिये यहोवा बाट जोहता रहेगा, कि तुम पर अनुग्रह करे। यशायाह 30:18
यही परमेश्वर की रीति है। रात के सबसे अँधेरे पहरों में उसके पाँव लहरों के पार निकट आते हैं। जब वध का दिन उग रहा होता है, तब स्वर्गदूत पतरस की कोठरी में आता है। जब मोर्दकै के लिये फाँसी का खम्भा तैयार हो जाता है, तब राजा की नींद उचट जाना उस संकटग्रस्त जाति के पक्ष में परिवर्तन ले आता है।
हे प्राण, सम्भव है कि तेरा उद्धार होने से पहले तुझ पर सबसे बुरी घड़ी आ पड़े; परन्तु तेरा उद्धार होगा ही! परमेश्वर भले ही तुझे बाट जुहाता रखे, परन्तु वह अपनी वाचा को सदा स्मरण रखेगा, और अपने अटल वचन को पूरा करने को प्रकट होगा।—एफ. बी. मायर।
फ़रवरी 10
वह हमारी जाति से प्रेम रखता है, और उसी ने हमारे लिये आराधनालय बनवाया है। लूका 7:5
संगमरमर और कणाश्म नाशवान् स्मारक हैं, और उन पर खुदे लेख कदाचित् ही कभी पढ़े जाते हैं। अपने नाम मनुष्यों के हृदयों पर खोदो; केवल वे ही अमर हैं!—थियोडोर कायलर।
फ़रवरी 11
जिन जिन से मैं प्रेम रखता हूँ, उन सब को मैं . . . ताड़ना देता हूँ। प्रकाशितवाक्य 3:19
एक बार मैंने एक पहाड़ी की नंगी ढलान पर एक काली छाया पड़ी देखी। उसका कारण खोजते हुए मैंने ऊपर स्वच्छ नीले आकाश में एक छोटा बादल देखा, जो उजियाले के समान चमकीला था और तैर रहा था। ऐसा ही हमारे शोक के साथ है। यहाँ पृथ्वी पर वह अँधेरा और नीरस लगे; तौभी ऊपर दृष्टि कर, और तू देखेगा कि वह तो केवल उसकी उज्ज्वलता की एक छाया है जिसका नाम प्रेम है।—डीन ऐल्फर्ड।
फ़रवरी 12
इन पत्थरों का क्या अर्थ है? यहोशू 4:21। तुम भी . . . जीवते पत्थरों के समान। 1 पतरस 2:5। (R. V.)
एक मसीही के जीवन और चालचलन में कुछ ऐसा उल्लेखनीय, ऐसा असाधारण होना चाहिए कि लोग पूछने पर विवश हो जाएँ, “इसका क्या अर्थ है?”। . . . क्या तेरे चरित्र, तेरे वचनों, और तेरे जीवन की रीतियों में अपने चारों ओर के संसार से इतना कुछ भिन्न है कि लोग अनायास ही अपने-आप से या दूसरों से पूछने पर विवश हो जाएँ, “इसका क्या अर्थ है?” यह नहीं कि कोई बनावटी विचित्रता हो, केवल अनोखा दिखने के लिये अनोखापन हो; वह तो प्राचीन दिनों के फरीसीपन की नकल मात्र होगी। . . . ओह, कि हम यह समझ पाएँ कि परमेश्वर हमें इसी उद्देश्य से संसार में भेजता है, जैसे उसने अपने एकलौते पुत्र को भेजा!—एस. ए. ब्लैकवुड।
फ़रवरी 13
सब ने . . . उसका मुख देखा, कि उसका मुख मानो स्वर्गदूत का मुख है। प्रेरितों के काम 6:15
मुख प्रतिदिन अपनी भोर की प्रार्थना से बनता है, और उन खिड़कियों में से भोर को झाँकने से जो स्वर्ग की ओर खुलती हैं।—जोसेफ पार्कर।
फ़रवरी 14
यहोवा की आज्ञा से वे अपने तम्बुओं में रहते, और यहोवा की आज्ञा से कूच करते थे। गिनती 9:23
शान्ति और स्थिर उन्नति का यही भेद है। यदि जंगल में कोई इस्राएली ठान लेता कि वह यहोवा से स्वतंत्र होकर कोई चाल चले; यदि वह अपने मन से यह करता कि जब मण्डली विश्राम में हो तब कूच करे, या जब मण्डली कूच कर रही हो तब ठहर जाए, तो हम सहज ही देख सकते हैं कि उसका परिणाम क्या होता। और हमारे साथ भी सदा ऐसा ही होगा। यदि हम तब चलें जब हमें ठहरना चाहिए, या तब ठहरें जब हमें चलना चाहिए, तो ईश्वरीय उपस्थिति हमारे साथ न रहेगी।—सी. एच. एम.।
फ़रवरी 15
जिसमें तुम ने भी विश्वास करने के बाद, प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप पाई। इफिसियों 1:13
प्रभु अपने जनों पर एक छाप लगा देता है, कि सब कोई उन्हें पहचान लें। तेरे विषय में यह छाप वह आत्मा है जो तुझमें प्रभु की समानता उत्पन्न करता है। तू जितना अधिक पवित्र होता जाएगा, यह छाप उतनी ही अधिक स्पष्ट और साफ, और हर आते-जाते के लिये उतनी ही प्रकट होगी, क्योंकि तब लोग तेरे विषय में जान लेंगे कि तू यीशु के साथ रहा है।—एंड्रयू बोनार।
फ़रवरी 16
कल के दिन के विषय में मत फूल। नीतिवचन 27:1
कल के लिये एकमात्र तैयारी आज का उचित उपयोग है। राजगीर के हाथ में जो पत्थर है, उसे उसके स्थान पर रखा और दूसरे को ग्रहण करने योग्य बनाया जाना चाहिए। यदि आज पर ध्यान न दिया जाए, तो कल व्यर्थ ही आता है। जो पुकार आज तेरे पास आती है, उसकी उपेक्षा मत कर, क्योंकि ऐसी उपेक्षा कल के विषय में फूलने के सिवा और कुछ नहीं।—जी. बोवेन।
फ़रवरी 17
यहोवा की यह वाणी है, मैं तेरी सहायता करूँगा। यशायाह 41:14
हे मेरे प्राण, क्या यह पर्याप्त नहीं? क्या तुझे संयुक्त त्रिएकता की सर्वशक्तिमत्ता से भी अधिक बल चाहिए? क्या तुझे उस बुद्धि से अधिक बुद्धि चाहिए जो पिता में है, उस प्रेम से अधिक प्रेम जो पुत्र में प्रकट होता है, या उस सामर्थ्य से अधिक सामर्थ्य जो आत्मा के प्रभावों में प्रगट है? अपना रीता घड़ा यहाँ ले आ! निश्चय यह कुआँ उसे भर देगा। शीघ्रता कर, अपने अभावों को बटोर, और उन्हें यहाँ ले आ—अपना रीतापन, अपने दुःख, अपनी आवश्यकताएँ। देख, परमेश्वर की यह नदी तेरी आपूर्ति के लिये भरी हुई है; इसके सिवा तू और क्या चाह सकता है? हे मेरे प्राण, अपने इसी बल में आगे बढ़। सनातन परमेश्वर तेरा सहायक है!—स्पर्जन।
फ़रवरी 18
और हर एक को उसका काम सौंपा। मरकुस 13:34
परमेश्वर के इस विशाल संसार के लिये वही सबसे अधिक करता है जो अपने छोटे से संसार में सबसे उत्तम करता है।—चयनित।
फ़रवरी 19
जो मछलियाँ तुम ने अभी पकड़ी हैं, उन में से कुछ लाओ। यूहन्ना 21:10
ऐसा क्यों हुआ? ओह, प्रभु चाहता है कि हम उससे केवल पाएँ ही नहीं, वरन् उसकी सेवा भी करें, और हमारी सेवा अपने सच्चे लक्ष्य को तब पाती है जब वह हमारे प्रिय प्रभु के लिये भोजन बन जाती है। जब वे उसकी मछलियाँ खा रहे थे, तब उसने प्रसन्न होकर उनकी मछलियाँ खाईं। यह वही दुगना भोज था जिसके विषय में वह प्रकाशितवाक्य के उस कोमल सन्देश में कहता है, “मैं उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ।”—ए. बी. सिम्पसन।
फ़रवरी 20
विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया, तो आज्ञा मानकर ऐसे स्थान को निकल गया जिसे वह मीरास में पानेवाला था। इब्रानियों 11:8
वह कहाँ जा रहा है, यह वह नहीं जानता था; उसके लिये इतना जान लेना पर्याप्त था कि वह परमेश्वर के साथ जा रहा है। वह प्रतिज्ञाओं पर उतना नहीं टिका जितना प्रतिज्ञा करनेवाले पर। उसने अपने भाग की कठिनाइयों पर नहीं, वरन् उस राजा पर दृष्टि की, जो सनातन, अविनाशी, अदृश्य, और एकमात्र बुद्धिमान् परमेश्वर है, जिसने उसका मार्ग ठहराने की कृपा की थी, और निश्चय ही अपने-आप को सच्चा ठहराएगा। हे तेजोमय विश्वास! यही तेरा कार्य है, ये तेरी सम्भावनाएँ हैं: मुहरबन्द आदेशों के साथ जलयात्रा करने में सन्तोष, क्योंकि उस प्रधान नौसेनापति प्रभु के प्रेम और बुद्धि पर अटल भरोसा है; उठ खड़े होने, सब कुछ छोड़ देने, और मसीह के पीछे हो लेने की तत्परता, क्योंकि यह आनन्दमय निश्चय है कि पृथ्वी की सबसे उत्तम वस्तु भी स्वर्ग की सबसे छोटी वस्तु के तुल्य नहीं ठहर सकती।—एफ. बी. मायर।
फ़रवरी 21
यहोवा तो ज्ञानी परमेश्वर है, और कामों को वही तौलता है। 1 शमूएल 2:3
जो कुछ हम परमेश्वर के पास लाते हैं, उसे वह नापता नहीं। वह उसे तौलता है।—मार्क गाय पीयर्स।
फ़रवरी 22
ज्योति पाने के बाद तुम ने दुःखों के बड़े संघर्ष को सहा। इब्रानियों 10:32
परमेश्वर के लिये संसार के सामने हमारी निर्भीकता सदा उस व्यवहार का फल होनी चाहिए जो एकान्त में परमेश्वर के साथ हुआ हो। अपने-आप पर, पाप पर, और संसार पर हमारी विजयें सदा सबसे पहले वहाँ लड़ी जाती हैं जहाँ परमेश्वर की आँख के सिवा कोई नहीं देखता। . . . यदि हमारे ये एकान्त के संघर्ष न हों, तो सम्भव है हमारे कोई प्रकट संघर्ष भी न हों। संघर्ष का बाहरी अभाव प्राण की भीतरी निद्रा को प्रकट कर देता है।—एफ. व्हिटफील्ड।
फ़रवरी 23
फिलिप्पुस ने नतनएल से मिलकर उससे कहा, जिसके विषय में मूसा ने व्यवस्था में और भविष्यद्वक्ताओं ने लिखा है, वह हमें मिल गया है। . . . आकर देख ले। यूहन्ना 1:45,46
यह जान लेने के बाद कि “वह हमें मिल गया है,” अगली बात यह है कि किसी और को ढूँढ़ निकालें, और कहें, “आकर देख ले।”—फ्रांसिस रिडली हैवरगल।
फ़रवरी 24
वायु जिधर चाहती है उधर बहती है, और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता कि वह कहाँ से आती और कहाँ को जाती है; जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है। यूहन्ना 3:8
हम जानते हैं कि वायु वहीं बहना चाहती है जहाँ रिक्तता हो। यदि तुझे वायु का कोई प्रचण्ड झोंका मिले, तो तू जान लेता है कि कहीं कोई खाली स्थान है। मुझे इस बात का पूरा निश्चय है: यदि हम सारे अभिमान, घमण्ड, आत्म-धार्मिकता, स्वार्थ, वाहवाही, आदर, और पदोन्नति की लालसा को निकाल बाहर कर सकें—यदि किसी ईश्वरीय सामर्थ्य से हम इन सबसे पूरी तरह रीते कर दिए जाएँ, तो आत्मा एक प्रचण्ड आँधी के समान हमें भरने को आ जाएगा।—ए. जे. गॉर्डन।
फ़रवरी 25
तेरी नम्रता ने मुझे महान् बना दिया है। 2 शमूएल 22:36
मसीह की नम्रता वह सबसे सुन्दर आभूषण है जिसे कोई मसीही पहन सकता है।—विलियम आर्नोट।
फ़रवरी 26
याकूब ने अपना मार्ग लिया, और परमेश्वर के दूत उसे मिले। उत्पत्ति 32:1
उसी मार्ग पर, जहाँ चलने की आज्ञा परमेश्वर ने हमें दी है, हम स्वर्गदूतों को अपने चारों ओर पाएँगे। सच है, हम उनसे अपने चुने हुए मार्गों पर भी मिल सकते हैं, परन्तु वह उसी प्रकार का दूत होगा जो बिलाम को मिला था—हाथ में तलवार लिए, सामर्थी और सुन्दर, परन्तु क्रोध से भरा हुआ भी; और अच्छा हो कि हम उसका सामना न करें! परन्तु वे मित्रवत् सहायक, परमेश्वर के प्रेम के दूत, उसके अनुग्रह के प्रेरित, उन मार्गों पर नहीं मँडराते जिन्हें हम अपने लिये स्वयं बनाते हैं।—एलेक्स. मैक्लारेन।
फ़रवरी 27
मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता। यूहन्ना 14:6
स्वर्ग प्रायः दूर और अनजाना जान पड़ता है, परन्तु यदि वही हमारा अगुआ हो जिसने वहाँ तक का मार्ग बनाया, तो हमें राह खो देने का भय करने की आवश्यकता नहीं। हम बहुत दूर तक देखना नहीं चाहते—केवल इतनी दूर तक कि उसे पहचान सकें और उसके पदचिह्नों पर चल सकें। . . . जो मसीह के पीछे चलते हैं, वे अँधेरे में से होकर भी निश्चय पिता तक पहुँचेंगे।—हेनरी वैन डाइक।
फ़रवरी 28
जो बातें पीछे रह गई हैं उन्हें भूलकर . . . मैं उस निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूँ, ताकि वह इनाम पाऊँ जिसके लिये परमेश्वर ने मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। फिलिप्पियों 3:13,14
सच्चा कार्य उस बात पर पछताने से नहीं होता जिसका सुधार असम्भव है, वरन् हम जो हैं उसी का सर्वोत्तम उपयोग करने से होता है। यह शिकायत करने से नहीं कि हमारे पास ठीक औजार नहीं, वरन् जो औजार हमारे पास हैं उन्हें भली भाँति काम में लाने से होता है। हम जो हैं, और जहाँ हैं, वह परमेश्वर का दैवीय प्रबन्ध है—परमेश्वर का किया हुआ, यद्यपि वह मनुष्य का बिगाड़ा हुआ भी हो सकता है। जीवन भूलों की एक श्रृंखला है, और वही सबसे अच्छा मसीही नहीं जो सबसे कम गलत कदम उठाता है। सबसे अच्छा वही है जो भूलों को सुधारकर सबसे शानदार विजयें प्राप्त करता है।—एफ. डब्ल्यू. रॉबर्टसन।
अध्याय 2 पूरा हुआ
फ़रवरी