अध्याय 1 · 20 मिनट का पठन
जनवरी
जनवरी 1
भोर को ऊपर आ जाना . . . और . . . पर्वत की चोटी पर मेरे सम्मुख उपस्थित होना। निर्गमन 34:2
हे मेरे पिता, मैं आ रहा हूँ। इस नीचे के मैदान की कोई भी वस्तु मुझे उन पवित्र ऊँचाइयों से दूर न रखेगी। मुझे तेज़ी से चढ़ने में सहायता दे, और तू मेरे पाँव को थामे रख, ऐसा न हो कि वह कठोर चट्टान पर गिर पड़े! तेरे बुलावे पर मैं आता हूँ, इसलिये तू मेरे मन को निराश न करेगा। अपने साथ स्वर्ग से मधु ले आ, हाँ, दूध और दाखमधु, और मेरे प्राण की भलाई के लिये तेल, और सूर्य को उसकी चाल में थाम रख, नहीं तो वह समय बहुत थोड़ा होगा जिसमें मैं तेरे मुख को निहार सकूँ, और तेरी कोमल वाणी सुन सकूँ।
पर्वत पर बिताई हुई भोर! इतने उत्तम आरम्भ से आरम्भ हुए इस दिन के शेष सारे समय भर यह मुझे बलवन्त और आनन्दित बनाए रखेगी।—Joseph Parker.
जनवरी 2
मेरा प्रतिफल मेरे पास है। प्रकाशितवाक्य 22:12
हमें प्रतिफल केवल किए हुए काम के लिये ही नहीं, वरन उठाए हुए बोझों के लिये भी मिलेगा, और मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है कि सबसे उज्ज्वल प्रतिफल उन्हीं को मिलेंगे जिन्होंने बिना कुड़कुड़ाए बोझ उठाए हैं। उस दिन वह उस सोसन को, जो इतने लम्बे समय तक काँटों के बीच बढ़ता रहा है, उठा लेगा और उसे सारी सृष्टि की महिमा और अचम्भा बनने के लिये ऊँचा करेगा; और उस सोसन की सुगन्ध स्वर्ग की सारी सेनाओं से अवर्णनीय स्तुतियाँ निकलवाएगी।—Andrew Bonar.
जनवरी 3
तू कहाँ है? उत्पत्ति 3:9
क्या तू उससे अपने आप को छिपा रहा है, जो तुझे भेजना चाहता है कि तू उसका अपना धन्य काम उसी की रीति से करे? ओह, इस भोर मुझे तुझ से यह कहने दे, “प्रभु को तेरी आवश्यकता है।” ऐसा जान पड़ सकता है कि जो काम उसने तुझे सौंपा है वह छोटा-सा ही है, परन्तु वह महत्वपूर्ण है। उसे “तेरी आवश्यकता है।” उसकी ओर पीठ न फेर; अपने आप को उसके द्वारा काम में लगाए जाने से दूर न रख; अपने लिये यह नियम ठहराने से आरम्भ न कर कि तू क्या करेगा और क्या नहीं करेगा; परन्तु अपने मन की गहराई से पुकार उठ, “मैं यहाँ हूँ, मुझे भेज,”—W. Hay Aitken.
जनवरी 4
धर्मी पर बहुत सी विपत्तियाँ पड़ती तो हैं, परन्तु यहोवा उसको उन सब से मुक्त करता है। भजन संहिता 34:19
धर्मी की सारी विपत्तियाँ किसी महिमामय वस्तु में खुलती हैं। बन्दी केवल छुड़ाया ही नहीं जाता, वरन वह द्वार पर अपने लिये एक स्वर्गदूत को प्रतीक्षा करते हुए पाता है। और हर छुटकारे के साथ एक विशेष आशीष आती है। एक स्वर्गदूत का नाम विश्वास है; दूसरे का, प्रेम; दूसरे का, आनन्द; दूसरे का, सहनशीलता; दूसरे का, कोमलता; दूसरे का, भलाई; दूसरे का, दीनता; दूसरे का, संयम; दूसरे का, शान्ति। इनमें से हर एक अनुग्रह कहता है, “हम बड़े क्लेश में से निकल आए हैं।”—G. Bowen.
जनवरी 5
यहोवा मेरा . . . भजन है। भजन संहिता 118:14
आओ, हम इस पर मनन करें कि परमेश्वर स्वयं हमारा भजन बन जाता है। परमेश्वर को जानने की परिपूर्णता और सिद्धता यही है: उसे इस प्रकार जानना कि वह स्वयं हमारा आनन्द बन जाए; उसे इस प्रकार जानना कि जब हम उसके विषय में गाते हैं तब स्तुति सबसे मधुर, सबसे भरपूर, सबसे नवीन और सबसे आनन्दमय हो। जिसने यह धन्य भेद सीख लिया है वह स्वर्ग की सुनहरी कुंजी लिये फिरता है—नहीं, वरन वह स्वर्ग को उतारकर पृथ्वी पर ले आया है, और अब उसे स्वर्गदूतों से डाह करने की आवश्यकता नहीं।—Mark Guy Pearse.
जनवरी 6
मत डरो, खड़े रहो और यहोवा के उद्धार को देखो। निर्गमन 14:13
प्रायः ऐसा जान पड़ता है कि परमेश्वर अपनी सन्तान को अत्यन्त कठिनाई की स्थितियों में रख देता है—उन्हें ऐसी सँकरी घाटी में ले जाता है जहाँ से बच निकलने का कोई मार्ग नहीं; ऐसी परिस्थिति रच देता है जिसकी अनुमति कोई भी मानवीय बुद्धि पहले से पूछे जाने पर न देती। वही बादल उन्हें वहाँ ले जाता है। सम्भव है कि इसी घड़ी तू इसी प्रकार घिरा हुआ हो। यह अत्यन्त उलझनभरा और अति गम्भीर तो जान पड़ता है; परन्तु यह पूर्णतः ठीक है। इसका परिणाम उसको, जो तुझे यहाँ ले आया है, और भी अधिक सही ठहराएगा। यह उसके सर्वशक्तिमान अनुग्रह और सामर्थ्य के प्रगट होने का मंच है। वह न केवल तुझे छुड़ाएगा, वरन ऐसा करते हुए वह तुझे एक ऐसा पाठ भी सिखाएगा जिसे तू कभी न भूलेगा; और आगे के दिनों में अनेक भजनों और गीतों में तू बार-बार उसी की ओर लौटेगा। जो कुछ उसने किया है ठीक वैसा ही करने के लिये तू परमेश्वर का पर्याप्त धन्यवाद कभी न कर सकेगा।—F. B. Meyer.
जनवरी 7
अब तो तुम प्रभु में ज्योति हो: ज्योति की सन्तान के समान चलो। इफिसियों 5:8
जो प्रभाव हम संसार में डालते हैं वह यीशु मसीह के साथ हमारे सम्बन्ध से उत्पन्न होता है; और यीशु मसीह के साथ हमारा सम्बन्ध हमारे प्रभाव से प्रगट होता है।—Selected.
जनवरी 8
इसलिये अपने-अपने प्राण की भली भाँति चौकसी करना। यहोशू 23:11 (हाशिया)
जब तक सोना उस स्फटिक और चट्टान के साथ मिला रहता है जिसमें वह गड़ा पड़ा है, तब तक वह मुद्रा के रूप में काम नहीं आ सकता। इसी प्रकार तेरा प्राण परमेश्वर के लिये तब तक निकम्मा है जब तक वह उस पाप, सांसारिकता और स्वार्थ में से बाहर न निकाला जाए जिसमें वह दबा पड़ा है। आत्मा की नया जन्म देनेवाली सामर्थ्य के द्वारा तुझे मसीह के लिये अलग किया जाना, उसकी छाप और नाम से अंकित किया जाना, और एक ईश्वरीय मुद्रा में ढाला जाना है, जो मनुष्यों के बीच उसका स्वरूप धारण करे। मसीही, ऐसा कहें तो, मसीह का प्रचलित सिक्का है, उस राज्य की वह मुद्रा जिसके द्वारा खोए हुए संसार पर दया और अनुग्रह के बड़े-बड़े लेन-देन चलाए जाते हैं। जैसे मुद्रा सोने का प्रतिनिधित्व करती है, वैसे ही मसीही मसीह का प्रतिनिधित्व करता है, और उसकी भली और ग्रहणयोग्य इच्छा को प्रगट करता है।—A. J. Gordon.
जनवरी 9
जो थोड़े में विश्वासयोग्य है, वह बहुत में भी विश्वासयोग्य है। लूका 16:10
जीवन का सबसे छोटा काम भी उतने ही ऊँचे उद्देश्य से उतने ही निश्चय के साथ किया जा सकता है जितना सबसे बड़ा और सबसे श्रेष्ठ काम। विश्वासयोग्यता कामों को वैसे ही तौलती है जैसे परमेश्वर उन्हें तौलता है। सच्ची अन्तरात्मा की सुधि हमारे कर्तव्यों के साथ वैसा ही व्यवहार करती है जैसा परमेश्वर करता है। कर्तव्य कर्तव्य है, विवेक विवेक है, सही सही है, और गलत गलत है, चाहे वे किसी भी आकार के अक्षरों में क्यों न छपे हों। “बड़ा” और “छोटा” विवेक की शब्दावली के शब्द नहीं हैं। वह केवल दो ही शब्द जानता है—सही और गलत।—Alex. McLaren.
जनवरी 10
और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है, तुम्हारी हर एक घटी को पूरा करेगा। फिलिप्पियों 4:19
कैसा स्रोत—“परमेश्वर”! कैसा मानक—“महिमा सहित उसका धन”! कैसा माध्यम—“मसीह यीशु”! यह तेरा मधुर सौभाग्य है कि तू अपनी सारी घटी को उसके धन के सामने रख दे, और बाद वाले की उपस्थिति में पहले वाले को दृष्टि से ओझल कर दे। उसका न चुकनेवाला भण्डार, उसके मन के सारे प्रेम सहित, तेरे लिये खुला पड़ा है; जा और विश्वास की निष्कपट सरलता में उसमें से ले, और तुझे कभी किसी सृजे हुए सोते की ओर ताकने, या किसी सृजे हुए सहारे पर टेक लगाने की आवश्यकता न पड़ेगी।—C. H. M.
जनवरी 11
जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो, तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो। याकूब 1:2
परमेश्वर पर भरोसा रखने से हम घाटे में नहीं रह सकते, क्योंकि विश्वास से उसका आदर होता है, और सबसे अधिक आदर तब होता है जब विश्वास उसके मार्गों और विधान के घने बादल के पीछे उसके प्रेम और सच्चाई को पहचान लेता है। धन्य हैं वे जो इस प्रकार जाँचे जाते हैं! हम बस अविश्वास और दोषी विवेक से मुक्त रहें। हम प्रभु की चट्टान और मण्डप में अपने आप को छिपा लेंगे, और सारी विपत्तियों के टल जाने तक अनन्त प्रेम के पंखों के नीचे शरण पाए रहेंगे।—Selected.
जनवरी 12
धन्य हैं वे, जो बिना देखे विश्वास करते हैं। यूहन्ना 20:29
जो दिखाई देता है वह छाया है: वास्तविकता अनदेखे में पाई जाती है। . . . नि:सन्देह, मसीह में हमारे विश्वास की नींव अनदेखी है; परन्तु वैसी ही उस मीनार की भी है जो लहरों के बीच अपनी ऊँची सीधी देह उठाए खड़ी है और उन पर बचानेवाली ज्योति डालती है। वह उछलती हुई तरंगों पर टिकी हुई जान पड़ती है; परन्तु इनके नीचे, अदृश्य और अटल, वह ठोस चट्टान पड़ी है जिस पर वह सुरक्षित खड़ी है; और जब ऊपर आँधी गरजती है, और नीचे लहरें गरजती हैं, तब भी मैं उस एकाकी समुद्री मीनार में शान्ति से सो सकता हूँ। चट्टान पर बनी हुई, और उस घमण्डी से घमण्डी महल से भी अधिक सुरक्षित जो रेतीले, लहरों से पिटे हुए तट पर खड़ा है, वह टाली नहीं जा सकती। तब सनातन चट्टान की तो बात ही क्या! जो उस पर भरोसा रखता है वह मृत्यु के लिये तैयार, न्याय के लिये सज्जित, और अन्तिम दिन की बजनेवाली तुरही के लिये तत्पर है, क्योंकि, “यहोवा अपने दासों के प्राण को छुड़ा लेता है, और जितने उस पर भरोसा रखते हैं उनमें से कोई भी उजड़ने न पाएगा।”—Guthrie.
जनवरी 13
मेरे पिता की महिमा इसी से होती है कि तुम बहुत सा फल लाओ। यूहन्ना 15:8
कैसी सम्भावना, कैसी प्रेरणा, कि हम “अपने पिता” की महिमा को बढ़ा सकते हैं! इस विचार से हमारे मन उछल पड़ते हैं।
यह कैसे किया जा सकता है? “पत्ते,” अर्थात उसके लिये प्रेम का एक दावा लाने से? नहीं। कुछ फल लाने से? नहीं। “कि तुम बहुत सा फल लाओ।” उपज की बहुतायत में ही किसान का आनन्द, उसकी महिमा है। इसलिये हमें असाधारण, “सौ गुना” फल देनेवाले मसीही बनने का लक्ष्य रखना चाहिए, और सबसे बड़ी उपज को छोड़ किसी और से सन्तुष्ट नहीं होना चाहिए। हमारे जीवन भले कामों से भरे होने चाहिए। तब कटनी के समय हम कह सकेंगे, “हे पिता, मैंने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है!”—W. Jennings.
जनवरी 14
प्रतिदिन मैं तुझको धन्य कहा करूँगा; और तेरे नाम की स्तुति सदा सर्वदा करता रहूँगा। भजन संहिता 145:2
एक बहुत ही सुन्दर प्रतीक है जिसके द्वारा जापानी लोग अपने मित्रों के लिये अपनी शुभकामनाएँ प्रगट किया करते हैं। वह एक ऐसे नगाड़े का चित्र है जिसमें चिड़ियों ने अपना घोंसला बना लिया है। इसके विषय में यह कथा कही जाती है कि एक बार एक भला राजा रहता था, जो अपनी प्रजा के कल्याण के लिये इतना चिन्तित रहता था कि उसने राजमहल के फाटक पर एक नगाड़ा रखवा दिया, और जिस किसी का कोई अन्याय दूर कराना हो या कोई आवश्यकता हो, वह उस नगाड़े को बजाए, और तुरन्त, दिन हो या रात, राजा उस निवेदक को दर्शन और सहायता प्रदान करे। परन्तु सारे देश में ऐसी समृद्धि और सन्तोष का राज्य था कि किसी को किसी बात के लिये गुहार लगाने की आवश्यकता न पड़ी, और चिड़ियों ने उसके भीतर अपने घोंसले बना लिए और उसे अपने गीत के संगीत से भर दिया।
ऐसी अनुग्रहमय पहुँच स्वर्ग के राजा के द्वारा हमें भी दी गई है, और रात-दिन उसका तत्पर सुनना और उसकी सहायता उन सब की पहुँच में है जो उसके पास आते हैं; परन्तु सब मनुष्यों में सबसे अधिक धन्य वे हैं जिन्होंने पृथ्वी पर ऐसा धन्य भाव पा लिया है जिसमें हर आवश्यकता भुला दी जाती है, और भरोसा पिता की देखभाल में सुरक्षा के विषय में इतना आश्वस्त रहता है कि प्रार्थना निरन्तर स्तुति के लिये स्थान छोड़ देती है। वे सदा प्रभु में आनन्दित रहते हैं।—Mark Guy Pearse.
जनवरी 15
वे उकाब के समान अपने पंखों से उड़ेंगे; वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे; वे चलेंगे और थकित न होंगे।—यशायाह 40:31
हे मेरे प्राण, तेरे अस्तित्व की विजय यही है—कि तू परमेश्वर के साथ चल सके! उड़ान नवयुवा प्राण की है; यह धर्म का रोमांच है। बिना श्रमित हुए दौड़ना उदात्त प्राण की है; यह धर्म का सौन्दर्य है। परन्तु चलना और न थकना सिद्ध प्राण की है; यह धर्म की सामर्थ्य है।
क्या तू मनुष्यों की दागी हुई गलियों में से श्वेत वस्त्र पहने चल सकता है? क्या तू पृथ्वी के नीच और अशुद्ध लोगों को छूकर भी अपने वस्त्रों को शुद्ध बनाए रख सकता है? क्या तू पापियों के सम्पर्क में आकर भी स्वयं निष्कलंक रह सकता है? तब तो तूने उकाब की उड़ान को भी पीछे छोड़ दिया है!—George Matheson.
जनवरी 16
और मूसा पर्वत पर चालीस दिन और चालीस रात रहा। निर्गमन 24:18
परमेश्वर के साथ संगति का जीवन एक ही दिन में नहीं बनाया जा सकता। इसका आरम्भ हर बात को घड़ी-घड़ी उसके सम्मुख रखने की आदत से होता है, जैसा मूसा ने मिस्र में किया। परन्तु यह आगे बढ़कर संगति के अधिक और लम्बे समयों तक पहुँचता है; और मध्यस्थता, प्रतीक्षा और पवित्र मेल-जोल के दिनों और रातों में इसकी परिपूर्णता और परमानन्द पाया जाता है।—F. B. Meyer.
जनवरी 17
एलीशा ने प्रार्थना की, हे यहोवा, इसकी आँखें खोल दे कि यह देख सके। 2 राजा 6:17
यही वह प्रार्थना है जो हमें अपने लिये और एक दूसरे के लिये करनी चाहिए, “हे प्रभु, हमारी आँखें खोल दे कि हम देख सकें”; क्योंकि हमारे चारों ओर का संसार, वैसे ही जैसे उस भविष्यद्वक्ता के चारों ओर था, परमेश्वर के घोड़ों और रथों से भरा है, जो हमें महिमामय विजय के स्थानों तक ले जाने के लिये प्रतीक्षा कर रहे हैं। और जब हमारी आँखें इस प्रकार खोली जाती हैं, तब हम जीवन की सारी घटनाओं में, चाहे वे बड़ी हों या छोटी, चाहे आनन्दमय हों या दुःखमय, अपने प्राणों के लिये एक “रथ” देखेंगे। जो कुछ हमारे पास आता है वह उसी क्षण एक रथ बन जाता है जब हम उसके साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं; और दूसरी ओर, छोटी से छोटी परीक्षा भी हमें दुःख या निराशा में कुचल देनेवाला जगन्नाथ रथ बन सकती है, यदि हम उन्हें ऐसा समझें। यह चुनना कि वे कौन-सी होंगी, हम में से हर एक पर निर्भर है। यह सब इस पर निर्भर नहीं कि ये घटनाएँ क्या हैं, वरन इस पर कि हम उन्हें किस प्रकार लेते हैं। यदि हम उनके नीचे पड़ जाएँ, और उन्हें अपने ऊपर से होकर लुढ़कने और कुचलने दें, तो वे जगन्नाथ रथ बन जाती हैं, परन्तु यदि हम उन पर, विजय के रथ के समान, चढ़ जाएँ, और उन्हें अपने को विजयपूर्वक आगे और ऊपर ले जाने दें, तो वे परमेश्वर के रथ बन जाती हैं।—Smith.
जनवरी 18
जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती हैं। रोमियों 8:28
एक हज़ार परीक्षाओं में से पाँच सौ नहीं, वरन उनमें से नौ सौ निन्यानबे, और उनके साथ एक और, विश्वासी की भलाई के लिये काम करती हैं।—George Müller.
जनवरी 19
तू हारून के लिये पवित्र वस्त्र बनवाना। निर्गमन 28:2
क्या हमारे पास नीले और बैंगनी रंग के, और सुन्दर अर्थ से भरे वस्त्र नहीं हैं? हमारे पास स्तुति के वस्त्र हैं; हम प्रभु यीशु को पहने हुए हैं। और क्या हमारे पास आभूषण नहीं हैं? नम्र और शान्त आत्मा का आभूषण परमेश्वर की दृष्टि में बहुमूल्य है। और क्या हमारे पास सोने की घंटियाँ नहीं हैं? हमारे पास पवित्र कामों की सोने की घंटियाँ हैं। हमारे वचन घंटियाँ हैं, हमारे काम घंटियाँ हैं, हमारे उद्देश्य घंटियाँ हैं। जब कभी हम चलते हैं, तब हमारी गति इस प्रकार पवित्र स्थानों, पवित्र कामों, पवित्र चरित्र की ओर की गति समझी जाती है।—Joseph Parker.
जनवरी 20
हे यहोवा, भोर को तू मेरी वाणी सुनेगा; भोर को मैं अपनी प्रार्थना तेरे सम्मुख सजाकर तेरी बाट जोहूँगा। भजन संहिता 5:3
भोर दिन का फाटक है, और इसकी भली भाँति प्रार्थना से रखवाली की जानी चाहिए। यह उस धागे का एक सिरा है जिस पर दिन भर के काम पिरोए जाते हैं, और इसे भक्ति की गाँठ से भली भाँति बाँधना चाहिए। यदि हम जीवन की महिमा को और अधिक अनुभव करते, तो हम इसकी भोरों के विषय में और अधिक सावधान रहते। जो अपने बिछौने से उठकर सीधा अपने काम-धन्धे की ओर दौड़ता है और आराधना के लिये नहीं ठहरता, वह उतना ही मूर्ख है मानो उसने अपने वस्त्र न पहने हों, या अपना मुँह न धोया हो, और उतना ही निर्बुद्धि है मानो वह बिना हथियार और कवच के युद्ध में कूद पड़ा हो। यह हमारा हो कि जंगल की तपन और मार्ग का बोझ हमें दबाने लगे, इससे पहले हम परमेश्वर के साथ संगति की मन्द बहती नदी में स्नान कर लें।—Spurgeon.
जनवरी 21
हे यहोवा, अपने मार्ग मुझ को दिखा दे; अपने पथ मुझे सिखा। भजन संहिता 25:4
एक ऐसा पथ है जिस पर परमेश्वर की हर एक सन्तान को चलना है, और जिस पर ही परमेश्वर उसके साथ चल सकता है।—Denham Smith.
जनवरी 22
इसलिये परमेश्वर की प्रजा के लिये विश्राम अब भी बाकी है। इब्रानियों 4:9
नये यरूशलेम की मीनारों से मृत्यु के जल के पार तैरती हुई इस पहली स्वर्गीय घंटी का संगीत कैसा मधुर है। हे यात्री, अपनी लम्बी और कठिन यात्रा के नीचे थके हुए, इसे सुन! यह विश्राम है। हे सैनिक, अब भी अपने ऊपर युद्ध का लहू और धूल लिए हुए, इसे सुन! यह विश्राम है। हे नाविक, पाप और शोक की लहरों पर उछाले गए, संसार के उथल-पुथल भरे सागर पर इधर-उधर बहाए गए, इसे सुन! बन्दरगाह दिखाई दे रहा है; वही लहरें जो तुझ पर टूट रही हैं मानो यह गुनगुनाती हैं—“वह अपने प्रियों को विश्राम देता है।” यह अस्तित्व की लम्बी खिंची हुई आह है जिसका उत्तर आखिरकार मिल गया। पृथ्वी के इस खिंचे हुए सप्ताह का परिश्रम और वेदना समाप्त हो गई। इसके अटूट सब्त की शान्ति आरम्भ हो गई। मनुष्य, थके हुए मनुष्य ने आखिरकार अपने परमेश्वर की गोद में वह चिरकाल से खोजा हुआ विश्राम पा लिया है!—Macduff.
जनवरी 23
उसकी छाया में। श्रेष्ठगीत 2:3
फ्रांसिस रिडली हैवरगल कहती हैं: इससे मुझे चार चित्र सुझाए हुए दिखाई पड़ते हैं: किसी थका देनेवाले मैदान में एक चट्टान की छाया में; एक वृक्ष की छाया में; उससे भी अधिक निकट, उसके पंख की छाया में; सबसे निकट और सबसे सटे हुए, उसके हाथ की छाया में। निश्चय ही वह हाथ वही छेदा हुआ हाथ होगा, जो बहुधा हमें बहुत कसकर दबा सकता है, फिर भी सदा हमें घेरता, थामता और छाया देता रहता है!
जनवरी 24
उसने ऐसा दिखाया मानो वह आगे बढ़ना चाहता है। लूका 24:28
क्या परमेश्वर सदा ऐसा ही नहीं करता? वह अपने पवित्र आत्मा के द्वारा हमारे पास वैसे ही आता है जैसे वह इन दो चेलों के पास आया था। वह सुसमाचार के प्रचार के द्वारा, परमेश्वर के वचन के द्वारा, अनुग्रह के विविध साधनों और जीवन की विधानपूर्ण परिस्थितियों के द्वारा हम से बातें करता है; और इस प्रकार बातें कर चुकने पर, वह ऐसा दिखाता है मानो वह आगे बढ़ जाएगा। यदि कान उसकी वाणी के लिये और मन उसकी आत्मा के लिये खुला हो, तो यह प्रार्थना उठेगी, “हे प्रभु, मेरे साथ रह।” परन्तु यदि उस वाणी का कोई प्रभाव न पड़े, तो वह आगे बढ़ जाता है, जैसा उसने हज़ारों बार किया है, और हर बार मन को पहले से अधिक कठोर, और कान को आत्मा के बुलावे के प्रति और अधिक बन्द छोड़ जाता है।—F. Whitfield.
जनवरी 25
मेरा परमेश्वर मेरा बल होगा। यशायाह 49:5
ओह, सहज जीवन के लिये प्रार्थना मत करो! अधिक बलवन्त मनुष्य बनने के लिये प्रार्थना करो! अपनी सामर्थ्य के बराबर कामों के लिये प्रार्थना मत करो; अपने कामों के बराबर सामर्थ्य के लिये प्रार्थना करो! तब तुम्हारे काम का किया जाना कोई अचम्भा न होगा। परन्तु तुम स्वयं एक अचम्भा होगे। प्रतिदिन तुम अपने आप पर, और जीवन की उस समृद्धि पर अचम्भा करोगे जो परमेश्वर के अनुग्रह से तुम में आई है।—Phillips Brooks.
जनवरी 26
लज्जा की कुछ चिन्ता न करके। इब्रानियों 12:2
और यह कैसे किया जाए? दो रीतियों से। पर्वत पर चढ़ जा, और मैदान की वस्तुएँ बहुत छोटी दिखाई देंगी; जितना ऊँचा तू चढ़ेगा उतनी ही वे तुच्छ जान पड़ेंगी। परमेश्वर के साथ संगति बनाए रख, और यहाँ के धमकानेवाले शत्रु बहुत ही कम भयानक जान पड़ेंगे। दूसरी रीति यह है, कि परदा उठाकर उसके पीछे जो है उस पर दृष्टि लगा। किसी आल्प्स देश की तराई में पड़ी हुई नीची पहाड़ियाँ मैदान से देखने पर तब तक ऊँची जान पड़ सकती हैं जब तक बर्फ से ढँकी चोटियाँ कोहरे में लिपटी रहती हैं; परन्तु जब हवा का हल्का झोंका आकर ऊँची चोटियों पर से कोहरा हटा देता है, तब कोई भी सामने की छोटी हरी पहाड़ियों की ओर नहीं देखता। इसी प्रकार संसार की बाधाएँ और संसार की कठिनाइयाँ और चिन्ताएँ तब तक बहुत ऊँची दिखाई देती हैं जब तक बादल नहीं छँटता। परन्तु जब हम उन विशाल श्वेत चोटियों को देखते हैं, तब उनसे नीची हर वस्तु आखिरकार इतनी ऊँची नहीं जान पड़ती। यीशु की ओर देख, और वह कठिनाइयों को बौना कर देगा।—Alex. McLaren.
जनवरी 27
क्या दिन के बारह घंटे नहीं होते? यूहन्ना 11:9
यही तथ्य कि एक मसीही यहाँ है, न कि स्वर्ग में, इस बात का प्रमाण है कि कोई काम उसकी प्रतीक्षा कर रहा है।—William Arnot.
जनवरी 28
जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो। मत्ती 26:39
जिनकी इच्छाएँ परमेश्वर की इच्छा में गड़ी हुई हैं, उनके लिये कोई निराशा नहीं होती।—Faber.
जनवरी 29
जीवित परमेश्वर। दानिय्येल 6:20
पवित्रशास्त्र में हम कितनी ही बार यह वाक्यांश पाते हैं, फिर भी यही तो वह बात है जिसे हम इतनी सहजता से दृष्टि से ओझल कर देते हैं! हम जानते हैं कि यह लिखा है “जीवित परमेश्वर”; परन्तु हमारे दैनिक जीवन में व्यवहार में शायद ही कोई ऐसी बात हो जिसे हम इस तथ्य के समान इतना दृष्टि से ओझल करते हों कि परमेश्वर जीवित परमेश्वर है; कि वह अब भी वही है जो वह तीन या चार हज़ार वर्ष पहले था; कि उसके पास वही सर्वोच्च सामर्थ्य है, और उन लोगों के प्रति वही उद्धार करनेवाला प्रेम है जो उससे प्रेम करते और उसकी सेवा करते हैं, जैसा सदा से रहा है, और कि वह उनके लिये अब वही करेगा जो उसने औरों के लिये दो, तीन, चार हज़ार वर्ष पहले किया था, केवल इसलिये कि वह जीवित परमेश्वर है, अपरिवर्तनीय है। ओह, इसलिये हमें उस पर कैसा भरोसा रखना चाहिए, और अपने सबसे अन्धकारमय क्षणों में इस तथ्य को कभी दृष्टि से ओझल नहीं करना चाहिए कि वह अब भी जीवित परमेश्वर है और सदा जीवित परमेश्वर रहेगा!—George Müller.
जनवरी 30
इसलिये उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। रोमियों 6:4
यही वह जीवन है जिसे जीने के लिये हम बुलाए गए हैं, और यही वह जीवन है जिसे जीना हमारा सौभाग्य है; क्योंकि परमेश्वर हमें कभी ऐसा बुलावा नहीं देता जो सौभाग्य न हो, और वह हमें कभी ऊपर आने का सौभाग्य नहीं देता बिना अपना हाथ बढ़ाए कि हमें ऊपर उठा ले। पुनरुत्थान के जीवन की वास्तविकताओं और महिमाओं में ऊँचे और ऊँचे चढ़ते जाओ, यह जानते हुए कि तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है। अपने आप को हर बाधा से मुक्त कर लो, हर अशुद्धता की ओर पीठ फेर लो, अपने आप को कुम्हार के हाथों में मिट्टी के समान सौंप दो, कि वह तुम पर अपनी ही पुनरुत्थान महिमा की परिपूर्णता की छाप लगा दे, ताकि तुम, दर्पण में के समान प्रभु की महिमा को देखते हुए, प्रभु की आत्मा के द्वारा महिमा से महिमा को प्राप्त करते हुए बदलते जाओ।—W. Hay Aitken.
जनवरी 31
मसीह ही सब कुछ और सब में है। कुलुस्सियों 3:11
मसीह की सेवा मेरे जीवन का कार्य है।
मसीह की इच्छा मेरे जीवन की व्यवस्था है।
मसीह की उपस्थिति मेरे जीवन का आनन्द है।
मसीह की महिमा मेरे जीवन का मुकुट है।—Selected.
अध्याय 1 पूरा हुआ
जनवरी